Akbar Birbal की ११ मजेदार रोचक हिंदी कहानियां. अकबर बीरबल की रोचक कहानी

Akbar Birbal की ११ मजेदार रोचक हिंदी कहानियां. अकबर बीरबल की रोचक कहानी

 

४- अकबर को मजाक की आदत थी. एक बार उन्होंने नगर के सेठों को आदेश दिया की अब से तुम लोगों को नगर की पहरेदारी करनी होगी. अब सेठ बड़े चक्कर में पड़ गए और भागे-भागे बीरबल के पास आये और सारी बात कह सुनाई.

 

 

 

बीरबल ने कहा कोई बात नहीं अब जैसा कहता हूँ वैसा ही करो. तुम सभी लोग अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामें को सर पर लपेटकर पुरे नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहो “अब तो आन पड़ी है”.

 

 

 

रात को अकबर भेष बदलकर राज्य के निरिक्षण के लिए निकले तो सेठों का यह निराला रूप देख पहले तो खूब हँसे और फिर बोले ” यह सब क्या है”?

 

 

 

सेठों के मुखिया ने कहा “हम सब व्यापारी है. हमें इसके बारे में क्या पता? पता होता तो हमें बनिया क्यों कहा जाता? झो जिसका काम होता है वही उसे अच्छे से कर सकता है.” अकबर को बात समझ में आ गयी और उन्होंने अगले ही दिन हुक्म वापस ले लिया

 

 

 

 

अकबर बीरबल की कहावत

 

 

 

५- किसी समय बीरबल ने अकबर को एक कहावत सुनाई थी की ” खाकर लेटना और मारकर भाग जाना ” सयाने लोगो की पहचान है. एक दिन महाराज को दोपहर में यह कहावत याद आ गयी.

 

 

 

Akbar Birbal Stories

 

 

बीरबल जरुर खाना खाने के बाद लेटता होगा. क्यों ना आज उसकी बात को गलत सिद्ध किया जाए. अकबर ने एक नौकर को बीरबल के पास भेजा और तुरंत आने को कहा. बीरबल सारा माजरा समझ गए.

 

 

उन्होंने नौकर को कहा रुको मैं कपडे बदल कर आता हु.. उन्होंने उस दिन चुस्त पायजामा चुना और पायजामा पहनने के बहाने वह बिस्तर पर लेट गए और काफी देर तक लेते रहे.

 

 

दरबार पहुंचाते ही अकबर बोले, बीरबल आज खाना खाने के बाद लेते की नहीं. बिलकुल लेटा था महाराज.इसका मतलब तुमने मेरे आदेश की अवहेलना की है. तुम्हे इसका दंड मिलेगा. इसपर बीरबल बोले, महाराज! मैंने कोई हुक्म उदूली नहीं की है.

 

 

 

मैं तो खाना खाने के बाद कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूं.  आप तो पैगाम ले जाने वाले से पूछ सकते हैं.  अब ये अलग बात है कि ये चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था. ” बीरबल ने सहज भाव से उत्तर दिया. अकबर बादशाह बीरबल की चतुरता को समझ गए और मुस्करा पड़े.

 

अकबर बीरबल के रोचक किस्से – जब बीरबल बना बच्चा

 

 

 

६- एक दिन बीरबल दरबार में काफी देर से पहुंचे तो अकबर ने इसका कारण पूछा. इसपर बीरबल बोले, महाराज! बच्चे दरबार ना आने की जिद कर रहे थे. मैं किसी तरह से बहाना बनाकर आया हूँ. इसपर बीरबल बोले, ” तुम झूठ बोल रहे हो. बच्चों को संभालना इतना मुश्किल नहीं होता है”.

 

 

इसपर बीरबल हंसते हुये बोले,” महाराज!किसी बच्चे को डांटकर समझाना अलग बात है, लेकिन उन्हें विस्तार से समझा पाना बहुत ही मुशील है.”

 

 

इसपर अकबर बोले ” अब बहाने मत बनाओ. ऐसा कुछ नहीं होता है. मुझे कोई बच्चा लाकर दो. फिर देखो मैं कैसे उसे संभल कर दिखाता हूँ”.

 

 

ठीक है हुजुर.  अब बच्चा लाने से बेहतर है मैं ही बच्चा बनकर उनके तरह व्यव्व्हार करता हूँ. आप संभलकर दिखाओ. फिर बच्चा बने बीरबल ने बच्चो की तरह हरकते शुरू कर दी.

