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hindi story for kids with moral

hindi story for kids with moral  
Written by Abhishek Pandey

hindi story for kids with moral    तीन विकल्प बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था. उस किसान की एक बहुत ही सुन्दर बेटी थी. दुर्भाग्यवश, गाँव के जमींदार से उसने बहुत सारा धन उधार लिया हुआ था. जमीनदार बूढा और कुरूप था. किसान की सुंदर बेटी को देखकर उसने सोचा क्यूँ न कर्जे के बदले  किसान के सामने उसकी बेटी से विवाह का प्रस्ताव रखा जाये.

 

 

जमींदार किसान के पास गया और उसने कहा – तुम अपनी बेटी का विवाह मेरे साथ कर दो, बदले में मैं तुम्हारा सारा कर्ज माफ़ कर दूंगा . जमींदार की बात सुन कर किसान और किसान की बेटी के होश उड़ गए.तब जमींदार ने कहा –चलो गाँव की पंचायत के पास चलते हैं और जो निर्णय वे लेंगे उसे हम दोनों को ही मानना होगा.वो सब मिल कर पंचायत के पास गए और उन्हें सब कह सुनाया. उनकी बात सुन कर पंचायत ने थोडा सोच विचार किया और कहा.

 

 

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ये मामला बड़ा उलझा हुआ है अतः हम इसका फैसला किस्मत पर छोड़ते हैं . जमींदार सामने पड़े सफ़ेद और काले रोड़ों के ढेर से एक काला और एक सफ़ेद रोड़ा उठाकर एक थैले में रख देगा फिर लड़की बिना देखे उस थैले से एक रोड़ा उठाएगी, और उस आधार पर उसके पास तीन विकल्प होंगे ….

 

 

१. अगर वो काला रोड़ा उठाती है तो उसे जमींदार से शादी करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज माफ़ कर दिया जायेगा.

 

 

२. अगर वो सफ़ेद पत्थर उठती है तो उसे जमींदार से शादी नहीं करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्फ़ भी माफ़ कर दिया जायेगा.

 

 

३. अगर लड़की पत्थर उठाने से मना करती है तो उसके पिता को जेल भेज दिया जायेगा.

 

 

पंचायत के आदेशानुसार जमींदार झुका और उसने दो रोड़े उठा लिए . जब वो रोड़ा उठा रहा था तो तब तेज आँखों वाली किसान की बेटी ने देखा कि उस जमींदार ने दोनों काले रोड़े ही उठाये हैं और उन्हें थैले में डाल दिया है.

 

 

 

लड़की इस स्थिति से घबराये बिना सोचने लगी कि वो क्या कर सकती है , उसे तीन रास्ते नज़र आये….

 

 

१. वह रोड़ा उठाने से मना कर दे और अपने पिता को जेल जाने दे.

 

 

२. सबको बता दे कि जमींदार दोनों काले पत्थर उठा कर सबको धोखा दे रहा हैं.

 

 

३. वह चुप रह कर काला पत्थर उठा ले और अपने पिता को कर्ज से बचाने के लिए जमींदार से शादी करके अपना जीवन बलिदान कर दे.

 

 

उसे लगा कि दूसरा तरीका सही है, पर तभी उसे एक और भी अच्छा उपाय सूझा , उसने थैले में अपना हाथ डाला और एक रोड़ा अपने हाथ में ले लिया . और बिना रोड़े की तरफ देखे उसके हाथ से फिसलने का नाटक किया, उसका रोड़ा अब हज़ारों रोड़ों के ढेर में गिर चुका था और उनमे ही कहीं खो चुका था .

 

लड़की ने कहा – हे भगवान ! मैं कितनी फूहड़ हूँ . लेकिन कोई बात नहीं .आप लोग थैले के अन्दर देख लीजिये कि कौन से रंग का रोड़ा बचा है , तब आपको पता चल जायेगा कि मैंने कौन सा उठाया था जो मेरे हाथ से गिर गया.

