hindi horror stories

hindi horror story भूतों की सच्ची कहानियां

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Written by Abhishek Pandey

hindi horror story दोस्तों यह एक सच्ची   कहानी है.    सर्दियों के दिन थे और सब को तो पता है कि सर्दियों में सब जल्दी सो जाते है . उस रात भी सब जल्दी सो गए .  रात के 11 बजे थे सिर्फ मैं जाग रहा था और TV देख रहा था .

 

 

मेरे घर के आगे गार्डन है और पीछे रास्ता है . तभी किसी ने जोर से आवाज लगाई .  मैंने सोचा इतनी रात को कौन बुला रहा है .  मैं उठा और कमरे से बाहर गया .  मैंने गार्डन में देखा कोई नहीं था .  मुझे लगा कोई किसी और को बुला रहा होगा.  मै कमरे के अंदर आकर टीवी देखने लगा .

 

 

तभी फिर से आवाज आई “आओ रोहन  .” मुझे लगा कोई मुझे ही बुला रहा है.  मैंने रास्ते पर देखा तोह एक औरत खड़ी थी, उसने घाघरा कमीज पहन रखा था और मुंह पर एक दुपट्टा ढक रखा था .

 

 

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मैं आराम से बोला “जी कौन”, वो कुछ नहीं बोली और मेरी तरफ हाथ से इसारा किया कि ‘मेरे पास आ .’ मुझे लगा कोई अपने ही मोहल्ले की होगी.  जैसे ही मैं उसके पास गया तो वो वहां नहीं थी.  मैंने चारों तरफ देखा तो वो दूर रास्ते पर सीधी चली जा रही थी . मैंने आवाज लगाई “कौन हो आप” पर वो कुछ नहीं बोली और हाथ से इशारा किया ‘मेरे पीछे आ .’

 

 

दोस्तों उस रात पूरा मोहल्ला खाली था, सभी सो रहे थे . थोड़ी दूर जाने के बाद मुझे  २  आदमी दिखाई दिए .  उन्होंने पूछा “कहाँ जा रहा है लड़के?” मैंने कहा “वो औरत देखो, उसी के पीछे . ” लेकिन वहां कोई नहीं था, वो औरत गायब हो चुकी थी .  मेरे डर के मारे पैर कांपने लगे . मैं डरते-डरते घर पहुंचा, रात के करीब एक बज चुके थे . मैं तुरंत बिस्तर में जाकर सो गया, लेकिन पूरी रात मेरी नींद नहीं लगी .

 

 

सुबह आसपास के लोगों से पता चला कि वो औरत एक भूतनी थी और अक्सर यहाँ भटकती रहती थी . जब वो मरी थी तो उसके पेट में बच्चा था . इसलिए बच्चों से उसको काफी लगाव था .  वह मुझे जहाँ ले जा रही थी वो शमशान था . वो मेरे साथ क्या करने वाली थी मुझे नहीं पता . लेकिन अब रात को कोई भी बुलाए मैं अकेला बाहर नहीं जाता . वो रात शायद मैं जिंदगी भर नहीं भूलने वाला .

 

 

 भूतों की सच्ची कहानियां ( True Ghost Story ) hindi horror story

 

 

यह एक सच्ची घटना है दोस्तों जो मेरे साथ तब घटी जब मई 8th class की पढ़ाई करने अपनी बुआजी के यहाँ ग्वालियर गया था  .  मेरी बुआजी जिस कॉलोनी रहती है वहां पे सामने एक पडोसी रहता था जिनकी  मां काफी समय से बीमार थी .  उस समय गर्मी भी बहुत पड़ रही थी .

 

एक दिन अचानक से रात मेरी तबियत बहुत बिगड़ गई और मैं बेहोश  हो गया . दोस्तों आप विस्वास नहीं करेंगे मेरे बेहोश होने के बाद क्या हुआ .  वो जो पडोसी की मां जो काफी समय से बीमार थीं उनकी आत्मा ने मेरे अंदर प्रवेश ले लिया और  मैं  लेडीज की आवाज में बात करने लगा .  यहाँ तक कि मैंने यह भी बता दिया कि मैं मर चुकी हूँ  और मुझे चन्दन की लकड़ी डालकर जलना .

