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Haunted Places in India in Hindi . भारत के डरावने स्थान जानिये उसके बारे में

Haunted Places in india
Written by Abhishek Pandey

Haunted Places in India in Hindi भारत के डरावने स्थान

 

 

 

Haunted Places in India दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो कि bhoot pret पर विश्वास नहीं करते, लेकिन उनकी संख्या बेहद ही कम. भूत प्रेत को मानने वालों की संख्या ही अधिक है.

 

 

 

आज के वैज्ञानिक जीवन में अगर आप लोगों के सामने bhoot pret  की बात करेंगे तो हो सकता है कि वे इस बात को हसीं में उड़ा दें, लेकिन इतना सत्य है कि वे इससे इनकार नहीं कर पायेंगे, क्योकि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है.

 

 

 

आज भी पुरे विश्व में कई ऐसी जगहें हैं जो कि रहस्य बनी हुई है. आज हम उन्ही जगहों में से एक बेलीगारद जहाँ है भूतों का डेरा के बारे में  बताने जा हूँ.

 

 

 

बेलीगारद यानि की रेजीडेंसी उस स्थान पर है जो पुराने लखनऊ को नए लखनऊ से जोड़ता है. एक समय था जब कोई भी इस जगह की तरफ रात में आने की हिम्मत नहीं कर पाता था.

 

 

 

दिन में भी खासकर दोपहर लोगों को इस तरफ आने में पसीने छुट जाते थे. आज चूँकि वैज्ञानिक युग है फिर उस दर की यादें लोगों के जेहन में ताजा हैं और इस जगह की बात छिड़ने पर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

 

 

 

Haunted Places in india

Haunted Places in India in Hindi

 

 

 भारतीय डरावने स्थान 

 

 

 

यह  बात  १९७१ की है. उस समय लखनऊ विश्वविद्यालय के तीन छात्रों (जो कि अच्छे मित्र थे)   ने शर्त रखी की किसकी हिम्मत है जो कि इस  रेजीडेंसी में पूरी रात  अकेले रुक सके.

 

 

 

दरअसल यह शर्त इसलिए लगी थी क्योंकि १८५७ में मारे गए अंग्रेज सैनिको के कब्रिस्तान हैं और सभी कब्रों पर लगे पत्थरों पर उनके नाम भी लिखे हुए हैं, यही कारन था कि कोई भी रात को यहाँ नहीं रुकता था.

 

 

 

अब उनमें से एक दोस्त ने हिम्मत दिखाई और रात में रुकने के लिए हाँ कह दिया. अब तीनों दोस्त अगले दिन सफेद कुर्ते पायजामे में विश्वविद्यालय से निकले और नवादा कालेज और पक्का पुल के रास्ते रेजीडेंसी  अर्थात बेलीगारद पहुंचे. रात के लगभग ११ बज चुके थे, चारो तरफ अँधेरे का स्वामित्व हो चुका था. इक्का दुक्का तांगे काफी देर के बाद आ रहे थे और वे भी सरपट निकल जा रहे थे.

 

 

 

 

रेजीडेंसी की चाहरदिवार टूटी हुई थी, कोई भी बड़ी ही आसानी से अन्दर बहुंच सकता था. इसका फायदा उन तीनों दोस्तों ने उठाया और तनों रेजीडेंसी में प्रवेश कर गए.

 

 

 

 

रात लगभग १२ बजे या कुछ समय पहले बाकि दो दोस्त निकल गए और शर्त के अनुसार एक दोस्त उस सुनसान, भयावह  horror बेलीगारद में रुक गया. सुबह जब दोनों दोस्त उससे मिलने गए तो उनकी चीख निकल गयी क्योंकि वहाँ उनका दोस्त नहीं बल्कि उसकी लाश थी.

 

 

 

Haunted Places in India भारत के कई सारे डरावने स्थान 

 

 

 

 

पुलिस के डर से दोनों दोस्त भाग गए. उसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम कराया तो पुलिस के साथ ही हर कोई हैरान रह गया.

