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Dhanteras Story in Hindi . धनतेरस की कथा हिंदी में। धनतेरस २०१९

Dhanteras Story in Hindi
Written by Abhishek Pandey

Dhanteras Ki Katha धनतेरस की कथा

 

 

Dhanteras Story in Hindiपुराने जमाने में एक राजा हुए थे राजा हिम. उनके यहां एक पुत्र हुआ, तो उसकी जन्म-कुंडली बनाई गई. ज्योतिषियों ने कहा कि राजकुमार अपनी शादी के चौथे दिन सांप के काटने से मर जाएगा। इस पर राजा चिंतित रहने लगे.

 

 

 

जब राजकुमार की उम्र 16 साल की हुई, तो उसकी शादी एक सुंदर, सुशील और समझदार राजकुमारी से कर दी गई…. राजकुमारी मां लक्ष्मी की बड़ी भक्त थीं… राजकुमारी को भी अपने पति पर आने वाली विपत्ति के विषय में पता चल गया.

 

 

 

राजकुमारी काफी दृढ़ इच्छाशक्ति वाली थीं… उसने चौथे दिन का इंतजार पूरी तैयारी के साथ किया… जिस रास्ते से सांप के आने की आशंका थी, वहां सोने-चांदी के सिक्के और हीरे-जवाहरात आदि बिछा दिए गए… पूरे घर को रोशनी से जगमगा दिया गया… कोई भी कोना खाली नहीं छोड़ा गया यानी सांप के आने के लिए कमरे में कोई रास्ता अंधेरा नहीं छोड़ा गया…. इतना ही नहीं, राजकुमारी ने अपने पति को जगाए रखने के लिए उसे पहले कहानी सुनाई और फिर गीत गाने लगी.

 

 

धनतेरस की कहानी 

 

 

 

इसी दौरान जब मृत्यु के देवता यमराज ने सांप का रूप धारण करके कमरे में प्रवेश करने की कोशिश की, तो रोशनी की वजह से उनकी आंखें चुंधिया गईं.

 

 

 

इस कारण सांप दूसरा रास्ता खोजने लगा और रेंगते हुए उस जगह पहुंच गया, जहां सोने तथा चांदी के सिक्के रखे हुए थे…. डसने का मौका न मिलता देख, विषधर भी वहीं कुंडली लगाकर बैठ गया और राजकुमारी के गाने सुनने लगा.

 

 

 

इसी बीच सुबह हो गई. यम देवता वापस जा चुके थे…..इस तरह राजकुमारी ने अपनी पति को मौत के पंजे में पहुंचने से पहले ही छुड़ा लिया….यह घटना जिस दिन घटी थी, वह धनतेरस का दिन था, इसलिए इस दिन को ‘यमदीपदान’ भी कहते हैं…. भक्तजन इसी कारण धनतेरस की पूरी रात रोशनी करते हैं.

 

 

 

 

Dhanteras Hindi Story       धनतेरस की दूसरी कथा

 

 

 

प्राचीन काल में एक राजा थे. उनके कोई संतान नहीं थी. तमाम मन्नतों के बाद भगवान् की कृपा से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई. ज्योतिषियों ने कुंडली बनाते वक्त बताया कि इस बालक की मृत्यु विवाह के चार दिन बाद हो जायेगी।

 

 

 

इससे राजा को बहुत दुःख हुआ. उन्होंने राजकुमार का भेष बदलवाकर उन्हें ऐसे स्थान पर भेज दिया  जहां किसी स्त्री की परछाई भी ना पड़े. उन्होंने तय कर लिया कि ना तो राजकुमार की शादी होगी और ना ही उनकी मृत्यु होगी।

 

 

समय गुजरा और राजकुमार जब बड़े हुए तो तो एक राजकुमारी को राजकुमार से प्रेम हो  गया. उन्होंने गन्धर्व विवाह कर  लिया. विवाह के ठीक चार दिन बाद यमदूत राजकुमार के प्राण हरने के लिए आ गए.

 

 

 

जब यमदूत राजकुमार के प्राण लेकर जा रहे थे तो नवविवाहिता का विलाप सुनकर उनका ह्रदय द्रवित हो उठा. लेकिन वे विधि के विधान से बंधे हुए थे.

 

 

तब एक यमदूत ने यकराज से विनती करते हुए कहा, ” क्या ऐसा कोई उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए.”

 

 

तब यमराज ने उस यमदूत से कहा, ” यदि मनुष्य कार्तिक कृष्ण पक्ष की रात जो प्राणी मेरे निमित्त पूजन करके दीप  माला दक्षिण दिशा की और भेंट करेगा। उसके मन कभी भी अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। ” इसके बाद धनतेरस के दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा की और दीप जलाकर रखे जाते है.

 

 

 

धनतेरस की पूजा  Dhanteras Puja Vidhi

 

 

 

धनतेरस का त्यौहार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है. इस दिन लोग भगवान् धन्वन्तरि की पूजा करते  है और यमराज के लिए दीपदान करते है.

 

 

धनतेरस का पर्व आर्युवेद के देवता के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है. स्कंदपुराण के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को प्रदोषकाल में घर के दरवाजे पर यमराज के लिए दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है.

 

 

इस दिन पूरे विधि-विधान से माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है. कहा जाता है की इस दिन प्रदोषकाल में माता लक्ष्मी जी की पूजा करने से मान लक्ष्मी घर में ठहर जाती है. धनतेरस के दिन खरीदारी करना बहुत ही शुभ रहता है. इस दिन विशेषकर बर्तनों और गहनों आदि की खरीदारी की जाती है.

 

 

 

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