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children story in hindi बेटी की परिभाषा

children story in hindi
Written by Abhishek Pandey

children story in hindi    डाक्टर सिन्हा अभी सुबह का नाश्ता करने ही जा रहे थे कि उनका पर्सनल फोन बज उठा . उन्हें यह समझते देर कि कोई सीरियस केस है .  उन्होंने फोन रिसीव किया .

 

 

 

उधर से नर्स ने घबराते हुए बोला …सर जल्दी हास्पिटल आईये …बहुत ही सीरियस केस है . हास्पिटल डाक्टर सिन्हा के घर से थोड़ी ही दूर पर है . डाक्टर सिन्हा नाश्ता करना  छोड़ सीधे हास्पिटल पहुंचे .

 

 

 

सर कोई नवजात बच्ची को छोड़कर चला गया है ..उसकी हालत बहुत ही सीरियस है . उसे सांस लेने में परेशानी हो रही है ….नर्स ने घबराते हुए बो

 

 

 

तुम लोग का दिमाग कहाँ रहता है ….कैसे कोई बच्ची को छोड़कर चला गया….सिक्युरिटी कहाँ थी . पकडे क्यों नहीं …ऐसा कहने का का तो डाक्टर का बहुत मन हो रहा था , लेकिन इस समय उस बच्ची को बचाना उनके लिये ज्यादा जरुरी था.

 

 

 

उन्होंने जल्दी से कृतिम श्वांस लगाकर कुछ इंजेक्शन लगाया और बाहर आये …..वे बड़बड़ा रहे थे …ऐसे भला कोई अपनी बेटी को छोड़ कर जाता है क्या . शर्म नहीं आती ऐसे लोगों को . मिल जाए तो इन्हें फांसी होनी चाहिए . अपने ही बच्चों के साथ यह कैसी घृणा …वह बड़बड़ा रहे थे कि वार्ड ब्यॉय ने उन्हें बताया कि एक एक्सीडेंट का केस है .

 

 

 

 

डाक्टर सिन्हा ने देखा तो ज्यादा चोट नहीं आई थी . घुटने में थोड़ी सी चोट लगी थी. उन्होंने मरहम पट्टी की और दवाइयां लिख कर उस बूढी महिला के साथ आई हुई दुबली सी , सांवली लड़की को दे दी .

 

 

 

कैसे हुआ यह ? सिन्हा जी ने उस लड़की से पूछा

 

 

 

डाक्टर साहब …..वह मैं सुबह पूजा के लिए फुल तोड़ने गयी थी और मां वहीँ बठी थी . तभी वह उठकर घुमने लगीं …शायद बैठे – बैठे बोर हो रही थी . तभी अचानक से गली में से एक बाइक सवार आया और दादी को टक्कर मार दी .

 

 

 

घर में और कौन है ? डाक्टर का अगला प्रश्न था .

 

 

 

कोई नहीं  सर …..पिताजी  बहुत पहले गुजर गए …….मामा – मामी हैं , वे १० – १५ दिन में आ जाते हैं …बाकी गाँव के लोग बहुत अच्छे हैं .

 

 

 

ओह ….. ये दवाइयां लिख दी है मैंने इसे ले लेना और शायद से एक्स – रे भी करवाना पड़ सकता है .  सब हो जायेगा न …ओ पैसे ..

 

 

 

सर उसकी चिंता मत करिए …हम मैनेज कर लेंगे . कुछ पैसे जुटाए हैं …और कुछ हम एडवांस में ले लेंगे ….उस लड़की ने कहा

 

 

 

एडवांस में ? सिन्हा जी ने आश्चर्य से पूछा

 

 

 

हाँ सर …वो हम बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं …तो हम वहाँ से ले लेंगे .

 

 

 

 

ओह …वैसे बेटा नाम क्या है तुम्हारा ?

 

 

 

सर …कोमल

 

 

 

तबी उसकी मां  ने कुछ हिम्मत जुटा कर कहा, ”कोमल , मुझे जरा बिठा दो, उलटी सी आ रही है.”

 

 

 

 

डाक्टर ने कोमल   के साथ मिल कर उस की मां को बिठाया. अभी वह पूरी तरह बैठ भी नहीं पाई थी कि एक जोर की उबकाई के साथ उन्होंने उलटी कर दी और कोमल की नीली  पोशाक उस से सन गई.

 

 

 

 

मां शर्मसार सी होती हुई बोलीं, ”माफ करना बेटी.मैं ने तो तुम्हें भी..”

 

 

 

उन की बात बीच में काटती हुई श्वेता बोली, ”यह तो मेरा सौभाग्य है मां कि आप की सेवा का मुझे मौका मिल रहा है.”