 

 

 

रिपोर्ट के अनुसार उसकी मौत बेहद बुरी तरह से डरने की वजह से उसकी मौत हो गयी थी. उसे हार्ट अटैक हुआ था. आज भी लोग उस जगह रात को जाने से डरते हैं.

 

 

 

कहा जाता है कि पहले जब कोई रात को यहाँ से गुजरता था तो एक आदमी सफेद कपडे पहने उससे माचिस मांगता था और माचिस दे देने पर उसकी मौत सुनिश्चित थी और ना देने पर भी तबियत बेहद खराब हो जाती थी.

 

 

 

इस घटना ने लोगों की मन में बेहद खौफ भर दिया था. जब उन भागे हुए छात्रों से पुलिस ने पूछताछ की तो सारी कहानी सामने आ गयी.अब सरकार ने इसे संरक्षित करवा दिया है.

 

 

 

 

चारो तरफ लाइट्स लगवा दी गयी हैं. चाहरदीवारी को बड़ा और मजबूत बनवा दिया गया है. अब वहाँ पुलिस की गश्त भी होती रहती है. क्योंकि इस घटना के सरारती तत्व लोगों को बेवजह डराकर परेशान करने और उन्हें लुटने लगे थे.

 

 

 

मसूरी का डरावना होटल 

 

 

२- Mussoorie ke Hotel Saway ka Rahasy – आज हम आपको पहाड़ो की मल्लिका, पहाड़ों की रानी मसूरी की एक रोमांचक और भयानक घटना से अवगत करायेंगे.

 

 

 

पहाड़ों की रानी मसूरी में जैसे ही दिन खत्म होने लगता है और रात का अन्धेरा दूर-दूर तक फैली पहाड़ियों को अपने आगोश में लेता है तो वहीं शुरू होता है बुरी शक्तियों का तांडव.

 

 

 

आज हम बात करने जा रहे हैं मसूरी के होटल सवाय की. यह बहुत समय पहले मसूरी के प्रसिद्ध होटलों में से एक था. सवा सौ साल पुरानी यह इमारत आज मसूरी के इतिहास का हिस्सा है.

 

 

 

कहा जाता है कि घनी काली रात मीन यह होटल ठीक वैसे ही गुलजार हो जाता है जैसे कब्रिस्तान नयी कब्र खुदने के बाद या फिर कोई श्मशान नेई चिता के सुलगने के बाद.

 

 

 

Haunted Places in india in Hindi

Haunted Places in India in Hindi

 

 

मसूरी के मध्य में स्थित इस होटल में रात के अँधेरे में एक साया बेचैन हो जाता है. वह कभी गलियारों में चहलकदमी करता है तो कभी खिडकियों से झांकता है.

 

 

 

१२१ कमरों के इस आलिशान होटल के वीरान और सुनसान पड़े कमरों में अब सिर्फ उसका ही राज चलता है. लोगों का कहना है कि यह सिर्फ कही-सुनी बातें नहीं है…बल्कि हकीकत से वास्ता है. तो चलिए Mussoorie ke Hotel Saway  इसके रहस्य को जानते हैं.

 

 

 

यह सवाय होटल पहले अर्थात १९वीं शताब्दी में मसूरी  स्कूल था . जिसका नाम बदलकर बाद में मेडाक स्कूल रख दिया गया. इस स्कूल को इग्लैंड से आये लिंकन ने १८९० में खरीदा और लगभग १२ वर्ष की मेहनत के बाद वर्ष १९०२ में इसे इंग्लैण्ड के तब की मशहूर होटल सवाय के तर्ज पर बनाने में कामयाबी  हासिल की. यह १२१ कमरों का आलीशान और बेहद ही ख़ूबसूरत होटल था. उस समय इस होटल की हर शाम गुलजार हुआ कराती थी.

 

 

 

Haunted Places in India in Hindi 

 

 

 

लेकिन अचानक घटी एक घटना ने इस होटल को वीरान बना दिया. दरअसल उस होटल में एक ब्रिटिश महिला का क़त्ल हो गया. इस घटना से हर कोई अवाक रह गया.

 

 

 

इस घटना की गूंज हर जगह सुनाई देने लगी. सभी के बीच खलबली मची हुई थी. ऐसा नहीं था कि वह महिला कोई विआईपी थी. बल्कि इसका कारण कुछ और ही था.

