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eklavya story in hindi

eklavya story in hindi  आज मै आप लोगो को महान धनुर्धर eklavya के बारे मे बताने जा रहा हूँ .यह एक bhakti story है. जिसमें eklavya के त्याग, बलिदान और eklavya की मृत्यु के बारे में बताया जायेगा.

महाभारत के सभी किरदारों में भगवान krishna god और arjuna को मुख्य किरदार माना जाता है. mahabharata की सारी लीला तो प्रभु krishna god की ही थी और arjun को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर कहा जाता है,लेकिन क्या आप जानते हैं अर्जुन से भी बड़ा एक धनुर्धर था जिसका नाम था eklavya .eklavya एक भील पुत्र था.जब पांडवों और कौरवों को गुरु द्रोणाचार्य अस्त्र शस्त्र की शिक्षा दे रहे थे तो एकलव्य ने भी द्रोणाचार्य से विद्या ग्रहण करने का आग्रह किया,लेकिन द्रोणाचार्य ने उसके भील पुत्र होने के कारण शिक्षा देने से इंकार कर दिया.तब शिक्षा आज की तरह नहीं हुआ करती थी. शिक्षा ग्रहण करने के लिए शिष्य गुरुकुल मे रहा करते थे और शिक्षा भी कुल के हिसाब से दी जाती थी.
eklavya story in hindi
mahabharat काल मे प्रयाग (जो की इस समय भारत के उत्तर प्रदेश मे है ) के तटवर्ती प्रदेश मे फैला हुआ राज्य शृंगवेरपुर था. वहाँ की राजा हरिण्यधनु थे.वह एक महान पराक्रमी राजा थे. निषाद राज हरिण्यधनु की पत्नी का नाम सुलेखा था.रानी सुलेखा ने एक पुत्र को जन्म दिया ,जिसका नाम अभिद्युम्न रखा गया.बचपन से ही शस्त्र विद्या में उसकी लगन को देखते हुए उसका नाम एकलव्य रखा गया.एकलव्य का विवाह निषादराज के मित्र की कन्या सुनीता से हुआ था.
एकलव्य को अपनी धनुर्विद्या से संतुष्टि नही थी .उसने द्रोणाचार्य से धनुर्विद्या सीखने की सोची .जब उसने यह बात निषादराज को बताई तो उन्होने उसे वहां जाने से मना किया,क्योंकि वे जानते थे कि द्रोणाचार्य उसे शिक्षा नहीं देंगे.जब वह द्रोणाचार्य के आश्रम मे गया तो द्रोणाचार्य ने उसे अपमाअनित कर भगा दिया,लेकिन वे इससे तनिक भी विचलित नहीं हुए बल्कि उन्होने विद्या ग्रहण करने का दृढ़ संकल्प ले लिया और वही जंगल मे द्रोणाचार्य की मूर्ति बनाकर और उनका ध्यान करते हुये विद्या सीखने लगे.द्राेणाचार्य जाे भी अपने शिष्याें काे सिखाते वह eklavya छिप कर देखते फिर उसका गहन अभ्यास करते.
एक बार जब द्रोणाचार्य अपने शिष्यों के साथ आखेट के लिए जंगल मे गये तो उनके साथ एक कुत्ता भी गया था जाे कि आश्रम में ही रहता था. अचानक से वह कुत्ता उस स्थान पर जाकर भौकने लगा जहां eklavya अभ्यास कर रहे थे.कुत्ते की भौकने की आवाज द्रोणाचार्य को भी सुनाई दे रही थी.वह उस तरफ बढ़ ही रहे थे कि अचानक से आवाज आनी बंद हो गयी.वे तेजी से वहा पहुंचे तो देखा कि किसी ने कुत्ते को कोई हानि पहुँचाए उसका मुँह बाणाें से भर दिया है.यह देख कर द्रोणाचार्य आश्चर्य में पड़ गये क्योंकि ऐसी विद्या केवल अर्जुन ही जानते थे और उन्होने अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी का आशीर्वाद दिया था.
द्रोणाचार्य ने विस्मित होकर एकलव्य से पूछा ..तुमने ऐसा कैसे किया.
तब eklavya ने सारी बात बता दी,उसने कहा मैने आपकी एक मूर्ति बनाई और आपका ध्यान करके कड़ा अभ्यास किया,लेकिन द्रोणाचार्य ने अर्जुन को सबसे बड़ा धनुर्धारी घोषित कर दियाथा सो उन्होंने एकलव्य से कहा कि तुमने मेरी मूर्ति के सामने मेरा ध्यान कर के यह विद्या ,ज्ञान अर्जित किया है, तो तुम्हें गुरु दक्षिणा भी देनी पड़ेगी.
eklavya story in hindi

bhagwaan vishnu

इस पर eklavya सहर्ष तैयार हो गया.तब द्रोणाचार्य ने उससे उसके दाहिने हाथ का अंगूठा मांग लिया.जिस पर eklavya मुस्कुराए और बोले गुरुदेव मेरे लिए यह किसी सौभाग्य से कम नहीं है कि आपने मुझे अपना शिष्य माना.अगर आप मेरी मृत्यु भी मुझसे मांगते तो भी मैं खुशी से दे देता और उसने यह कहते हुए पना अंगूठा दे दिया और गर्व से कहा कि वह द्रोणाचार्य शिष्य एकलव्य है.

 श्री कृष्ण ने एकलव्य का वध क्यो किया ? eklavya story in hindi 

विष्णुपुराण के हरिवंशपुराण के अनुसार निषादराज बनने के बाद eklavya ने जरासंध की तरफ से मथुरा पर आक्रमण किया और श्रीकृष्ण की सेना मे हाहाकार मचा दिया. मात्र चार उंगलियों से भीषण प्रहार करते देख भगवान कृष्ण को भी विश्वाश नहीं हुआ.उसी महायुद्ध में भगवान कृष्ण के हाथों एकलव्य मारा गया.दाेस्ताें यह eklavya story in hindi कैसी लगी अवश्य बताएं और eklavya story in hindi की तरह की hindi stories के लिये ब्लॉग को सबस्क्राइब कर लें और अन्य bhakti stories के लिए इस लिंक पर क्लिक करें.

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Abhishek Pandey

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