 

 

 

कोमल  के कहे शब्द डाक्टर कुमार को सोच के किसी गहरे समुद्र में डुबोए चले जा रहे थे.

 

 

 

”डाक्टर साहब, कोई गहरी चोट तो नहीं है न,” कोमल  ने रूमाल से अपने कपड़े साफ करते हुए पूछा.

 

 

 

नहीं बेटा …कोई ज्यादा गहरी चोट नहीं है …जल्द ही आपकी मां पूरी तरह स्वस्थ हो जायेंगी .

 

 

 

डाक्टर फिर तेजी से दुसरे कमरे में पहुंचे , जहां वह बच्ची एडमिट थी .  उन्होंने देखा की उस्सकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है . बल्कि हालात और भी सीरियस हो गए थे . वे बहुत ही बेचैन हो गए . वह इस सच को भी जानते थे कि बनावटी फीड में वह कमाल कहां जो मां के दूध में होता है.

 

 

 

 

डाक्टर सिन्हा  दोपहर को खाने के लिए आए तो अपने दोनों मरीजों के बारे में ही सोचते रहे. बेचैनी में वह अपनी थकान भी भूल गए थे . शाम को डाक्टर कुमार वार्ड का राउंड लेने पहुंचे तो देखा कि कोमल  अपनी मां को व्हील चेयर में बिठा कर सैर करा रही थी.

 

 

 

 

”दोपहर को समय पर खाना खाया था मांजी ने ?” डाक्टर सिन्हा  ने कोमल  से मां के बारे में पूछा.

 

 

 

”जी  सर, जी भर कर खाया था. महीना दो महीना मां को यहां रहना पड़ जाए तो खूब मोटी हो कर जाएंगी,” श्वेता पहली बार कुछ खुल कर बोली. डाक्टर कुमार भी आज दिन में पहली बार हंसे थे.

 

 

 

तभी नर्स ने आकर उन्हें कुछ मैसेज दिया और डाक्टर सिन्हा वहीँ धाम से बैठ गए . वह बच्ची नहीं बाख पायी थी . हालांकि अब उन्होंने कई मौत के केसेज देखे थे , लेकिन इस मृत्य्यु ने उन्हें अन्दर से झकझोर दिया था ……. क्योंकि यह उस बच्ची की नहीं बल्कि इंसानियत की मौत थी .  वे सोच रहे थे कि अगर उस बच्ची के मां – बाप मिल जाते तो उन्हें घसीट कर कोमल के पास ले जाते और बेटी की परिभाषा समझाते …..

 

 

 

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children’s story in hindi :- एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी

– “जय जय रघुवीर समर्थ !” घर से महिला बाहर आयी. उसने उनकी झोलीमे भिक्षा डाली और कहा, “महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए .”

 

स्वामीजी बोले, “आज नहीं, कल दूँगा.”

 

 

दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – “जय जय रघुवीर समर्थ !”उस घर की स्त्रीने उस दिन खीर बनायीं थी, जिसमे बादाम-पिस्ते भी डाले थे.

 

 

 

वह खीर का कटोरा लेकर बाहर आयी। स्वामीजीने अपना कमंडल आगे कर दिया. वह स्त्री जब खीर डालने लगी, तो उसने देखा कि कमंडल में गोबर और कूड़ा भरा पड़ा है. उसके हाथ ठिठक गए. वह बोली, “महाराज ! यह कमंडल तो गन्दा है.”

 

 

स्वामीजी बोले, “हाँ, गन्दा तो है, किन्तु खीर इसमें डाल दो.” स्त्री बोली, “नहीं महाराज, तब तो खीर ख़राब हो जायेगी. दीजिये यह कमंडल, में इसे शुद्ध कर लाती हूँ.”

 

 

स्वामीजी बोले, मतलब जब यह कमंडल साफ़ हो जायेगा, तभी खीर डालोगी न ?”

 

 

स्त्री ने कहा : “जी महाराज !”

 

 

स्वामीजी बोले, “मेरा भी यही उपदेश है. मन में जब तक चिन्ताओ का कूड़ा-कचरा और बुरे संस्करो का गोबर भरा है, तब तक उपदेशामृत का कोई लाभ न होगा.

 

 

 

 

यदि उपदेशामृत पान करना है, तो प्रथम अपने मन को शुद्ध करना चाहिए, कुसंस्कारो का त्याग करना चाहिए, तभी सच्चे सुख और आनन्द की प्राप्ति होगी.”

 

 

 

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3- kids story in hindi :-  एक किसान था. वह एक बड़े से खेत में खेती किया करता था. उस खेत के बीचो-बीच पत्थर का एक हिस्सा ज़मीन से ऊपर निकला हुआ था जिससे ठोकर खाकर वह कई बार गिर चुका था और ना जाने कितनी ही बार उससे टकराकर खेती के औजार भी टूट चुके थे.

