Pari ki kahani

परी की कहानी . Best Hindi Story . परियों की कहानी हिंदी में। बच्चों की कहानी।

परी की कहानी हिंदी में
Written by Abhishek Pandey

परी की कहानी हिंदी में Pari Ki Kahani

 

 

 

परी की कहानी एक सागर में एक जलपरी राजकुमारी रहती थी।  वह बहुत ही मधुर गीत गाती  थी।  उसके पिताजी जो वहाँ के राजा थे वे हमेशा राजकुमारी को दो पैरों वाले  मानवों के बारे में बताते थे।

 

 

 

जलपरी राजकुमारी की मानवों के प्रति जिज्ञासा दिन – प्रतिदिन बढती ही जा रही थी। उसने एक दिन मानवों को देखने का निश्चय किया और उसके लिए उसने सागर की सतह पर जाने का निश्चय किया।

 

 

 

वह सागर के सतह पर आई।  तभी उसे एक बड़ी सी जहाज दिखी।  वह राजघराने की जहाज थी। उसने देखा कि एक बहुत ही खूबसूरत नौजवान उस पर खड़ा हुआ सागर को निहार रहा था।

 

 

 

वह जलपरी राजकुमार को देखते ही ख्वाब में खो गयी और जहाज के साथ चलने लगी।  तभी जहाज एक भयानक भंवर में फंस गयी और डूबने लगी और उसके साथ राजकुमार भी डूबने लगा।

 

 

 

राजकुमार को डूबते देख जलपरी तुरंत ही उसे पकड़ लिया और राजकुमार को सागर के तट पर लायी। राजकुमार बेहोश हो गया था।  राजकुमारी ने उसका उपचार किया और उसके होश में आने के पहले ही सागर में चली गयी और वहाँ से वह राजकुमार पर नज़र रखने लगी।

 

 

 

होश में आने के बाद राजकुमार ने इधर – उधर देखा। उसको कोई नज़र नहीं आया।  वह आश्चर्यचकित था और सोच रहा रहा कि उसकी जान किसने बचाई?

 

 

Pari Story in Hindi

 

 

तभी कुछ राहगीर जो उस तट से गुजर रहे थे उन्होंने राजकुमार को पहचान लिया और उन्हें आदरपूर्वक साथ ले गए।  यह देख राजकुमारी बहुत प्रसन्न हुई लेकिन उसे राजकुमार से बिछडने का दर्द हो रहा था।

 

 

 

उस दिन से वह गुमसुम सी रहने लगी।  ना ठीक से खाती ना ठीक से सोती।  उसकी इस मनोस्थित से राजा बड़े ही चिंतित हुए।  उन्होंने राजकुमारी से इसका कारण पूछा तो उसने पूरी कहानी बता दी और कहा, ” यदि मेरे भी पैर होते तो मैं भी राजकुमार के साथ रह सकती थी। ”

 

 

 

इसपर राजा ने कहा, ” तुम्हे इसके लिए बूढ़ी तांत्रिक परी से मिलना होगा, लेक्किन एक बात को याद रखना वह कुछ भी देने बदले कुछ ना कुछ मांगती है और वह ऐसी चीज मांगती है जो व्यक्ति को सबसे प्रिय होता है।  ऐसे में इस बात को ध्यान रखते हुए तुम उसके पास जा सकती हो।  ”

 

 

 

अब वह राजकुमारी उस बूढी तांत्रिक के पास गयी।  उसने उसे अपनी शक्तियों से पैर देना तो स्वीकार कर लिया लेकिन उसकी मधुर आवाज मांगी।  राजकुमारी को कभी भी नहीं लगा था कि वह बूढी तांत्रिक पारी इस तरह की शर्त रखेगी।

 

 

 

लेकिन फिर भी राजकुमारी से शर्त मंजूर कर ली।  उसके बाद उस बूढ़ी तांत्रिक ने अपने मन्त्र शक्तियों का आह्वान किया और उन मन्त्र शक्तियों के प्रभाव से उसे नीद आ गयी।

 

 

 

जब वह नीद से जाएगी तो उसने देखा कि उसके पैर आ चुके हैं और वह सागर किनारे रेत  पर है।  वह इससे खुश थी, लेकिन उसे अपनी आवाज़ खोने का बहुत दुःख था।

 

 

 

वह साझ नहीं पा रही थी कि वह राजकुमार तक कैसे पहुंचेगी और लोगों से राजकुमार का पता कैसे पूछेगी।  वह बेचैनी से इधर – उधर  घूमने लगी।

 

 

 

उसने बहुत बड़ा निर्णय ले लिया था।  अब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।  उसके अपनी आँख बंद की और मन ही मन रानी परीको याद किया।

 

 

 

कुछ समय में वहाँ लाल परी उपस्थित हो गयी और उसने बताया कि उसे रानी परी ने भेजा है।  इसपर राजकुमारी बहुत प्रसन्न हुई और अपनी समस्या बता दी।

 

 

परी की कहानी बच्चों की 

 

 

 

तब लाल परी ने कहा, ” यहाँ से कुछ दूर एक बाग़ है।  वहाँ राजकुमार हर शाम को घूमने आते हैं।  तुम वहाँ जाओ वे तुम्हे वहाँ जरूर मिलेंगे।  लाल परी मन की भाषा को समझती थी।

 

 

 

राजकुमार शाम को घूमने आया।  उसने राजकुमारी को देखा तो उस पर मोहित हो गया।  उसने राजकुमारी से उसका नाम पूछा, लेकिन आवाज नहीं होने के कारण उसने इशारों से बात करनी शुरू की।

 

 

 

राजकुमार ने उसे राजभवन में चलने का प्रस्ताव दिया।  जिसे राजकुमारी जलपरी सहर्ष मान गयी। यह तो उसके लिए उसके स्वप्न के साकार होने जैसा था।

 

 

 

वह जिससे प्यार करती थी आज उसके महल में जा रही थी।  महल में राजकुमार ने राजकुमारी जलपरी का भव्य स्वागत किया।  उसने अपने माता – पिता और परिवार के लोगों से राजकुमारी को मिलवाया।

 

 

 

राजकुमारी और राजकुमार बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे।  इधर बूढी तांत्रिक जलपरी से कोई डरता ही नहीं था।  उसकी आवाज़ मधुर हो गयी थी।  इससे वह बहुत ही क्रोधित रहने लगी।

 

 

 

एक दिन उसने यह आवाज वापस राजकुमारी को देने का निश्चय किया। उसने अपनी जादुई शक्तियों से राजकुमारी के बारे में पता किया और उसके बाद उसने राजकुमारी से कहा, ” तुम यह अपनी आवाज ले लो और इसके साथ ही तुम जब भी चाहो जलपरी बन जाओगी और जब चाहो मानव बन सकती हो और तुम्हारी देने से मुझे मेरी आवाज मिल जायेगी।  ”

 

 

 

राजकुमारी के लिए यह बात ” सोने पर सुहागा ” वाली थी।  उसने तुरंत ही इसके लिए हाँ कह दी।  आवाज मिल जाने के बाद उसने राजकुमार को पूरी सच्चाई, पूरी कहानी बता दी।

 

 

 

राजकुमार इससे बहुत प्रभावित और खुश हुआ।  उसकी शादी राजकुमारी जलपरी से हो गयी।  अब राजकुमारी राजकुमार के साथ ख़ुशी और सुखी पूर्वक रहने लगी।  जब उसका मन होता वह जलपरी बनकर अपने मायके अपने माता – पिता के पास भी जाती थी।

 

 

 

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