 

 

 

वे कभी अकबर को चिढाते ती कभी उनकी मुझे उखाड़ते तो कभी सामान इधर उधर करते तोकभी किसी चीज को बार – बार पूछते और जब अकबर उन्हें थोड़ा भी डांटते तो वे रोने लगते .

 

 

 

पुरे दरबार में हंगामा मचा हुआ था. सभी इस खेल को देख बड़े प्रसन्न थे. अकबर ने नौकरों से मिठाई लाने को कहा. बीरबल ने मिठाई खाई और बाकी की मिठाई इधर- उधर फेकने लगे.

 

 

 

अकबर ने कहा इसे नहीं फेंकते. इतना कहते ही बीरबल फिर से रोने लगे. अब अकबर ने खिलौने लाने को कहा, तभी बीरबल रोते हुए बोले नहीं मैं तो गन्ना खाऊंगा.

 

 

 

अकबर मुस्कराए और गन्ना लाने को कहा. यह देखकर बीरबल फिर रोने लगे और बोले इतना बड़ा गन्ना नहीं चाहिये इसे छोटा-छोटा करो. अब सैनिको ने इसे टुकड़ों में काट दिया और गन्ना कटते ही बीरबल फिर रोने लगे और अकबर से बोले नहीं मुझे तो पूरा गन्ना चाहिए.

 

 

 

मैं छोटे-छोटे गन्ने नहीं खाऊंगा. अब अकबर ने दूसरा साबुत गन्ना देते हुए बोले लो इसे खाओ. लेकिन बीरबल ने कहा मैं यह गन्ना नन्ही खाऊंगा.मुझे तो इन छोटे टुकड़ों से ही साबुत गन्ना बनाकर दो.

 

 

 

अरे कैसी बात करते हो? कटा हुआ गन्ना भला साबुत कैसे हो सकता है. अकबर गुस्से में बोले. लेकिन बीरबल रोते रहे. अकबर का धैर्य जवाब दे गया. उन्होंने कहा कि तुम चुप नहीं हुए तो अब मार पड़ेगी.

 

 

अब बच्चा बने बीरबल हंसते हुए उठ खड़े हुए और बोले, ” नहीं – नहीं हुजुर, मुझे मत मारो. अब आपको पता चला बच्चे कैसी बेतुकी जिद करते हैं.”

 

 

अकबर को भी बात समझ में आ चुकी था.

 

 

 

अकबर बीरबल की रोचक कहानिया – कारीगर का कवच

 

 

७- एक बार अकबर ने एक कारीगर को बख्तरबंद कवच बनाने का आदेश दिया. कुछ दिनों में कारीगर ने सैम्पल के तौर पर कुछ कवच लेकर दरबार में आया.

 

 

 

उसने पूरी कारीगरी से कवच को मजबूती प्रदान की थी. अकबर को कवच तो पसंद आया लेकिन उसकी मजबूती पर उन्हें शक हो रहा था. उन्होंने स्वयं इसका निरिक्षण करने का फैसला किया.

 

 

 

उन्होंने एक पुतले को कवच पहनाकर जैसे ही उसपर वार किया वह कवच फट गया. इससे अकबर बड़े ही क्रोधित हुए और उस कारीगर खूब खरी-खोटी सुनाते हुए आदेश दिया कि अगर अगली बार भी ऐसी ही गलती रही तो तुम्हे शूली पर लटका दिया जाएगा.

 

 

 

कारीगर बेहद निराश हो गया. वह घर आया और सारी बात अपनी पत्नी को बताई. उसकी पत्नी चालाक थी. उसने इस बारे में बीरबल से बात करने को कहा.

 

 

 

बीरबल ने पूरी बात ध्यान से सुनी और कारीगर से कहा “जब तुम फिर से कवच लेकर महाराज के पास जाना तो जब महाराज इसे काठ के पुतले को पहनाने की आज्ञा दें तो कहना इसकी परीक्षा पुतले पर नहीं हो सकती है, इसे मैं स्वयं ही पहन लेटा हूँ.

 

 

 

लेकिन ध्यान रखना जैसे ही महाराज या कोई और तुमपर तलवार चलाने के लिए झपटे तुम चिल्लाकर विचित्र स्थिति उत्पन्न कर देना, जिससे उसका हाथ काप जाए और वह दूर खडा हो जाए.

