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Akbar Birbal Stories in Hindi अकबर बीरबल की 5 प्रसिद्ध कहानिया। खिचड़ी स्टोरी।

Akbar Birbal Stories
Written by Abhishek Pandey

Akbar Birbal Stories Hindi अकबर बीरबल की कहानियां

 

 

Akbar Birbal Stories in Hindi:– एक बार की बात है।  बादशाह अकबर ने घोषणा करवाई कि यदि कोई व्यक्ति सर्दी के मौसम में नर्मदा नदी के ठंडे पानी में घुटनों तक डूबे रहकर सारी रात गुजार देगा, उसे बहुत बड़ा इनाम दिया जाएगा।

 

 

 

इतनी ठंडी में किसी की भी पानी में जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी।  एक गरीब आदमी जिसे पैसों की बेहद जरूरत थी उसने हिम्मत करके पूरी रात नदी में बिताने का फैसला लिया और इसे पूरा करने के पश्चात वह अपना इनाम लेने दरबार में पहुंचा।

 

 

 

बादशाह अकबर ने उसे बड़े ही आश्चर्य से देखा और फिर पूछा, ” तुमने पूरी रात कैसे इतने ठन्डे पानी में गुजार दी।  यह तो असंभव है। ”

 

 

 

इस पर आदमी ने कहा, ” जहाँपनाह ! मैं बहुत ही गरीब हूँ।  मुझे पैसों की बहुत अधिक आवश्यकता थी।  मैंने सारी रात नदी के छोर के महल के कमरे में जल रहे दीपक को देखता रहा और इस तरह जागते हुए सारी रात ठन्डे जल में गुजार दी। ”

 

 

 

 

इसपर बादशाह ने कहा, ” इसका मतलब तुम्हे महल के दीपक से गर्मी मिल रही थी और उसी सहारे तुम पूरी रात पानी में रह सके।  तुमने अपराध किया है और अगर हम चाहें तो तुम्हें सज़ा भी दे सकते हैं, लेकिन फिर भी तुम्हे हम सज़ा नहीं देंगे।  अब तुम तुरंत यहां से चले जाओ। ”

 

 

 

बादशाह अकबर के इस निर्णय और बर्ताव से वह आदमी बहुत ही दुखी हुआ।  इसी बीच किसी ने बीरबल के पास जाने की सलाह दी।  वह आदमी हिम्मत करके बीरबल के पास पहुंचा और पूरी बात से अवगत कराया।

 

 

 

हालांकि तब तक बीरबल तक यह बात पहुँच चुकी थी।  बीरबल ने उस आदमी को न्याय का भरोसा दिलाया। बीरबल दूसरे दिन दरबार में नहीं आये, जबकि उस दिन दरबार में आवश्यक बैठक थी।

 

 

 

बादशाह ने एक सिपाही को बीरबल को बुलाने के  लिए एक सिपाही को भेजा।  सिपाही ने वापस आकर कहा  कि, ” बीरबल खिचड़ी पका रहे हैं और बोले वे खिचड़ी पकते ही उसे खाकर आएंगे। ”

 

 

 

 

काफी देर हो गयी और बीरबल नहीं आये तो बादशाह अकबर को संदेह हुआ।  वे खुद ही मुआयना ककरने के लिए पहुँच गए।  बादशाह ने देखा कि बीरबल ने  एक बहुत लम्बे डंडे पर घड़ा बांधकर उसे बहुत ऊंचा लटका दिया है और नीचे ज़रा सी आग जल रही है और पास में बीरबल बड़े आराम  खटिया पर लेटे हुए हैं।

 

 

 

 

बादशाह ने यह नज़ारा देखा तो क्रोधित होते हुए बोलै, ” बीरबल, यह क्या तमाशा है।  ऐसे खिचड़ी पकती है क्या ?”

