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children’s story in hindi . बच्चों की बेस्ट कहानियां

children's story in hindi
Written by Abhishek Pandey

children’s story in hindi   एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को बहुत बुरा भला कह दिया .  लेकिन बाद में उसे अपनी गलती का अहसास हुआ तो वो पश्चाताप के लिए एक संत के पास गया .  उसने जाकर संत से अपने शब्द वापिस लेने का उपाय पूछा ताकि उसने मन का बोझ कुछ कम हो सके .

 

 

संत ने किसान से कहा एक कम काम करो तुम जाकर कंही से खूब सारे पंख इक्कठा कर लो और उसके बाद उन पंखो को को शहर के बीचो बीच जाकर बिखेर दो .  किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुँच गया .

 

 

 

तो संत ने उस किसान से कहा क्या तुम ऐसा कर सकते हो कि जाकर उन पंखो को पुन: समेट के ले आ सको .  इस पर किसान वापिस गया तो देखता है कि हवा के कारण सारे पंख उड़ गये है और कुछ जो बचे है वो समेटे नहीं जा सकते .

 

 

 

children’s story in hindi

 

 

किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा तो संत ने उसे समझाया कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे शब्दों के साथ होता है तुम बड़ी आसानी से किसी को कुछ भी बिना सोचे समझे कह सकते हो लेकिन एक बार कह देने के बाद वो शब्द वापिस नहीं लिए जा सकते ठीक ऐसे ही जैसे ही एक बार बिखेर देने के बाद पंखो को वापिस नहीं समेटा जा सकता .  तुम चाह कर भी उन शब्दों को वापिस नहीं ले सकते इसलिए आज के बाद कभी भी किसी से कुछ कहने से पहले विचार कर बोलना .

 

 

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२- moral stories for childrens in hindi  : –  यह एक लोक कथा है.  बहुत पहले आसमानी बिजली और तूफ़ान बाकी सारे लोगों के साथ यहीं धरती पर रहा करते थे, लेकिन राजा ने उन्हें सारे लोगों के घरों से बहुत दूर अपना बसेरा बनाने का आदेश दिया हुआ था.

 

 

तूफ़ान असल में एक बूढ़ी भेड़ थी जबकि उसका बेटा आसमानी बिजली एक गुस्सैल मेढा. जब भी मेढा गुस्से में होता वह बाहर जाकर घोरों में आगज़नी किया करता और पेड़ों को गिरा देता.

 

 

वह खेतों को भी नुकसान पहुंचाता और कभी तो लोगों को मार भी डालता. वह जब नभी ऐसा करता उसकी माँ ऊंची आवाज़ में डांटती हुई उसे और नुक्सान न पहुंचाने और घर वापस आने को कहती, लेकिन आसमानी बिजली अपनी माँ की बातों पर ज़रा भी ध्यान दिए बिना तमाम नुकसान करने पर आमादा रहता. अंत में जब यह सब लोगों की बर्दाश्त से बाहर हो गया, उन्होंने राजा से शिकायत की.

 

 

 

सो राजा ने एक विशेष आदेश दिया और भेड़ और उसके मेढे को शहर छोड़कर दूर झाडियों में जा कर रहने पर मजबूर होना पड़ा. इस से भी कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि गुस्सैल मेढा अब भी कभी कभार जंगलों में आग लगा दिया करता और आग की लपटें जब-तब खेतों तक पहुंचकर उन्हें तबाह कर दिया करतीं.

 

 

लोगों ने राजा के आगे फिर से शिकायत की और इस बार राजा ने दोनों माँ-बेटे हो धरती छोड़कर आसमान में जाकर अपना घर बना लेने को कहा, जहां वे बहुत ज़्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे. तब से जब भी आसमानी बिजली को गुस्सा आता है, वह हमेशा की तरह तबाही मचाता है लेकिन हम उसकी माँ को उसे डांट पिलाता हुआ सुन सकते हैं. हाँ कभी कभी जब माँ अपने शरारती बेटे से कुछ दूर कहीं गयी होती है, हम देख सकते हैं कि वह अब भी गुस्सा है और नुक्सान पहुंचा रहा है अलबत्ता उसकी माँ की आवाज़ हमें नहीं सुनाई देती.

