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हिंदी स्टोरी

dushyant shakuntala
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Written by Hindibeststory

हिंदी स्टोरी एक धर्मात्मा ने गाँव के मोड़ पर एक राहगीरों के लिए एक धर्मशाला का निर्माण किया. जिससे आने जाने वाले लोगग इसमें आराम करके अपनी थकान मिटा सके . लोग आते जाते रहे और वहाँ का दरबार जब कोई व्यक्ति वहाँ से जाता तो उससे यह जरुर पूछता कि आपको यहाँ कैसा लगा और इसे बनाने वाले का उद्देश्य क्या है.

उसने किस उद्देश्य से इस धर्मशाला का निर्माण कराया है. इसपर सबके अपने – अपने विचार थे. सभी अपनी दृष्टि , अपनी सोच के हिसाब से इसके निर्माण का उद्देश्य बताते. चोरो ने कहा कि चोरी करके यहाँ चोरी के सामन को गुप्त रखा जा सकता है. व्यभिचारियों ने कहा यहाँ भोग विलास कहा जा सकता है. कर चोरों ने कहा कि छपे से बचने के लिए यहाँ कुछ दिन छुप कर रहा जा सकता है. साधू स्संतों ने कहा कि यहाँ बैठकर शान्ति से साधना की जा सकती है. चित्र कलाकारों ने कहा यहाँ एकांत का है अतः हम अच्छी कलाकृति बना सकते हैं. कवियों ने कहा कि यहां विरह के गीत लिखे जा सकते हैं . विद्यार्थियों ने कहा कि यहाँ बहुत अच्छे ढंग से अध्ययन किया जा सकता है. इसी तरह हर कोई अपनी दृष्टि , अपनी सोच के आधार पर अपने अनुभव साझा करता. यह बात दरबान ने धर्मात्मा को बतायी . धर्मात्मा ने कहा जिसका जैसा व्य्याक्तित्व होता है वैसी ही उसकी दृष्टि , उसकी सोच होती है. वह हर चीज को उसी नजरिये से देखता है .

लेकिन एक बात तो तय है कि धर्मशाला बनाने का का हमारा उद्देश्य जरुर सफल हो गया, लेकिन हमें इस बात को ध्यान रखना होगा की यह कुकर्मों का अड्डा ना बनकर सत्कर्मों की पाठशाला बने, जहां अनेक सोच और उद्देश्य को रखने वाले लोग अपनी सोच और उद्देश्य को साझा कर सके. मित्रों आपको यह कहानी हिंदी स्टोरी कैसी लगी जरुर बताएं और इस तरह की कहानी के लिए इस ब्लॉग को लाइक , शेयर और सबस्क्राइब करें और दुसरे कहानी के लिए इस लिंक hindi story पर क्लिक करें.

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