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Horror Story

अंधेरा horror story hindi

अंधेरा horror story hindi
अंधेरा horror story hindi
Written by Hindibeststory

अंधेरा horror story hindi दरवाजे पर पहुंचते ही मैंने घड़ी देखी . मैं १० मिनट लेट था. मुझे उम्मीद थी वे बुरा नहीं मानेंगे . उनसे मेरी अच्छी पहचान थी . इधर ४- ५ महीनों से मेरी उनसे बात नहीं हुई थी. चलिये आपकी भी उनसे पहचान करवा देता हूँ. उनका नाम था राजीव घोष. मैंने दरवाजा नॉक किया. आता हूँ उन्होने जल्दी से बोला. मुझे थोड़ा अटपटा लगा, तभी उन्होंने दरवाजा खोल दिया. क्षमा चाहता हूँ मैं १० मिनट देर से पहुंचा .

अरे कोई बात नहीं ..आईये अन्दर चलिए. उनका चेहरा पसीने से लथपथ था. आप बैठिये मैं कुछ नाश्ता लेकर आता हूँ. किचेन में हलकी रोशनी थी. घर भी कुछ डरवना ही लग रहा था जैसे कह रहा हो यहाँ से चले जाओ. तभी मैंने देखा कि राजीव कागज़ पर कुछ लिख रहे थे. बहुत ही तेजी से . वे बहुत ही घबराये हुए थे. मैं तुरंत उठा और उनकी तरफ बढ़ा . तभी वे तेजी से किचेन से निकल कर दालान होते हुए सीढियों से ऊपर जाने लगे. मुझे कुछ नहीं होगा. रश्मि से कहना वह घबराए नहीं. रश्मि उनकी पत्नी का नाम था. करीब एक साल से दोनों की कोई बात चित नहीं थी. क्या हुआ ? अरे ऐसा क्यों कह रहे हो ? हम तो आज फिल्म देखने जाने वाले थे न . शायद मैं नहीं जा पाऊंगा . मुझे क्षमा करना . वे बहुत ही तेजी से सीढियां चढ़ रहे थे. उनके चहरे पर एक कट लग गया था. बहुत खून निकल रहा था.

मैं घबरा गया और चीखते हुए बोला यह चोट कैसे लगी ? अब तुम्हे जाना चाहिए , मैं तुम्हे नहीं बता सकता . मुझे माफ़ कर दो. उनकी बाते पूरी होने के पहले धड़ाम की आवाज के साथ ऊपर का कमरा बंद हो गया और उनकी आवाज भी. नहीं … नहीं मैं ऐसे नहीं छोड़ सकता. ऐसी परिस्थिति में घोष को छोड़ना विश्वासघात होगा. मुझे ऊपर जाना चाहिए . मैंने लाईट चालू करने की सोची. अरे यह क्या लाईट चालू होते ही बल्ब चटककर टूट गया. मुझे बहुत डर लग रहा था. फिर भी हिम्मत करके धीरे धीरे मैं सीढियों से चलते हुए ऊपर के कमरे तक जाने लगा. मैं जैसे ही कमरे के पास पहुंचा कमरे का दरवाजा खुल गया.. मैं बुरी तरह डर गया. मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग गया था. तभी मुझे कुछ अजीब सी आवाज सुनाई दी. जैसे कोई कुछ चबा रहा था. तभी मैने देखा घोष मांस के टुकड़े को चबा रहे थे. उनका मुंह से खून की धारा गिर रही थी. वे धीरे – धीरे मेरी तरफ बढ़ रहे थे. मैं पीछे सरक रहा था कि इतने में मेरा पैर सीढ़ी पर पड़ा और मैं तेजी से नीचे गिरा और वहीँ बेहोश हो गया. अगले मेरी जब आँख खुली तो मैं हास्पिटल में था . तभी मुझे पता चला कि रश्मि की मृत्यु हो गयी है.

अचानक से मेरा दिमाग चकराया और मुझे सब याद आने लगा . मैं जैसे ही सीढियों से गिर नीचे आया तो घोष भी मेरे पीछे पीछे आया. वह मुझे मारने ही वाला था कि इतने में वहाँ रश्मि पहुँच गयी और उसके साथ पुलिस भी थी. शायद उसे यह पता चल गया था और उसका खामियाजा खुद की मौत से चुकाना पड़ा . लेकिन कैसे ? रश्मि को यह सब कैसे पता चला ? यह अब भी मेरे लिए एक सवाल ही था. मैं ठीक हो चुका था. घर पर गया. वहां सभी लोग मेरा इन्तजार कर रहे थे. मैं दिन भर वही सोचता रहा. रात को २ बजे मेरी नीद खुली. मेरे बिस्तर पर एक पत्र था. खून से लिखा हुआ. मैंने उसे पढ़ा . लिखा था कोई बात नहीं रश्मि …तुझे कल मारूंगा . आज मेरा दोस्त राकेश आया है. तुझे कल चिठ्ठी दी थी. अगर तू आ गयी होती तो इसकी जान बाख जाती. बाय……अब सबकुछ मुझे समझ आ गया था.

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