hindi best story

best hindi story . हिंदी की ११ बेहतरीन कहानियां

best hindi story
Written by Abhishek Pandey

best hindi story एक बार एक मेंढक के शरीर में बदलाव करने की क्षमता को जाँचने के लिए कुछ वैज्ञानिकों ने उस मेंढक को एक काँच के जार में डाल दिया और उसमे जार की आधी ऊंचाई तक पानी भर दिया .

 

फिर उस जार को धीरे धीरे गर्म किया जाने लगा, जब गर्मी बर्दाश्त से बाहर हो जाये तब मेंढक उस जार से बाहर कूद  सके इसलिए, जार का मुँह ऊपर से खुला रखा गया .

मेंढक को अपने शरीर में गर्मी महसूस हुई और अपने शरीर की ऊर्जा को उसने अपने आपको बाहर की गर्मी से तालमेल बिठाने में लगाना शुरू किया .

 

मेंढक के शरीर से पसीना निकलने लगा, वो अपनी ऊर्जा का उपयोग तालमेल बिठाने में लगा रहा था, एक वक़्त ऐसा आया की मेंढक की गर्मी से और लड़ने की क्षमता कम होने लगी, और मेंढक ने जार से बाहर कूदने की कोशिश की, मगर वो बाहर जाने की बजाय पानी में गिर जाया करता और बार बार की कोशिश के बाद भी मेंढक बाहर नही निकल पाया क्यूँकि बाहर कूदने में लगने वाली शक्ति वो गर्मी से लड़ने में पहले ही ज़ाया कर चुका था, तो अगर सही वक़्त पे मेंढक कूदने का फ़ैसला लेता तो शायद उसकी जान बच सकती थी .

हमें अपने आसपास के माहौल से लड़ना तो ज़रूर है लेकिन सही वक़्त आने और पर्याप्त ऊर्जा रहते उस माहौल से बाहर निकलना भी ज़रूरी है .

 

  best hindi story Story – 2 चालाक गधा 

 

एक दिन एक किसान का गधा कुएँ में गिर गया.  वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से चिल्लाता  रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं.

 

अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढा हो चूका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिए .

किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया. सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी. जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है, वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा .

 

और फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया. सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे. तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया.

 

अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था. वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था.

जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे-वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और ऊपर चढ़ आता . जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुएँ के किनारे पर पहुँच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया.

ध्यान रखो, तुम्हारे जीवन में भी तुम पर बहुत तरह कि मिट्टी फेंकी जायेगी, बहुत तरह कि गंदगी तुम पर गिरेगी. जैसे कि, तुम्हे आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही तुम्हारी आलोचना करेगा,कोई तुम्हारी सफलता से ईर्ष्या के कारण तुम्हे बेकार में ही भला बुरा कहेगा . कोई तुमसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो तुम्हारे आदर्शों के विरुद्ध होंगे. ऐसे में तुम्हे हतोत्साहित होकर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख लेकर, उसे सीढ़ी बनाकर, बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है.

 

 

best hindi story Story – 3 मेंढक की विजय 

 

बहुत समय पहले की बात है एक सरोवर में बहुत सारे मेंढक रहते थे. सरोवर के बीचों-बीच एक बहुत पुराना धातु का खम्भा भी लगा हुआ था. जिसे उस सरोवर को बनवाने वाले राजा ने लगवाया था. खम्भा काफी ऊँचा था और उसकी सतह भी बिलकुल चिकनी थी.

एक दिन मेंढकों के दिमाग में आया कि क्यों ना एक रेस करवाई जाए. रेस में भाग लेने वाली प्रतियोगियों को खम्भे पर चढ़ना होगा, और जो सबसे पहले एक ऊपर पहुच जाएगा वही विजेता माना जाएगा.