 

 

 

बीरबल बोले, ” माफ़ करें, जहाँपनाह जरूर पकेगी।  मुझे पूरा विश्वास है कि जैसे उस आदमी को महल के दीपक से गर्मी मिल सकती तो यह खिचड़ी भला क्यों नहीं पक सकती? यह तो काफी नजदीक भी है। ”

 

 

 

अकबर को अपनी गलती का एकसास हो गया।  उन्होंने तुरंत ही उस आदमी को उसका इनाम दिया और बीरबल को भी सम्मानित किया।  तभी से बीरबल की खिचड़ी की कहानी प्रसिद्ध हो गयी।

 

 

 

दूसरी कहानी जीत किसकी

 

 

 

बादशाह अकबर जंग जाने की तैयारी कर रहे थे। फ़ौज युद्ध के लिए सज्ज हो चुकी थी।  बादशाह भी अपने घोड़े पर सवार होकर आ गए।  उनके साथ उनके विश्वस्त बीरबल भी थे।

 

 

 

बादशाह ने फ़ौज को जंग के मैदान में कूच करने का निर्देश दिया। बादशाह आगे -आगे और पीछे विशाल फ़ौज चल रही थी।  तभी रास्ते में बिबल को कुछ जिज्ञासा हुई।  उन्होंने बीरबल से पूछा, ” बता सकते हो युद्ध में विजय किसकी होगी? ”

 

 

 

 

इसपर बीरबल बोले, ” जहाँपनाह ! इस प्रश्न का उत्तर मैं जंग – ए – मैदान में ही दूंगा। ”

 

 

 

कुछ समय में फ़ौज जंग के मैदान में थी। वहा पहुँचने के बाद बीरबल बोले, ” महाराज! अब मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूँ कि जीत आपकी ही होगी। ”

 

 

यह तुम इतने विश्वास से कैसे कह सकते हो, जबकि दुश्मन बहुत मजबूत है और उसकी सेना भी बहुत विशाल और मजबूत है…बादशाह ने शंका जाहिर की।

 

 

तब बीरबल बोले, ”  महाराज दुश्मन हाथी पर सवार है और हाथी तो सूंड से मिटटी अपने ऊपर ही फेकता है और वह अपनी ही मस्ती में रहता है।  जबकि आप घोड़े पर हैं।  घोड़ा कभी भी धोखा नहीं दे सकता है। घोड़ा गाज़ी मर्द होता है। ”

 

 

बीरबल का कथन सत्य हुआ और उस युद्ध में विजय अकबर की ही हुई।

 

 

 

तीसरी कहानी Akbar Birbal Stories in Hindi 

 

 

 

 

एक दिन की बात है।  बादशाह अकबर के दरबार में अधिकांश लोग बीरबल के खिलाफ हो गए और बीरबल के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। बादशाह ने भारी जनमत को देखते हुए आदेश दिया कि, ” बीरबल को सूली पर चढ़ा दिया जाए। ”

 

 

 

जब यह खबर बीरबल को लगी तो वे बड़े परेशान हुए, लेकिन तभी उनका दिमाग काम कर गया।  बीरबल ने कहा, ” मेरे खिलाफ जो आरोप लगा है वह इतना गंभीर नहीं है कि मुझे मृत्युदंड दिया जाए।  गलतिया तो सभी से होती है।  लेकिन कोई बात नहीं।  मैंने इस दरबार के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन मोती बोन की कला मैंने अभी तक नहीं बतायी।  अगर आज्ञा हो तो उसे बता दूँ।  ”

 

 

 

बादशाह अकबर जानते थे कि उनका फैसला गलत है और यह दबाव में लिया गया है और उन्हें पूरा विश्वास था कि बीरबल इस मुसीबत से अवश्य ही बाहर निकल आएंगे।  अतः उन्होंने अनुमति दे दी।

 

 

 

अब आज्ञा मिलते ही बीरबल को अकबर के सन्देश का भान हो गया।  उन्होंने कुछ विशेष महलों की और इशारा करते हुए कहा कि इसे गिरा दिया जाए।  यह स्थान मोती के लिए बहुत उत्तम है।

 

 

Akbar Birbal Stories For Kids

 

 

 

यह महल झूठी शिकायत करने वाले दरबारियों के थे। महल गिराने के बाद बीरबल ने वहाँ जाऊ बो दिए।  कुछ दिन बाद बीरबल से दरबार में सभी से कहा, ” कल वह शुभ दिन है जब ये पौधे मोती पैदा करेंगे। ‘

