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Written by Abhishek Pandey

best hindi kahaniya  एक बार की बात है. एक राह चलते फकीर से एक लड़के ने पूछा– “बाबा! मैंने कई जगह पढ़ा है और कई लोगों से सुना भी है, कि ‘सच्चा प्यार बहुतो को नसीब नहीं होता’.  मैं यह जानना चाहता हूं कि- लोग इस बात को क्यों बोलते है ? लेखक! क्यों इस बात को अपनी किताबों में शब्दों के माध्यम से गढते हैं ? इस बात में कितनी सच्चाई है ? अगर आप मुझे बता सकते हैं, तो कृपया मेरा मार्गदर्शन करें.

 

 

उस वृद्ध फकीर ने लड़के की बातों को गौर से सुनकर गहरी सांस लेते हुए कहा– “बेटा! एक काम करो तुम्हारे घर के पास जो फूलों का बगीचा है, उस बगीचे से मुझे वहां का सबसे सुंदर फूल लाकर दो. मैं तुम्हारे हर सवाल का संतोषजनक उत्तर दूंगा”.

 

 

लड़के ने फकीर की शर्त मान ली और बगीचे से फूल लेने के लिए चला गया. कुछ समय के बाद वह लड़का खाली हाथ लौट कर वापस आ गया. उसके हाथ में किसी भी प्रकार का कोई फूल नहीं था. जब फकीर ने लड़के से पूछा कि– “फूल कहां है” ?

 

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तो लड़के ने कहा– “बाबा! जब बगीचे में पहुंचा था, तो मुझे शुरुआती पेड़ों पर बहुत ही सुंदर फूल मिल गया था. लेकिन मैं उससे भी अच्छे फूल की तलाश में पूरे बगीचे में भटकता रहा. जब मुझे कहीं भी उससे अच्छा फूल नहीं मिला, तब मैं उसी फूल को लेने के लिए वापस आया. लेकिन तब तक उस फूल को कोई और ले जा चुका था और मुझे खाली हाथ लौट कर वापस आना पड़ा”.

 

 

लड़के की पूरी बात सुनने के बाद, फकीर ने मुस्कुराते हुए कहा– “बेटा! ठीक ऐसा ही हमारी जिंदगी में भी होता है. कई लोग हर समय खुद के पास जो है उससे बेहतर खोजने में अपना समय व्यर्थ करते रहते हैं. लेकिन उनको यह पता नहीं होता कि जिस बेहतर प्यार या रिलेशनशिप को वह बाहर खोज रहे हैं, वह उनके पास पहले से है. जब तक उनको इस चीज का एहसास होता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है और बेहतर खोजने के चक्कर में वो हर तरफ से वंचित रह जाते हैं”.

 

 

किसी ने सच ही कहा है कि– “सच्चा प्यार बहुतो को नसीब नहीं होता”. इसीलिए अपने पुराने संबंधों की कद्र करना सीखिए. यह बात सुनकर लड़के की आंखों में एक अलग सी चमक आ गई. शायद उसे दुनिया का सबसे अनमोल सबक मिल चुका था. शायद उसे रिश्तो को निभाना गया था. वह लड़का मुस्कुराते हुए अपने घर वापस चला गया और फकीर ने भी अपना रास्ता लिया.

 

 

 STORY – 2              कानून सबके के लिए बराबर है  ( best hindi kahaniya ) 

 

शहंशाह बहुत न्यायप्रिय शासक थे.  उन्होंने अपने महल के प्रवेशद्वार पर एक घंटा लगवा दिया था.  जिसको भी शिकायत हो वह उस घंटे को बजा सकता था ताकि शहंशाह आवाज को सुनकर न्याय कर सकें.

 

उनके राज्य में गरीब-अमीर, छोटे-बड़े सबसे साथ न्याय किया जाता था.  शहंशाह की दृष्टि में कानून सबके लिए बराबर था. शहंशाह अपराधी को दंड और निर्दोष को क्षमा करके सबके साथ न्याय करते थे. कई लोग न्याय के लिए शहंशाह के दरबार में अपनी शिकायतें लेकर आते थे.