 

रेस का दिन आ पहुँचा, चारो तरफ बहुत भीड़ थी, आस-पास के इलाकों से भी कई मेंढक इस रेस में हिस्सा लेने पहुचे. माहौल में सरगर्मी थी, हर तरफ शोर ही शोर था.

रेस शुरू हुई लेकिन खम्भे को देखकर भीड़ में एकत्र हुए किसी भी मेंढक को ये यकीन नहीं हुआ कि कोई भी मेंढक ऊपर तक पहुंच पायेगा …

हर तरफ यही सुनाई देता …

“ अरे ये बहुत कठिन है ”

“ वो कभी भी ये रेस पूरी नहीं कर पायंगे ”

“ सफलता का तो कोई सवाल ही नहीं, इतने चिकने खम्भे पर चढ़ा ही नहीं जा सकता ”

और यही हो भी रहा था, जो भी मेंढक कोशिश करता, वो थोडा ऊपर जाकर नीचे गिर जाता, कई मेंढक दो-तीन बार गिरने के बावजूद अपने प्रयास में लगे हुए थे …

पर भीड़ तो अभी भी चिल्लाये जा रही थी, “ ये नहीं हो सकता, असंभव ”, और वो उत्साहित मेंढक भी ये सुन-सुनकर हताश हो गए और अपना प्रयास छोड़ दिया.

लेकिन उन्ही मेंढकों के बीच एक छोटा सा मेंढक था, जो बार-बार गिरने पर भी उसी जोश के साथ ऊपर चढ़ने में लगा हुआ था …. वो लगातार ऊपर की ओर बढ़ता रहा, और अंततः वह खम्भे के ऊपर पहुच गया और इस रेस का विजेता बना.

उसकी जीत पर सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ, सभी मेंढक उसे घेर कर खड़े हो गए और पूछने लगे , “ तुमने ये असंभव काम कैसे कर दिखाया, भला तुम्हे अपना लक्ष्य प्राप्त करने की शक्ति कहाँ से मिली, ज़रा हमें भी तो बताओ कि तुमने ये विजय कैसे प्राप्त की ?”

तभी पीछे से एक आवाज़ आई … “अरे उससे क्या पूछते हो, वो तो बहरा है ”

दोस्तों हमारे अन्दर अपना लक्ष्य प्राप्त करने की काबिलियत होती है, पर हम अपने चारों तरफ मौजूद नकारात्मकता की वजह से खुद को कम आंक बैठते हैं और हमने जो बड़े-बड़े सपने देखे होते हैं उन्हें पूरा करने की कोशिश भी नहीं करते हैं.आवश्यकता इस बात की है हम हमें कमजोर बनाने वाली हर एक आवाज के प्रति बहरे और ऐसे हर एक दृश्य के प्रति अंधे हो जाएँ और मन लगाकर कोशिश करें तब हमें सफलता के शिखर पर पहुँचने से कोई नहीं रोक पायेगा.

 

 

best hindi story Story – 4 बुद्धि का फल 

 

 

एक रोज की बात है कि बादशाह अकबर के दरबार में लंका के राजा का एक दूत पहुँचा . उसने बादशाह अकबर से एक नयी तरह की माँग करते हुए कहा –“ आलमपनाह ! आपके दरबार में एक से बढ़कर एक बुद्धिमान, होशियार तथा बहादुर दरबारी मौजूद हैं .

 

हमारे महाराज ने आपके पास मुझे एक घड़ा भरकर बुद्धि लाने के लिए भेजा है . हमारे महाराज को आप पर पूरा भरोसा है कि आप उसका बन्दोबस्त किसी-न-किसी तरह और जल्दी ही कर देंगे .”

यह सुनकर बादशाह अकबर चकरा गए .

उन्होंने अपने मन में सोचा  – “ क्या बेतुकी माँग है, भला घड़े भर बुद्धि का बन्दोबस्त कैसे किया जा सकता है ? लगता है  लंका का राजा हमारा मजाक बनाना चाहता है, कहीं वह इसमें सफल हो गया तो …?