 

 

                                                  children’s story in hindi

 

 

३- new moral stories in hindi :- एक राजा था.  उसके बारह बेटे थे.  जब वे बड़े हो गए, तब राजा ने उनसे कहा कि तुम्हे अपने अपने लिए एक-एक पत्नी ढूंढकर लानी है. लेकिन वह पत्नी एक ही दिन में सूत कातकर कपड़ा बुने, फिर उससे एक कमीज सिलकर दिखाए, तभी मैं उसे बहू के रूप में स्वीकार करूंगा.”

 

 

इसके बाद राजा ने अपने बेटों को एक-एक घोड़ा दिया. वे सभी अपनी-अपनी पत्नी खोजने निकल पड़े. कुछ ही दूर गए थे कि उन्होंने आपस में कहा कि वे अपने छोटे भाई को साथ नहीं ले जाएंगे.

 

 

ग्यारह भाई अपने छोटे भाई को अकेला छोड़कर चले गए.  वह रास्ते में सोचने लगा कि वह आगे जाए या लौट जाए. उसका चेहरा उतर गया था. वह घोड़े से उतरकर घास पर बैठ गया और रोने लगा.

 

 

 

रोते-रोते अचानक चौंक गया. उसके सामने की घास हिली और कोई सफेद चीज उसकी ओर आने लगी. जब वह चीज राजकुमार के पास आई, तो उसे एक नन्ही-सी लड़की दिखाई दी.

 

 

उसने कहा- “मैं छोटी-सी गुड़िया हूँ. यहां घास पर ही रहती हूँ. तुम यहां क्यों आए हो?”

 

 

राजकुमार ने अपने बड़े भाइयों के बारे में बताया. उसने अपने पिता की शर्त के बारे में भी बताया. फिर उसने गुड़िया से पूछा- “क्या तुम एक दिन में सूत कातकर, कपड़ा बुनकर एक कमीज सिल सकती हो? अगर यह कर दोगी, तो मैं तुमसे शादी कर लूंगा. मैं अपने भाइयों के दुर्व्यवहारों के कारण आगे नहीं जाना चाहता.”

 

 

 

गुड़िया ने ‘हाँ’ कर दी. तुरंत ही उसने सूत काता कपड़ा बुना और एक छोटी-सी कमीज लेकर महल की ओर चल पड़ा. जब वह महल में पहुंचा तो उसे शर्म आ रही थी, क्योंकि कमीज बहुत छोटी थी. फिर भी राजा ने उसे विवाह करने की अनुमति दे दी.

 

 

राजकुमार गुड़िया को लेने चल पड़ा. जब वह घास पर बैठी गुड़िया के पास पहुंचा, तो उसने गुड़िया से घोड़े पर बैठने को कहा. गुड़िया ने कहा- “मैं तो अपने दो चूहों के पीछे चांदी की चम्मच बांधकर उसमें बैठकर जाऊंगी.”

 

 

राजकुमार ने उसका कहना मान लिया. राजकमार घोड़े पर सवार हो गया. गुड़िया चूहों के पीछे बंधी चांदी की चम्मच पर सवार हो गई. राजकुमार सड़क के एक ओर चलने लगा, क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसके घोड़े का पांव गुड़िया के ऊपर न पड़ जाए.

 

 

 

गुड़िया सड़क के जिस ओर चल रही थी, उस ओर एक नदी बह रही थी. अचानक गुड़िया नदी में गिर गई. लेकिन जब वह नदी के अंदर से ऊपर आई, तो राजकुमार के समान बड़ी हो गई थी. राजकुमार बहुत प्रसन्न हुआ.

 

 

राजकुमार महल में पहुंचा, तो उसके सभी बड़े भाई अपनी-अपनी होने वाली पत्नियों के साथ वहां आ चुके थे. लेकिन उसके भाइयों की पत्नियों का न व्यवहार अच्छा था , न ही वे सुन्दर थीं.