 

 

घर के अंदर ज्वेलरी से भरा मटका जो कि उस पडोसी के मां  ने छुपा के रखा था उसका पता भी मैंने बता दिया। फिर अचानक मेरी बुआजी की सास ने मुझे हलुमांझी की भभूत खिला दी और मैं होश में आ गया .  दोस्तों यह मेरे साथ बीती सच्ची घटना है . आज भी उस रात को याद करके मैं डर जाता हूँ .

 

 

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3- bhayanak horror story :- विनय एक बीमा कंपनी में काम करते है.  उनकी कंपनी उनको एक जगह से दूसरे जगह ग्राहक से मिलने के लिए भेजती रहती है जिसके कारण वो अपना घर एक ठिकाने पर नहीं रख सकते थे.

 

 

इस बार उन को नेपाल के छोटे से पहाड़ी इलाके में जाना था करीब 1 महीनो के लिए. इसलिए इस बार उन्होंने अपनी पत्नी को भी साथ ले लिया.

 

 

परिवार में सिर्फ वो और उनकी पत्नी ही रहती थी. विनय और उसकी पत्नी दोनों नेपाल के लिए निकल पड़े वैसे भी ठण्ड का मौसम था और नेपाल में ऊपर से बहुत तेज़ बर्फ पड़ रही थी.

 

 

वो लोग अपने घर पहुँच चुके थे. अपने घर तक पहुँचने के लिए उनको बहुत संघर्ष करना पड़ा क्योंकि घर छोटे से गाँव में एक पहाड़ी इलाके में था। जिसकी वजह से दोनों बहुत थक चुके थे.

 

 

रात के 12:30 बज चुके थे. जहाँ वो रह रहे थे वहाँ दूसरे घर एक दुसरो से बहुत दूर दूर थे. बाहर ज़ोरो से ठंडी हवा और बर्फ गिर रही थी. दोनों अपने रजाई में दुबक कर आराम ही कर रहे थे की अचानक उनको लगा की किसी ने उनके घर का दरवाज़ा खटखटाया है. फिर उन्होंने सोचा की क्या पता तेज़ हवा चलने की वजह से ऐसा जो रहा हो इसी लिए उन्होंने उसको अंदेखा कर दिया.

 

 

 

अगली सुबह विनय जिस काम के लिए आया था उसके लिए वो निकल पड़ा उसकी पत्नी घर में अकेले ही थी. उसको समझ नहीं आ रहा था कि वो घर में बैठे वक़्त कैसे बिताए उसने सोचा की चलो क्यों न बाहर जा कर ही कुछ देख लिया जाए.

 

 

 

बाहर ठण्ड तो थी पर हवा नहीं चल रही थी. इसी लिए उसने अपना स्वेटर पहना और बाहर निकलने को तैयार हो गयी जैसे ही उसने अपना घर का गेट खोला वैसे ही देखती है कि घर के पास बने एक खम्बे के पीछे एक छोटा सा बच्चा खड़ा है.

 

 

जो उसको चुपके चुपके देख रहा है.  विनय की पत्नी ने उसको अपनी और बुलाया पर वो नहीं आया और वो वहाँ से भाग गया.

 

 

अगले दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ वो लड़का उसको फिर से घूरे देखा जा रहा था इस बार उसकी पत्नी ने उस बच्चे को पकड़ लिया और पूछा की तुम यहाँ क्या कर रहे हो.

 

 

उस बच्चे ने कुछ नहीं बोला और न ही कुछ बताया.  विनय की पत्नी ने उससे उसके घर के बारे में पूछा तब भी वो कुछ नहीं बोल रहा था.
आखिर में उसका नाम पूछने पर उसने अपने धीमी सी आवाज़ में अपना नाम सूर्य बताया और फिर वहाँ से भाग गया.