 

 

सबके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। बीरबल के कहने पर उस स्थान की सुरक्षा बढ़ा दी गयी। अगले दिन सभी लोग दरबार में उपस्थित हुए।  सबको अपनी आखों से मोती उगा हुआ देखने तीव्र इच्छा हो।

 

 

 

तब बीरबल ने कहा, ” इस मोती ककी एक खाशियत है।  इस मोती को वही तोड़ सकता है जिसने कभी भी अपराध नहीं किया हो और मैं तो अपराधी हूँ और मुझे सज़ा भी होने वाली है।  अतः मैं तो इस मोती को नहीं तोड़ सकता।  अगर आपमें से कोई ऐसा है तो आप जाएँ और मोती तोड़कर लाएं। लेकिन एक बात का ख्याल रहे, अगर आपने कोई भी अपराध किया होगा तो मोती मिटटी हो जाएगा। ”

 

 

कोई भी दरबारी आगे बढ़ने को तैयार नहीं हुआ।  यह देखकर बीरबल बोले, ” महाराज ! यहां तो हर कोई अपराधी है।  अब आप ही इस मोती को तोड़े। ”

 

 

 

अब अकबर भी परेशान हो गए और उन्होंने कहा, ” गलतियां सभी से होती है।  गलतियों की व्यापकता को देखते हुए उसके हिसाब से ही दंड दिया जाना चाहिए।  दंड देने से पूर्व उस अपराध की गहन छान – बीन अवश्य ही करनी चाहिए और उसके बाद अकबर ने बीरबल को सजा से मुक्त कर दिया। ”

 

 

 

चौथी कहानी अकबर बीरबल की मुलाक़ात

 

 

 

बादशाह अकबर को शिकार का बहुत ही शौक था।  वे काम की व्यस्तता के बावजूद भी शिकार के लिए वक्त निकाल ही लेते थे। एक बार की बात है अकबर शिकार के लिए निकले।

 

 

 

 

घोड़े पर सरपट दौड़ते हुए उन्हें पता ही नहीं चला कि कुछ सिपाहियों को छोड़कर बाकी की सेना पीछे ही रह गयी।  शाम का वक्त हो गया था।सभी भूख प्यास से बेहाल थे।

 

 

 

उन्हें लग गया था कि वे रास्ता भटक चुके है।  अकबर को भी समझ नहीं आ रहा कि वे किस दिशा में जाएँ। उन्होंने अगल – बगल देखना शुरू किया।  कुछ देर चलने के बाद उन्हें एक तिराहा नजर आया।

 

 

 

राजा बहुत ही खुश हुए चलो किसी तरह अब राजधानी पहुंच ही जायेंगे। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह थी कि जाएँ तो किस तरफ जाएँ। सब लोग अपने – अपने तरीके से सोच रहे थे।  तभी अकबर ने देखा कि एक लड़का खड़ा – खड़ा उन सभी को घूर रहा था।

 

 

 

सैनिकों ने उसे देखा तो राजा के सामने लाकर पेश किया।  राजा ने रौबदार आवाज़ में पूछा, ” ऐ लडके, आगरा के लिए कौन सी सड़क जाती है ?”  लड़का मुस्कुराते हुए बोला, ” महाराज यह सड़क तो यही रहती है।  जाना तो आदमी को ही पड़ता है। ” यह कहकर वह खिलखिलाकर हंस पड़ा।

 

 

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सभी सैनिक मौन खड़े थे।  उन्हें अकबर के गुस्से के बारे में पता था।  लेकिन अकबर गुस्सा नहीं हुए बल्कि मुस्कुराते हुए बोले, ” तुम सही कह रहे हो।  क्या नाम है तुम्हारा? ”

 

 

 

” मेरा नाम महेश दास है और आप कौन हैं ? उस लडके ने पूछा।

 

 

 

