Suspense Story

आखिर उसे किसने मारा ?

आखिर उसे किसने मारा ? उन दिनों मेरी पोस्टिंग लालगंज में हुई थी. जो की मेरे घर से थोड़ी दूर लगभग १० किलोमीटर की दुरी पर थी. मैं अपने चेयर पर बैठा  फाइलों को देखने में मशगुल था की इसी बीच एस आई विनोद कुमार ने जानकारी दी की सीकरी गांव में एक क़त्ल हो गया है. सीकरी लालगंज से ६ और मेरे गांव से करीब ३ किमी की दुरी पर था.

मैं अन्य कुछ सिपाहियों के साथ फ़ौरन ही मौका-ए-वारदात पर पहुंचा. जिसका क़त्ल हुआ था उसका नाम रघु था और उसकी उम्र कुछ २५ साल के आस-पास थी. उसके पिता का नाम आनंद था, जो की एक जमीदार था. जहां क़त्ल हुआ था वह एक खलिहान में बना कमरा था. वहाँ पर ३ कमरी बने हुए थे और बीच वाले कमरे में रघु का खून हुआ था.

जब तक हम वहाँ पहुंचते , उसके पहले ही उसके घर के और उसके गांव के लोग पहुँच गए थे. हर किसी के मन में यही सवाल था की आखिर उसे किसने मारा?

उसके घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल था. अब किसी की घर का नौजवान चिराग बुझ जाए तो उसका दर्द केवल वही महसूस कर सकता है. जब मैंने गौर से जांच की तो देखा की वह औधे मुंह गिरा हुआ था और उसके मुंह के पास काफी खून गिरा हुआ था जो की अब ज़मने लगा था . इससे यह बात तो बिलकुल साफ हो गयी की उसकी मौत की वजह सर पर लगी जख्म है. किसी ने पीछे से उस पर बड़ी ही बेदर्दी से वार किया था. इससे यह बात भी पूरी तरह से साफ हो गयी थी कि जिस किसी ने भी  रघु का खून किया वह उससे बहुत नफ़रत करता था. 

आखिर उसे किसने मारा ?
आखिर उसे किसने मारा ?

मैंने कमरे की बारीकी से तलाशी ली और अन्य कमरों की तलासी एस आई विनोद कुमार ने ली, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. तब मने उसके पिता आनंद से पूछा की क्यया किसी से रघु की दुश्मनी थी.

नहीं साहब रघु बहुत ही सीधा लड़का था. वह किसी से कोई मतलब नहीं रखता था. वह मेरे इस जमींदारी  के काम में साथ देता था…..आनंद ने रोते हुए कहा 

अच्छा…मैंने एक गहरी सांस ली और कहा की ऐसा तो लग नहीं रहा है जिस किसी ने भी रघु को मारा है बड़ी ही बेदर्दी से मारा है. ऐसा तो नहीं की जमीदारी के कारण कही कोई आपसे झगडा या बहस हुई हो और उसकी वजह सी रघु की ह्त्या कर दी गयी हो.

नहीं…मेरी भी किसी से कोई बहस नहीं हुई थी और ना ही किसी से कोई झगड़ा हुआ है…..आनंद ने पुरे विश्वास से कहा 

ठीक है….अच्छा रघु का दोस्त था….मैंने कहा

हाँ उसके बहुत से दोस्त थे ….राज, किरण, राहुल लेकिन उसका एक परम मित्र था उमंग…उमंग चौधरी….आनंद ने कहा 

ठीक है…..विनोद जी लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दो और रघु के सभी दोस्तों को थाने लेकर आओ…

आखिर उसे किसने मारा ?
आखिर उसे किसने मारा ?

ओके सर…व्विनोद ने कहा 

सर ये सभी रघु के दोस्त हैं…..विनोद ने कहा 

ओके….चलो सभी लोग अपना नाम बताओ 

सर राज….सर किरण…सर राहुल 

ओके…उमंग कहां है…..मैंने विनोद की ओर देखते हुए पूछा 

सर वह गायब है….और हमारी टीम उसे ढूंढ रही है….विनोद ने कहा 

ओके…कही कातिल उमंग ही तो नहीं है….अच्छा इसमें से उमंग को कौन जानता है…मैंने रघु के दोस्तों से पूछा 

सर मैं जानता हूँ….किरण ने तपाक से कहा 

ओके…क्या जानते हो उमंग के बारे में ..मैंने कहा 

सर उमंग बहुत ही अय्याश और बिगड़ा हुआ लड़का है. उसकी नजर रघु की बहन मधु पर थी…इसी बात पर उसका एक दिन रघु से झगड़ा हुआ था और उमंग ने रघु को जान से मार देने की धमकी दी थी.

