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Ali Baba 40 chor: हिंदी कहानी अली बाबा ४० चोर . Alibaba chalis Chor

ali baba 40 chor
Written by Abhishek Pandey

ali baba 40 chor बहुत समय पहले की बात है. पर्शिया के एक शहर में गलीचों का एक व्यापारी रहता था. उसके दो बेटे थे. एक का नाम कासीम और दुसरे का नाम अलीबाबा था.

 

 

पिता की मृत्यु के बाद कासिम ने भोले अलीबाबा को धोखा देखर पुरे कारोबार पर कब्ज़ा कर लिया. कासिम ने एक अमीर लड़की से शादी की और ठाट से रहने लगा.

 

 

 

उधर अलीबाबा की शादी एक गरीब लड़की से हुई. वह जीवन यापन के लिए लकड़ी काटने और बेचने का काम करने लगा. एक दिन जब वह लकडियाँ कट रहा था तो उसे बहुत सारे घोड़ों के टापुओं की आवाज सुनाई दी.

 

 

 

उसने देखा कि बहुत सारे डाकू उसकी तरफ तेजी से बढे आ रहे थे.वह दर से तुरंत ही बड़े और घने पेड़ के निचे छिप गया. उसने देखा कि सभी डाकू एक बड़े टीले के पास आकर रुक गए.

 

 

 

अलीबाबा  धीरे से पेड़ से उतारा और छुपकर सारा माजरा देखने लगा. उसने गिनती की तो पुरे ४० चोर थे. तभी उन चोरों का सरदार आगे आया और टीले के पास जाकर बोला “खुल जा सिमसिम”.

 

 

 

वहाँ एक दरवाजा खुल गया और सभी चोर एक एक करके अन्दर चले गए. यह देखकर अलीबाबा आश्चर्य में पड़ गया. कुछ देर में सभी चोर अपने सामान उस गुफा में रखकर बाहर आ गए और दरवाजा पहले की तरह पुनः बंद हो गया.

 

 

 

अलीबाबा बड़े ही ध्यान से सबकुछ देख रहा था. चोरो के जाने के बाद उसने इधर – उधर देखा और धीरे से टीले के पास पहुंचा और बोला ” खुल जा सिमसिम”.

 

 

 

दरवाजा खुल गया. वह अन्दर गया. उसने देखा कि वहाँ ढेर सारे आभूषण, हीरे, मोती, चांदी, बर्तन, आदि रखे हुये थे. यह सब सामन चोरों ने लूट कर वहां जमा किया था.

 

 

अलीबाबा ने ढेर सारे सिक्के अपने थैले में भर लिए और अपने घर पहुंचा.उसने अपनी पत्नी को यह सिक्के दे दिए. उसकी पत्नी इतने सारे सिक्के देखकर हैरान रह गयी.

 

 

 

 

उसने पूछा इतने सारे सिक्के तुम्हे कहाँ से मिले. इस पर अलीबाबा ने कहा कि यह बहुत लम्बी कहानी है.ठीक है मैं यह सिक्के गिन लेती हूँ.अरे नहीं इतने ज्यादा सिक्के नहीं गिन सकते. तुम भाईजान के घर से वजन काँटा लेकर आओ…अली ने कहा

 

 

 

अलीबाबा  की पत्नी अपने जब वजन काँटा लेने पहुंची तो वहाँ कासिब की पत्नी थी. उसने पूछा तुम वजन काँटा में क्या वजन करने वाली हो. इसपर अलीबाबा की पत्नी ने कहा कि कुछ अनाज है.

 

 

 

 

लेकिन कासिम की पत्नी बात को ताड गयी. उसने सोचा अलीबाबा के पास इतना अनाज कैसे आया होगा. इसलिये उसने वजन कांटे के पीछे मोम चिपका दिया.