तभी बादशाह को बीरबल का ध्यान आया, वे सोचने लगे कि शायद यह कार्य बीरबल के वश का भी न हो, मगर उसे बताने में बुराई ही क्या है ?

जब बीरबल को बादशाह के बुलवाने का कारण ज्ञात हुआ तो वह मुस्कराते हुए कहने लगे – “ आलमपनाह ! चिन्ता की कोई बात नहीं, बुद्धि की व्यवस्था हो जाएगी, लेकिन इसमें कुछ हफ्ते का वक़्त लग सकता है .”

बादशाह अकबर बीरबल की इस बात पर कहते भी तो क्या, बीरबल को मुँह माँगा समय दे दिया गया .

बीरबल ने उसी दिन शाम को अपने एक खास नौकर को आदेश दिया – “ छोटे मुँह वाले कुछ मिट्टी के घड़ों की व्यवस्था करो .”

नौकर ने फ़ौरन बीरबल की आज्ञा का पालन किया .

घड़े आते ही बीरबल अपने नौकर को लेकर कददू की एक बेल के पास गए . उन्होंने नौकर से एक घड़ा ले लिया, बीरबल ने घड़े को एक कददू के फूल पर उल्टा लटका दिया, इसके बाद उन्होंने सेवक को आदेश दिया कि बाकि सारे घड़ों को भी इसी तरह कददू के फूल पर उल्टा रख दें .

बीरबल ने इस काम के बाद सेवक को इन घड़ों की देखभाल सावधानीपूर्वक करते रहने का हुक्म दिया और वहाँ से चले गए .

बादशाह अकबर ने कुछ दिन बाद इसके बारें में पूछा, तो बीरबल ने तुरन्त उत्तर दिया – “ आलमपनाह ! इस कार्य को हो चुका समझें, बस दो सप्ताह का समय और चाहिए, उसके बाद पूरा घड़ा बुद्धि से लबालब भर जायेगा .”

बीरबल ने पन्द्रह दिन के बाद घड़ों के स्थान पर जाकर देखा कि कददू के फल घड़े जितने बड़े हो गए हैं, उन्होंने नौकर की प्रशंसा करते हुए कहा – “तुमने अपनी जिम्मेदारी बड़ी कुशलतापूर्वक निभायी है, इसके लिए हम तुम्हे इनाम देंगे .”

इसके बाद बीरबल ने लंका के दूत को बादशाह अकबर के दरबार में बुलाया और उसे बताया कि बुद्धि का घड़ा लगभग तैयार है . और बीरबल ने तुरन्त ताली बजाई, ताली की आवाज सुनकर बीरबल का सेवक एक बड़ी थाली में घड़ा लिए हुए बड़ी शान से दरबार में हाज़िर हुआ .

बीरबल ने घड़ा उठाया और उसे लंका के दूत के हाथ में सौंपते हुए कहा – “ लीजिए श्रीमान आप इसे अपने महाराज को भेंट कर दीजिए, लेकिन एक बात अवश्य ध्यान रखियेगा कि खाली होने पर हमारा यह कीमती बर्तन हमें जैसा-का –तैसा वापस मिल जाना चाहिए . इसमें रखा बुद्धि का फल तभी प्रभावशाली होगा जब इस बर्तन को कोई नुकसान न पहुँचे .

इस पर दूत ने कहा –“ हुजूर ! क्या मैं भी इस बुद्धि के फल को देख सकता हूँ .”

“हाँ ..हाँ जरुर .” बीरबल ने गर्दन हिलाते हुए कहा .

घड़े देखकर परेशान होते हुए दूत ने मन-ही–मन सोंचा –“हमारी भी मति मारी गई है . भला हमें भी क्या सूझी, बीरबल का कोई जवाब नहीं है ….भला ऐसी बात मैंने सोची कैसे ?”

घड़ा लेकर दूत के जाते ही बादशाह अकबर ने भी घड़े को देखने की इच्छा प्रकट की . और बीरबल ने एक घड़ा मँगवा दिया .