 

 

रोजाना की तरह आज भी वह सुबह-सुबह खेती करने पहुंचा पर जो सालों से होता आ रहा था एक वही हुआ , एक बार फिर किसान का हल पत्थर से टकराकर टूट गया.

 

 

किसान बिल्कुल क्रोधित हो उठा , और उसने मन ही मन सोचा की आज जो भी हो जाए वह इस चट्टान को ज़मीन से निकाल कर इस खेत के बाहर फ़ेंक देगा.

 

 

वह तुरंत भागा और गाँव से ४-५ लोगों को बुला लाया और सभी को लेकर वह उस पत्त्थर के पास पहुंचा .

 

 

” मित्रों “, किसान बोला , ” ये देखो ज़मीन से निकले चट्टान के इस हिस्से ने मेरा बहुत नुक्सान किया है, और आज हम सभी को मिलकर इसे जड़ से निकालना है और खेत के बाहर फ़ेंक देना है.”

 

और ऐसा कहते ही वह फावड़े से पत्थर के किनार वार करने लगा, पर ये क्या ! अभी उसने एक-दो बार ही मारा था की पूरा-का पूरा पत्थर ज़मीन से बाहर निकल आया. साथ खड़े लोग भी अचरज में पड़ गए और उन्ही में से एक ने हँसते हुए पूछा ,” क्यों भाई , तुम तो कहते थे कि तुम्हारे खेत के बीच में एक बड़ी सी चट्टान दबी हुई है , पर ये तो एक मामूली सा पत्थर निकला ??”

 

 

 

किसान भी आश्चर्य में पड़ गया सालों से जिसे वह एक भारी-भरकम चट्टान समझ रहा था दरअसल वह बस एक छोटा सा पत्थर था !! उसे पछतावा हुआ कि काश उसने पहले ही इसे निकालने का प्रयास किया होता तो ना उसे इतना नुक्सान उठाना पड़ता और ना ही दोस्तों के सामने उसका मज़ाक बनता .

 

 

 

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4- hindi story for kid :-  विद्यालय में सब उसे मंदबुद्धि कहते थे . उसके गुरुजन भी उससे नाराज रहते थे क्योंकि वह पढने में बहुत कमजोर था और उसकी बुद्धि का स्तर औसत से भी कम था.

 

 

कक्षा में उसका प्रदर्शन हमेशा ही खराब रहता था . और बच्चे उसका मजाक उड़ाने से कभी नहीं चूकते थे . पढने जाना तो मानो एक सजा के समान हो गया था , वह जैसे ही कक्षा में घुसता और बच्चे उस पर हंसने लगते , कोई उसे महामूर्ख तो कोई उसे बैलों का राजा कहता , यहाँ तक की कुछ अध्यापक भी उसका मजाक उड़ाने से बाज नहीं आते . इन सबसे परेशान होकर उसने स्कूल जाना ही छोड़ दिया .

 

 

 

अब वह दिन भर इधर-उधर भटकता और अपना समय बर्वाद करता . एक दिन इसी तरह कहीं से जा रहा था , घूमते – घूमते उसे प्यास लग गयी . वह इधर-उधर पानी खोजने लगा.

 

 

 

अंत में उसे एक कुआं दिखाई दिया.  वह वहां गया और कुएं से पानी खींच कर अपनी प्यास बुझाई. अब वह काफी थक चुका था, इसलिए पानी पीने के बाद वहीं बैठ गया.

 

 

 

 

तभी उसकी नज़र पत्थर पर पड़े उस निशान पर गई जिस पर बार-बार कुएं से पानी खींचने की वजह से रस्सी का निशाँ बन गया था . वह मन ही मन सोचने लगा कि जब बार-बार पानी खींचने से इतने कठोर पत्थर पर भी रस्सी का निशान पड़ सकता है तो लगातार मेहनत करने से मुझे भी विद्या आ सकती है.

 

 

 

 

उसने यह बात मन में बैठा ली और फिर से विद्यालय जाना शुरू कर दिया. कुछ दिन तक लोग उसी तरह उसका मजाक उड़ाते रहे पर धीरे-धीरे उसकी लगन देखकर अध्यापकों ने भी उसे सहयोग करना शुरू कर दिया .

 

 

 

 

उसने मन लगाकर अथक परिश्रम किया. कुछ सालों बाद यही विद्यार्थी प्रकांड विद्वान वरदराज के रूप में विख्यात हुआ, जिसने संस्कृत में मुग्धबोध और लघुसिद्धांत कौमुदी जैसे ग्रंथों की रचना की. “

 

 

 

 

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