 

 

 

अलीबाबा की पत्नी ने सिक्कों को वजन किया और बहुत प्रसन्न हुई. उसने कहा हम अमीर बन गए हैं. अब हम जो चाहे खरीद सकते हैं. लेकिन अलीबाबा ने उसे मना किया कि अभी नहीं..

 

 

 

अभी हमें कुछ दिन रुकना होगा, नहीं तो लोग हम पर शक करेंगे.लेकिन अगली सुबह जब वजन काँटा कासिम के घर पहुंचा तो कासिम की पत्नी को सारा माजरा समझ में आ गया.

 

 

 

उसके इसकी जानकारी कासिम को दी. कासिम बहुत ही बेचैन हो गया. उसने सोचा कि आखिर सोने के सिक्के अलीबाबा के पास कैसे आए. वह तुरंत ही अलीबाबा के घर पहुंचा और चापलूसी से अलीबाबा से बातें करने लगा.

 

 

 

बातों बातों में धूर्त कासिम ने सारी बात जान ली. अगले दिन कासिम ४ मजबूत खच्चर लेकर गुफा के पास पंहुचा और बोला “खुल जा सिमसिम” और दरवाजा खुल. कासिम अन्दर गया और हैरत से देखने लगा.

 

 

 

 

उसने ख़ुशी के मारे ढेर सारे सिक्के , हीरे जवाहरात थैले में भरे और तेजी से दरवाजे की तरफ बढ़ , लेकिन उसे दरवाजे का कोड “खुल जा सिमसिम” भूल गया था.उसने बहुत प्रयत्न किया, अलग्ग अलग कोड बोले लेकिन दरवाजा नहीं खुला.

 

 

 

इतने में चोर वहाँ आ गए और उन्होंने “खुल जा सिमसिम” कहकर दरवाजा खोला तो तो वहा कासिम को हीरे जवाहरात के साथ रेंज हाथ पकड़ लिया. यह देखकर चोरों के सरदार को बहुत क्रोध आया.

 

 

 

 

उसने वहीं कासिम को मार डाला और उसे उसी गुफा में बंदकर चले गए.काफी देर तक जब कासिम नहीं लौटा तो उसकी पत्नी को घबाहत हुई. वह अली के घर आई और सारी बात बताई.

 

 

 

 

इसपर अली ने कहा कि वह जरुर गुफा में गया होगा. मैं उसे अभी लेकर आता हूँ. जब वह गुफा में पहुंचा तो देखा कि वहा कासिम की लाश पड़ी हुई थी. वह काफी घबरा गया और जल्दी से उसकी लाश को लेकर घर पहुंचा.

 

 

 

 

कासिम की नौकरानी मोर्गियाना इस हादसे के बारे में जानती थी.वह बहुत ही चालक औरत थी.उसने कहा कि हमें इसकी खबर लोगों से छुपानी होगी.

 

 

 

 

मैं हकीम के पास से कुछ दवाइयां लेकर आती हूँ , जिससे लोगों को लगे कि मालिक बीमार हैं. हम कल इस बारे में लोगों को बताएँगे.सभी इस पर राजी हो गए.

 

 

 

समय गुजरा कासिम की मृत्यु से उसकी पत्नी टूट गयी और कुछ दिन में उसकी मृत्यु हो गयी. उसकी मृत्यु के बाद कासीम की नौकरानी ने अलीबाबा  से कहा कि अब यहाँ कोई नहीं क्या आप मुझे अपने घर में रहने देंगे.

 

 

 

अलीबाबा जानता था कि वह बहुत ही होशियार औरत है. वह मान गया. इधर कासिम की लाश गायब होने से चोर सकते में आ गए थे.वह समझ गए कि यहाँ के बारे में कोई और भी जानता है.

 

 

 

अतः वे उस व्यक्ति की तलाश में लग गए. चोरों के सरदार ने कहा कि आस- पास के गांव में फ़ैल जाओ और पता करो कि हाल में किसकी मृत्यु हुई है.

