परीलोक की कहानी / Parilok KI Kahani in Hindi / New Fairy Tales

परीलोक की कहानी रानी परी

 

 

 

परीलोक की कहानी परीलोक में एक सुंदर बगीचा था।  उसमें तरह-तरह की फूल खिलते थे।  पीले, लाल, नीला, गुलाबी और तमाम तरह के फूलों से वह बगीचा भजन रहता था।

 

 

 

लेकिन उसमें एक चीज की कमी थी। उस बगीचे में तितलियां नहीं आती थी।  जिसकी वजह से वह बगीचा अधूरा – अधूरा लगता था। एक  दिन रानी परी ने इस बात पर गौर किया।

 

 

 

उन्होंने लालपरी से कहा, ” आखिर क्या बात है इस बगीचे में तितलियां क्यों नहीं आती हैं ? लाल परी ने कहा हमें इसकी जांच करानी चाहिए। तब रानी परी ने इस जांच के लिए काली परी को नियुक्त किया।

 

 

 

काली परी ने इसकी जांच की तो उन्होंने पाया कि धरती और परीलोक के बीच में एक राक्षस ने अपना राज्य स्थापित कर लिया है और उसने वहां पर तितलियों को कैद कर लिया है और  इसकी वजह से तितलियां यहां पर नहीं आ पा रही हैं।

 

 

 

इससे रानी परी बहुत चिंतित हुई।  उन्होंने कहा अब इसका क्या उपाय है ? आखिर हम यहां तितलियों को कैसे बुलाएंगे ? तब काली परी ने कहा इसका उपाय मैंने सोच लिया है। अब मैं तितली बनकर इस बगीचे में इस फूल से उस फूल पर मडराऊँगी।

 

 

 

जब यह खबर राक्षस को पता लगेगी तो वह मुझे कैद करेगा और मैं वहाँ से तितलियों को आज़ाद करवा लूंगी। उसके बाद कालीपरी  ने एक सुंदर तितली का रूप धारण किया और फूलों पर इधर-उधर मंडराने लगी।

 

 

 

 

जल्द ही इसकी सूचना राक्षस को मिल गई। उसने काली परी को भी कैद कर लिया। जब काली परी तितलियों की बीच में  गयी  तो उसने देखा तितलियां बहुत दुखी थी।

 

 

फेयरी टेल्स इन हिंदी

 

 

एक दिन जब राक्षस सो रहा था। मौका पाकर काली परी ने अपना रूप धारण किया और तितलियों को अपनी योजना अनुसार वहां से ले उड़ी। एक बार फिर पुरे  बगीचे में रौनक बढ़ गई।

 

 

 

लेकिन रानी परी को इस बात का आभास था कि राक्षस  चुप नहीं बैठने वाला है।  वह जरूर तितलियों को कैद करने की कोशिश करेगा और इसीलिए उन्होंने परी लोक के बॉर्डर की सुरक्षा बढ़ा दी और वहां पर उन्होंने नीली परी को तैनात किया।

 

 

 

निलीपरी बहुत ताकतवर थी।  रानी परी का अंदेशा सही रहा।  जल्द ही उस राक्षस ने परीलोक पर हमला किया,  लेकिन वह निलीपरी  के ताकत के आगे हार गया और मारा गया।  उसके बाद परी लोक में खुशियां छा गई और सभी ख़ुशी से रहने लगे।

 

 

 

2- परी लोक और सैर की कहानी – बबली और बबलू दोनों भाई बहन थे।  वे दोनों अपनी मम्मी पापा के साथ में रहते थे।  बबली अपनी परी डॉल के साथ खेलती थी तो वहीं पर बबलू बैट बॉल खेलता था।

 

 

 

वह हमेशा बबली से कहता परियां वगैरह  कुछ नहीं होती तुम झूठे ही डॉल्स के साथ खेलती रहती हो।  इससे बबली गुस्सा हो जाती और दोनों में खूब झगड़ा होता।

 

 

 

इसकी वजह से उसकी मम्मी ने बबली  और बबलू का का कमरा अलग कर दिया। एक  दिन की बात है बबलू ने देखा बबली के कमरे से कुछ रोशनी आ रही है जब उसने दरवाजा खोला तो देखा तो वहाँ एक परी थी।

 

 

 

वह आश्चर्यचकित रह गया। उसने कहा आप तो डाल  थी तो आप परी  कैसे बन गई ? तब परी ने कहा, ” हम जीवित डॉल हैं, जब कमरे में कोई नहीं रहता तो हम अपने रूप में आते हैं और परीलोक में चले जाते हैं। वहां हमारे परिवार के लोग रहते हैं।

 

 

 

 