 

 

 

 

जब उन्होंने अपने भाई की सुन्दर पत्नी को देखा, तो वे सभी जल-भुन गए. राजा को पता चला कि बड़े पुत्रों ने छोटे राजकुमार के साथ दुर्व्यवहार किया है, तो उसने बड़े बेटों की खूब निंदा की.

 

 

 

फिर छोटे बेटे को गद्दी सौंप दी। छोटे राजकुमार का विवाह गुड़िया के साथ धूमधाम से हुआ. अब छोटा राजकुमार राजा था और गुड़िया रानी दोनों सुख से रहने लगे.

 

 

 

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4- hindi stories for class 3– := किसी गाँव में एक दिन कुश्ती स्पर्धा का आयोजन किया गया . हर साल की तरह इस साल भी दूर -दूर से बड़े-बडें पहलवान आये . उन पहलवानो में ऐक पहलवान ऐसा भी था, जिसे हराना सब के बस की बात नहीं थी। जाने-माने पहलवान भी उसके सामने ज्यादा देर टिक नही पाते थे.

 

स्पर्धा शुरू होने से पहले मुखिया जी आये और बोले , ” भाइयों , इस वर्ष के विजेता को हम 3 लाख रूपये इनाम में देंगे. “

 

 

इनामी राशि बड़ी थी , पहलावन और भी जोश में भर गए और मुकाबले के लिए तैयार हो गए. कुश्ती स्पर्धा आरंभ हुई और वही पहलवान सभी को बारी-बारी से चित्त करता रहा .

 

 

 

जब हट्टे-कट्टे पहलवान भी उसके सामने टिक ना पाये तो उसका आत्म-विश्वास और भी बढ़ गया और उसने वहाँ मौजूद दर्शकों को भी चुनौती दे डाली – ” है कोई माई का लाल जो मेरे सामें खड़े होने की भी हिम्मत करे !! … “

 

 

वही खड़ा एक दुबला पतला व्यक्ति यह कुश्ती देख रहा था, पहलवान की चुनौती सुन उसने मैदान में उतरने का निर्णय लिया,और पहलावन के सामें जा कर खड़ा हो गया.

 

 

यह देख वह पहलवान उस पर हँसने लग गया और उसके पास जाकर कहाँ, तू मुझसे लडेगा…होश में तो है ना?

 

 

तब उस दुबले पतले व्यक्ति ने चतुराई से काम लिया और उस पहलवान के कान मे कहाँ, “अरे पहलवानजी मैं कहाँ आपके सामने टिक पाऊगां,आप ये कुश्ती हार जाओ मैं आपको ईनाम के सारे पैसे तो दूँगा ही और साथ में 3लाख रुपये और दूँगा,आप कल मेरे घर आकर ले जाना.  आपका क्या है , सब जानते हैं कि आप कितने महान हैं , एक बार हारने से आपकी ख्याति कम थोड़े ही हो जायेगी…”

 

 

कुश्ती शुरू होती है ,पहलवान कुछ देर लड़ने का नाटक करता है और फिर हार जाता है. यह देख सभी लोग उसकी खिल्ली उड़ाने लगते हैं और उसे घोर निंदा से गुजरना पड़ता है.

 

अगले दिन वह पहलवान शर्त के पैसे लेने उस दुबले व्यक्ति के घर जाता है,और 6लाख रुपये माँगता है.

 

 

तब वह दुबला व्यक्ति बोलता है , ” भाई किस बात के पैसे? “

 

“अरे वही जो तुमने मैदान में मुझसे देने का वादा किया था. “, पहलवान आश्चर्य से देखते हुए कहता है.