 

शहंशाह की पत्नी नूरजहाँ एक दिन धनुर्विद्या का अभ्यास कर रही थी.  नूरजहाँ ने कुछ चुने हुए निशानों पर ही तीर चलाए. अभ्यास करते-करते एक तीर नूरजहाँ ने हवा में चलाते हुए नदी की तरफ चला दिया जो वहीँ कहीं गिर पड़ा. इसके बाद नूरजहाँ अपने महल लौट आई.

 

कुछ देर में महल के प्रवेशद्वार पर लगा हुआ घंटा जोर-जोर से बजने लगा.  पहरेदार ने देखा कि एक धोबन सिसकियाँ लेकर रो रही थी. उसके पास जमीन पर एक मृत शरीर रखा था और उसके हाथ में खून से सना हुआ तीर था.

 

 

पहरेदार उस धोबन को शहंशाह के पास ले गया.  धोबन शहंशाह को सलाम करके इंसाफ की दुहाई देने लगी. उसने शहंशाह को तीर दिखाते हुए कहा ― ‘हुजूर, इस तीर से किसी ने मेरे पति को मार डाला है, मुझे विधवा और मेरे बच्चों को अनाथ बना दिया है. अब मेरी और मेरे बच्चों की परवरिश कौन करेगा.’

 

 

शहंशाह ने उस तीर को उठाकर देखा तो उस पर शाही मुहर लगी थी. शहंशाह समझ गए कि निश्चय ही इस दुःखद घटना को अंजाम किसी महल के ही व्यक्ति ने दिया है.  उन्होंने पहरेदार को आदेश दिया ―जिस दिन यह घटना हुई उस दिन धनुर्विद्या का अभ्यास कौन कर रहा था ? राजा का आदेश पाकर पहरेदार महल में गया और सच्चाई जानकार कुछ ही देर में वापस आ गया और बोला ― ‘हुजूर, उस दिन बेगम साहिबा धनुर्विद्या का अभ्यास कर रही थीं.’ शहंशाह ने तुरंत नूरजहाँ को दरबार में बुलाया.

 

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जैसे ही नूरजहाँ दरबार में हाजिर हुई तो शहंशाह ने अपनी कमरबंद से छुरा निकालकर धोबन को देते हुए कहा ―’तुम नूरजहाँ की वजह से ही विधवा हुई हो, इसलिए तुम इस छुरे से मुझे मार कर नूरजहाँ को विधवा कर दो.

 

 

ऐसा करने से तुम्हें न्याय जरुर मिलेगा।’ शहंशाह का न्याय सुनकर धोबन बहुत लज्जित हुई और बोली ― ‘हुजूर, आपकी हत्या करने से मेरा पति जीवित नहीं होगा. फिर मैं आपके जैसे न्यायप्रिय शहंशाह की हत्या करने का पाप कैसे कर सकती हूँ.’

 

 

धोबन की बात सुनकर शहंशाह बहुत खुश हुए और राजकीय कोष से उसे आर्थिक सहायता प्रदान की. धोबन आर्थिक सहायता लेकर शहंशाह को धन्यवाद देती अपने घर चली गई.

 

धोबन के जाने के बाद नूरजहाँ ने शहंशाह से कहा ―’आपने तो सचमुच बहुत खतरा मोल ले लिया था. यदि वह महिला आपके आदेश का पालन कर देती तो बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता.’ शहंशाह ने कहा ―’यदि मैं मर जाता तो उस महिला को इन्साफ मिल जाता. एक बात अवश्य याद रखना, कानून सबके लिए बराबर है.’

 

STORY – 3    best hindi kahaniya        जो कुआँ खोदता है वही गिरता है            ( hindi best kahaniya ) 

 

 

एक बादशाह के महल की चहारदीवारी के अन्दर एक वजीर और एक कारिंदा रहता था. वजीर और कारिंदे के पुत्र में गहरी दोस्ती थी. हम उम्र होने के कारण दोनों एक साथ पढ़ते, खेलते थे.