 

 

 

 

उसको उसका व्यवहार कुछ समझ नहीं आया. ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा वो बच्चा रोज़ उसको खम्बे के पीछे से निहारता रहता था. उस दिन रविवार की रात थी दोनों घर में अँगीठी के सामने आग ताप रहे थे क्योंकि बाहर की हालत बहुत ख़राब थी इतनी ख़राब की कोई थोड़ी देर के लिए बाहर निकल जाए तो उसकी जान चली जाए.

 

 

 

अचानक दरवाज़ा किसी ने खटखटाया उन दोनों को फिर से लगा की शायद हवा की वजह से ऐसा हो रहा हो. तभी फिर से किसी ने दरवाजा खटखटाया. इस बार खटखटाने की आवाज़ साफ़ आरही थी.

 

 

 

ये आवाज़ सुन कर दोनों डर गए क्योंकि इतनी रात को वो भी जान ले लेने वाली ठण्ड में आखिर कोन हो सकता है . दोनों केवल एक दूसरे का मुह देख रहे थे. अचानक दरवाज़े के बाहर से धीरे धीरे रोने की आवाज़ आने लगी.

 

 

 

तभी विनय ने जोर से आवाज़ में बोला …..कौन है बाहर

 

 

 

कुछ देर तक आवाज़ तो नहीं आई पर बाद में एक धीमी सी आवाज़ आई ….दरवाज़ा खोलो….. कृपया करके दरवाज़ा खोलो, बहुत ठण्ड है.

 

 

 

ये आवाज़ किसी छोटे से बच्चे की थी. तभी विनय की पत्नी को ये आवाज़ जानी पहचानी लगी उसने कहाँ कि ये तो वही बच्चे की आवाज़ लगती है जो रोज़ घर के बाहर खड़ा रहता था.

 

 

 

विनय की पत्नी ने कहा कि हमें उसे अंदर लाना चाहिये. वो भागते हुए अभी दरवाज़े के पास जा ही रही थी की अचानक उनके घर के फ़ोन की घंटी बाजी.

 

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फोन एक पड़ोस में रहने वाली औरत का था जिससे आज ही विनय की पत्नी मिल कर आई थी.

 

विनय की पत्नी ने फ़ोन उठाया. वहाँ से उस औरत की आवाज़ आई ….हेल्लो, जी मै आपको बताना भूल गई थी की अगर आपके घर के बाहर कोई भी दरवाज़ा खटखटाए तो उसको मत खोलना.

 

 

 

विनय की पत्नी ने कहा की अभी मेरे घर जे बाहर एक बच्चे की आवाज़ आरही है जो दरवाज़ा खोलने को कह रहा है.

 

 

 

तभी उस औरत ने कहा कि नहीं आप बिलकुल मत खोलना, वो असल में एक आत्मा है. यहाँ जब जब तेज़ आंधी और ठण्ड पड़ती है वो तब तब सबके घर के बाहर जाता है और दरवाज़ा खोलने को कहता है.

 

 

 

वो ठण्ड का बहाना बनाता है और दरवाज़ा खुलवाने की कोशिश करता है . अगर कोई गलती से भी दरवाज़ा खोल देता है तो वो अगले दिन बर्फ में दबा हुआ मिलता है.

 

 

 

ये सुनते ही जैसे उनके पैरों से ज़मीन ही खिसक गयी. वो सोचने लगी की जो बाहर दरवाज़ा खटखटा रहा है वो असल में एक आत्मा है.

 

 

उन्होंने ने दरवाज़ा नहीं खोला अगले दिन ही वो दोनों भाग कर पडोसी के पास गए और पूरे मामले के बारे में पूछा.

 

 

उस औरत ने बताया कि इस गाँव में एक परिवार रहता था पहाड़ टूटने की वजह से उस परिवार का विनाश हो गया बस एक बच्चा बच गया.
वो दुसरो के घर जा जा कर खाना मांगता. एक दिन बहुत ज़ोरो से बर्फ की आंधी पड़ रही थी.

 

वो दुसरो के घर के बाहर दरवाज़ा खटखटा कर घर के अंदर आने को गुहार लगा रहा था.

 

 

पर किसी ने भी उसकी गुहार नहीं सुनी ठण्ड की वजह से सब अपने घरों में दुबके हुए थे. कल सुबह होने पर उस बच्चे की लाश बर्फ में अकड़ी हुई मिली.