 

 

दुबला व्यक्ति हँसते हुए बोला “वह तो मैदान की बात थी,जहाँ तुम अपने दाँव-पेंच लगा रहे थे और मैंने अपना… पर इस बार  मेरे दांव-पेंच तुम पर भारी पड़े और मैं जीत गया. “

 

 

मित्रों , ये कहानी हमें सीख देती है कि थोड़े से पैसों के लालच में वर्षों के कड़े प्ररिश्रम से कमाई प्रतिष्ठा भी कुछ ही पलों में मिटटी मे मिल जातीं है और धन से भी हाथ धोना पड़ता है. अतः हमें कभी अपने नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से बच कर रहना चाहिए.

 

 

 

 

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5-  hindi short stories  :-  संतो की उपदेश देने की रीति-नीति भी अनूठी होती है. कई संत अपने पास आने वाले से ही प्रश्न करते है और उसकी जिज्ञासा को जगाते है; और सही-सही मार्गदर्शन कर देते है.

 

 

आचार्य रामानुजाचार्य एक महान संत एवं संप्रदाय-धर्म के आचार्य थे . दूर दूर से लोग उनके दर्शन एवं मार्गदर्शन के लिए आते थे. सहज तथा सरल रीति से वे उपदेश देते थे.

 

 

एक दिन एक युवक उनके पास आया और पैर में वंदना करके बोला : “मुझे आपका शिष्य होना है. आप मुझे अपना शिष्य बना लीजिए.”

 

 

रामानुजाचार्यने कहा : “तुझे शिष्य क्यों बनना है ?” युवक ने कहा : “मेरा शिष्य होने का हेतु तो परमात्मा से प्रेम करना है.”

 

 

संत रामानुजाचार्य ने तब कहा : “इसका अर्थ है कि तुझे परमात्मा से प्रीति करनी है. परन्तु मुझे एक बात बता दे कि क्या तुझे तेरे घर के किसी व्यक्ति से  प्रेम है ?”

 

 

युवक ने कहा : “ना, किसीसे भी मुझे प्रेम नहीं.” तब फिर संतश्री ने पूछा : “तुझे तेरे माता-पिता या भाई-बहन पर स्नेह आता है क्या ?”

 

 

युवक ने नकारते हुए कहा ,“मुझे किसी पर भी तनिकमात्र भी स्नेह नहीं आता. पूरी दुनिया स्वार्थपरायण है, ये सब मिथ्या मायाजाल है. इसीलिए तो मै आपकी शरण में आया हूँ.”

 

 

तब संत रामानुज ने कहा : “बेटा, मेरा और तेरा कोई मेल नहीं. तुझे जो चाहिए वह मै नहीं दे सकता.”

 

 

युवक यह सुन स्तब्ध हो गया.

 

उसने कहा : “संसार को मिथ्या मानकर मैने किसी से प्रीति नहीं की. परमात्मा के लिए मैं इधर-उधर भटका. सब कहते थे कि परमात्मा के साथ प्रीति जोड़ना हो तो संत रामानुजके पास जा; पर आप तो इन्कार कर रहे है.”

 

 

संत रामानुज ने कहा : “यदि तुझे तेरे परिवार से प्रेम होता, जिन्दगी में तूने तेरे निकट के लोगों में से किसी से भी स्नेह किया होता तो मै उसे विशाल स्वरुप दे सकता था . थोड़ा भी प्रेमभाव होता, तो मैं उसे ही विशाल बना के परमात्मा के चरणों तक पहुंचा सकता था .

 

छोटे से बीजमें से विशाल वटवृक्ष बनता है. परन्तु बीज तो होना चाहिए. जो पत्थर जैसा कठोर एवं शुष्क हो उस में से प्रेम का झरना कैसे बहा सकता हूँ ? यदि बीज ही नहीं तो वटवृक्ष कहाँ से  बना सकता हूँ ? तूने किसी से प्रेम किया ही नहीं, तो तेरे भीतर परमात्मा के प्रति प्रेम की गंगा कैसे बहा सकता हूँ ?”

 

 

 

काहनी का सार ये है कि जिसे अपने निकट के भाई-बंधुओं से प्रेमभाव नहीं, उसे ईश्वर से प्रेम भाव नहीं हो सकता. हमें अपने आस पास के लोगों और कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ सकते. यदि हमें आध्यात्मिक कल्याण चाहिए तो अपने धर्म-कर्तव्यों का भी  उत्तम रीति से पालन करना होगा.

