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chhath puja story

छठ पूजा क्या है हिंदी में जाने
छठ पूजा क्या है हिंदी में जाने

chhath puja story  chhath puja बिहार का प्रमुख और प्रसिद्ध त्यौहार है. इसे बिहारवासी उन अन्य क्षेत्रों में बनाते हैं जहां वे रहते हैं . आज के समय में यह त्यौहार बिहार के साथ ही दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि शहरों के साथ ही विदेशों में भी मनाया जाता है. यह लोक आस्था का पर्व है जो कि हर वर्ष कार्तिक माह की चतुर्थी से  शुरू होकर सप्तमी तक चलता है. यह नहाय खाय से शुरू भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त होता  है.

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नहाय खाय  इस पर्व की शुरुवात नहाय खाय से होती है. इस दिन लोग अपने घरों और आस पास के जगह को साफ सुथरा करते हैं. उसके बाद स्नान करके तन और मन को शुद्ध करके शाकाहारी भोजन ही ग्रहण करते है.

खरना इस पर्व के दुसरे दिन को खरना कहा जाता है. इस दिन निर्जल उपवास रखा जाता है अर्थात पुरे दिन जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं की जाती है. शाम को गन्ने का जूस या फिर गुड़ की खीर का प्रसाद बांटा जाता है.

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संध्याकाळ का अर्घ्य इस पर्व के तीसरे दिन को संध्याकाळ के समय नदी या तलाव में खड़े होकर भगवान भास्कर  को अर्घ्य दिया जाता है. इस दिन भी उपवास ही रखा जाता है और यह पहला त्यौहार है जिसमें डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. अर्घ्य के बाद रात्री में chhathi maiya के गीत गाय्ये जाते हैं और व्रत की कथा सुनी जाती है. माना जाता है कि ऐसा करने से बहुत अधिक फल प्राप्त होता है.

सुबह का अर्घ्य चौथे दिन भोर में उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता  है. उसके बाद chhathi maiya से परिवार में सुख और शान्ति की कामना की जाती है. उसके बाद लोगों को प्रसाद दिया जाता है और व्रती भी प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोल लेती हैं.

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