Wednesday, 31 August 2017

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Wednesday, July 25, 2018

Badnaseebi......sad love story


हेलो दोस्तो, मेरा नाम राकेश है. Yah Ek Sad love story है. मैं U.P. के मेरठ का रहने वाला हूँ. वैसे तो मैं मुंबई के दादर में रहता हूँ, वहाँ मैं एक प्रतिष्ठित कंपनी में सुपरवाइजर हूँ. मेरी अच्छी Pagar है. घंटे की जाब है. हफ्ते में दिन काम होता है. कंपनी का मालिक राजस्थान का है. उसके विचार बहुत ही अच्छे हैं. किसी के उपर कोई दबाव नहीं देता है, पूरी कंपनी एक टीम की तरह काम करती है. साल में महीने की छुट्टी मिलती है और उस छुट्टी के पैसे भी नहीं काटे जाते हैं अर्थात पेड हॉलीडे. 



दोस्तों इस बार मै जून लास्ट में घर आया था, मेरे एक दोस्त की शादी थी. वह मेरा बहुत ही खास मित्र था. मेरे और उसके का फासला तो बहुत ज़्यादा था, लेकिन दोनो दिलों के बीच में कोई दूरी नहीं थी. मेरे और उसके घर के बीच की दूरी १० किलोमीटर की थी, इसके बावजूद हमारे और उसके घर के बीच के संबंध बहुत ही प्रगाढ़ थे.  


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जुलाई के पहले सप्ताह में उसकी शादी थी. इस बार शादी के मुहूर्त लेट तक थे. मै घर जिस दिन पहुँचा भाईसाहब पूरे परिवार के साथ घर पर पहुँच गये और उसी दिन मुझे शाम तक अपने घर भी लेकर चले गये. चलिए अब इन भाईसाहब का नाम भी बता ही देता हूँ,इनका नाम था अमित त्रिपाठी. 



पूरी रात मैं वहीं रुका. मेहमान की तरह सेवा सत्कार हुआ. मैं बार-बार कहता रह गया कि घर का ही लड़का हूँ, लेकिन जब कोई माने तब ना. सुबह मैं घर के लिए प्रस्थान करने वाला था कि भाईसाहब का आदेश हो गया कि कल सुबह चले आना बाइक के साथ, एक मेहमान के यहां जाना है और वहाँ दो दिन के लिए रुकना है. उनके घर पर कोई कार्यक्र्म है. मैने भी हाँ में सर हिलाया और वहाँ से प्रस्थान किया.  
अगले दिन मैं समय से उनकी घर पहुँच गया, लेकिन भाईसाहब पहले की तरह लेट-लतीफ, मैं ज़ोर से आवाज दिया...ओये अमित भैया...अमित त्रिपाठी जी... 

आवा सुनकर माँ जी बाहर आईं और बोलीं जाओ बेटा घर में जाओ, थोड़ा पानी पी लो, ओकर तो पहले सी आदत है, कितना भी जरूरी काम हो, टाइम से नहीं जा सकता. 

मैं घर में आया पानी पिया, तब तक अमित भी तैयार होकर गया. हमने मंज़िल की ओर प्रस्थान किया. हम जहाँ जा रहे थे वह अमित के घर से करीब किलोमीटर की दूरी पर था और मेरे घर से १६ किलोमीटर की दूरी पर. करीब १५ मिनट में हम वहाँ पहुँच गये. अमित ने सभी से मेरा परिचय कराया. उनके यहाँ गृहपरवेश का कार्यक्रम था. दिन भर हम लोग मेहमानों की आवभगत में जुटे रहे. उस दिन हल्की -हल्की बारिश हुई थी. शाम के समय बाकी लोग तो घर की छतों पर सो ये लेकिन हम दोनो लोग बाहर बरामदे मेसो गये. 

बारिश की बूंदे, बूँदों का पानी ....... तू रंग सरबतों का..मैं मीठे घाट का पानी, गीतों के बोल, वह भी इतने मधुर आवाज में, मैं चौंक कर उठ गया, मैने समय देखा तो सुबह की .३० बज रहे थे. हल्की -हल्की बारिश हो रही थी, बिजली कड़क रही थी और उसी के बीच इतना कर्णप्रिय गीत. मेरा तो दिल ही गया. मैं उसी पल यह जानने को बेताब हो रहा था कि आख़िर वह सुरों की मल्लिका है कौन? 