जैसे ही उन्होंने घड़े में झाँका उन्हें हँसी आ गयी . वे बीरबल की पीठ ठोकते हुए बोले –“ मान गए भई ! तुमने बुद्धि का क्या शानदार फल पेश किया है, लगता है इसे पाकर लंका के राजा के बुद्धिमान होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी .”

 

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best hindi story Story – 5 कीमती पत्थर 

 

एक युवक कविताएँ लिखता था, लेकिन उसके इस गुण का कोई मूल्य नहीं समझता था. घरवाले भी उसे ताना मारते रहते कि तुम किसी काम के नहीं, बस कागज काले करते रहते हो.

 

उसके अन्दर हीन-भावना घर कर गयी. उसने एक जौहरी मित्र को अपनी यह व्यथा बतायी. जौहरी ने उसे एक पत्थर देते हुए कहा – जरा मेरा एक काम कर दो.

 

यह एक कीमती पत्थर है. कई तरह के लोगो से इसकी कीमत का पता लगाओ, बस इसे बेचना मत. युवक पत्थर लेकर चला गया. वह पहले एक कबाड़ी वाले के पास गया. कबाड़ी वाला बोला – पांच रुपये में मुझे ये पत्थर दे दो.

फिर वह सब्जी वाले के पास गया. उसने कहा तुम एक किलो आलू के बदले यह पत्थर दे दो, इसे मै बाट की तरह इस्तेमाल कर लूँगा. युवक मूर्तिकार के पास गया.

 

मूर्तिकार ने कहा – इस पत्थर से मै मूर्ति बना सकता हूँ, तुम यह मुझे एक हजार में दे दो. आख़िरकार युवक वह पत्थर लेकर रत्नों के विशेषज्ञ के पास गया.

 

उसने पत्थर को परखकर बताया – यह पत्थर बेशकीमती हीरा है जिसे तराशा नहीं गया. करोड़ो रुपये भी इसके लिए कम होंगे. युवक जब तक अपने जौहरी मित्र के पास आया, तब तक उसके अन्दर से हीन भावना गायब हो चुकी थी और उसे एक सन्देश मिल चुका था.

मोरल : हमारा जीवन बेशकीमती है, बस उसे विशेषज्ञता के साथ परखकर उचित जगह पर उपयोग करने की आवश्यकता है.

 

 

  best hindi story Story – 6 सोचने से क्या फर्क पड़ता है 

 

एक दिन एक औरत गोल्फ खेल रही थी. जब उसने बॉल को हिट किया तो वह जंगल में चली गई.  वह बॉल को खोजने गई तो उसे एक मेंढक मिला जो जाल में फंसा हुआ था.  मेंढक ने उससे कहा – “अगर तुम मुझे इससे आजाद कर दोगी तो मैं तुम्हें तीन वरदान दूँगा.

“महिला ने उसे आजाद कर दिया.

मेंढक ने कहा – “धन्यवाद, लेकिन तीन वरदानों में मेरी एक शर्त है जो भी तुम माँगोगी तुम्हारे पति को उससे दस गुना मिलेगा.

महिला ने कहा – “ठीक है” उसने पहला वरदान मांगा कि मैं संसार की सबसे खुबसूरत स्त्री बनना चाहती हूँ.

मेंढक ने उसे चेताया – “क्या तुम्हें पता है कि ये वरदान तुम्हारे पति को संसार का सबसे सुंदर व्यक्ति बना देगा.

महिला बोली – “दैट्स ओके, क्योंकि मैं संसार की सबसे खुबसूरत स्त्री बन जाऊँगी और वो मुझे ही देखेगा.”

मेंढक ने कहा – “तथास्तु”

अपने दूसरे वरदान में उसने कहा कि मैं संसार की सबसे धनी महिला बनना चाहती हूँ.

