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chhath puja history

छठ व्रत कथा हिंदी में
. छठ व्रत कथा हिंदी में

chhath puja history  उत्तर भारत में खासकर बिहार में मनाया जाने वाला लोकपर्व छठ बिहार का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है. यह लोक आस्था का पर्व है, जिसमें प्रकृति की पूजा होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिन छठी मैया की पूजा इस पर्व में की जाती है वे कौन थी…आईये हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बताते हैं कि छठी मैया कौन थीं.

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chhath puja history धार्मिक ग्रन्थ ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार देवी के नौ रूपों में से छठवें रूप को ही छठी मैया के नाम से जाना जाता है. इन्हें भगवान ब्रह्मदेव की मानस  पुत्री कहा जाता है. कहा जाता है  जिन लोगों को पुत्र की प्राप्ति नहीं हो रही है वे अगर भक्ति  भाव और नियम पूर्वक इन देवी की आराधना करें तो उन्हें अवश्य ही पुत्र प्राप्ति होती हैं.  देवी के नौ स्वरूपों में से छठे रुप को  कात्यायनी कहा  जाता है.

छठ और सूर्य की पूजा साथ क्यों होती है?

आप लोगों ने यह कभी सोचा है कि छठ मैया के साथ सूर्यदेव की पूजा क्यों होती है. तो आईये आज हम आपको बताते हैं ऐसा क्यों होता है. इसके पीछे कई तरह की मान्यताएं हैं . कहा जाता है कि छठी मां को ” अंश ” प्रदान करने वाली माना गया है और सूर्य देव प्रक्रति के प्रतीकों में से एक हैं. छठ पर्व में अंश और प्रकृति दोनों को पाने की कामना की जाती है. इस त्यौहार के लोकगीतों में भी यह दिखाई देता है. छठ पूजा में व्रती मां से संतान भगवान सूर्य से अन्न धन , सुख शान्ति की कामना करते हैं. इससे खुश होकर छठी मैया और भगवान  सूर्य देव व्रतियों की मनिकमाना अवश्य ही पूरा करते हैं. मित्रों यह पोस्ट  chhath puja history  आपको कैसी लगी कमेन्ट में अवश्य ही बताएं और भी अन्य कहानी के लिए इस लिंक  chhath puja कथा हिंदी में  पर क्लिक करें.

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