 

 

 

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६- hindi story class 5 :- मैनेजमेंट की शिक्षा प्राप्त एक युवा नौजवान की बहुत अच्छी नौकरी लग जाती है, उसे कंपनी की और से काम करने के लिए अलग से एक केबिन दे दिया जाता है.

 

वह नौजवान जब पहले दिन office जाता है और बैठ कर अपने शानदार केबिन को निहार रहा होता है तभी दरवाजा खट -खटाने की आवाज आती है दरवाजे पर एक साधारण सा व्यक्ति रहता है , पर उसे अंदर आने कहनेँ के बजाय वह युवा व्यक्ति उसे आधा घँटा बाहर इंतजार करनेँ के लिए कहता है.

 

 

 

आधा घंटा बीतने के पश्चात वह आदमी पुन: office के अंदर जाने  की अनुमति मांगता है, उसे अंदर आते देख युवक टेलीफोन से बात करना शुरु कर देता है. वह फोन पर बहुत सारे पैसों  की बातेँ करता है, अपनेँ ऐशो – आराम के बारे में  कई प्रकार की डींगें हांकने  लगता है, सामने वाला व्यक्ति उसकी सारी बातें  सुन रहा होता है, पर वो युवा व्यक्ति फोन पर बड़ी-बड़ी डींगें हांकना जारी रखता है.

 

 

जब उसकी बातें  खत्म हो जाती हैं ह उस साधारण व्यक्ति से पूछता है है कि तुम यहाँ क्या करने आये हो?

 

 

वह आदमी उस युवा व्यक्ति को विनम्र भाव से देखते हुए कहता है , “साहब, मैं यहां  टेलीफोन रिपेयर करने के लिए आया हूं, मुझे खबर मिली है कि आप जिस टेलीफोन से बात कर रह थे वो हफ्ते भर से बंद पड़ा है इसीलिए मैं  इस टेलीफोन को रिपेयर करनेँ के लिए आया हूँ.”

 

 

इतना सुनते ही युवा व्यक्ति शर्म से लाल हो जाता है और चुप-चाप कमरे से बाहर चला जाता है. उसे उसके दिखावे का फल मिल चुका होता है.

 

 

कहानी का सार यह है कि जब हम सफल होते हैं  तब हम अपने आप पर बहुत गर्व होता हैं  और यह स्वाभाविक भी है. गर्व करने से हमे स्वाभिमानी होने का एहसास होता है लेकिन  एक समय  के बाद ये अहंकार का रूप ले लेता है और आप स्वाभिमानी से अभिमानी बन जाते हैं और अभिमानी बनते ही आप दूसरों के सामने  दिखावा करने लगते हैं .

 

 

अतः हमें ध्यान रखना चाहिए कि हम चाहे कितने भी सफल क्यों ना हो जाएं व्यर्थ के अहंकार और झूठे दिखावे में ना पड़ें अन्यथा उस युवक की तरह हमे भी कभी न कभी शर्मिंदा होना पड़ सकता है.

 

 

 

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७- hindi story for class 6 :-  कुछ लोग अपने बच्चों के साथ समुद्र के किनारे एक कबीले में रहते थे, उसमें एक छोटी लड़की भी थी, जिसका नाम मिनावी था.

 

 

 

मिनावी दूसरे सभी बच्चों से थोड़ी अलग थी. उसे अक्सर दूसरे बच्चों के बीच झगड़ा कराने में बहुत मजा आता था और इस वजह से पूरी टोली परेशान हो जाती थी. लगभग रोज कबीले में लड़ाई हो जाती थी.

 

 

एक बार की बात है कि डूबते हुए सूरज की लाल-गुलाबी किरणें खेल के मैदान पर पड़ रही थीं, सारी लड़कियां खेल का आनंद उठा रही थीं. सारे लड़के अपने पिता के साथ, बड़े आदमियों वाले काम सीख रहे थे.