मेंढक ने कहा – “यह तुम्हारे पति को विश्व का सबसे धनी पुरुष बना देगा और वो तुमसे दस गुना पैसे वाला होगा .”

महिला ने कहा – “कोई बात नहीं. मेरा सब कुछ उसका है और उसका सब कुछ मेरा .”

मेंढक ने कहा – “तथास्तु”

जब मेंढक ने अंतिम वरदान के लिये कहा तो उसने अपने लिए एक “हल्का सा हर्ट अटैक मांगा.”

मोरल ऑफ स्टोरीः महिलाएं बुद्धिमान होती हैं, उनसे बच के रहें .

महिला पाठकों से निवेदन है आगे ना पढें, आपके लिये जोक यहीं खत्म हो गया है . यहीं रुक जाएँ और अच्छा महसूस करें .

पुरुष पाठकः कृपया आगे पढें.

उसके पति को उससे “10 गुना हल्का हार्ट अटैक” आया.

मोरल ऑफ द स्टोरी : महिलाएं सोचती हैं वे वास्तव में बुद्धिमान हैं.

उन्हें ऐसा सोचने दो, क्या फर्क पडता है. ...यह एक जोक था , इसे अन्यथा ना लें . 

 

 

best hindi story   Story – 7 

 

नारियल के पेड़ बड़े ही ऊँचे होते हैं और देखने में बहुत सुंदर होते हैं.  एक बार एक नदी के किनारे नारियल का पेड़ लगा हुआ था. उस पर लगे नारियल को अपने पेड़ के सुंदर होने पर बहुत गर्व था.

 

सबसे ऊँचाई पर बैठने का भी उसे बहुत मान था. इस कारण घमंड में चूर नारियल हमेशा ही नदी के पत्थर को तुच्छ पड़ा हुआ कहकर उसका अपमान करता रहता.

एक बार, एक शिल्प कार उस पत्थर को लेकर बैठ गया और उसे तराशने के लिए उस पर तरह – तरह से प्रहार करने लगा. यह देख नारियल को और अधिक आनंद आ गया उसने कहा – ऐ पत्थर ! तेरी भी क्या जिन्दगी हैं पहले उस नदी में पड़ा रहकर इधर- उधर टकराया करता था और बाहर आने पर मनुष्य के पैरों तले रौंदा जाता था और आज तो हद ही हो गई.

 

ये शिल्पी तुझे हर तरफ से चोट मार रहा हैं और तू पड़ा देख रहा हैं. अरे ! अपमान की भी सीमा होती हैं. कैसी तुच्छ जिन्दगी जी रहा हैं. मुझे देख कितने शान से इस ऊँचे वृक्ष पर बैठता हूँ. पत्थर ने उसकी बातों पर ध्यान ही नहीं दिया. नारियल रोज इसी तरह पत्थर को अपमानित करता रहता.

कुछ दिनों बाद, उस शिल्पकार ने पत्थर को तराशकर शालिग्राम बनाये और पूर्ण आदर के साथ उनकी स्थापना मंदिर में की गई. पूजा के लिए नारियल को पत्थर के बने उन शालिग्राम के चरणों में चढ़ाया गया.

 

इस पर पत्थर ने नारियल से बोला – नारियल भाई ! कष्ट सहकर मुझे जो जीवन मिला उसे ईश्वर की प्रतिमा का मान मिला. मैं आज तराशने पर ईश्वर के समतुल्य माना गया.

 

जो सदैव अपने कर्म करते हैं वे आदर के पात्र बनते हैं. लेकिन जो अहंकार/ घमंड का भार लिए घूमते हैं वो नीचे आ गिरते हैं। ईश्वर के लिए समर्पण का महत्व हैं घमंड का नहीं. पूरी बात नारियल ने सिर झुकाकर स्वीकार की .