 

 

वजीर के कहने पर कारिंदे का लड़का उसके सब काम कर देता था.  वह वजीर को चाचा कहकर पुकारता था. बादशाह कारिंदे के पुत्र को बहुत प्रेम करता था.

 

 

बादशाह के कोई संतान नहीं थी.  इसलिए वे कारिंदे के पुत्र को अपने पुत्र के समान ही समझते थे. बादशाह ने उसे महल और दरबार में आने-जाने की पूरी छूट दे रखी थी.  कारिंदे के पुत्र के प्रति बादशाह का प्रेम देखकर वजीर को बहुत ईर्ष्या होती थी.

 

 

वजीर चाहता था कि बादशाह केवल उसके पुत्र को ही प्रेम करें. यदि बादशाह ने उसके पुत्र को गोद ले लिया तो बादशाह की मृत्यु के बाद उसका पुत्र ही राजगद्दी पर बैठेगा.

 

 

वजीर की इच्छा के विपरीत बादशाह का प्रेम कारिंदे के पुत्र के प्रति बढ़ता ही गया. बादशाह वजीर के पुत्र को जरा भी पसंद नहीं करते थे. इसलिए वजीर कारिंदे और उसके पुत्र से मन-ही-मन ईर्ष्या करने लगा.

 

वजीर ने कारिंदे के पुत्र को मारने का निश्चय किया.  वजीर ने कारिंदे के पुत्र को रुमाल और पैसे देकर गोश्त लाने के लिए कहा. वजीर ने कारिंदे के पुत्र को अच्छी तरह समझाया कि गोश्त बाजार में गली के नुक्कड़ वाली दुकान से ही लाना.

 

 

कारिंदे का बेटा रुमाल और पैसे लेकर बाजार की ओर चल दिया.  उसने देखा कि उसका मित्र वजीर का बेटा भी वहाँ पर खेल रहा है. वजीर के लड़के ने कारिंदे के पुत्र से कहा कि तुम मेरा दांव खेलो, मैं जाकर गोश्त ले आऊँगा.

 

 

कारिंदे के पुत्र ने उसे पैसे और रुमाल देकर दुकान का पता बता दिया. इस प्रकार वजीर का पुत्र गोश्त लेने चला गया और कारिंदे का पुत्र दांव खेलने लगा.

 

 

वजीर के पुत्र ने दुकानदार को पैसे और रुमाल देकर कहा कि इसमें गोश्त बाँध दो। कसाई ने रुमाल में बने हुए निशान को पहचान लिया.इस रुमाल को वजीर ने कसाई को दिखाते हुए कहा था कि जो लड़का इस रुमाल को लेकर गोश्त लेने आए तुम उसे मौत के घाट उतार देना. कारिंदे के पुत्र को मारने के लिए वजीर ने कसाई को पैसे भी दिए थे. कसाई ने अन्दर भट्ठी जलाकर सारी तैयारी पहले ही कर ली थी.

 

कसाई ने रुमाल और पैसे लेकर उस लड़के को वहाँ बैठने के लिए कहा और स्वयं अन्दर गोश्त लेने चला गया. तभी वहाँ पर लड़का भी चला गया. कसाई ने तुरंत उस लड़के को उठाकर जलती हुई भट्ठी में झोंक दिया.

 

 

कारिंदे का पुत्र अपना दांव खेलकर अपने घर जा रहा था कि उसे रास्ते में वजीर मिल गया.  कारिंदे के पुत्र ने पूछा―‘चाचा, भैया गोश्त ले आया?’

 

 

इतना सुनकर वजीर के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई.  तभी कारिंदे के पुत्र ने कहा ―’चाचा भैया ने मुझसे रुमाल और पैसे ले लिए थे और कहा कि तुम मेरा दांव खेल लो, मैं गोश्त लेकर घर चला जाऊँगा.