 

 

 

माएं शाम का खाना बनाने की तैयारी कर रहीं थीं. कोयले की आग पर एक ताजा मछली, ताजें केकड़े और मसेल के साथ पक रही थी. टोली के सभी लोग खुश थे.

 

 

 

फसल उनके लिए अच्छी रही थी. खूब ताजा खाना उपलब्ध था.  मिनावी के अलावा सब खुश थे. मिनावी सबसे अलग थी. बचपन से ही, मिनावी को दूसरी लड़कियों को परेशान करना अच्छा लगता था.

 

 

मिनावी का चेहरा इतना बदसूरत और कठोर था, कि उसे देखकर उसके मन की नफरत का अंदाजा लगाया जा सकता था. बुजुर्गों को पता था कि मिनावी सबको परेशान करने की कोशिश करती है, जिससे झगड़ा होता है, न केवल छोटी लड़कियों में, बल्कि उनकी मांओं में भी.

 

 

बुजुर्गों ने मिनावी की मां को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने मिनावी को गड़बड़ करने से नहीं रोका, तो उसके साथ कुछ भयानक घट जाएगा, पर मिनावी ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

 

 

 

साल बीतते गए, और मिनावी जवान हो गई. पर उसे तब भी झगड़ा कराना अच्छा लगता था. एक दिन सारी जवान लड़कियों को, मिनावी को भी, दुल्हन बनने के लिए तैयार होना था. मिनावी भी अन्य लड़कियों के साथ खड़ी हो गई.

 

 

बुजुर्गों ने बताया कि कौन-सा लड़का किससे शादी करेगा. समारोह के आखिर में, मिनावी अकेली खड़ी रह गई. किसी भी लड़के ने उसे शादी के लिए नहीं चुना.

 

 

 

मिनावी के मन में नफरत और ज़्यादा बढ़ गई. उसने टोली में और भी ज्यादा गड़बड़ करनी शुरू कर दी. कबीले में रोज ही लड़ाइयां होने लगीं. मिनावी अपनी छोटी-सी झोपड़ी में बैठी रहती और देखा करती, आप ही खुश होती रहती.

 

 

 

बुजुर्गों ने तय किया कि मिनावी को अपने किए की सज़ा मिलनी चाहिए. मिनावी को कबीले के निर्णय के बारे में थोड़ा-बहुत पता था. जब वह औरतों के बीच एक और झगड़ा कराने जा रही थी, आदमियों ने उसे पकड़ लिया और जमीन में गिरा दिया उसे चारों ओर गोल-गोल घुमाया.

 

 

 

 

वह किसी तरह भाग निकली और समुद्र के किनारे पहुंच गई जहां उसने बुरी आत्माओं से प्रार्थना की कि वे उसे एक क्रूर जानवर में बदल दें, जिससे वह अपने कबीले से बदला ले सके.

 

 

मिनावी एक बड़े मगरमच्छ में बदल गई और चुपचाप कीचड़ में घुस गई, व अपने शिकार का इंतजार करने लगी. कबीले के लोग धीरे-धीरे मिनावी को भूल गए और अपनी दिनचर्या में व्यस्त हो गए.

 

 

एक दिन जब वे केकड़ों को ढूंढ़ने समुद्र के किनारे आए, मिनावी इंतजार में लेटी थी. एक आदमी जो मिनावी को सज़ा दिलाने में शामिल था, जब पानी में कूदा, तो मिनावी पीछे से रेंग कर आ गई और उसे दबोच लिया.

 

 

 

उसने आदमी से कहा कि वह उसे चारों ओर गोल-गोल घुमाएगी, उसने तब तक बार-बार, आदमी को पानी में घुमाया, जब तक उसे संतोष नहीं हो गया कि उसे काफी सज़ा मिल चुकी है तब से आज तक, मिनावी की आत्मा मगरमच्छ में समाई हुई है, और इसीलिए हर बार जब मगरमच्छ अपने शिकार को पकड़ता है तो हमेशा पानी में चारों तरफ गोल-गोल घुमाता है.

 

 

 

 

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