अकबर ने अपनी अंगूठी निकालकर महेश दास को देते हुए कहा, ” तुम बादशाह अकबर से बात कर रहे हो।  मुझे निडर लोग बहुत ही प्रिय हैं।  तुम जब चाहे मेरे दरबार में आ सकते हो।  मुझे यह अंगूठी दिखाना मैं तुम्हे पहचान लूंगा और हाँ अभी यह बताओ कि मैं किस रास्ते पर चलूँ कि आगरा पहुँच जाऊं। ”

 

 

 

महेश दास ने सर झुकाकर आगरा का रास्ता बता दिया और इस तरह से अकबर को भविष्य कके बीरबल मिले।

 

 

 

पांचवी कहानी Akbar Birbal Stories in Hindi With Moral

 

 

 

एक दिन एक कवि  एक धनि आदमी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुन्दर कवितायें इस उम्मीद से सुनाई कि शायद यह धनवाद आदमी खुश होकर कुछ इनाम जरूर देगा।  लेकिन वह धनवान आदमी बड़ा ही कंजूस था।

 

 

 

उसने कहा, ” तुम्हारी कवितायें सुनकर दिल खुश हो गया।  तुम कल फिर आना मैं तुम्हें खुश कर दूंगा। ” वह कवि बड़ा बहुत ही खुश हुआ। उसने सोचा कल इनाम जरूर मिलेगा।

 

 

 

अगले दिन वह ख़ुशी – ख़ुशी उस धनवान आदमी के हवेली में गया।  धनवान आदमी वाला, ” कवि महाशय, ककल आपने मुझे अपनी कविता सुनाकर खुश किया ठीक वैसे ही आज मैंने आपको अपने हवेली पर बुलाकर खुश कर दिया।  ना तो आपने मुझे कुछ दिया, इसीलिए मैं भी आपको कुछ नहीं दे रहा हूँ, हिसाब बराबर। ”

 

 

 

बेचारा कवि  बेहद निराश हुआ।  उसने अपनी बात अपने एक ख़ास मित्र को बताई।  उस मित्र ने उसे लेकर बीरबल के पास गया। बीरबल ने कवि की बात को बड़ी ही गंभीरता से सूना और फिर बोले, ” अब एक काम करो।  तुम उस धनवान आदमी को भोजन का निमंत्रण दो और हाँ अपने इस कवि मित्र को भी वहाँ बुलाओ और मैं तो वहाँ रहूंगा ही। ”

 

 

 

बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र ने उस धनवान को आदमी को भोजन के लिए अपने घर पर आमंत्रित किया।  धनवान तो ठहरा महाकंजूस उसने सोचा आज मुफ्त की दावत का लुफ्त उठाते हैं।

 

 

 

तय समय पर वह पहुँच गया। वहा कवि और उसका मित्र और बीरबल बातों में मशगूल थे।  समय गुज़रता जा रहा था लेकिन कहीं भी खाने -पीने का कोई इंजाम ही नहीं था। यह देख धनवान आदमी की बेचैनी बढाती जा रही थी।  कुछ देर के और इन्तजार के बाद वह पड़ा,
“भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?”

 

 

” खाना, कैसा खाना? बीरबल ने पूछा।

 

 

धनवान बड़े ही गुस्से में बोला, ” मतलब क्या है तुम्हारा? क्या इन महाशय ने ( कवि के मित्र की और इंगित करते हुए ) मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया?”

 

 

 

इस पर बीरबल बोले, ” खाने का कोई निमंत्रण नहीं था।  यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था। ‘

 

 

डांवां को बड़ा गुस्सा आया। वह क्रोधित स्वर में बोला, ” क्या तमाशा है यह ? इस तरह किसी इज़्ज़तदार आदमी को घर बुलाकर बेइज़्ज़त करना ठीक है क्या ? ”

 

 

 

तब बीरबल मुस्कुराये और फिर बोले, ” यही बात इस कवि पर भी लागू होती है। तुमने इसके साथ ठीक ऐसा ही किया। ” बीरबल के इतना कहते ही उस धनवान आदमी को अपनी गलती का एहसास हो गया और उसने उस कवि अच्छा इनाम दिया और फिर भोजन कर वहाँ से विदा ली।  सभी लोगों ने बीरबल की खूब प्रसंसा की।

 

 

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