 

 

 

आज भी कभी भी ज़ोरो से बर्फ की आंधी आती है तो उसकी आत्मा सबके घर के पास आती है और गुहार लगाती है. ये सब सुन कर दोनों हैरान रह गए.

 

 

लेकिन वो वहाँ 1 महीने जब तक रहे तब तक 3-4 बार उनके साथ ऐसा ही हुआ. लेकिन विनय का काम खत्म हो जाने पर वो वहाँ से चले गए.

 

पर विनय की पत्नी में दिमाग में एक रहस्य हमेशा बना रहा की उस घटना के बाद जो बच्चा उसे रोज़ घर के बाहर दिखता था वो कभी नहीं दिखा.

 

 

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४- real spirit stories in hindi :- खड़ खड़–खड़ खड़..ट्रेन द्रुत गति से भागी चली जा रही थी.संध्या काल का समय था, तेज बारिश और बीच बीच मे बिजली की चमक वातानुकूलित कोच की खिड़कियों से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही थी.

 

 

केबिन का एकांत और यह भयावह मौसम मुझ जैसे डरपोक आदमी को और डरा रहा था.थोड़ी देर बाद गाड़ी के पहियों की रफ़्तार कम हुई और एक मध्यम से स्टेशन पर गाड़ी रुकी.

 

 

 

बारिश इतनी ज्यादा थी कि मैं स्टेशन का नाम नहीं पढ़ पा रहा था. मैं अपने केबिन मे अकेला था और इस उधेड़बुन मे था की कोई सह यात्री आये, जिससे वार्तालाप करते करते आगे का रास्ता आसानी से काटा जा सके और एक अंदरुनी भय जो मेरे अंदर जागृत हो चुका है उससे मुझे निजात मिल सके.

 

 

 

 

तभी किसी ने केबिन का दरवाजा खटखटाया और एक शांत सा दिखने वाला व्यक्ति केबिन मे दाखिल हुआ. अपना सामान आदि व्यवस्थित करने के बाद वो मेरी तरफ देख कर मुस्कराया और मेरी तरफ हाथ आगे बढ़कर उसने अपना परिचय दिया..मैं मिस्टर घोष….वो बोला -मैं कोलकाता जा रहा हूँ..पुनर्जन्म से सम्बंधित एक कार्यशाला मे भाग लेने के लिए.

 

 

 

 

मैंने उसे बताया कि मैं कानपुर मे व्याख्याता के पद पर हूँ और पटना जा रहा हूँ .उसने कुछ खाने का सामान निकाला और मुझसे भी खाने हेतु आग्रह किया.

 

 

 

 

किन्तु मैं बहुत ही सशंकित व्यक्तित्व का प्राणी..ट्रेन मे किसी अजनबी के द्वारा दिए गए खाने को लेना असंभव था मेरे लिए. मैंने बहुत विनम्रता से उसके आग्रह को ठुकराया.

 

 

 

वो भी कम उस्ताद नहीं था …कस कर हँसा और बोला- संशय कर रहे हैं मेरे ऊपर,अभी तो कुछ नहीं देखिये आगे क्या क्या होता है .उसके यह शब्द सुन कर मुझे सांप सूंघ गया किन्तु मैंने किसी तरह अपनी घबराहट को छिपाया.

 

कोई स्टेशन आने पर वो उतरता और ट्रेन चलने के बाद किसी दूसरे कम्पार्टमेंट से चढ़ कर फिर आ जाता. पूछने पर बोलता की बीच बीच मे रेलवे की नौकरी भी कर लेता हूँ. थोड़ी देर बाद मैं और वह विभिन्न विषयों पर चर्चा करने लगे.

 

 

उसने पुनर्जन्म से सम्बंधित बातें प्रारम्भ कीं और पुनर्जन्म को अन्धविश्वास बताया.थोड़ी देर बाद उसने मुझसे पूछा की क्या आप भूत-प्रेत पर विश्वास करते हैं?