 

 

      best hindi story Story – 8  चार मुर्ख 

 

एक बार काशी नरेश ने अपने मंत्री को यह आदेश दिया कि जाओ और तीन दिन के भीतर चार मूर्खों को मेरे सामने पेश करो. यदि तुम ऐसा नहीं कर सके तो तुम्हारा सिर कलम कर दिया जाएगा.

पहले तो मंत्री जी थोड़े से घबराये लेकिन मरता क्या न करता. राजा का हुक्म जो था. ईश्वर का स्मरण कर मूर्खों की खोज में चल पड़े.

कुछ मील चलने के बाद उसने एक आदमी को देखा जो गदहे पर सवार था और सिर पर एक बड़ी सी गठरी उठाये हुए था। मंत्री को पहला मूर्ख मिल चुका था. मंत्री ने चैन की सांस ली.

कुछ और आगे बढ़ने पर दूसरा मूर्ख भी मिल गया. वह लोगों को लड्डू बाँट रहा था.  पूछने पर पता चला कि उसकी बीवी  शत्रु के साथ भाग गयी और अब उसकी बीबी ने एक बेटे को जन्म दिया था जिसकी ख़ुशी में वह लड्डू बाँट रहा था.

दोनों मूर्खों को लेकर मंत्री राजा के पास पहुंचा.

राजा ने पूछा – ये तो दो ही हैं? तीसरा मूर्ख कहाँ है?

महाराज वह मैं हूँ. जो बिना सोचे समझे मूर्खों की खोज में निकल पड़ा. बिना कुछ सोचे समझे आपका हुक्म बजाने चल पड़ा.

और चौथा मूर्ख ?

क्षमा करें महाराज? वह आप हैं. जनता की भलाई और राज काज के काम के बदले आप मूर्खों की खोज को इतना जरुरी काम मानते हैं.

राजा की आँखें खुल गयी और उनसे मंत्री से क्षमा मांगी.

 

 

  best hindi story Story 9 

 

एक पहाड़ की ऊंची चोटी पर एक बाज रहता था.  पहाड़ की तराई में बरगद के पेड़ पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था. वह बड़ा चालाक और धूर्त था.  उसकी कोशिश सदा यही रहती थी कि बिना मेहनत किए खाने को मिल जाए.

पेड़ के आसपास खोह में खरगोश रहते थे. जब भी खरगोश बाहर आते तो बाज ऊंची उड़ान भरते और एकाध खरगोश को उठाकर ले जाते.

एक दिन कौए ने सोचा, ‘वैसे तो ये चालाक खरगोश मेरे हाथ आएंगे नहीं, अगर इनका नर्म मांस खाना है तो मुझे भी बाज की तरह करना होगा. एकाएक झपट्टा मारकर एक को पकड़ लूंगा.’

दूसरे दिन कौए ने भी एक खरगोश को दबोचने की बात सोचकर ऊंची उड़ान भरी. फिर उसने खरगोश को पकड़ने के लिए बाज की तरह जोर से झपट्टा मारा. अब भला कौआ बाज का क्या मुकाबला करता.

खरगोश ने उसे देख लिया और झट वहां से भागकर चट्टान के पीछे छिप गया. कौआ अपनी ही झोंक में उस चट्टान से जा टकराया. नतीजा, उसकी चोंच और गरदन टूट गई और उसने वहीं तड़प कर दम तोड़ दिया.

 

 

best hindi story  Story – 10    कपिराज 

 

कभी एक राजा के बगीचे में अनेक बंन्दर रहते थे और बड़ी स्वच्छंदता से वहाँ कूद-फांद करते थे. एक दिन उस बगीचे के द्वार के नीचे राज-पुरोहित गु रहा था.

 

उस द्वार के ऊपर एक शरारती बंदर बैठा था. जैसे ही राज-पुरोहित उसके नीचे आया उसने उसके गंजे सर पर विष्ठा कर दी.  अचम्भित हो पुरोहित ने चारों तरफ देखा, फिर खुले मुख से उसने ऊपर को देखा.