मैं उसे ढूढ़ने के लिए जाने वाला ही था कि अमित की नीद भी खुल गयी. उसने मुझसे कहा बे क्या कर रहा है. उल्लू की तरह रात भर जागते रहता है. कभी सो भी लिया कर..तभी वह स्वर राग फिर से सुनाई दिया...ये मोह-मोह के धागे... वह भी चौंक पड़ा और बोला बे बज कितना रहा है...मैने उसका चेहरा देखा तो उसके १२ बजे हुए थे.


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मैने उससे पूछा भाई के हो गया..... वह घबराकर बोला बे बकैती बंद कर समय बता.  

भाई सुबह हो गयी है, बजाने वाले हैं. मुंबई में तो लोग अब तक ड्यूटी के लिए निकल जाते हैं. तब जाकर उसने रा की सांस ली और बोला भाई मुझे तो लगा की कोई चुड़ैल तो नहीं है.

फिर हमलोग टार्च लेकर उस हसीना को ढूढ़ने निकल पडे, गली-गली भटके, गाँव में लगभग हर जगह ढूँढा वो नहीं मिली. वा के झोको के साथ ही उसकी स्वरलहरी भी हर दिशाओं से आती प्रतीत होने लगती थी. हम उसे ढूंढते सड़क के उस पार पहुँचे कि तुझसे लागी मेरे मन की लगन की ध्वनि काफ़ी करीब महसूस हुई. 

हमारी नज़रें भी उसी तरफ घूमीं ... उस राजकुमारी को एक टक देखता रह गया. मेरा बावरा मन अब उसकी गिरफ़्त में हो चुका था, वह दौड़ कर सड़ के उस पार बने घर में चली गयी. सड़क के उस पार बना वह इकलौता घर था. घर तो काफ़ी आलीशान था, लेकिन उसी घर से एक लड़की का विलाप कुछ और ही कहानी बयाँ कर रहा था. मैने उसी समय अमित से पूछा ... भाई यह घर किसका है तू बता सकता है.  


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नहीं भाई...इसके बारे में मुझे तो नहीं पता है, लेकिन तू इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहा है. कहीं तुझे प्यार- व्यार तो नहीं हो गया. अगर हो भी गया हो ना बेटा तो भूल जइयो, वह खुद किसी के प्यार में फँसी लग रही थी. भाई बदनाम हो जाएगा.  

चुप कर.... कुछ तो बात है, तू खाली पता कर उस घर के बारे में, कुछ तो गलत हो रहा है उस लड़की के साथ.... मैने अमित से कहा 

मैने ही गलती की...मुझे तुझे लेकर यहां आना ही नहीं चाहिए था. अरे क्यों हम किसी के मामले में दखल दें.....अमित ने कहा 

वाह क्या बात कही है भाई तूने... शाबाश... तुझे तो मेडल मिलना चाहिये... ड़ तू किसी के बीच में...मैं खुद पता कर लूंगा..मैने भी गुस्से में कहा और फिर हम वहां से निकल पड़े. 

कुछ देर के बाद अमित ने कहा..चलो ठीक है. मैं कल पता गाता हूँ. 
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हम जब तक घर पहुँचते यहां सब लोग जाग गये थी और हमें खोजने की तैयारी की जा रही थी. मै हालत को देखते ही सब समझ गया और तुरंत बोला .....क्षमा कीजिए हम लोग हलने गये थे, मुंबई में भी जाता था तो वही आदत है. मुझे लगा कि हम जल्द जाएंगे, इसलिए हमने किसी को जगाया नहीं. दरअसल हम टहलते- टहलते सड़क तक चले गये , वहां हमें एक मधुर आवाज सुनाई ने, जब उस तरफ गे बढ़े तो देखा कि एक २०-२२ साल की लड़की यह गीत गा रही थी और उसके आखों से आँसू बह रहे थे... हमारी आह पाकर वह तुरंत वहां से हट गयी और सामने बने आलीशान घर में चली गयी. हम रास्ते भर इसी की चर्चा कर रहे थे कि इतने आलीशान घर की लड़की इस तरह बेबश और लाचार कैसे है. आख़िर क्या हुआ है उसके साथ? 

हम इस बात के एक बार फिर से क्षमा मांग रहे हैं...हमें बता कर ही जाना चाहिए था. लेकिन कृपया हमें कोई तो उसके बारे में बताये. यह बात सुनकर वहां एक खामोशी छा गयी और सबके चेहरे गमगीन हो गये. तब एक बुजुर्ग ने कहा बेटा बड़ी लंबी कहानी है...जा पहले तैयार हो जा फिर मैं तुझे सब कुछ बताता हूँ. फिर सभी लोग अपने-अपने कार्य में लग गये. लेकिन मुझे चेहरा, उस चेहरे की उदासी अंदर ही अंदर परेशान कर रही थी. मैं और अमित दोनो ही फटाफट तैयार होकर दादाजी के पास गये. अमित भी पूरी कहानी जानने को बेचैन हो रहा था. घर के कुछ अन्य सदस्य भी गये. हालांकि उन्हें सारी घटनाओं की जानकारी थी.  