 

 

 

 

दरअसल लेडी गारनेट आर्मे की लाश मौत के कई दिनों बाद होटल के कमरे से मिली थी. इसके बावजूद वह पूरी तरह ताजा मालुम पड़ रही थी. लेकिन यह मामला पुलिस की डायरी में दब गया.

 

 

 

उनकी डेड बॉडी का क्या हुआ इसके बारे में भी किसी को कोई खबर नहीं हुई. बात आई-गयी हो जाती, लेकिन इसी बीच दो और क़त्ल हो गए . एक उस डॉक्टर का जिसने लेडी गारनेट का पोस्टमार्टम किया था और एक उनके पेंटर का.  इन दो मौतों ने लोगों के बीच खौफ भर दिया.  इसके बाद लोगों में डर हो गया, लेकिन सवाय की खूबसूरती लोगों को होटल की तरफ खीच ही लाती थी.

 

 

 

 

कुछ लोगों का कहना था कि इस होटल का मालिक लिंकन एक सीरियल किलर था . यहाँ जो भी बातें होती..गलत क्काम होते वह इस होटल की दीवारों में दफन हो जाते और जो भी इसे बाहर ले जाने की कोशिश करता उसे सदा के लिए मौत के हवाले कर दिया जाता था.

 

 

 

 

इतिहासकारों की माने तो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह होटल ब्रिटिश और अमेरिका की सेनाओं का ठिकाना रहा. इस होटल में क़त्ल का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा, लेकिन बात तब बढ़ी जब इस होटल पर आत्माओं ने कब्ज़ा ज़माना शुरू किया.

 

 

 

 

इसके बाद जिस किसी ने भी इस होटल को खरीदा उसे सिर्फ एक ही चीज मिली बर्बादी.  उसके बाद से इस होटल को लेडी आर्मे ने अपना ठिकाना बना लिया है. आज यह होटल पूरी तरह से बंद है, लेकिन लोगों के अनुसार आज भी इस होटल में लेडी आर्मे की आत्मा भटकती है.

 

 

Kuldhara Village Story in Hindi

 

 

भारत देश तमाम तरह के रहस्यों से भरा हुआ है. आज उन्ही रहस्यों में से एक कुलधरा गाँव की कहानी  आपको बताने जा रहा हूँ.

 

 

कुलधरा  पिछले १७० सालों इतिहारकारों के अनुसार कुलधरा के पालीवाल ब्राह्मण बहुत ही उद्यमी और धनवान थे.राजस्थान के जैसलमेर शहर से 18 किमी दूर स्थित  कुलधरा गाँव आज से ५०० साल पहले ६०० घरो और 84 गावो का पालीवाल ब्राह्मणों का साम्राज्य ऐसा राज्य था जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है.

 

 

Kuldhara Village Story in Hindi

 

 

 

रेगिस्तान के बंजर धोरो में पानी नहीं मिलता वहाँ पालीवाल ब्राहमणों ने ऐसा चमत्कार किया जो इंसानी दिमाग से बहुत परे थी. उन्होंने जमीन पर उपलब्ध पानी का प्रयोग नहीं किया और न ही बारिश के पानी को संग्रहित किया बल्कि रेगिस्तान के मिटटी में मोजूद पानी के कण को खोजा और अपना गाव जिप्सम की सतह के ऊपर बनाया.

 

 

 

उन्होंने उस समय जिप्सम की जमीन खोजी ताकि बारिश का पानी जमीन सोखे नहीं और आवाज के लिए गाव ऐसा बंसाया की दूर से अगर दुश्मन आये तो उसकी आवाज उससे 4 गुना पहले गाव के भीतर आ जाती थी.

 

 

 

हर घर के बीच में आवाज का ऐसा मेल था जेसे आज के समय में टेलीफोन होते हे. जैसलमेर के दीवान और राजा को ये बात पसंद नहीं आई कि ब्राह्मण इतने आधुनिक तरीके से खेती करके अपना जीवन यापन कर रहे हैं .

