Wednesday, 31 August 2017

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Saturday, July 21, 2018

Galati Ka Ehsas:Akhir Kaise Panku,Panku se Pankaj Ban Gaya

हैलाे दाेस्ताे, कैसे हैं आप सब, उम्मीद है अच्छे होंगे.... आज मैं आप लाेगाें काे  Hindi best story की  Siksha ki kahaniyan  सुनाने जा रहा हूँ... उम्मीद है यह कहानी आप सभी को पसंद आयेगी.

गाैरी का आज कालेज में दाखिला हुआ था. वह बहुत ही खुश थी. उसके साथ उसकी सहेलियां भी खुश थीं, क्याेंकि वह पढ़ने में बहुत ही अच्छी थी और वह बहुत ही निडर थी. लड़कों के किसी भी फब्तियाें पर वह चुप-चाप नही चली जाती थी,बल्कि उन्हें बाकायदा चुप कराकर जाती थी.
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ऐसी ही एक घटना का जिक्र मैं कर रहा हूँ, जिसकी वजह से वह पूरे गांव में प्रसिद्ध हाे गयी थी.
उस दिन गाेरी दाेपहर में स्कूल से छुट्टी लेकर घर आ रही थी, क्याेंकि उसकी मां की तबीयत खराब थी और उसके पिताजी बाजार गये थे.  उन्हाेने उसे जल्द घर आने के लिये कहा था.

उसके घर और स्कूल के बीच में एक आम का बगीचा था. जहां दाेपहर में गांव के कुछ लफंगे बैठते थे.  गाैरी काे आता देख गांव का एक बिगड़ैल लड़का रिंकू खुश हाेते हुये अपने दाेस्त प्यारे से बाेला ...प्यारे देख गाैरी आ रही है... क्या लग रही यार...चल आज अपनी प्यास बुझाते हैं.

गाैरी तेजी से आगे बढ़ते हुये जैसे ही बागीचे में आयी, इन दाेनाें ने उसे राेक लिया और फब्तियां कसने लगे.  लेकिन गाैरी डरी नहीं, उसने पलटवार करते हुये कहा कि अगर सही-सलामत घर जाना चाहता है ताे अभी निकल ले,  नहीं तो तेरे मां-बाप काे बेवजह मेहनत करनी पड़ेगी.

ऐसा कहकर गाैरी ने दाेनाे काे धक्का दिया और आगे बढ़ी, लेकिन यह दाेनाे भी कहां मानने वाले थे. रिंकू ने पीछे से गाैरी काे एक जाेरदार धक्का दिया, जिससे गाैरी गिर गयी, फिर प्यारे ने उसका दुपट्टा खींच लिया.
इस पर गाैरी का चेहरा सुर्ख लाल हाे गया. गुस्से से उसकी भाैहें टेढ़ी हाे गयी, उसका रौद्र रूप देखकर रिंकू और प्यारे की घिग्घी बंध गयी. वह काेमल सी सुकुमारी अबला लड़की अब कयामत बन गयी थी.

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वह बिजली की तेजी से उठी और अगले ही  Pal वे दाेनाे जमीन पर पड़े कराह रहे थे. अब उनमें उठने की हिम्मत बची नहीं थी. गाैरी कराटे की चैम्पियन थी. उसे स्कूल से कई सारे अवार्ड मिले थे. उसने अपना दुपट्टा उठाया, अपने कपड़े सही किये और सीधा गांव में रिंकू और प्यारे के घर गयी और वहां उनके मां-बाप काे सम्बाेधित करते हुये  गुस्से से बाेली " ले आवाे अपने निकम्माें काे, पहले ही उनसे कहा था कि चले जावाे, नहीं ताे अपने पैर पर नहीं जा पावाेगे, साले पड़े हैं आम के बागीचे में".

रिंकू कि मां गुस्से में खीझते हुये बाेली " हे भगवान किस गलती की सजा दे रहे हो, ऐसी औलाद से अच्छा ताे बेऔलाद ही ठीक थी मैं"

इस घटना के बाद से गाैरी पूरे गांव में प्रसिद्ध हाे गयी. हर काेई उसके शान में कसीदा पढ़ता, लाेग अपने बच्चों से कहते कि देखाे बेटा तुम्हें भी गाैरी की तरह बनना है.... गुणवान, धैर्यवान और बलवान.

कालेज में दाखिले से गौरी और उसकी सहेलियां ताे खुश  थीं, लेकिन गाैरी के पिता रामेश्वर खुश नहीं थे. वे कालेज में दाखिले एकदम खिलाफ थे. उन्हें गौरी की हमेशा चिन्ता रहती थी. उनका चिन्तित हाेना भी सही था,एक पिता अपनी बेटी काे लेकर चिंतित नहीं रहेगा ताे कौन रहेगा, लेकिन गौरी की जिद के आगे उनकी एक ना चली और उन्हें दाखिला  कराना ही पड़ा.