 

 

 

जब महाराज इसका कारण पूछेंगे तो कहना, ” महाराज! युद्ध के समय यह कवच कोई पुतला तो पहनेगा नहीं और जो कोई भी इसे पहनेगा उसके हथियार और खुद की शक्ति भी होगी, जिसका खौफ दुश्मन सैनिक में होगा और इसलिए वह पुतले पर किये जाने वाले प्रहार की तरह प्रहार नहीं कर सकेगा.

 

 

 

कारिगर को बात समझ में आ गयी. उसने ठीक वैसा ही वहाँ किया और बादशाह ने जब कारण पूछा तो उसने बीरबल की सारी बात बता दी. इसपर अकबर ने कहा बात तो तुम्हारी सही है, लेकिन यह बताओ यह उपाय तुम्हे किसने बताया.

 

 

 

कारीगर ने सारी बात सच- सच बता दी. इसपर अकबर और दरबारी बड़े ही प्रसन्न हुए.

 

 

 अंधो की सूची – Akbar Birbal की रोचक कहानी

 

 

 

८- अकबर अक्सर बीरबल से अजीबोगरीब सवाल करते रहते थे. एक दिन उन्होंने बीरबल से पूछा, तुम बता सकते हों की इस राज्य में कितने अंधे रहते हैं? लेकिन उत्तर एकदम सही होना चाहिए.

 

 

 

इसपर बीरबल बोले महाराज! तुरंत तो इसका उत्तर देना मुश्किल है. इसका जवाब कुछ दिनों में मैं आपको दे पाऊंगा. अकबर ने उन्हें मोहलत दे दी.

 

 

 

अकबर अगले दिन एक बिना बुनी हुई चारपाई लेकर बाजार में बैठ गए और उसे बुनना शुरू कर दिया. उन्होंने दो आदमी बिठा रखे थे कागज़- कलम लेकर कुछ लिख रहे थे.

 

 

 

थोड़ी ही देर में भीड़ लग गयी. हर कोई बीरबल से यही पूछता “बीरबल क्यया कर रहे हो”? बीरबल कुछ नहीं बोलते. उनके साथ बैठे लोग ऐसे लोगों का नाम लिखते जाते.

 

 

 

यह बात अकबर तक पहुंची. अब अकबर भी बाज़ार पहुंचे और बीरबल से वही सवाल किया. बीरबल ने तुरंत ही अकबर का भी नाम लिख देने को कहां.

 

 

 

 

अकबर को आश्चर्य हुआ. उन्होंने तुरंत ही वह कागज़ ले लिया और देखा तो उसपे लिखा था ” अंधे लोगों की सूची “. अकबर बड़े नाराज हुए और बोले क्या तमाशा है बीरबल? मैं अंधा दीखता हूँ?

 

 

 

बीरबल बोले. “महाराज! आपने देखा कि मैं चारपाई बन रहा हूँ फिर भी आपने सवाल पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ? अकबर को बात समझ में आ गयी. उन्होंने बीरबल को खूब इनाम दिया.

 

 

असली चोर – बीरबल की होशियारी

 

 

९- एक बार अकबर के राज्य में एक व्यापारी के यहाँ बड़ी भारी चोरी हुई. उसमें कई कीमती सामान चोरी हो गयी. व्यापारी को अपने १० नौकरों पर ही शक था, लेकिन वह तय नहीं कर पा रहा था की असली चोर कौन है.

 

 

 

व्यापारी बीरबल के पास पहुंचा और मदद मांगी. बीरबल ने हाँ कहा और सिपाहियों से सभी नौकरों को गिरफ्तार कर जेल में डालने को कह दिया. बीरबल ने सभी चोरो से पूछा चो किसने की है. सभी ने ना कह दिया.

 

 

 

बीरबल नें थोड़ी देर सोचा, और कुछ देर बाद वह दस समान लम्बाई की छड़ी ले कर आये और सभी चुने हुए लोगों को एक-एक छड़ी पकड़ा दिया. पर छड़ी पकडाते हुए बीरबल नें कहा, ” जिसने भी चोरी की है उसकी छड़ी दो इंच बड़ी हो जायेगी “. अगली सुबह बीरबल ने छड़ी को ध्यान से देखा और व्यापारी को लो यही चोर है जिसने चोरी की है.

 

 

व्यापारी बीरबल की तरफ आश्चर्य से देखा और पूछा आपने कैसे पता किया? इसपर बीरबल ने सारी बात बताई और कहा इस चोर ने डर की वजह से छड़ी को २ इंच तोड़ दिया था, इस तरह से अकबर ने फिर से अपनी बुद्धिमत्ता साबित कर दी.