 

 

 

उन्होंने खेती पर कर लगा दिया पर पालीवाल ब्राह्मणों ने कर देने से मना कर दिया.उसके बाद दीवान सलीम सिंह को गाव के मुखिया की बेटी पसंद आ गयी तो उसने कह दिया या तो बेटी दीवान को दे दो या सजा भुगतने के लिए तयार रहे.

 

 

 

ब्राह्मणों को अपने आत्मसम्मान से समझोता बिलकुल बर्दाश्त नहीं था इसलिए रातो रात ८४ गाँव की एक महापंचायत बैठी और निर्णय हुआ की रातो रात kuldhara खाली करके वो चले जायेंगे.

 

 

Kuldhara Story

 

 

 

रातो रात ८४ गाँव के ब्राह्मण कहा गए कैसे गए और कब गए इस चीज का पता आजतक नहीं लगा. पर जाते जाते पालीवाल ब्राह्मण श्राप दे गए की ये kuldhara हमेशा के लिए वीरान हो जायेगी.

 

 

 

इस जमीं पर कोई बस नहीं सकेगा और जो ऐसी हिमाकत करेगा. वह मृत्यु को प्राप्त होगा. तभी सेkuldhara villageशापित हो गया.कहा जाता है कि उसके बाद कई लोगों ने इसे मिथ्या मानकर वहाँ बसने की कोशिश की, लेकिन या तो वे डरकर भाग गए या फिर वह सदा के लिए वहीँ के होकर रह गए अर्थात उनकी मृत्यु हो गयी.

 

 

 

आज भी  कुलधरा गाँव  क्षेत्र में आते ही मोबाइल और रेडियों तरंगे बंद हो हाती हैं और उस क्षेत्र से बाहर निकलते ही फिर से तरंगे आने लगती है.पर्यटक यहां इस चाह में आते हैं कि उन्हें यहां दबा हुआ सोना मिल जाए.

 

 

 

इतिहासकारों के मुताबिक पालीवाल ब्राह्मणों ने अपनी संपत्ति जिसमें भारी मात्रा में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात थे ,उसे जमीन के अंदर दबा रखा था.

 

 

 

यही वजह है कि जो कोई भी यहां आता है वह जगह-जगह खुदाई करने लग जाता है. इस उम्मीद से कि शायद वह सोना उनके हाथ लग जाए. यह गांव आज भी जगह-जगह से खुदा हुआ मिलता है.

 

 

मई २०१३ में दिल्ली से आई पैरानार्मल सोसायटी की टीम { जो भूत प्रेत का रिसर्च करती है ) ने एक रात kuldhara village में बिताई . टीम ने भी माना की यह जगह अन्य जगहों की तरह सामान्य नहीं है.

 

 

 

उन्होंने वहाँ कई तरह के पैरानार्मल एक्टिविटी महसूस की. टीम के एक सदस्य ने बताया की कोई कई बार उनके कंधे पर हाथ रखकर थपथपाता, लेकिन पीछे देखने पर कोई नहीं रहता.

 

 

 

पैरानार्मल सोसायटी के उपाध्यक्ष अंशुल शर्मा ने बताया कि हमारे पास एक डिवाइस है जिसका नाम घोस्ट बाक्स है. इसके माध्यम से हम ऐसी जगहों पर रहने वाली आत्माओं से सवाल पूछते हैं.

 

 

 

कुलधरा गाँव  में भी ऐसा ही किया जहां कुछ आवाजें आई तो कहीं असामान्य रूप से आत्माओं ने अपने नाम भी बताए. शनिवार चार मई की रात्रि में जो टीम  कुलधरा गाँव  गई थी उनकी गाडिय़ों पर बच्चों के हाथ के निशान मिले.

 

 

राजस्थान सरकार ने इसे पर्यटक क्षेत्र घोषित कर दिया है. यहाँ पर रोजाना हजारों की संख्या में लोग आते हैं. यहाँ आने वालों को भी वहाँ की रूहानी ताकतों का एहसास होता है.

 

 

 

प्रशासन ने कुलधरा  की सरहद पर एक फाटक बनवा दिया है. दिन में तो यहाँ अवश्य ही चहल पहल होती है , लेकिन रात को इस फाटक को पार करने की किसी की हिम्मत नहीं होती है.