कालेज गांव से थाेड़ी दूर पर था, बीच में 4-5 गांव पड़ते थे. हर गांव के नुक्कड़ पर लफंगे इकठ्ठा हाेते थे. उन्हीं में एक था पंकज उर्फ पंकू.  उसे पंकज कहलाना पसंद नहीं था. उसके पिताजी  ग्राम प्रधान थे. उसका परिवार खानदानी रईस था. इस रईसी की वजह से पंकज बहुत बिगड़ गया था.  उसका सिर्फ एक ही काम था, लड़कियों को छेड़ना. उसके डर से कितनी लड़कियों ने कालेज जाना बंद कर दिया था. उसके पिता के रसूख  के कारण काेई उस पर बंदिश नहीं लगा पा रहा था. लाेग उससे बहुत डरते थे. इसलिये उसका हौसला बहुत बढ़ गया था.


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एक दिन की बात है गाैरी कालेज से वापस लाैट रही थी,रास्ते में पंकू ने उसे राेक लिया. गाैरी उसके डर से बेखबर होकर उससे कहा कि " शायद तुम्हें पता नहीं है, इसके पहले ऐसे ही रास्ता राेकने के कारण दाे लाेगाें काे अपनी एक-एक टांगे गवानी पड़ी. आज भी जब वो चलते हैं ना ताे मेरा नाम लेते हैं ".

पंकज इस बात पर जाेर हंसा और फिर कहा "रानी हमें ऐसी ही लड़कियों में दिलचस्पी रहती है. ऐसी लड़कियों काे पसंद करता हूँ मैं, एक बार साथ दाे मालामाल कर दूंगा.

इधर रास्ते के दाेनाे तरफ लाेग खड़े थे. सबकी नजरे झुकी हुयी थीं. रास्ते के बीचाेबीच पंकज और गौरी खड़े थे. काेई भी किसी तरफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. सभी पर पंकज का खौफ साफ नजर आ रहा था. लेकिन गौरी निर्भीक,निडर उसके सामने खड़ी थी और उसके हर वार पर पलटवार कर रही थी.

पंकज ने फिर जाेर देकर कहा... चल गौरी तुझे अपनी रानी बनाकर रखूंगा और उसने गौरी का हाथ पकड़ लिया.
अब गाैरी का वही रौद्र रूप प्रकट हाे चुका था. उसने तेजी से अपना हाथ छुड़ाया और पंकज काे एक जाेरदार तमाचा रसीद करते हुये चिल्लाते हुये बाेली "मर्द है तू, शर्म आनी चाहिये तुझे अपनी मर्दानगी पर, एक लड़की पर अपनी ताकत दिखाता है. अरे तेरी इस हरकत से तेरी मां पर क्या गुजरती हाेगी, साेचा है तूने कभी. अरे क्या साेचेगा तू, तेरे दिमाग में ताे कचरा भरा है कचरा. अरे जा चुल्लू भर पानी में डूब मर, तुझे मेरा जिस्म चाहिये ना जिस्म चाहिये ना तुझे मेरा ले"...और इतना कह कर गाैरी ने अपना दुपट्टा फेक दिया.

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अब पंकज अपनी नजराें से गिर चुका था. वह पीछे बट गया. गौरी ने लाेगाें की देखा,उनकी नजरें अभी भी झुकी हुयी थीं. यह देख दर्द और गुस्से के मिश्रित स्वर में गौरी ने कहा "अगर आज बेटियां, बहुयें बेइज्जत हाे रही हैं ना ताे उसके जिम्मेदार उसके कसूरवार आप और आप जैसी साेच के लाेग हैं.  आप लाेग  इस बात का इंतजार करते हैं कि अरे यह मेरे घर की थाेड़ी ना  है मेरे घर की हाेगी ताे देखा जायेगा. लेकिन आपके घर की हाे या किसी और को घर की, मरती है ताे सिर्फ बेटी, लुटती है ताे सिर्फ बेटी...."

यह कहकर गाैरी ने अपना दुपट्टा लिया और वहां से चली गयी, लेकिन पंकज वहीं घुटने के बल पर बैठ गया. उसके आंखों से आंसू निकलने लगे. उसे अपनी गलतियों का एहसास हाे गया था. उसने ऐसी गलती कभी भी ना करने की शपथ ली. उसने अपना नाम पंकज कर लिया. उसे पंकू नाम में काई दिलचस्पी नहीं थी. अब वह पंकू से पंकज बन गया था. मेरी यह Shiksha ki kahani ki Moral Story  कैसी लगी.
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Hello doston...Mai ABHISHEK PANDEY is HINDI BEST STORY hindi blog men aapaka SWAGAT karata hun. Agar aap men se kisi ko bhi GUEST POST likhana hai to mujhase SAMPARK kare. NIYAM AUR SHARTEN>>>>> Guest Post kahin par bhi PUBLISH na ki gayi ho. 2-Yah HINDI men honi chahiye...Aap Angreji Word ka prayog kar sakate hain. 3- Isamen koi bhi Vayask Samagri nahin honi chahiye. IS ID PAR APANI KAHANI BHEJ SAKATEE HAIN>>>KOSHISH KAREN KI WAH pdf FILE NA HO. [email protected] [email protected] THANK YOU

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