Bhakti Story

भगवान बलराम /balram bhagwan

भगवान बलराम /balram bhagwan
भगवान बलराम /balram bhagwan
Written by Hindibeststory
भगवान बलराम /balram bhagwan भारत  के उत्तर प्रदेश के mathura  जिला से लगभग २० किलोमीटर दूर भगवान balarama का मंदिर स्थित है. यहाँ निजी वाहन और सरकारी वाहनों से भी पहुंचा जा सकता है. इस  कस्बे का नाम भगवान sri krishna के बड़े भाई  balaram के नाम पर रखा गया है. यहाँ की होली की हुडदंग [ हुरंगा ] बहुत ही प्रसिद्ध है.balaram को ब्रज का राजा कहा जाता है. भगवान भगवान बलराम /balram bhagwan को रोज खीर का भोग लगाया जाता है. श्री कल्याण देवजी balaram god के परम भक्त हैं. वे हमेशा ही balaram god की भक्ति करते रहते हैं. एक दिन श्री कल्याण  देवजी अपने नित्यकर्म से निवृत हुए ही थे कि दिव्य मुसलधारी भगवान भगवान बलराम /balram bhagwanउनके सम्मुख प्रकट हुये और बोले कि मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हूँ…वर मांगे. कल्याण देवजी ने करबद्ध प्रणाम कर निवेदन किया कि प्रभु मुझे आपके नित्य दर्शन के अतिरिक्त अन्य कोई अभिलाषा नहीं है. अतः आप नित्य मेरे घर विराजें. भगवान balaram ने तथास्तु कहा और यह आदेश दिया कि इस वट वृक्ष के नीचे मेरी और श्री रेवती जी की प्रतिमाएं भूमिस्थ है, उनका प्राकट्य करो. कल्याण देव जी ने भूमि खोदी और उस स्थान पर balaram और श्री रेवती जी की प्रतिमा निकली. 

इस दिन मार्गशीर्ष मास पूर्णमासी थी. वेदाचार के अनुरूप दोनों मूर्तियों की स्थापना की गयी. सर्वप्रथम श्री ठाकुर जी को खीर का भोग लगाया और उसके बाद से ही भगवान बलराम को खीर का भोग लगाया जाता है.

इस   भगवान बलराम /balram bhagwan मंदिर का बहुत ही विशेष महत्व है. शहंशाह औरंगजेब का मात्र एक ही संकल्प था कि हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ना…..देव स्थान को नष्ट भ्रष्ट करना और हिन्दू संस्कृति को तहस नहस करना था. जब उसने blaram temple की ख्याति सुनी तो उसने इस मंदिर को तोड़ने का निश्चय किया. जब वह सेना को लेकर आगे बढ़ा तो उसका दस्ता रास्ता ही भटक गया…इसके बाद भी जब उसने पीछे हटना स्वीकार नहीं किया और आगे बढ़ने लगे तो उस पर भौरों और ततैयों का झुण्ड उसकी सेना पर टूट पड़े..जिसमे उसकी सेना बुरी तरह घायल हो गयी. इसके बाद औरंगजेब ने पीछे हटना  स्वीकार कर लिया और मंदिर के लिए बहुत सारी सुबिधायें दीं और वहाँ एक नक्कारखाने का निर्माण कराया और यह नक्कारखाना आज भी वहाँ मौजूद है जो कि औरंगजेब के पराजय का साक्षी है. मित्रों यह जानकारी भगवान बलराम /balram bhagwan आपको कैसी लगी. अवश्य ही बताये और अन्य कहानी के लिए इस लिंक  https://www.hindibeststory.com/bijali-mahadev-bhakti-ki-kahani/ पर क्लिक करें.

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