 

 

 

मैंने कहा-बिल्कुल. वो जोर से हँसा और बोला यह सब बकवास है. मुझे भूतों पर विश्वास था किन्तु वो भूतों के अस्तित्व को नकारता रहा. रात अपने यौवन पर पहुँच चुकी थी,चर्चा उपरांत मैं वातानुकूलित प्रथम श्रेणी के कक्ष मे सोने का प्रयास कर रहा था.

 

 

 

अचानक मुझे ऐसा अनुभव हुआ की कोई मेरे गले पर गर्म अंगार रख रहा है. मैं हड़बड़ा कर उठा …कहीं कोई नहीं…मेरे अलावा उस कक्ष मे मेरा वही सह यात्री था जो सामने की बर्थ पर लेटा घोड़े बेंचकर सो रहा था.

 

 

 

मैं फिर सोने का प्रयास करने लगा. अभी आँख लगी ही थी की मुझे अपने पेट पर बहुत तेज दबाव और हंसने की तेज आवाज सुनाई दी.

 

 

 

मैं घबराकर उठा तो देखा की सहयात्री बर्थ पर नहीं था.लगभग एक दो मिनट बाद वो आया और बोला जनाब सोये नहीं…

 

 

 

मैंने अपनी घबराहट रोकते हुए उससे कहा अभी नींद नहीं आ रही और मैंने अपने बैग से एक मैग्जीन निकाली और पढ़ने का नाटक करने लगा.

 

 

सहयात्री भी बर्थ पर लेट गया और कुछ देर मे उसके खर्राटे केबिन मे गूंजने लगे.मैं भी थोडा निश्चिन्त हुआ और बर्थ पर आँख बंद कर लेट गया.
ट्रेन कभी धीमी होती कभी रफ़्तार पकड़ लेती लेकिन मेरे दिल ने अब तेज रफ़्तार ही पकड़ रखी थी…,

 

भय और घबराहट के कारण लघुशंका की इच्छा अपने आप जीवित हो जाती है..और मैं टॉयलेट की तरफ मुड़  जैसे ही मैंने टॉयलेट का दरवाजा खोला वो सहयात्री मुझे अंदर दिखा और मैं चिल्लाते हुए अपनी बर्थ की तरफ भागा… , देखा तो वो सहयात्री इत्मिनान से अपनी बर्थ पर सो रहा है…मैंने घबराहट मे उसे जगाया…वो बोला..अरे क्या हुआ ?

 

 

 

इतना मासूम लग रहा था ,वो जैसे कुछ जानता ही ना हो….मैंने कहा- आप यहाँ भी और वहां टॉयलेट मे भी….वो कुटिलता से हँसा और बोला -मैं कितने रूप मे कहीं पर भी रह सकता हूँ.

 

 

घबराहट के मारे मैं पसीने से तर बतर..बिल्कुल निर्जीव सा खड़ा उसके सामने.वो बोला -तुम्हें भूतों पर विश्वास था ना..तुम्हे तुम्हारे विश्वास का प्रमाण देना था.तुम्हारे जैसे लोगों के कारण ही हम भूत-पिशाच लोगों का अस्तित्व है…इतना कहकर वो मेरी आँखों के सामने से अचानक गायब हो गया।मैं डर के मारे अवाक् और निर्जीव सा अपनी बर्थ पर बैठा था.

 

 

तभी केबिन के अंदर टिकट निरीक्षक आया उसका चेहरा देखकर मुझे बेहोशी छाने लगी क्योंकि यह वही सहयात्री था मेरा..और वो टिकट चेक कर मुस्कराता हुआ चला गया…

 

 

 

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5- khatarnak horror stories :- कुफरी में स्कीइंग का लुफ्त उठाने और पूरा दिन मौज मस्ती करने के पश्चात कुमार, कामना, प्रशान्त और पायल शाम को शिमला की ओर बीएमडब्लू में जा रहे थे.

 

 

सर्दियों के दिन, जनवरी का महीना, शाम के छ: बजे ही गहरी रात हो गई थी. गोल घुमावदार रास्तों में अंधकार को चीरती, पेडों के झुरमुठ के बीच कार चलती जा रही थी.

