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Wednesday, May 23, 2018

Devtaon ke Ghatak Ashtra Shashtra in hindi

आज मैं  interesting fact in hindi  के माध्यम से देवतावाें के घातक अश्त्र शस्त्र ke bare me bataunga.

देवतावाें के घातक अश्त्र शस्त्र के बारे में जानने के पहले यह जानना आवश्यक है कि अश्त्र और शस्त्र में क्या फर्क हाेता है....


अश्त्र वह हाेता है जिसे मंत्र शक्तियाे से साध कर दूर से फेका जाता है...
शश्त्र वह हथियार हाेता है... जिससे बिना मंत्र के ही फेका जाता है...

वैदिक काल मे इसके 4प्रकार हाेते थे.... 

1-अमुक्ता--इस शश्त्र से फेककर वार नही किया जाता था.
 
2-मुक्ता-यह फेककर वार किया जाता था और इसके भी दाे प्रकार हाेते थे... 1-पाणिमुक्ता-हाथ से फेका जाने वाला 2-यंत्रमुक्ता--नाम से ही स्पष्ट है यंत्र से फेका जाने वाला. 

3-मुक्तामुक्त-यह ऐसे शश्त्र हाेते थे जिनसे फेककर या बिना फेके दाेनाे तरह से वार किया जाता था. 

4-मुक्तासंनिवृत्ती-यह ऐसे शश्त्र हाेते थे.. जाे लक्ष्य काे साधकर वापस लाैट आते थे.


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ब्रह्माश्त्र--यह सबसे घातक दिव्यास्त्र है... जिसकी काट काेई नही है... यह परमपिता ब्रह्मा जी का अश्त्र है... यह बहुत ही भयानक अश्त्र है़... जिसे अगर संधान करके कहीं छाेड़ा जाये ताे बहुत विनाशकारी सिद्ध हाेता है...
 जिससे उस क्षेत्र में भयानक गर्मी उत्पन्न हाेती है... विकिरण की वर्षा हाेने लगती है..कई वर्षाें के लिये जल जीवन समाप्त हाे जाता है. यह वार कभी विफल नही हाेता है.... हां इसे वापस अवश्य बुलाया जा सकता है.


नारायणास्त्र-यह भगवान विष्णु का अश्त्र है... यह महा विनाशक दिव्यास्त्र है... इस अस्त्र की भी काेई काट नहीं है़....इस अस्त्र से तमाम अस्त्र निकलते हैं... इस अस्त्र पर जितना अधिक वार किया जाता है वह और भी अधिक भयावह हाेता जाता है... जिसका उल्लेख भहाभारत मे मिलता है.
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पाशुपतास्त्र--यह भगवान शंकर का दिव्यास्त्र है.यह उनके त्रिशूल की तरह प्रदर्शित हाेता है.. अत: इसे शूलास्त्र भी कहते हैं. यह महाभयानक अस्त्र है... इसे विफल नही किया जा सकता. यह भयंकर गर्जना के साथ दुश्मन पर वार करता है.


अमाेघ अस्त्र ---यह भगवान राम का अस्त्र है... इसे रामास्त्र भी कहते हैं... इसका वार खाली नही जाता.. इसे सिर्फ राम नाम के उच्चारण से राेका जा सकता है.


Sudarshan Chakra--यग भगवान विष्णु का अश्त्र है जाे कि उनके कृष्णावतार में उनके पास था... यह उनके नारायणास्त्र के समान ही है.


वज्र और इन्द्रास्त्र-देवतावाें के राजा देवराज का घातक अस्त्र वज्र है.. जिसे महर्षि दधिचि के हड्डियाे ये बनाया गया है... इन्द्रास्त्र एक बार अनगिनत वाणाें की वर्षा करने में सक्षम हैं.


हल-प्रभु बलराम का अस्त्र हल महाविनाशक है... उसमें से विद्युत की तिव्र ज्वाला निकलती है... साथ ही विभिन्न प्रकार के अस्त्र शस्त्र इसमे से निकलते हैं. इसी कारण श्री बलराम काे हलधर भी कहा जाता है.


आग्नेयास्त्र ---यह महाभयावह अस्त्र अग्निदेव का है... जाे अाकाश से अग्निवर्षा करता है.

वायव्य --यह भयंकर हवा प्रकट करता है... जिससे हर तरफ अंधकार छा जाता है.

पन्नग--इस बाण विभिन्न प्रकार के महाविषधर सर्प प्रकट होते है

गरुणास्त्र--इसे संधान करने से गरुण जी प्रकट हाेते हैं और सर्पाे का नाश करते हैं.


कुछ अन्य अस्त्र शस्त्र.....


शूल-यह बहुत नुकिला हाेता है... दुश्मन का शरीर भेद देता है.


त्रिशूल -जैसा कि नाम से ही प्रतीत हाे रहा है इसके तीन सिरे हाेते है और इसका मध्य भाग नुकीला हाेता है.


चन्द्रहास...यह तलवार के समान हाेता है... लेकिन टेढ़ा और कठोर हाेता है... इसका प्रयोग ज्यादातर असुर ही करते थे.


गदा --इसका नीचे का भाग पतला और मजबूत हाेता था.. जिससे पकड़ने में आसानी हाे... यह जमीन से छाती जितनी लम्बी हाेती थी... इसका ऊपरी हिस्सा गाल और मजबूत हाेता था.. यह बहाेत वजनी हाेती थी.

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चक्र-इसे मंत्र से सिद्ध कर के और घुमाकर दाेनाे तरह से फेका जाता था.

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मुशल---यह गदा के समान हाेता था... इसे फेककर वार किया जाता था.


Dhanush--इसका प्रयोग बाणाें काे चलाने में किया जाता था.


नाराच-यह बिशिष्ट प्रकार का बाण हाेता है.


मुग्दर --यह हथाैड़े के समान हाेता था.


भाला--यह लम्बा हाेता था और उसका ऊपरी सिरा बहाेत धारदार और नुकीला हाेता था.


इन अस्त्र शस्त्राें के अतिरिक्त अन्या विभिन्न प्रकार के अस्त्र शस्त्र हाेते थे.

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