Bhakti Story

जब मां लक्ष्मी को मिली सजा

जब मां लक्ष्मी को मिली सजा

जब मां लक्ष्मी को मिली सजा एक बार की बात है. ब्रह्म मुहूर्त के समय भगवान विष्णु जी के मन पृथ्वी पर भ्रमण का विचार आया. उन्होंने सोचा कि बहुत दिन हो गए है अतः एक पृथ्वी पर चलना चाहिए. अब वह पृथ्वी पर प्रस्थान की तैयारी में लग गए. जब माता लक्ष्मी ने यह देखा तो उन्होंने भगवान श्री हरी से पूछा ” भगवन इतनी सुबह कहा जाने की तैयारी हो रही है “, तब नारायण ने सारी कथा कह सुनाई. इस पर मां लक्ष्मी ने साथ चलने का आग्रह किया.

भगवान विष्णु ने कुछ देर सोचने के बाद कहा कि ठीक है, लेकिन एक शर्त है कि आप उत्तर दिशा की तरफ नहीं देखेंगी. मां लक्ष्मी यह समझ गयी इसमें अवश्य की कोई भगवान की लीला है, अतः वह इस शर्त को सहर्ष मान गयीं. सुबह सुबह मां लक्ष्मी और श्री हरी धरती पर पहुँच गए. अभी भगवान भास्कर अपने रथ पर आरूढ़ होकर पूर्व दिशा की ओर से प्रकट हो रहे थे, रात को बरसात हुई थी. चारो तरफ हरियारी छायी थी. बहुत ही मनोहर दृश्य था. इस सुन्दरता पर मां लक्ष्मी मन्त्र मुग्ध हो गयीं और इसी में वह श्री नारायण को दिए गए वचन को भूल गयीं और पृथ्वी की सुन्दरता को निहारते हुए कब उत्तर दिशा की ओर देखने लगीं , उन्हें खुद ही पता नहीं चला.

उत्तर दिशा की तरफ ही बहुत ही खुबसूरत बगीचा नजर आया. उसमें तमाम तरह के फूल खिले हुए थे, उसमें से मन को मोहने वाली खुसबू आ रही थी. उस खुशबू से कोई उस बगीचे की तरफ आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता था और वही हुआ भी. कुछ ही देर में मां लक्ष्मी उस बगीचे में पहुच गयीं और वहाँ से एक फूल तोड़ लिया. इतने में ही श्री नारायण वहाँ पहुंचे और कहा कि आपने अपना वचन तोड़ा है. अब मां लक्ष्मी को अपनी भूल का एहसास हो गया था.

उन्होंने अपनी भूल के लिए भगवान विष्णु से माफ़ी मांगी, लेकिन भगवान ने कहा कि आपने इस बगीचे के मालिक को बिना बताये ही यह फूल तोड़ा है. यह एक तरह से चोरी हुई, अतः आपको इसका प्रायश्चित करना होगा. आपको तीन कुछ दिनों तक इस बगीचे के मालिक के घर नौकरानी बनकर काम करना होगा…मां लक्ष्मी ने इसे स्वीकार कर लिया और एक गरीब महिला का रूप धारण करके उस माली के घर जा पहुँचीं.

जब मां लक्ष्मी को मिली सजा
जब मां लक्ष्मी को मिली सजा

वह बहुत ही गरीब था. उसका नाम माधव था और घर के नाम पर महज एक टूटा- फूटा झोपड़ा था. घर मीन वह और उसकी धर्मपत्नी और दो बेटे तथा दो बेटियाँ रहती थीं. सभी उस छोटे से बगीचे में काम करके किसी तरह से गुजर बसर कर रहे थे. जब मां लक्ष्मी उस माली के दरवाजे पर पहुंची तो माधव ने पूछा ” बहन आप कौन हैं . मैं आपको पहचाना नहीं. क्या काम है ?”

इस पर मां लक्ष्मी ने कहा मैं गरीब दुखियारी महिला हूँ. इस दुनिया में मेरा कोई नहीं है. मैंने कई दिनों से भोजन ग्रहण नहीं किया है. मुझे कोई भी काम दे दो, मैं उसे करुँगी. उसके बदले मुझे इस घर के किसी कोने में आसरा दे दो…मुझे और कुछ नहीं चाहिए बस दो जून की रोटी और रहने का ठिकाना, इसके बदले में मैं आपका हर कार्य करुँगी.

किसान को इसपर दया आ गयी. उसने कहा कि मैं बहुत गरीब हूँ..किसी तरह से दो जून की रोटी नसीब होती है. इस माता लक्ष्मी ने कहा ” जो भी घर में रुखा सुखा रहेगा…मैं उसे ही खाकर अपने पेट की अग्नि को शांत कर लूंगी.”

ठीक है..बहन, अन्दर आ जाओ ….किसान ने कहा. मां लक्ष्मी वहाँ अपने निश्चित समय तक नौकरानी बन कर रहीं. जिस दिन उन्होंने उस माली के घर में कदम रखा, उसी दिन से उसकी तक़दीर बदल गयी. दुसरे ही दिन माली को फूलों से इतनी अधिक आमदनी हुई कि वह बाजार से एक गाय खरीद लाया….उसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा….धीरे धीरे उसने ढेर सारी जमीन खरीद ली….घर भी अच्छा बनवा लिया…उसका और उसके परिवार का रहन-सहन बदल गया…अब वह गरीब नहीं रह गया था….जिसके घर में साक्षात मां लक्ष्मी निवास करें वह कैसे गरीब हो सकता है.

वह हमेशा ही सोचता था कि यह सब उस महिला के आनी की बाद ही हुआ है….जरुर यह कोई देवी हैं…एक दिन वह और उसका परिवार खेतों से काम कर वापस आ रहा था तो देखा कि उसके घर के दरवाजे पर वही महिला साक्षात मां लक्ष्मी के अवतार में खड़ी थीं. वह तुरंत ही पहचान गया और क्षमा माँगने लगा.इस मां लक्ष्मी ने कहा ” अब मेरे लौटने का समय आ गया है. इसीलिए आज मैं खेतों में नहीं आई थी. तुम बहुत ही दयालु और नेकदिल इंसान हो. मैं तुम्हें यह आशीर्वाद देती हूँ कि तुम्हारा घर सदैव ही धन धान्य से भरा रहे. तुम्हें कभी भी किसी चीज की कमी ना पड़े. ” यह कह कर मां लक्ष्मी अपने निवास को चली गयीं और वह माली ख़ुशी से रहने लगा. मित्रों यह कहानी जब मां लक्ष्मी को मिली सजा आपको कैसी लगी , अवश्य ही बताएं और साथ ही ब्लॉग को घंटी दबाकर सबस्क्राइब कर लें. अन्य कहानी के लिए इस लिंक https://www.hindibeststory.com/biography-of-rajanikant-in-hindi/ पर क्लिक करें.

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