 

 

Bhangarh Fort Horror Story 

 

 

भानगढ़ किला भारत के प्रसिद्ध डरावने स्थानों में से एक हैं।  लेकिन कई लोग मानते हैं कि जिस तरह  दिन है वैसे रात भी है…अगर पाप है तो पुण्य भी है…ईश्वर भी है तो राक्षस भी हैं। इसी तरह से भूत भी होते हैं।  आईये अब भानगढ़ किले के बारे में विस्तार से जानते हैं।

 

 

 

भानगढ़ किला राजस्थान के अलवर में सरिस्का अभयारण्य की सीमा पर अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों के साथ स्थित है। वैसे तो राजस्थान में कई किले हैं और सभी अपनी प्रसिद्धि के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन भानगढ़ का किला उनसे बिल्कुल अलग है।

 

 

 

भूतिया किला होने के कारण वहाँ सरकारी आदेश है कि किसी कको भी शाम ६ बजे के बाद यहां नहीं रुकने दिया जाए और इसीलिये लोगों को वहाँ से ५.३० बजे से हटा दिया जाता है।

 

 

Bhangarh Story in Hindi

 

 

 

इतिहास के अनुसार, भानगढ़ का किला १५७३ में आमेर के राजा भगवंत दास ने अपने छोटे बेटे माधो सिंह के लिए बनवाया था। इसके बाद ३ पीढ़ियों ने इस नगर पर शासन किया।

 

 

 

माधोसिंह का भाई मान सिंह था, जो कि अकबर का सेनापति था।  माधोसिंह को उनके पुत्र चतर सिंह को उत्तराधिकारी बनाया गया।  चतर सिंह अजब सिंह का पुत्र था, जिसने अजबगढ़ का किला बनवाया था।

 

 

 

भानगढ़ किले का निर्माण बहुत ही सुन्दर तरीके से किया गया है। यह तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा होने के कारण काफी सुरक्षित है। यह एक बहुत बड़ा किला है और  वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इस किले में भगवान शिव, महाबली हनुमान, भगवान सोमेश्वर के प्राचीन मंदिर हैं।

 

 

 

 

इस किले की कई तरह की कहानियां है।  यहां एक बहुत बड़े तांत्रिक साधू रहते थे।  उनका नाम गुरु बालुनाथ था।  वे पहाड़ी पर एक झोपड़ी में रहते थे।

 

 

 

जब राजा भगवंत सिंह किले का निर्माण करवा रहे थे।  तब गुरु बालूनाथ ने एक शर्त रखी कि यह किला उनके झोपड़ी को ढकना चाहिए अर्थात किला उनके घर से ऊंचा नहीं होना चाहिए।  सभी इस शर्त को स्वीकार कर लिया, लेकिन अज़ब सिंह ने किसी भी कीमत पर इस शर्त को स्वीकार नहीं किया।

 

 

 

अज़ब सिंह के जिद के आगे किले का निर्माण शुरू किया गया और खम्बे के दो जोड़े उनके कुटी के ठीक आ गया और उसकी छाया उनके कुटी पर पड़ने लगी।  इससे साधू बहुत नाराज हुए और उन्होंने श्राप दे दिया।

 

 

 

जिसके वजह से किला और उसके अगल – बगल के गाँव नष्ट हो गए।  वहाँ अभी भी एक छोटी सी पत्थर की कुटिया है, जिसे तांत्रिक की छतरी के नाम से जाना जाता है।

 

 

 

 

भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बहुत खूबसूरत थी। पूरे राज्य में उनकी सुंदरता की चर्चा थी। उनके लिए शादी के कई प्रस्ताव आ रहे थे। इस राज्य में, एक काला जादू करने वाला तांत्रिक सिंधु सेवदा रहता था। कहीं-कहीं इसका नाम शिंधिया भी लिखा गया है। वह बहुत स्वार्थी और क्रूर था।

 

 

 

जब राजकुमारी  रत्नावती की चर्चा उस तांत्रिक के पास पहुंची तो वह राजकुमारी  को पाने के उतावला हो उठा।  उसने राजकुमारी को ढूढना शुरू किया।