 

 

सैलानी ही इस समय सडकों पर कार चलाते नजर आ रहे थे. टूरिस्ट टैक्सियां भी वापिस शिमला जा रही थी. कुफरी की ओर इक्का दुक्का कारें ही जा रही थी. बातों के बीच चारों शिमला की ओर बढ रहे थे. लगभग आधा सफर कट गया था .कार स्टीरियो की तेज आवाज में हंसी ठिठोली करते हुए सफर का आनन्द उठाते हुए समय का पता नही चल रहा था.

 

 

 

झटके मारते हुए कार क्यों चला रहे हो?” प्रशान्त ने झटकती हुई कार में झूलते हुए कुमार से पूछा.

 

 

“प्रशान्त भाई, मैं तो कार ठीक चला रहा हूं, मालूम नही, यह अचानक से झटके क्यों खा रही है?” कुमार ने झटके खाती कार को संभालते हुए कहा.

 

 

“कार को थोडा साईड करके देख लेते हैं. “हो सकता है, कि डीजल में कचरा आ गया हो, थोडी रेस दे कर देखता हूं, कि कार रिदम में आ जाए.

 

 

“ कुमार ने क्लच दबाते हुए कार का ऐक्सीलेटर दबाया, लेकिन कोई खास कामयाबी नही मिली, कार झटके खाती हुई रूक गई.

 

 

“अब क्या करे?” चारों के मुख से एक साथ निकला. सभी सोचने लगे, कि काली रात के साए में कुछ भी नजर नही आ रहा था, सोने पे सुहागा तो धुन्ध ने कर दी थी. धीरे धीरे धुन्ध बढ रही थी. ठंडक भी धीमे धीमे बढ रही थी. कार सडक की एक साईड पर खडी थी.

 

 

 

इक्का दुक्का कार, टैक्सी आ जा रही थी.  “प्रशान्त बाहर निकल कर मदद मांगनी पडेगी. कार में बैठे रहने से कुछ नही होगा.

 

 

कार तो हम चारों का चलाना आता है, लेकिन कार के मैकेनिक गिरी में चारों फेल है. शायद कोई कार या टैक्सी से कोई मदद मिल जाए.
“ कह कर कुमार कार से बाहर निकला. एक ठंडे हवा के तेज झोके ने स्वागत किया. शरीर में झुरझरी सी फैल गई .प्रशान्त भी कार से बाहर निकला. पायल और कामना कार के अंदर बैठे रहे.

 

 

 

 

ठंड बहुत अधिक थी दिल्ली निवासियों कुमार और प्रशान्त की झुरझरी निकल रही थी. दोनों की हालात दयनीय होने लगी. “थोडी देर खडे रहे तो हमारी कुल्फी बन जाएगी.“ कुमार ने प्रशान्त से कहा.

 

 

“ठीक कह रहे हो, लेकिन कर भी क्या सकते है.“ प्रशान्त ने जैकेट की टोपी को ठीक करते हुए कहा.

 

 

“लिफ्ट मांग कर शिमला चलते है, कार को यहीं छोडते है. सुबह शिमला से मैकेनिक ले आएगें.“ कुमार ने सलाह दी.

 

 

“ठीक कहते हो.“ रात का समय था. गाडियों की आवाजाही नगण्य थी. काफी देर बाद एक कार आई.

 

उनको कार के बारे में कुछ नही मालूम था, वैसे भी कार में पांच सवारियां थी. कोई मदद नही मिली. दो तीन कारे और आई, लेकिन सभी में पूरी सवारियां थी, कोई लिफ्ट न दे सका. एक टैक्सी रूकी.

 

 

 

ड्राईवर ने कहा, जनाब मारूती, होंडा, टोएटा की कार होती तो देख लेता, यह तो बीएलडब्लू है, मेरे बस की बात नही है.एक काम कर सकते हो, टैक्सी में एक सीट खाली है, पति, पत्नी कुफरी से लौट कर शिमला जा रहे हैं.

 

 

उनसे पूछ तो, तो एक बैठ कर शिमला तक पहुंच जाऔगे. वहां से मैकेनिक लेकर ठीक करवा सकतो हो. टैक्सी में बैठे पति, पत्नी ने इजाजत दे दी.