 

 

बंदर ने तब उसके खुले मुख में ही मलोत्सर्ग कर दिया.  क्रुद्ध पुरोहित ने जब उन्हें सबक सिखलाने की बात कही तो वहाँ बैठे सभी बंदरों ने दाँत किटकिटा कर उसका और भी मखौल उड़ाया.

कपिराज को जब यह बात मालूम हुई कि राजपुरोहित वहाँ रहने वाले वानरों से नाराज है, तो उसने तत्काल ही अपने साथियों को बगीचा छोड़ कहीं ओर कूच कर जाने ही सलाह दी.

 

सभी बंदरों ने तो उसकी बात मान ली. और तत्काल वहाँ से प्रस्थान कर गये. मगर एक दम्भी मर्कट और उसके पाँच  मित्रों ने कपिराज की सलाह को नहीं माना और वहीं रहते रहे.

कुछ ही दिनों के बाद राजा की एक दासी ने प्रासाद के रसोई घर के बाहर गीले चावन को सूखने के लिए डाले.  एक भेड़ की उस पर नज़र पड़ी और वह चावल खाने को लपका.

 

दासी ने जब भेड़ को चावल खाते देखा तो उसने अंगीठी से निकाल एक जलती लकड़ी से भेड़ को मारा, जिससे भेड़ के रोम जलने लगे. जलता भेड़ दौड़ता हुआ हाथी के अस्तबल पर पहुँचा, जिससे अस्तबल में आग लग गयी और अनेक हाथी जल गये.

राजा ने हाथियों के उपचार के लिए एक सभा बुलायी जिसमें राज-पुरोहित प्रमुख था. पुरोहित ने राजा को बताया कि बंदरों की चर्बी हाथियों के घाव के लिए कारगर मलहम है. फिर क्या था ! राजा ने अपने सिपाहियों को तुरन्त बंदरों की चर्बी लाने की आज्ञा दी.

 

सिपाही बगीचे में गये और पलक झपकते उस दम्भी बंदर और उसके पाँच साथियों को मार गिराया. महाकपि और उसके साथी जो किसी अन्य बगीचे में रहते थे शेष जीवन का आनंद उठाते रहे.

 

best hindi story Story 11  कौवों की कहानी 

 

वर्षों पहले एक समुद्र में एक नर और एक मादा कौवा मदमस्त हो कर जल-क्रीड़ा कर रहे थे.  तभी समुद्र की एक लौटती लहर में कौवी बह गयी, जिसे समुद्र की किसी मछली ने निगल लिया .

 

नर कौवे को इससे बहुत दु:ख हुआ. वह चिल्ला-चिल्ला कर विलाप करने लगा. पल भर में  सैकड़ों  कौवे भी वहाँ आ पहुँचे. जब अन्य कौवों ने उस दु:खद घटना को सुना तो वे भी जोर-जोर से काँव-काँव करने लगे.

 

तभी उन कौवों में एक ने कहा कि कौवे ऐसा विलाप क्यों करे ; वे तो समुद्र से भी ज्यादा शक्तिशाली हैं. क्यों न वे अपनी चोंच से समुद्र के पानी को उठा कर दूर फेंक दें. सारे कौवों ने इस बात को समुचित जाना और अपनी-अपनी चोंचों के समुद्र का पानी भर दूर तट पर छोड़ने लगे.

 

साथ ही वे कौवी की प्रशंसा भी करते जाते. एक कहता,” कौवी कितनी सुंदर थी. ” दूसरा कहता, “कौवी की आवाज कितनी मीठी थी.” तीसरा कहता, “समुद्र की हिम्मत कैसे हुई कि वह उसे बहा ले जाय”.

 

फिर कोई कहता, “हम लोग समुद्र को सबक सिखला कर ही रहेंगे.” कौवों की बकवास समुद्र-देव को बिल्कुल रास न आयी और उसने एक शक्तिशाली लहर में सभी कौवों को बहा दिया.

 

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