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Sunday, March 4, 2018

नवरात्रि कब, क्यों, कैसे मनायी जाती है ???

नवरात्रि मां दुर्गा के नव रूपाें के पूजन का त्यौहार है.Yah Ek Bhakti story hai.Jisame Vavratri Kab,Kyon, Kaise Manai jati hai,usake bare me bataya gaya hai.

नवरात्रि का अर्थ होता है नव रातें इन नव राताें में शक्ति की देवी मां दुर्गा भवानी की आराधना की जाती है.
नवरात्रि वर्ष में 4 बार आता है... मुख्य रूप से 2 नवरात्रि की सार्वजनिक रूप से आराधना की जाती है और दाे नवरात्रि काे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है. गुप्त नवरात्रि का भी अपना एक अलग ही महत्व है.


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नवरात्रि भारत वर्ष में अनेक प्रकार से मनायी जाती है. भारत विविधता से भरा देश है. गुजरात में इस अवसर पर गरबा और डांडिया खेला जाता है. बंगाल की दुर्गापूजा पूरे विश्व मे प्रसिद्ध है. उत्तर भारत में भी नवरात्रि बहुत ही भक्तिभाव से मनायी जाती है.


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जय मां जगदंबे, जय मां जगदंबे
शक्ति दे, भक्ति दे, जय मां जगदंबे
रूप दे, ग्यान दे, जय मां जगदंबे.
आन, बान, शान दे, जय मां जगदंबे
गुणाें की खान दे, जय माँ जगदंबे
जय मां जगदंबे, जय मां जगदंबे
शक्ति दे, भक्ति दे, जय मां जगदंबे
अहंकार काे हर ले ,जय मां जगदंबे
निर्गुणाे की खबर ले, जय मां जगदंबे
एक बार भक्त पर नजर कर ले, जय मां जगदंबे
जय मां जगदंबे, जय मां जगदंबे.
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नवरात्रि में  मां महालक्ष्मी... मां महासरस्वती और मां दुर्गा के नव रूपाें की पूजा की जाती है. इन नव रूपाें के नाम इस प्रकार हैं.


हाेली कब, क्याें, कैसे मनायी जाती है???



शैलपुत्री -मां दुर्गा के नव रूपाें में मां शैलपुत्री प्रथम स्वरूप में पूजी जातीं हैं.पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. इनका वाहन वृषभ है.मां शैलपुत्री के दाये हाथ में त्रिशूल तथा बायें हाथ में मां ने कमल पुष्प धारण कर रखा है.

ब्रह्मचारिणी- पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है. ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली. मां का यह रूप भक्ताे काे अनन्त फल देने वाला है. मां के इस रूप की उपासना से तप, त्याग, सदाचार और संयम की वृद्धि  होती है.

चन्द्रघंटा- माता दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम मां चन्द्रघंटा है. नवरात्रि के पर्व में तीसरे दिन के पूजन का बहुत ही महत्व है. मां दुर्गा के इस स्वरूप के पूजन से मनुष्य काे असीम कृपा मिलती है. मनुष्य काे दिव्य वस्तुओं के दर्शन हाेते हैं. उन्हें दिव्य ध्वनियां सुनाई देती हैं. मां के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है. इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा गया है.
इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं. मां खड्ग, त्रिशूल, तलवार अन्य अस्त्र शस्त्र धारण किये हुये हैं.

कुष्माण्डा- नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्माण्डा की उपासना की जाती है. अपनी हंसी से ब्रह्मांड काे उतप्न करने के कारण मां काे कुष्माण्डा के नाम से जाना गया.जब हर तरफ अंधकार ही अंधकार था... सृष्टि की रचना नहीं हुई थी... तब मां ने अपने धीमे हास्य से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की... इसलिए इन्हें आदिशक्ति भी कहा जाता है. मां काे कुम्हड़े की बलि बहुत ही प्रिय है और कुम्हड़े काे संस्कृत में कुष्मांड कहा जाता है... इस प्रकार भी मां का नाम कुष्माण्डा पड़ा.

स्कंदमाता - पाचवें दिन मां के स्वरूप स्कंदमाता की उपासना की जाती है. मां की चार भुजायें हैं. इनका वाहन सिंह है. मां अपने भक्ताें की समस्त परेशानियाें काे नष्ट कर उनकी समस्त इच्छाओं की पूर्ति करतीं हैं.
इनकी कृपा से अग्यानी मनुष्य भी प्रकाण्ड विद्वान हाे जाता है.

कात्यायनी- छठें दिन मां कात्यायनी की उपासना की जाती है. मां के इस रूप की उपासना से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है.मनुष्य के समस्त राेज, शाेक, कष्ट, डर नष्ट हो जाते हैं. मां की चार भुजायें हैं. इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है. इनका वाहन सिंह है.

कालरात्रि- मां कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है. इस दिन साधक का मन " सहस्त्रार" तक्र में रहता है. मां कालरात्रि की उपासना से ब्रहमाण्ड की समस्त सिद्धियाें के दरवाजे खुल जाते हैं. मां का यह रूप अत्यंत ही भयानक है. मां के इस रूप के स्मरण मात्र से ही भूत पिशाच थर थर कांपने लगते हैं.

महागौरी- आठवें दिन मां महागाैरी की उपासना की जाती है. मां महागाैरी का रूप गाैर वर्ण है. इनका वाहन वृषभ है. इनकी चार भुजायें हैं. इन्हाेने त्रिशूल और डमरू धारण किया हुआ है. मां के इस रूप की उपासना से भक्ताे सभी पाप धुल जाते हैं और अलाैकिक शक्तियां प्राप्त हाेती हैं.

सिद्धिदात्रि- नाैवें दिन मां सिद्धिदात्रि की  पूजा की जाती है. इनकी आरधना से मनुष्य अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व नामक आठाें सिद्धियाें की प्राप्ति कर लेता है.
इन देवी का वाहन सिंह हैं,इनकी चार भुजायें हैं....
नियम और संयम से नवरात्रि व्रत का पालन करने पर मनुष्य काे समस्त गुणाें की प्राप्ति होती है.

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