 

 

 

कुमार टैक्सी में बैठ कर शिमला की ओर रवाना हुआ. प्रशान्त कार में बैठ गया. प्रशान्त पायल और कामना बातें करते हे समय व्यतीत कर रहे थे.धुन्ध बढती जा रही थी.  थोडी देर बाद प्रशान्त पेशाब करने के लिए कार से उतरा. कामना, पायल कार में बैठे बोर हो गई थी.

 

 

 

मौसम का लुत्फ उठाने के लिए दोनों बाहर कार से उतरी. कपकपाने वाली ठंड थी .“कार में बैठो. बहुत ठंड है।.कुल्फी जम जाएगी.“ प्रशान्त ने दोनों से कहा.

 

 

“बस दो मिन्ट मौसम का लुत्फ लेने दो, फिर कार में बैठते हैं.“ पायल और कामना ने प्रशान्त को कहा. “भूतिया माहौल है. कार में बैठते है.“ प्रशान्त ने कहा.

 

 

 

प्रशान्त की बात सुन कर पायल खिलखिला कर हंस दी. “भूतिया माहौल नही, मुझे तो फिल्मी माहौल लग रहा है. किसी भी फिल्म की शूटिंग के लिए परफेक्ट लोकेशन है. काली अंधेरी रात, धुन्ध के साथ सुनसान पहाडी सडक. हीरो, हीरोइन का रोमांटिक मूड, सेनसुएस सौंग. कौन सा गीत याद आ रहा है.“

 

 

“तुम दोनों गाऔ. मेरा रोमांटिक पार्टनर तो मैकेनिक लेने गया है.“ कामना ने ठंडी आह भर कर कहा. तीनों हंस पडे. तीनों अपनी बातों में मस्त थे. उनको मालूम ही नही पडा, कि कोई उन के पास आया है.

 

 

 

एक शख्स जिसने केवल टीशर्ट, पैंट पहनी हुई थी, प्रशान्त के पास आ कर बोला “आपके पास क्या माचिस है?”

 

 

इतना सुन कर तीनों चौंक गए. जहां तीनों ठंड में कांप रहे थे, वही वह शख्स केवल टीशर्ट और पैंट पहने खडा था, कोई ठंड नही लग रही थी उसे.

 

 

 

प्रशान्त ने उसे ऊपर से नीचे तक गौर से देख कर कहा. “आपको ठंड नही लग रही क्या?”

 

 

उसने प्रशान्त के इस प्रश्न का कोई उत्तर नही दिया बल्कि बात करने लगा “आप भूतिया माहौल की अभी बातें कर रहे थे.क्या आप भूतों में विश्वास करते हैं? क्या आपने कभी भूत देखा है?”

 

 

“नही, दिल्ली में रहते है, न तो कभी देखा है और न कभी विश्वास किया है, भूतों पर.“ प्रशान्त ने कह कर पूछा, “क्या आप विश्वास करते है?“
“हम पहाडी आदमी है, हर पहाडी भूतों को मानता है. उन का अस्तित्व होता है.“

 

 

उस शख्स की भूतों की बाते सुन कर कामना और पायल से रहा नही गया। उनकी उत्सुक्ता बढ गई.
“भाई, कुछ बताऔ, भूतों के बारे में. फिल्मी माहौल हो रखा है, कुछ बात बतावो “

 

 

उस शख्स ने कहा “देखिए, हम तो मानते है. आप जैसा कह रहे हैं, कि शहरों में भूत नजर नही आते, हो सकता है, नजर नहीं आते होगें मगर पहाडों में तो हम अक्सर देखते रहते है.

 

 

“कहां से आते है भूत और कैसे होते हैं, कैसे नजर आते है.“ प्रशान्त ने पूछा.

 

 

उस शख्स के हाथ में सिगरेट थी, वह सिगरेट को हाथों में घुमाता हुआ बोला “भूत हमारे आपके जैसे ही होते हैं. वे रौशनी में नजर नही आते है“

 

 

 

“होते कौन है भूत, कैसे बनते है?“ पायल ने पूछा.

