Forts in Maharashtra : महाराष्ट्र के प्रसिद्ध मुख्य किले।  जाने प्रमुख किलों के बारे में।
Forts in Maharashtra

Forts in Maharashtra : महाराष्ट्र के प्रसिद्ध मुख्य किले। जाने प्रमुख किलों के बारे में।

Forts in Maharashtra in Hindi महाराष्ट्र के प्रमुख किले

 

 

Forts in Maharashtra  आइये आज महाराष्ट्र के प्रमुख किलों के बारे में जानते है।

 

 

१- विजय दुर्ग – यह मुंबई से ४८५ किलोमीटर दूर सिंधुदुर्ग जिले में स्थित है।  यह अरब सागर और सह्याद्री पहाड़ियों के बीच में स्थित है। यह मराठा शास न के दौरान नौसेना बेस के रूप में काम किया और इस समय भी एक बंदरगाह के रूप में सेवा दे रहा है।

 

 

 

यह एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है।  यहां नारियल के पेड़ बहुतायत पाए जाते हैं।  यहां अल्फांसों आम के भी काफी पेड़ हैं। यहां के घर लाल लकड़ी और पट्टों वाली छतों से बनते हैं जो कि यहां सुंदरता को और भी निखार देता है।

 

 

 

इसे छत्रपति शिवाजी ने १७वीं सदी में बनवाया था। यह वास्तुकला का भी बेहतरीन उदाहरण है। यह मराठा शासन में की गयी लड़ाइयों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

 

 

 

अगर आप विजय दुर्ग जाना चाहते हैं तो पणजी से टैक्सी के माध्यम से जा सकते हैं या फिर पुणे – मुंबई से सड़क मार्ग और राज्य की सरकारी बसों से भी जा सकते हैं और आप स्वतः के वाहन से भी सड़क मार्ग से जा सकते हैं।

 

 

 

महाराष्ट्र के प्रमुख किले 

 

 

 

२- प्रतापग्रह किला – यह सतारा जिले में स्थित है जो कि पश्चिमी महाराष्ट्र में हैं।  यह भी एक बहुत ही मशहूर पर्यटक स्थल है। जो मराठा शासन के कई युद्धों का गवाह है।

 

 

 

यह महाबलेश्वर से २३ किलोमीटर की दूरी पर पश्चिमी में स्थित है। इसकी समुद्र तल से ऊंचाई ३५४० फ़ीट है।  इसे शिवाजी के कहने पर “मोरोपंत त्रिम्बक पिंगले जो कि शिवाजी के दरबार में बहुत बड़े पद पर थे” ने बनवाया था।

 

 

यह किला कोयना और नीरा नदी के किनारे हुआ है।  १६५६ में यह बनकर तैयार हुआ और १६५९ में शिवाजी और अफ़ज़ल खान का युद्ध इसी किले की प्राचीर के नीचे लड़ा गया था। इस किले के निचले भाग में तुलजा भवानी का एक मंदिर बना हुआ है।  किले के दूर पर अफ़ज़ल खान की दरगाह है।

Forts in Maharashtra की जानकारी 

 

 

 

३- रायगढ़ किला – यह रायगढ़ जिले के महाड में स्थित है। यह पहाड़ियों पर बना हुआ है। इसका निर्माण भी छत्रपति शिवाजी ने ही कराया था और १६७४ में इसे अपनी राजधानी घोषित किया।

 

 

 

इस तरह से यह किला अन्य से काफी महत्वपूर्ण हो गया।  यह समुद्र तल से २७०० फ़ीट ऊंचाई पर है।  किले तक पहुँचने के लिए १७३७ सीढ़ियां हैं।  लेकिन आज कल वहाँ रोपवे भी कार्यकत है। जिससे वहाँ पहुंचने में २० मिनट का समय लगता है।

 

 

 

 

४- पन्हाला फोर्ट – यह किला महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के उत्तर पश्चिम में २० किलोमीटर की दूरी पर है। यह किला इस समय जीर्ण हो गया है,लेकिन इसके कुछ संरचनाये अभी भी मौजूद है।  इसका निर्माण राजा भोज ने ११७८ से १२०९ के बीच कराया था।

 

५- सिंहगढ़ किला – यह किला महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है जो कि पुणे से ३० किलोमीटर दूरी पर है। यह किला कई महत्वपूर्ण युद्धों का गवाह है।  जिसमें सिंहगढ़ का युद्ध सबसे महत्वपूर्ण सबसे महत्व रखता है जो कि १६७१ में लड़ा गया था। इसी किले में शिवाजी के छोटे पुत्र राजाराम की मृत्यु हुई थी।  उनकी समाधि आज भी यहां मौजूद है।

 

 

 

६- शिवनेरी किला – यह पुणे में स्थित है। शिवनेरी शिवाजी महाराज का जन्मस्थान है।  यह एक ऐतिहासिक किला है।  शिवनेरी के चारो तरफ मौजूद चट्टानें इसे अभेद्य बनाती हैं।  किले में एक तालाव भी है जिसे बादामी तालाब कहते हैं।