 

 

सेर को सवा सेर Akbar Birbal Ki  Rochak Kahaniya

 

 

१०- एक बार कुछ लोगों ने बीरबल को शहर के लालची बर्तन के दूकान के बारे बताया. उन्होंने कहा की वह सबको ठगता बहुत है. उसे सबक सिखाइए.

 

 

 

बीरबल उसकी दूकान पर गए और वहाँ से तीन बड़े – बड़े पतीले ख़रीदे . कुछ दिन बाद वे एक छोटी सी पतीली लेकर दुकानदार के पास पहुंचे और बोले, ” आपके बड़े पतीले ने बच्चा दिया है. कृपया इसे रख लें” दुकानदार पहले तो चकराया फिर ख़ुशी – खुशी पतीली रख ली और सोचने लगा क्या घनचक्कर आदमी है.

 

 

 

कुछ दिन बीरबल एक बड़ा पतीला लेकर उस दुकानदार के पास पहुंचे और बोले, ” यह मुझे पसंद नहीं है, कृपया मेरा पूरा पैसा वापस दे दो”. इसपर दुकानदार बोला पुरे पैसे? लेकिन मैंने तोआपको तीन पतीले दिए तहर यह तो एक ही है.

 

 

 

इसपर बीरबल बोले बाकी के दो पतिलो का इंतकाल हो गया. दूकानदार बोला, ” कैसे आदमी हो भाई? भला पतीलों की भी मृत्यु होती है”. बीरबल ने जवाब दिया, ” क्यों नहीं, जब पतिलों के बच्चे पैदा हो सकते हैं, तो मृत्यु भी हो सकती है.”

 

 

 

दुकानदार को बीरबल के पैसे वापस करने पड़े. उसने बीरबल से क्षमा मांगी और बोला, ” अब से मैं कभी झोल नहीं करूँगा. इमानदारी से ही धंधा करूँगा?. आखिर आज सेर को सवा सेर मिल गया था.

 

 

Story Of Akbar Birbal

 

 

११- बादशाह अकबर को घोड़े बहुत ही पसंद थे और घोड़े पसंद आने पर वे मुहमांगी कीमत देकर उसे खरीद लेते थे. एक दिन एक घोड़ो का विक्रेता दरबार में आया. वह नया था, दरबारी और अन्य व्यापारी भिओ उसे नहीं जानते थे.

 

 

 

उसने दो बेहद आकर्षक घोड़े अकबर को दिखाए. अकबर को घोड़े पसंद आये तो वह व्यापारी बोला मैं ऐसे ही और घोड़े लाकर दे सकता हूँ लेकिन आधी कीमत पहले अदा करनी होगी.

 

 

 

अकबर को घोड़े पसंद आ गए थे. उन्होंने तुरंत ही खजांची को बुलाया और आधे पैसे देने को कहा. सभी को यह बात बहुत खटकी लेकिन कोई विरोध नहीं कर सका. सभी चाहते की यह मामला बीरबल उठाये.

 

 

 

अकबर कुछ सोचने लगे की तभी उन्हें महाराज की एक बात याद आ गयी और उन्होंने कहा, ” महाराज! आपने मुझे मूर्खों की सूचि बनाने को कहा था. माफ़ करिएगा उनमें आपका नाम सबसे ऊपर है”. अकबर गुस्से से लाल हो गए और बोले ” बीरबल तुम्हारी ऐसी हिम्मत कैसे हुई”.

 

 

बीरबल बोले, महाराज! मैं अपनी बात को साबित कर सकता हूँ और अगर साबित ना कर पाऊं तो मेरी गर्दन कटवा देना.

 

ठीक है बताओ कैसे? अकबर ने कहा

 

 

 

बीरबल बोले, ” आपने घोड़ो के ऐसे व्यापारी को इतनी बड़ी रकम पेशगी दे दी, जिसका अता-पता ही नहीं. दरबारी तो दूर कोई व्यापारी तक उसे नहीं जानता है. वह आपको धोखा दे सकता है”. इसीलिए आपका नाम मूर्खो की सूचि में सबसे ऊपर है.

 

 

 

अकबर को बात समझ में आ गयी और उन्होंने तुरंत ही पेशगी रुकवा दी और बीरबल को शाबाशी दी और ढेर सारा इनाम दिया.

 

 

 

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