 

 

 

“यहां पहाडों के लोगों का मानना है, कि जो अकस्मास किसी दुर्घटना में मौत के शिकार होते है या फिर जिनका कत्ल कर दिया जाता है, वे भूत बनते है.“ उस शख्स ने कहा.

 

 

“क्या वे किसो को नुकसान पहुंचाते है, मारपीट करते हैं?” प्रशान्त ने पूछा

 

 

“अच्छे भूत किसी को कुछ नुकसान पहुंचाते है. अच्छा मैं चलता हूं. सिगरेट मेरे पास है. आप के पास माचिस है, तो दीजिए, सिगरेट सुलगा लेता हूं.

 

 

 

“ उस शख्स ने कहा. प्रशान्त ने लाईटर निकाल कर जलाया. उस शख्स ने सिगरेट सुलगाई. लाईटर की रौशनी में सिर्फ सिगरेट नजर आई
वह शख्स गायब हो गया. लाईटर बंद होते ही वह शख्स नजर आया. तीनों के मुख से एक साथ निकला – भूत.

 

 

तीनों, प्रशान्त, पायल और कामना का शरीर अकड गया और बेसुध होकर एक दूसरे पर गिर पडे.

 

 

अकडा शरीर, खुली आंखें लगभग मृत्य देह के सामान तीनों मूर्क्षित थे. वह शख्स कुछ दूरी पर खडा सिगरेट पी रहा था. तभी वहां आर्मी का ट्रक गुजरा. उसने ट्रक को रूकने का ईशारा किया.

 

 

 

ट्रक ड्राईवर उसे देख कर समझ गया, कि वह कौन है. ट्रक से आर्मी के जवान उतरे और तीनों को ट्रक पर डाला और शिमला के अस्पताल में भरती कराया.

 

कुछ देर बाद कुमार कार मैकेनिक के साथ एक टैक्सी में आया. अकेली कार को देख परेशान हो गया, कि तीनों कहां गये.

 

 

वह शख्स, जो कुछ दूरी पर था, कुमार को बताया, कि ठंड में तीनों की तबीयत खराब हो गई, आर्मी के जवान उन्हें अस्पातल ले गये हैं. कह कर वह शख्स विपरीत दिशा की ओर चल दिया. मैकेनिक ने कार ठीक की और कुछ देर बाद शिमला की ओर रवाना हुए.

 

 

 

कुमार सीधा अस्पताल गया. डाक्टर से बात की. डाक्टर ने कहा कि तीनों को सदमा लगा है।.वैसे घबराने की कोई आवश्कता नही है लेकिन सदमें से उभरने में समय लगेगा. कुमार को कुछ समझ नही आया, कि उन्होनें क्या देखा, कि इतने सदमे में आ गए.

 

 

अगली सुबह आर्मी ऑफिसर अस्पताल में तीनों को देखने आया. कुमार से कहा – “आई एम कर्नल अरोडा, मेरी यूनिट ने इन तीनों को अस्पातल एडमिट कराया था.“

 

 

कुमार ने पूछा – “मुझे कुछ समझ में नही आ रहा, कि अचानक से क्या हो गया?“

 

कर्नल अरोडा ने कुमार को रात की बात विस्तार से बताई, कि वह शख्स भूत था, जिसे देख कर तीनों सदमें में चले गए और बेसुध हो गए.

 

 

वह एक अच्छा भूत था. अच्छे भूत किसी का नुकसान नही करते. उसने तीनों की मदद की. हमारे ट्रक को रोका और कुमार के वापिस आने तक भी रूका रहा.

 

 

शाम तक तीनों को होश आ गया. दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिली और सभी दिल्ली वापिस गए, लेकिन सदमें से उभरने में लगभग तीन महीने लग गए.

 

 

आज सात साल बीत गए उस घटना को. चारों कभी भी घूमने रात को नही निकलते. नाईट लाईफ बंद कर दी. घर से ऑफिस और ऑफिस से घर, बस यही रूटीन है उन का. उस घटना को याद करके आज भी उनका बदन ठंडा होने लगता है.

 

 

 

 

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