 

 

 

 

चोर गाँव में फ़ैल गए और उन्हें पता चला कि हल ही में कासिम की मृत्यु हुई है.उसने कासिम के घर का पता लगाया तो पता चला कि अब उसके घर पर कोई नहीं रहता है, लेकिन उसे यह भी पता चला कि उसका छोटा भाई अलीबाबा वही कुछ दूर पर रहता है.

 

 

 

उसे अलीबाबा पर शक हुआ. उस चोर ने रात को अली के घर पर निशान लगा दिया . अगली सुबह जब मोर्गियाना ने यह निशान देखा तो वह समझ गयी कि सबकी जान खतरे में है तो उसने वहाँ के बाकी सभी घरों में वैसा ही निशान लगा दिया.

 

 

 

 

रात को चोर गाँव में आये लेकिन उलझन में पड गए क्योंकि हर घर पर वैसा ही निशान था. वे निराश होकर लौट गए. अगले दिन चोरो का सरदार खुद भेष बदलकर गाँव आया और उसने अलीबाबा  के घर को बहुत ही बारीकी से देखा.

 

 

 

 

अब उसे घर याद हो चुका था. इसके बाद उसने चालीस गधे और चालीस बड़े डिब्बे ख़रीदे और एक डिब्बे में तेल डाला और बाकी डिब्बों में उसने अपनने साथियों को छुपने को कहा. उसके बाद वह भेष बदलकर तेल का व्यापारी बनकर अलीबाबा के घर पहुंचा.

 

 

 

उसने अलीबाबा के घर का दरवाजा खटखटाया. अली ने पूछा क्या काम है ? इस पर उसने कहा कि मैं तेल का व्यापारी हूं.रात बहुत हो गयी है. शहर बहुत दूर है.

 

 

 

अतः एक रात के लिए मुझे जगह दें तो बड़ी मेहरबानी होगी.इस पर भोले अलीबाबा ने उसे अन्दर बुलाया कि तभी उसकी नौकरानी आ गयी और सरदार से कहा कि मुझे डिब्बे देखने हैं.

 

 

 

इसपर सरदार  ने वही तेल से भरा डब्बा दिखा दिया और पूछा अभी कोई शक.इस पर मोर्गियाना ने कहा नहीं और उसने रात को बहुत ही लजीज खाना बनाया.

 

 

 

 

वह जब खाना लेकर आई  तभी उसकी नजर सरदार के हाथ की अंगूठी पर गयी.उसे याद आया कि ऐसी ही एक अंगूठी अलीबाबा भी लाया था. अब उसका शक गहरा हो गया.

 

 

 

वह उस जगह पर गयी जहां डिब्बे रखे हुए थे. उसने एक डिब्बे को धीरे से खटकाया. तभी उसमें बैठा चोर बोला ” अब बाहर आ जाएँ “. उसे अब यकीं हो गया था कि यह सभी चोर हैं.

 

 

 

उसने तेल वाली डिब्बे से तेल निकाला और उसे खूब गर्म किया. उसके बाद उसने वह तेल हर डिब्बे में डाल दिया..इससे एक इक ककर सभी चोर मर गए.

 

 

 

देर रात जब सरदार उन्हें जगाने को आया तो उनकी हालत देख कर उसके पैरों तले जमीन खिसक गयी. सभी चोर मर चुके थे. वह देखकर वहाँ से भाग निकला. अगली सुबह मोर्गियाना ने यह बात अलीबाबा को बताई.

 

 

 

इस पर अलीबाबा बहुत खुश हुआ और मोर्गियाना से कहा कि अब तुम नौकरानी नहीं बल्कि हमारे परिवार का हिस्सा हो, क्या तुम्हे मंजूर है? इस पर मोर्गियाना ने हां कह दी. उसके बाद अलीबाबा ने उस गुफा से सारा खजाना उठा लिया और मज़े से रहने लगा.

 

 

 

 

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