चटाक….मैंने किरण को एक चांटा लगाया….सभी लोग हक्के बक्के से मुझे देखने लगे…तेरा खेल खत्म हो गया है….तूने एक नहीं बल्कि दो-दो खून किये है…..उमंग को भी तूने ही मारा ना….

उमंग मर गया है….किरण सही बनने की कोशिश करते हुए बोला

बहुत भोला बनता है..तुझे तो फांसी होगी….फट..एक और थप्पड़….विनोद यह ऐसे नहीं मानेगा …इसे थर्ड डिगरी देनी पड़ेगी और इसके मां बाप को इन्फार्म करो…मैंने कहा 

नहीं नहीं सर मैं सब बताता हु….सर मेरी नियत खराब हो गयी थी…रघु की बहन की शादी होने वाली थी..मैं एक बार उसे हासिल करना चाहता था. यह बात रघु समझ गया था…उसने मुझे वार्निंग दी…लेकिन फिर भी मैं नहीं रुका तो परसों उसने मुझे अपनी बहन के सामने ही नंगा करके मारा..तभी मैंने उसी मारने का प्लान बना लिया था.

और उमंग को क्यों मारा….मैंने पूछा 

दोस्तों आप पढ़ रहे हैं आखिर उसे किसने मारा ?

सर उस जगह पर उमंग भी था और उसने इस घटना की वीडियो बना ली थी और मुझसे पैसे की मांग कर रहा था.

तूने उनको कैसे मारा और हथियार कहा छुपाये…मने पूछा

किरण हर चीज रटे हुए तोते की तरह कबूलता जा रहा था. उसने बताया की उस दिन सुबह करीब ५ बजे मैंने उस कमरे के ऊपर  जिसमें रघु सोया हुआ था छोटे छोटे पत्थर फेंके..चूँकि ऊपर छत ना होकर सीमेंट का पतरा था तो लगातार पत्थर की आवाज से उसकी नींद टूट गयी और गुस्से से चिल्लाते हुए बाहर निकला और उसी समय मैं उस कमरे में छिप गया और वह जैसे ही वापस आया मैंने हथौड़े सी उसके सर पर तेज वार किया और वह वहीँ गिर पड़ा…उसके बाद मैंने उस मैंने रघु की मोबाइल से ही उमंग को मैसेज करके बाहर बुलाया और जब वह तालाव के पास पहुंचा तो मैं पहले से ही झाड़ियों में छुपा हुआ था..और उस पर भी उसी हथौड़े से वार कर दिया. तभी पोलिस की गाडी आती हुई दिखाई दी..ने आनन फानन में हथौड़े और दोनों की मोबाइल को तालाव में फेंक दिया.

सर लेकिन आपको कैसे पता चला कि उमंग मर चुका है….विनोद कुमार ने आश्चर्य से पूछा

दरअसल जब रघु के पिता ने बताया कि उमंग रघु का परम मित्र है तो मैं उससे मिलने उसके घर की ओर चल दिया…लेकिन रास्ते में मैंने देखा की एक बहुत ही बुरी तरह घायल युवक सड़क पर गिरा था….मैंने गाडी रोकी तो उसने सारी बात बता दी और उसे मैंने अपनी मोबाइल में रिकार्ड कर लिया था. इस तरह से इस केस आखिर उसे किसने मारा ? की गुत्थी सुलझ चुकी थी. दोस्तों मेरी यह कहानी आखिर उसे किसने मारा ? आपको कैसी लगी अवश्य ही बताये और भी अन्य कहानी के लिए इस लिंक  https://hindibeststory.com/11/16/01/24/1644/naval-ka-katl-suspense-story/suspense-story/abhishek/2018/    पर क्लिक करें.

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