Pari ki kahani

जादुई दिया की कहानी। जादुई कहानी हिंदी में। Jadui Diya Story in Hindi .

जादुई दिया की कहानी
Written by Abhishek Pandey

जादुई दिया दीपावली का दिन था।  पुरे गाँव में ख़ुशी का माहौल था।  सभी लोगों ने अपने – अपने घरों को सुन्दर लाइट्स, दीये और रंगोली से सजाया हुआ था।

 

 

 

लेकिन उसी गाँव में एक लड़का था।  वह बड़ा ही उदास होकर अपने घर के बाहर बैठा हुआ था।  उसके घर पर कोई सजावट नहीं थी।  तभी वहाँ से एक संत गुजरते हैं और देखते हैं कि सभी घर रोशनी से जगमग हो रहे हैं और यही एकमात्र घर बिना रोशनी के है।

 

 

 

वह कारण जानने  हेतु उस घर पर आते हैं और बाहर बैठे लडके से एक ग्लास पानी माँगते हैं। लड़का ख़ुशी – ख़ुशी पानी लाकर देता है।  पानी पीने के पश्चात बाबा उस लडके से पूछते हैं, ” बेटा, क्या बात है? तुम इतना उदास क्यों हो ? सभी के घर दिवाली के त्यौहार के उपलक्ष्य में प्रकाशमान हो रहे हैं किन्तु तुम्हारे घर पर रोशनी क्यों नहीं है? ”

 

 

 

 

 

इस पर लडके ने उत्तर दिया, ” बाबा ! हम बहुत ही गरीब लोग हैं।  मेरे पिताजी बहुत वक्त पहले ही गुजर चुके हैं और मां किसी तरह दूसरों के घरों में काम करके घर का खर्च चलाती है।  ऐसी परिस्थिति में हम घर को कैसे सजा सकते हैं? ”

 

 

 

इसपर बाबा ने कहा, ” दुखी मत हो बेटा।  तुम बहुत ही नेकदिल और दयालु हो।  मैं तुम्हे एक जादुई दिया देता हूँ।  तुम इस दिये से जो कुछ मांगोगे तुम्हे मिल जाएगा।  पर एक बात का ध्यान रहे इसका गलत प्रयोग मत करना और हाँ अपनी मां के अतिरिक्त और किसी दूसरे व्यक्ति के सामने इससे कुछ ना मांगना, नहीं तो दिया बुझ जाएगा और इसकी शक्ति समाप्त हो जायेगी।  ”

 

 

 

यह कहकर  उन बाबा ने उस लड़के को एक जादुई दिया दिया और फिर चले गए।  वह लड़का उस दीपक को लेकर घर के अंदर जाता है और अपनी मां को सारी बात बताता है।

 

 

 

उसकी मां बहुत प्रसन्न होती है और बाबा का धन्यवाद करती है।  उसके बाद वह लड़का दीपक से विश मांगता है और कहता है, ” हे दीपक बाबा जी की बात सच करो।  मेरे घर को रोशनी से जजा दो। ”

 

 

 

उसके इतना कहते ही उसका घर रोशनी से जगमग हो उठता है। लड़का और उसकी माँ बहुत प्रसन्न होते हैं।  उसके बाद वह लड़का उस दिए से भोजन मांगता है और उसके बाद अपनी मां के लिए सिलाई मशीन मांगता है, जिससे उसकी माँ को दूसरों के घर  जाकर काम ना करना पड़े।

 

 

 

इन सबसे उसकी माँ अतिप्रसन्न होती है और बाबा का धन्यवाद करते हुए अपने लडके से कहती है कि इस दीपक का उपयोग जरुरत मंद लोगों के लिए किया जाएगा।

 

 

 

इससे लड़का बहुत प्रसन्न होता है। धीरे – धीरे उसके घर की माली स्थित सुधरने लगती है।  वह गरीबों की मदद भी करने लगता है और साथ ही स्कूल भी जाने लगता है।

 

 

 

एक दिन की बात है उसका एक दोस्त उसके घर आता है और उस दीपक को देख उसके बारे में पूछता है।  इसपर वह लड़का घमंड से बोलता है, ” यह कोई मामूली दिया नहीं है।  यह एक जादुई दिया है।  जो कुछ भी इससे मांगो यह दीपक हमें दे देता है। ”

 

 

 

यह सुनकर उसका दोस्त हंसने लगता है और उसका मजाक उड़ाते हुए कहता है, ” मुझे मुर्ख समझते हो।  यह सबव अंधविश्वास है।  ऐसा कुछ भी नहीं होता है।  ”

 

 

 

यह सुनते ही दीपक वाले लडके को क्रोध आ जाता है और वह बाबा की बताई हुई बात को भूल जाता है और दीपक के समक्ष जाकर कहता है, ” हे दीपक बाबा की बात सच करो मुझे खाने के लिए लड्डू दो।  ”

 

 

 

उसके इतना कहते ही दिया बुझ जाता है।  यह देख उस लडके का दोस्त हंसने लगता है और हँसते हुए चला जाता है।  तभी दीपक वाले लडके की माँ आ जाती है और बुझा हुआ दिया देख आश्चर्य में पड़  जाती है।

 

 

 

वह अपने लडके से इसका कारण पूछती है तो वह सब कुछ बता देता है।  तभी उसकी माँ को बाबा की बात याद आ जाती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि, ” इसका गलत उपयोग मत करना और किसी बाहरी व्यक्ति के सामने इससे कुछ मत मांगना।  ”

 

 

 

वह बहुत दुखी होती हैं। फिर वह अपने लडके से कहती हैं, ” हमें इस दीपक से माफ़ी माँगते हुए बाबा का ध्यान करना चाहिए।  शायद वह हमारी बात मान जाए। ”

 

 

 

उसके बाद दोनों दिए के सामने खड़े होकर माफ़ी माँगते हुए बाबा का ध्यान करते हैं।  कुछ क्षण पश्चात बाबा वहाँ प्रकट हो जाते हैं।  उसके बाद वह लड़का सारी बात कहते हुए माफ़ी की गुहार लगाता है और आइंदा कभी भी ऐसा ना करने का वचन देता है।

 

 

 

इस पर वह बाबा बोलते हैं, ” तुम्हारे दोस्त के भेष में मैं ही तुम्हारी परीक्षा लेने आया था।  पर मुझे दुःख है कि तुम उसमें असफल रहे परन्तु मुझे इससे बेहद ख़ुशी है कि तुम्हे अपनी गलती का एहसास हुआ और उससे भी बड़ी बात तुमने हमेशा ही गरीबों की सेवा की और अपने लिए इसका गलत उपयोग नहीं किया।  इसलिए मैं तुम्हे पुनः दीपक की रोशनी प्रदान करता हूँ, लेकिन याद रहे मैं समय – समय पर परीक्षा लेता रहूंगा।   अतः कभी भी इसका गलत उपयोग मत करना।  ”

 

 

 

इसके बाद बाबा ने पुनः दीपक की रोशनी वापस कर दी और अंतर्ध्यान हो गए और वह लड़का अपनी माँ के साथ ख़ुशी – ख़ुशी रहने लगा।

 

 

 

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