दादाजी ने कहा कि रश्मि थी. उसके पिताजी सेना में कर्नल थे. नसीब की मारी है बेचारी, भगवान ऐसी नसीब दुश्मन को भी ना दें. जब वह मात्र वर्ष की थी उसकी मां का देहांत हो गया. इतने कम उम्र में मां का साया सर से हट जाने से वह परेशा रहनी लगी. घर में उसके दादाजी को छोड़कर उसे कोई लाड़ प्यार नहीं करता था. इसी बीच उसके पिता रमेश पांडे के किसी रिश्तेदार ने उनके लिए रिश्ता लेकर आए. रमेश इसके खिलाफ था लेकिन उसकी मां ने ज़िद करके रिश्ता कर दिया. रमेश को भी लगा कि रश्मि को एक मां मिल जाएगी.  


लेकिन हुआ उसके ठीक उल्टा, घर में आई नई बहू प्रमिला, रश्मि को नापसंद करने लगी, हद तो तब हो गयी जब प्रमिला को एक पुत्र हुआ. उसके बाद रश्मि उस घर की एक नौकरानी बन कर रह गयी. रमेश और रश्मि के पिता की ज़िद के बाद रश्मि को स्कूल भेजा जाने लगा. वह पढ़ने में बहुत ही अच्छी थी. इसी बीच उसके दिल में किसी और की दस्तक हुई और धीरे-धीरे उस अजनबी ने उसके दिल पर कब्जा कर लिया.. वह भी उसी स्कूल में पढ़ता था. वह उससे बहुत अधिक प्यार करने गी थी. उसका नाम विहान था.  


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समय बिता रश्मि ने १०वीं बहुत ही अच्छे नंबर से पास किया. इधर विहान भी १०वी पास कर लिया.. फिर दोनो एक साथ एक ही कालेज में दाखिला लिया. रश्मि, रमेश से कुछ नहीं छुपाती थी. उसने रमेश से विहान के बारे सब कुछ बता दिया. रमेश भी इस बात से सहमत हो गया था. 

लेकिन इसी बीच एक घटना हुई, जिसने रश्मि के प्रत्येक सपने को चकनाचूर कर दिया. रश्मि का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह विहान के संग आपत्तिजनक अवस्था में थी.. इस वीडियो के वायरल होते ही उसके जिंदगी में भूचाल गया. इस सदमें को उसके दादाजी बर्दास्त नहीं कर सके और उनकी तबीयत बिगड़ती चली गयी... कुछ दीनो में उनकी मृत्यु हो गयी.


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इधर एक आतंकवादी हमले में रमेश भी ही हो गये. रमेश के ही होने के बाद रश्मि की बची उम्मीदें भी धूमिल हो गयी. विहान भी उस कालेज को छोड़ दिया. वह एक मी खानदान से ताल्लुक रखता है. उसने यह खबर उड़ा दिया की पैसे की लालच में रश्मि ही उसके साथ हमबिस्तर हुई और यह वीडियो बनाया. तब से रश्मि कहीं बाहर नहीं निकलती. वह ही रोज उस पेड़ के पास आकर अपने दुख को साझा करती है.  

यह सुनकर वहां सबके आँखों में आँसू थे... तभी शोरगुल सुनाई देने लगा..सभी लोग रश्मि के घर की ओर दौड़ रहे थे....हम लोग भी तेज़ी से उस ओर दौड़े......हमने देखा की रश्मि जिंदगी की जंग हार गयी थी...उसने ख़ुदकुशी कर ली थी.  


यह देख दादाजी बोली...मुक्त हो गयी....इस दुख पहाड़ से............!! 

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Hello doston...Mai ABHISHEK PANDEY is HINDI BEST STORY hindi blog men aapaka SWAGAT karata hun. Agar aap men se kisi ko bhi GUEST POST likhana hai to mujhase SAMPARK kare. NIYAM AUR SHARTEN>>>>> Guest Post kahin par bhi PUBLISH na ki gayi ho. 2-Yah HINDI men honi chahiye...Aap Angreji Word ka prayog kar sakate hain. 3- Isamen koi bhi Vayask Samagri nahin honi chahiye. IS ID PAR APANI KAHANI BHEJ SAKATEE HAIN>>>KOSHISH KAREN KI WAH pdf FILE NA HO. [email protected] [email protected] THANK YOU

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