 

 

 

कहा जाता है कि एक बार राजकुमारी अपनी सहेलियों और नौकरानी  के साथ बाजार घूमने के लिए निकलीं।  उसी समय काले जादूगर उस तांत्रिक साधू की नजर राजकुमारी रत्नावती पर पड़ी।

 

 

 

वह राजकुमारी की सुंदरता पर पागल था और राजकुमारी को किसी तरह हासिल करना चाहता था। इसके लिए उन्होंने काले जादू का इस्तेमाल किया।

 

 

 

 

एक दूकान पर राजकुमारी ने अपनी नौकरानी को केश तेल लाने को कहा।  तांत्रिक सिंधु सेवड़ा ने उस तेल पर काला जादू कर दिया।  उन्होंने उस तेल को अभिमंत्रित कर कहा कि जो भी इस तेल का उपयोग करेगा वह सम्मोहित होकर सिंधु सेवड़ा के पास आ जाएगा।

 

 

 

 

जब दासी इस केश तेल को राजकुमारी के पास ले गयी तो राजकुमारी ने महसूस किया कि इस तेल पर काला जादू किया गया है।  राजकुमारी को भी मन्त्रों का अच्छा ज्ञान था।

 

 

 

उसने नौकरानी को यह तेल एक चट्टान पर फेंकने का आदेश दिया। नौकरानी ने वैसा ही किया। जैसे ही तेल चट्टान पर गिरा, चट्टान कई हिस्सों में टूट गई और उसका एक हिस्सा बहुत तेज़ी से उस काले जादूगर की ओर बढ़ा और उस पर गिर पड़ा क्योंकि वह पहाड़ी उस काले जादूगर के मन्त्रों से प्रभावित हो गयी थी।

 

 

 

लेकिन मृत्यु से पहले सिंधु सेवड़ा ने राजकुमारी, उसके परिवार और पुरे गाँव को श्राप दे दिया।  उसके अगले वर्ष भानगढ़ और अजबगढ़ की सेना के बीच एक लड़ाई लड़ी गई, जिसमें रानी रत्नावती और अधिकांश सेना की मृत्यु हो गयी।

 

 

 

Shaniwar Wada 

 

 

भारत के महाराष्ट्र के पुणे में स्थित है। इस किले की डरावनी कहानी है। यह भारत के भूतिहा किलों में से एक है। २४ फ़रवरी १८२८ को शनिवार वाडा किले में आग गयी।

 

 

 

इस आग पर ७ दिनों तक काबू नहीं पाया जा सका।  इस आग में अधिकांश किला जल गया था। आज इसके अवशेष बने हुए हैं। कहा जाता है कि अमावस्या की रात, एक दर्दनाक आवाज़ “बचाओ-बचाओ” की गुहार लगाती है। इस आवाज का राज क्या है? आज इस पोस्ट में हम इन सभी कारणों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

 

 

 

यह एक खुशहाल किला था। यह वर्षों से समृद्ध था।  यहां पेशवाओं का शासन था। मराठा इतिहास में पेशवा साम्राज्य का विशेष महत्व है।  पेशवा बहुत ही बहादुर थे।  उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ीं और जीतीं।

 

 

कुछ लोग कहते हैं कि अमावस की अँधेरी रात इस किले की सबसे भयानक रात होती है।  इस किले में रात को आत्माओं का तांडव होता है। पेशवा नाना साहब के तीन बेटे थे।

 

 

Shaniwar Story in Hindi

 

 

विश्व राव, माधव राव और नारायण राव।  स्थानीय लोगों के अनुसार पानीपत की लड़ाई के बाद जब पेशवा कमजोर हो गए और नाना साहेब की मृत्यु के बाद उनके बेटे माधव राव ने राज्य संभाला।

 

 

नाना साहेब के छोटे भाई रघुनाथ राव को राज्य के कामकाज की देखरेख की जिम्मेदारी दी गयी थी। लेकिन रघुनाथ राव इसमें विफल रहे।  परिणामस्वरूप उन्हें कैद कर लिया गया।

 

 

 

