Hindi Kahani

hindi kahani with moral 

hindi kahani with moral 
Written by Abhishek Pandey

hindi kahani with moral एक युवक ने इस दुनिया से तंग होकर साधू बनने की सोची. वह एक मठ में पहुंचा और साधू जी से बोला ” महाराज , मैं इस दुनिया से तंग आ चुका हूँ और अब मैं मोह – माया त्यागकर साधू बनना चाहता हूँ. लेकीन बाबा एक दिक्कत है. मुझे शतरंज की बुरी लत है और यह किसी कीमत पर नहीं छूट रही है और मुझे लगता है कि शतरंज खेलना पाप है. अब आप ही बताओ मैं क्या करूँ “.

 

बाबा बोले , हाँ यह पाप तो है, लेकिन उनसे मन भी बहलता है. बाबा बोले चल आ जा बेटा थोड़ा शतरंज ही खेल लिया जाए . पहले तो युवक बड़े ही आश्चर्य में पडा . फिर उसने शतरंग की विसात बिछाई और बाबा से पहला दाव चलने को कहा. इसपर बाबा ने कहा बेटा पहला डाव तू ही चल लेकिन मेरी एक शर्त है कि हम शतरंज की एक बाजी खेलेंगे और अगर मैं हार गया तो सदा के लिए मठ छोड़कर चला जाऊँगा और तुम्हे मेरा स्थान लेना होगा.

 

युवक ने देखा साधू बाबा वास्तव में गंभीर थे. अब तो यह शतरंज की बाजी युवक के लिए जिंदगी और मौत के सामान हो गयी. क्योंकि वह साधू बनना चाहता था और इससे बढियां मौक़ा क्या मिलता , इसलिए उसे यह डर भी सता रहा था कि कहीं वह हार नहीं जाए. खेल शुरू हो गया. युवक के माथे पर दबाव साफ़ जाहिर हो रहा था. वह बार बार पसीना पोंछ रहा था. युवक कई कठोर चालें चली और महंत की शुरू मीन तो कुछ ठीक खेली लेकिन फिर उनका खेल कमजोर हो गया.

 

युवक इस खेल का पारंगत था, लेकिन जब उसने देखा साधू की कई चालें कमजोर रहीं तो वह जानबूझकर खराब खेलने लगा और तभी महंत ने बिसात ठोकर मार कर जमीन पर गिरा दी. महंत ने युवक से कहा ” तुम्हे जितना सिखाया गया था तुम उससे कहीं अधिक जानते हो . पहले तुमने अपना पूरा ध्यान अपने सपने को हकीकत में बदलने के लिए लगाया, लेकिन तभी तुम्हारे मन में करुणा जाग उठी और तुमने जानबूझ कर खराब खेलना शुरू कर दिया “.

 

महंत ने फिर कहा तुम्हारा इस मठ में स्वागत है क्योंकि तुम जानते हो कि कैसे अनुशासन और करुणा में सामंजस्य बिठाना है और दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और कठिन कार्य है.

 

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