इस पर बबलू ने कहा, ” आप लोग  धरती पर क्यों आती  हो और परीलोक कहां है और परी लोक की फोटो है आपके पास  ? ” तब परी ने कहा, ” हमें अच्छे  बच्चों के साथ रहने के लिए कहा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर हम उनकी सुरक्षा कर सकें और बबली बहुत अच्छी बच्ची है और इसीलिए हम उसके साथ रहते हैं और परीलोक आसमान में है।  ”

 

 

 

बब्लू  ने कहा, ” क्या यह बात मैं बबली को बता सकता हूं ? ” इस पर परी ने कहा, ” तुम यह बात बबली को मत बताओ क्योंकि हमें अपनी जानकारी छुपानी रहती है।  ”

 

 

 

परी की कहानी बताना

 

 

 

बबलू ने कहा, ” वह आपको  पसंद करती है अगर उसे बताऊंगा तो वह बहुत खुश होगी।  ” इसपर परी  ने कहा, ” ठीक है उसे बता दो।  ” उसके बाद बबलू तेजी से बाहर गया और बबली का हाथ पकड़कर उसे कमरे में लेकर आया।

 

 

 

बबली  ने जब परियों को देखा तो  बड़ी खुश हुई।  तभी बबलू ने कहा, ” क्या आपके साथ हम परीलोक चल सकते हैं ? ”  उसके  बाद सभी परी लोक पहुंचते हैं।  उन्होंने परी से कहा, ” हम परीलोक की फोटो भी लेंगे।  ” परी ने हाँ कह दिया।

 

 

 

परीलोक बहुत ही खूबसूरत था।  वहाँ चीजें चमकदार थी और चारों तरफ हरियाली ही हरियाली थी।   तरह – तरह के फूल खिले हुए थे। परियों को बच्चों के साथ और बच्चों को परियों के साथ खेलने में और बाते करने में बहुत मज़ा आ रहा था।

 

 

 

कुछ समय बाद परी  ने कहा, ” अब हमें वापस लौट जाना चाहिए। ”  तब बबलू ने कहा कि हम कुछ देर और नहीं खेल सकते।  तब परी  ने कहा, ” नहीं,  अब हमें जल्दी से जल्दी यहां से लौट जाना चाहिए।  ”

 

 

 

बबलू  थोड़ा जिद करने लगा।  तब परी ने कहा, ” अच्छा ठीक है थोड़ा और भी खेल लो। ”  तभी अचानक वहां काले बादल छाने लगे और अंधेरा होने लगा।

 

 

परीलोक की कहानी सुनाइए

 

 

सारी परियों में घबराहट छा गयी और इधर – उधर  भागने लगी।  तब बबलू ने पूछा , ”  यह क्या हो रहा है ? इतना अंधेरा क्यों छा रहा है ?  क्या यहां रात हो रही है ? ”

 

 

 

तब परी  ने कहा, ”  नहीं, यहाँ रात नहीं हो रही है।  यह काली डायन के आने का संकेत है।  वह परियों को खा जाती है।  इससे उसे ताकत मिलती है।

 

 

 

परी ने  बबलू और बबली  को छुपा दिया।  तब तक का काली डायन वहां पर तबाही मचाने लगी थी।  तभी बबलू के दिमाग में एक उपाय आया।  उसने परियों से कहा, ”  मैं और  बबली इस काली दायाँ  का ध्यान बटातें हैं और आप सभी लोग एक साथ उस पर हमला करो।  इससे  उसकी शक्तियां जरूर कम पड़ जायेंगी। ”

 

 

 

 

इस पर परी ने कहा, ”  नहीं हम रिस्क नहीं ले सकते।  हमें तुम्हारी भी तो रक्षा करनी है।  ”  तब बबलू और बबली ने कहा, ” इसमें कोई रिस्क नहीं है।  आप सब की शक्तियां इस डायन  की शक्तियों पर भारी पड़ेगी क्योंकि वह अकेली है।  अभी तक आप लोग अलग-अलग उससे लड़ती थीं, अब एक साथ लड़िये।  संगठन की शक्ति बहुत मजबूत होती है।  ”

 

 

परीलोक की कहानी कार्टून

 

 

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उसके बाद बबलू और बबली ने ऐसा ही किया।  वह काली डायन के सामने आए और उसे  बातों में उलझा लिया।   तभी सभी परियों ने मिलकर एक शक्ति एकत्रित की और उसे काली दायाँ  पर फेंक दिया।

 

 

 

काली डायन मर गई।  उसके बाद सभी खुश हो गए और परियों ने कहा, ” हमें इंसानों से संगठन की शक्ति का महत्व की सीख मिली। अब हम संगठित ही रहेंगे।  ” उसके बाद सब खुशी से रहने  लगे और बब्लू और बबली को परी ने उनके घर पर छोड़ा और वे समय – समय पर उनसे मिलने जाने लगे। बब्लू और बबली आते समय परीलोक का फोटो भी ले आये।

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