 

 

मैंने भैया को दुकान का पता भी बता दिया था.’ वजीर की आँखों के आगे अँधेरा छा गया और उसके मुख से एक शब्द भी नहीं निकला. अपने पुत्र को याद करता हुआ वजीर अपने घर चला गया. वजीर कह रहा था कि जो दूसरों के लिए कुआँ खोदता है उसमें स्वयं गिरता है.

 

 

  STORY – 4 

 

धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का     ( best hindi kahaniya )

 

 

क बार कक्षा दस की हिंदी शिक्षिका अपने छात्र को मुहावरे सिखा रही थी.  तभी कक्षा एक मुहावरे पर आ पहुँची “धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का ”, इसका अर्थ किसी भी छात्र को समझ नहीं आ रहा था.  इसीलिए अपने छात्र को और अच्छी तरह से समझाने के लिए शिक्षिका ने अपने छात्र को एक कहानी के रूप में उदाहरण देना उचित समझा.

 

 

उन्होंने अपने छात्र को कहानी कहना शुरू किया, ” कई साल पहले सज्जनपुर नामक नगर में राजू नाम का लड़का रहता था, वह एक बहुत ही अच्छा क्रिकेटर था.

 

 

वह इतना अच्छा खिलाड़ी था कि उसमे भारतीय क्रिकेट टीम में होने की क्षमता थी. वह क्रिकेट तो खेलता पर उसे दूसरो के कामों में दखल अन्दाजी करना बहुत पसंद था.

 

 

उसका मन दृढ़ नहीं था जो दूसरे लोग करते थे वह वही करता था.  यह देखकर उसकी माँ ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की कि यह आदत उसे जीवन में कितनी भारी पड़ सकती है पर वह नहीं समझा.

 

 

समय बीतता गया और उसका अपने काम के बजाय दूसरो के काम में दखल अन्दाजी करने की आदत ज्यादा हो गयी. जभी उससे क्रिकेट का अभ्यास होता था तभी उसके दूसरे दोस्तों को अलग खेलो का अभ्यास रहता था. उसका मन चंचल होने के कारण वह क्रिकेट के अभ्यास के लिए नहीं जाता था बल्कि दूसरे दोस्तों के साथ अन्य अलग-अलग खेल खेलने जाता था.

 

 

उसकी यह आदत उसका आगे बहुत ही भारी पड़ी, कुछ ही दिनों के बाद नगर में ऐलान किया गया नगर में सभी खेलों के लिए एक चयन होगा जिसमे जो भी चुना जाएगा उसे भारत के राष्ट्रीय दल में खेलने को मिल सकता है.

 

 

सभी यह सुनकर बहुत ही खुश हुए ओर वहीं दिन से सभी अपने खेल में चुनने के लिए जी-जान से मेहनत करने लगे, सभी के पास सिर्फ दो दिन थे. राजू ने भी अपना अभ्यास शुरू किया पर पिछले कुछ दिनों से अपने खेल के अभ्यास में जाने की बजाय दूसरो के खेल के अभ्यास में जाने के कारण उसने अपने शानदार फॉर्म खो दिया था.

 

 

 

दो दिन के बाद चयन का समय आया राजू ने खूब कोशिश की पर अभ्यास की कमी के कारण वह अपना शानदार प्रदर्शन नहीं दिखा पाया और उसका चयन नहीं हुआ, वह दूसरे खेलों में भी चयन न हुआ क्योंकि व़े सब खेल उसे सिर्फ थोड़ा आते थे ओर किसी भी खेल में वह माहिर नहीं था.

 

 

जिसके कारण वह कोई भी खेल में चयन नहीं हुआ और उसके जो सभी दूसरे दोस्त थे उनका कोई न कोई खेल में चयन हो गया क्योंकि वे दिन रात मेहनत करते थे. अंत में राजू को अपने सिर पर हाथ रखकर बैठना पड़ा और वह धोबी के कुत्ते की तरह बन गया जो न घर का होता है न घाट का. ”

 

              STORY – 5      best hindi kahaniya

एक जंगल की राह से एक जौहरी गुजर रहा था.  देखा उसने राह में. एक कुम्हार अपने गधे के गले में एक बड़ा हीरा बांधकर चला आ रहा है. चकित हुआ.