 

 

Forts in Maharashtra वसई का किला

 

 

७- वसई फोर्ट – वसई फोर्ट का बहुत ही ऐतिहासिक महत्व है।  वसई किला को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा प्राप्त है। यह मुंबई से लगभग ४८ किलोमीटर दूर पालघर जिला के वसई गाँव में है।  यहां आने के लिए आपको वसई रोड स्टेशन पर उतरना होगा।  वसई रोड पश्चिम रेलवे का प्रमुख स्टेशन है।

 

 

स्टेशन से आपको ऑटोरिक्शा बडे ही आराम से मिल जाएगा।  वैसे आप हाइवे नो ८ से वसई फाटा या तुंगारफाटा से वसई गाँव के लिए आ सकते हैं।

 

 

 

इसे Bassein Fort भी कहा जाता है।  यह वसई पश्चिम में है।  वसई किला बहुत ही विशाल है जो कि १०९ एकड़ में फैला है।  इसे मराठी में ” वसई चा किल्ला ” कहते हैं।  इस किले पर पुर्तगालियों, मराठों, अंग्रेजों और गुजरात के शासकों का कब्ज़ा रहा है।

 

 

 

यहां पुर्तगालियों द्वारा बनवाये गए कैदखाने के अवशेष आज भी मौजूद हैं।  वहाँ के लोग बताते हैं कि यहां कई चर्च थे जिसमें ३ चर्चों के अवशेष अभी भी मौजूद है।

 

 

 

इस किले से पुरे समुद्री क्षेत्र की निगरानी की जा सकती है।  इस किले में ११ दुर्ग है और दो गेट है।  इस किले को बनवाने की शुरुआत गुजरात के सुल्तान Maliq Tughan ने १५३३  में की।

 

 

 

उसके बाद १५३४ में पुर्तगालियों ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया और इसे फिर से बनवाना शुरू किया।  उन्होंने इस किले को बहुत ही मजबूत बनवाया और उसके अगल बगल ११ और भी दुर्गों का निर्माण करवाया।

 

 

 

१७३९ में मराठा पेशवा शासक पेशवा बाजीराव के भाई चिमाजी अप्पा ने इस किले को जीत लिया।  वसई को पूर्व और पश्चिम में बाटने वाले रेलवे पुल पर उनकी प्रतिमा उनके सम्मान में लगाई गयी है।

 

पुर्तगालियों के समय वसई व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र था।  वसई आज भी बहुत ही विकसित है।  पुर्तगालियों ने अपनी नौसेना को इस किले से मजबूती दी और यह किला समुद्री व्यवसाय का प्रमुख केंद्र था।

 

 

 

यहां समुद्री जहाज़ों का निर्माण होता था।  उन्होंने यहां तमाम चर्च, अनाथालय आदि बनवाया।  नरवीर चिमाजी अप्पा के साथ हुए युद्ध में इस किले को भारी छति  हुई।

 

 

 

नरवीर चिमाजी अप्पा ने ही इस किले में मंदिरों का निर्माण करवाया।  १८०२ में बाजीराव द्वितीय के विरुद्ध यशवंत राव होल्कर ने विद्रोह कर दिया।  इस युद्ध में बाजीराव द्वितीय की हार हो गयी।

 

 

उसके बाद अंग्रेजों और बाजीराव द्वितीय के बीच संधि हुई।  इस संधि को Bassein Sandhi के नाम से जाना जाता है।  इस लिए इस किले को Bassein Fort भी कहते हैं।

 

 

 

 

आज के समय में यह किला ज्यादा भीड़भाड़ का हिस्सा नहीं है।  यहां छुट्टी के दिनों में कालेज के ग्रुप और उसके साथ ही और भी बहुत लोग घूमने आते हैं।

 

 

 

गर्मी के दिनों में यहां आने वाले लोगों की संख्या बढ़ जाती है।  यह एक लवर पॉइंट भी बन चुका है। शांत और सुरक्षित स्थान होने के कारण यहां प्रेमी जोड़े आते हैं।

 

वसई किला १५५७ में जन्में भारत के पहले सेंट गोंसालो गार्सिया की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्द है।  यह किला चर्च ऑफ़ सेंट पॉल और चर्च ऑफ़ डॉमिनिकंस सहित सात चर्चों के लिए मशहूर है।  अभी इसमें से ज्यादातर ध्वस्त हो चुके हैं या फिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं।

८- शनिवार वाड़ा – यह किला पुणे में स्थित है। इसे १७३२ में बनवाया गया।  १८१८ तक इस किले पर मराठा पेशवा शासकों का कब्जा रहा। इस किले के ५ दरवाजे हैं।  दिल्ली दरवाज़ा, मस्तानी दरवाजा, गणेश दरवाजा, नारायण दरवाजा, और खिड़की दरवाजा।

 

 

 

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