माधव राव ने पानीपत के तीसरे युद्ध में हार को अपनी गलती माना। उस युद्ध में मराठों को बहुत नुकसान हुआ। कई बड़े योद्धा शहीद हुए, जिनमें उनके बड़े भाई विशव राव भी शामिल थे।

 

 

 

इस शोक में माधव राव की भी मृत्यु हो गयी।  माधव राव की मृत्यु के बाद, नारायण राव को राज्य की जिम्मेदारी दी गयी। उस समय, नारायण राव केवल १४ वर्ष के थे।

 

 

 

उसी समय रघुनाथ राव जेल से रिहा हुए।  उन्होंने फिर से काम करना शुरू कर दिया। लेकिन रघुनाथ राव और उनकी पत्नी आनंदी बाई इस व्यवस्था से खुश नहीं थे।  वे पुरे साम्राज्य पर अधिकार चाहते थे।

 

 

 

नारायण राव इस बात को समझ गए थे।  उन्होंने रघुननाथ राव पर नजर रखना शुरू कर दिया। इस बीच, राघोबा ने नारायण राव को गिरफ्तार करने के लिए भीलों के प्रमुख समर सिंह को एक पत्र लिखा।

 

 

 

लेकिन आनंदी बाई ने लालच की पराकाष्ठा को पार करते हुए, पत्र में बदलाव किया और नारायण राव को मारने के लिए लिख  दिया। समर सिंह ने सही मौके पर नारायण राव पर हमला किया।

 

 

 

 

नारायण राव  मराठी में ” काका मला वाचवा ”  कहते हुए भागे।   लेकिन अंत में नारायण राव मारे गए और उनके शरीर को नारायण दरवाजा के माध्यम से बहा दिया गया। तब से नारायण राव की आत्मा वहाँ भटकती है। शनिवार वाड़ा की दीवारों से किसी के रोने की आवाजें सुनाई देती हैं।

 

 

Haunted Places in india in Hindi

Haunted Places in India in Hindi

 

 

दिल्ली कैंटोनमेंट रोड Haunted Places in India

 

 

इस रास्ते पर सफ़ेद साडी वाली औरत दिखती है।  दिल्ली के लोगों के लिए यह रास्ता पहले से ही भूतिया है। इस रास्ते से रात को गुजरते हुए काफी डर लगता है।

 

 

एन एच – ३३ रांची – जमदेशपुर 

 

यह देश का एकमात्र ऐसा हाइवे है, जहां हादसे स्वाभाविक कम अस्वाभाविक ज्यादा होते हैं।  इस हाइवे के दोनों कोनो पर एक मंदिर है और कहा जाता है कि जो भी इस मंदिर में बिना पूजा किये जाता है उसके साथ हादसा हो जाता है।  अधिकतर लोगों का ककहाना है इस रोड पर सफ़ेद साडी पहने एक लम्बी औरत दिखाई देती है।

 

 

मार्वे – मड आइलैंड रोड Haunted Places in India

 

 

यह आइलैंड जिनता खूबसूरत है उतना ही रहस्यों से भरा है।  यह रास्ता काफी संकरा है और सुनसान भी।  ड्राइवरों का कहना है इस रास्ते में रात के समय एक शादी का जोड़ा पहने महिला दिखाई देती है।  इसके साथ ही वहां डरावनी आवाजें आती हैं।

 

 

कसारा घाट 

 

 

मुंबई – नासिक हाइवे का कसारा घाट काफी डरावना है क्योंकि यहां भूत दिखाई देने और इसका एहसास होने के कई किस्से सामने आ चुके हैं। कभी किसी को बिना सर की बुजुर्ग महिला दिखाई देती है तो कभी पेड़ पर बैठा हुआ बुजुर्ग भूत।  सड़क के दोनों तरफ घना पेड़ होने के कारण यह रास्ता रात को बेहद डरावना हो जाता है।

 

 

 

मित्रों यह Haunted Places in India in Hindi आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Haunted Places in india in Hindi की तरह की और भी जानकारियों और कहानियों के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब जरूर करें और इस तरह की दूसरी और भी कहानियां नीचे पढ़ें।

 

 

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