 

 

ये देखकर कि ये कितना मूर्ख है.  क्या इसे पता नहीं है कि ये लाखों का हीरा है. और गधे के गले में सजाने के लिए बाँध रखा है. पूछा उसने कुम्हार से। सुनो ये पत्थर जो तुम गधे के गले में बांधे हो.

 

 

इसके कितने पैसे लोगे ? कुम्हार ने कहा – महाराज ! इसके क्या दाम. पर चलो. आप इसके आठ आने दे दो. हमनें तो ऐसे ही बाँध दिया था कि गधे का गला सूना न लगे.

 

 

बच्चों के लिए आठ आने की मिठाई गधे की ओर से ले जाएँगे. बच्चे भी खुश हो जायेंगे. और शायद गधा भी कि उसके गले का बोझ कम हो गया है. पर जौहरी तो जौहरी ही था.  पक्का बनिया. उसे लोभ पकड़ गया. उसने कहा आठ आने तो थोड़े ज्यादा है. तू इसके चार आने ले ले.

 

कुम्हार भी थोड़ा झक्की था.  वह ज़िद पकड़ गया कि नहीं देने हो तो आठ आने दो.  नहीं देने है. तो कम से कम छह आने तो दे ही दो. नहीं तो हम नहीं बेचेंगे. जौहरी ने कहा – पत्थर ही तो है.

 

 

चार आने कोई कम तो नहीं. उसने सोचा थोड़ी दूर चलने पर आवाज दे देगा. आगे चला गया. लेकिन आधा फरलांग चलने के बाद भी कुम्हार ने उसे आवाज न दी. तब उसे लगा. बात बिगड़ गई. नाहक छोड़ा.

 

 

छह आने में ही ले लेता. तो ठीक था.  जौहरी वापस लौटकर आया.  लेकिन तब तक बाजी हाथ से जा चुकी थी. गधा खड़ा आराम कर रहा था। और कुम्हार अपने काम में लगा था.

 

जौहरी ने पूछा – क्या हुआ ? पत्थर कहां है ? कुम्हार ने हंसते हुए कहा – महाराज एक रूपया मिला है. उस पत्थर का. पूरा आठ आने का फायदा हुआ है. आपको छह आने में बेच देता. तो कितना घाटा होता. और अपने काम में लग गया.

 

पर जौहरी के तो माथे पर पसीना आ गया.  उसका तो दिल बैठा जा रहा था. सोच सोच कर.  हाय। लाखों का हीरा. यूं मेरी नादानी की वजह से हाथ से चला गया.

 

 

उसने कुम्हार से कहा – मूर्ख! तू बिलकुल गधे का गधा ही रहा. जानता है. उसकी कीमत कितनी है. वह लाखों का था. और तूने एक रूपये में बेच दिया. मानो बहुत बड़ा खजाना तेरे हाथ लग गया.

 

उस कुम्हार ने कहा – हुजूर मैं अगर गधा न होता तो क्या इतना कीमती पत्थर गधे के गले में बाँध कर घूमता ? लेकिन आपके लिए क्या कहूं ? आप तो गधे के भी गधे निकले.

 

 

आपको तो पता ही था कि लाखों का हीरा है.  और आप उस के छह आने देने को तैयार नहीं थे. आप पत्थर की कीमत पर भी लेने को तैयार नहीं हुए.

यदि इन्सान को कोई वस्तु आधे दाम में भी मिले तो भी वो उसके लिए मोल भाव जरुर करेगा.  क्योकि लालच हर इन्सान के दिल में होता है. कहते है न – चोर चोरी से जाये, हेरा फेरी से न जाये -. जौहरी ने अपने लालच के कारण अच्छा सौदा गँवा दिया.

 

 

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