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RAjniti/राजनीती

जनसंघ और bharatiya janata party

जनसंघ और bharatiya janata party
जनसंघ और bharatiya janata party
Written by Hindibeststory

bharatiya janata party ६ अप्रैल का भारतीय राजनीति में अहम् स्थान है. सन १९८० में इसी दिन अर्थात ६ अप्रैल को bharatiya janata party की स्थापना हुई थी. जनसंघ को हटाकर इस नयी पार्टी का निर्माण हुआ. १९७७ में आपातकाल की घोषणा के बाद जनसंघ का कई अन्य दलों से विलय हुआ और जनता पार्टी का उदय हुआ।.पार्टी ने १९७७ के आम चुनाव में कांग्रेस से सत्ता छीन ली और १९८० में जनता पार्टी को भंग करके भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी गई.

कब हुआ था जनसंघ का गठन

२१ अक्टूबर १९५१ को भारतीय जनसंघ का गठन किया गया . २१ अक्टूबर को ही दिल्ली के कन्या माध्यमिक विधालय परिसर में भारतीय जनसंघ का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मौजूद थे और इन्ही के अध्यक्षता में अखिल भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई. पार्टी का झंडा आयताकार भगवा ध्वज के रूप में स्वीकृत किय्या गया और साथ ही पार्टी ने प्रथम चुनाव को लेकर घोषणापत्र को भी स्वीकृत किया था. पहली बार के आम चुनाव में जनसंघ ने ३ सीटें जीती .

इसी साल भारतीय जनसंघ ने कश्मीर और राष्ट्रीय एकता के मसले पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में एक आंदोलन आरंभ किया और उसके साथ ही कश्मीर को दिए जाने वाले अनुदान का भी विरोध किया. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया, जहां रहस्यमय परिस्थितियों में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मृत्यु हो गई . २३ जून १९५५ को भारतीय जनसंघ के महामंत्री जगन्नाथ राव जोशी ने १०० सत्याग्रहियों के साथ गोवा के लिए प्रस्थान किया और नारा दिया गया. उन्होंने गोवा चलो का नारा दिया. ९ दिसंबर से १६ दिसंबर तक गोवा मुक्ति सप्ताह का आयोजन किया गया. भारतीय जनसंघ की लोकप्रियता थोड़ी बढ़ी और १९५७ के लोकसभा के चुनाव में जनसंघ ने ४ सीटों पर विजय पायी.

जनसंघ ने आन्दोलनों की धार तेज की और जन समस्यायों को तेजी से उठाना शुरू किया. जनसंघ ने इसी साल बेरूबाड़ी जन आंदोलन की शुरूआत की थी. यह आंदोलन नेहरु-नून समझौते के तहत बेरूबाड़ी केंद्र शासित प्रदेश को पाकिस्तान को सौंपने का विरोध किया गया था. १९६२ के लोकसभा चुनाव में जनसंघ ने तब १४ सीटें जीती थीं. उसके बाद १९६७ के लोकसभा चुनाव में जनसंघ ३५ सीटें जीतते हुए दुसरे नंबर की पार्टी बनी. १९७१ के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को भारी जीत मिली थी.वहीं जनसंघ ने २२ सीटों पर जीत दर्ज की. इंदिया गांधी की सरकार ने १९७५ में आपातकाल लागू कर दिया. जिसका जनसंघ ने कड़ा विरोध किया और जनसंघ के अलावा अनेक नेता और कार्यकर्ताओं को जेल भेज दिया गया. इस दौरान जॉर्ज फर्नांडीज भी जेल गए.

आपातकाल हटने के बाद १९७७ में जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया. साथ ही १९८० में जनता पार्टी आपसी स्पर्धा की शिकार हो गई जिसके बाद bharatiya janata party का गठन हुआ. १९८० लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी को बड़ी सफलता मिली और इसमें भाजपा को मात्र २ सीटें मिलीं. उसी समय बोफोर्स काण्ड हुआ और भाजपा इसे देश के कोने – कोने तक ले गयी. इसी दौरान भाजपा – शिवसेना का गठबंधन हुआ और इस चुनाव में भाजपा को ८५ सीटें मिली. तब तक राम मंदिर मुद्दा जोर पकड़ चुका था. लालकृष्ण आडवाणी की राम रथ यात्रा सोमनाथ से अयोध्या तक प्रारंभ हुई. रथ यात्रा को तब बिहार के मुख्यमंत्री ने लालू यादव ने रोक दिया था. १९९१ के लोकसभा चुनाव में भाजपा १२० सीटें जितने में कामयाब रही.

भाजपा का ग्राफ तेजी से उत्तर भारत से बढ़ाते हुए गोवा, गुजरात , ओड़िसा तक पहुंचने लगा. १९९६ के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने १६१ सीटें जीतीं. अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन १३ दिनों के बाद ही सरकार गिर गई. भाजपा ने १९९८ में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और अटल बिहारी वाजपेयी एकबार फिर प्रधानमंत्री बने . १९९९ में एनडीए को ३०३ सीटों पर जीत हासिल हुई और अटल बिहारी वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने. लेकिन २००४ में समय से छह महीने पहले ही चुनाव कराया गया और इंडिया शाइनिंग के नारे के बावजूद एनडीए हार गई.

२००८ में भाजपा को दक्षिण के राज्य कर्नाटक में सफलता मिली. पहली बार वहाँ बीजेपी की सरकार बनी , लेकिन २००९ का लोकसभा चुनाव भाजपा फिर से हार गयी . २०१४ में भाजपा में मोदी युग आया. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बन्या और कांग्रेस और उसके गठबंधन यूपीए पर तमाम भ्रष्टाचार के आरोप लगे और इस लोकसभा के चुनाव में भाजपा अपने दम पर २८२ सीटें लायी और पूर्ण बहुमत की सरकार बनी.

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