 

 

थैले में बचा हुआ रोड़ा काला था , सब लोगों ने मान लिया कि लड़की ने सफ़ेद पत्थर ही उठाया  था.जमींदार के अन्दर इतना साहस नहीं था कि वो अपनी चोरी मान ले .लड़की ने अपनी सोच से असम्भव को संभव कर दिया.

 

 

मित्रों, हमारे जीवन में भी कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जहाँ सबकुछ धुंधला दीखता है, हर रास्ता नाकामयाबी की और जाता महसूस होता है पर ऐसे समय में यदि हम परमपरा से हट कर सोचने का प्रयास करें तो उस लड़की की तरह अपनी मुशिकलें दूर कर सकते हैं.

 

 

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2- new moral story in hindi :- श्रावस्ती के निकट जेतवन में कभी एक जलाशय हुआ करता था. उसमें एक विशाल मत्स्य का वास था। वह शीलवान्, दयावान् और शाकाहारी था.

 

उन्हीं दिनों सूखे के प्रकोप के उस जलाशय का जल सूखने लगा. फलत: वहाँ रहने वाले समस्त जीव-जन्तु त्राहि-त्राहि करने लगे. उस राज्य के फसल सूख गये.

 

 

 

मछलियाँ और कछुए कीचड़ में दबने लगे और सहज ही अकाल-पीड़ित आदमी और पशु-पक्षियों के शिकार होने लगे. अपने साथियों की दुर्दशा देख उस महान मत्स्य की करुणा मुखर हो उठी.

 

 

 

उसने तत्काल ही वर्षा देव  का आह्वान  अपनी हठक्रिया के द्वारा किया. वर्षा देव  से उसने कहा, “हे वर्षा देव  अगर मेरा व्रत और मेरे कर्म सत्य-संगत रहे हैं तो कृपया बारिश करें.” उसकी  हठक्रिया अचूक सिद्ध हुई. वर्षा देव ने उसके आह्वान  को स्वीकारा और सादर तत्काल भारी बारिश करवायी.

 

इस प्रकार उस महान और सत्यव्रती मत्स्य के प्रभाव से उस जलाशय के अनेक प्राणियों के प्राण बच गये.

 

 

 

 

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३- moral story in hindi for class 7  :-  एक राजा के अस्तबल में  नाम का एक हाथी रहता था जो बहुत ही सौम्य था तथा अपने महावत के लिए परम स्वामिभक्त और आज्ञाकारी भी.

 

एक बार अस्तबल के पास ही चोरों ने अपना अड्डा बना लिया. वे रात-बिरात वहाँ आते और अपनी योजनाओं और अपने कर्मों का बखान वहाँ करते. उनके कर्म तो उनकी क्रूरता आदि दुष्कर्मों के परिचायक मात्र ही होते थे.

 

 

कुछ ही दिनों में उनकी क्रूरताओं की कथाएँ सुन-सुन हाथी  की प्रवृत्ति वैसी ही होने लगी. दुष्कर्म ही तब उसे पराक्रम जान पड़ने लगा. तब एक दिन उसने चोरों जैसी क्रूरता को उन्मुख हो, अपने ही महावत को उठाकर पटक दिया और उसे कुचल कर मार डाला.

 

 

उस सौम्य हाथी में आये आकस्मिक परिवर्तन से सारे लोग हैरान परेशान हो गये. राजा ने जब हाथी  के लिए एक नये महावत की नियुक्ति की तो उसे भी वैसे ही मार डाला.

 

 

 

इस प्रकार उसने चार अन्य परवर्ती महावतों को भी कुचल कर मार डाला. एक अच्छे हाथी के बिगड़ जाने से राजा बहुत चिंतित था. उसने फिर एक बुद्धिमान् वैद्य को बुला भेजा और हाथी  को ठीक करने का आग्रह किया.

 

 

 

वैद्य ने हर तरह से हाथी और उसके आसपास के माहौल का निरीक्षण करने के बाद पाया कि अस्तबल के पास ही चोरों का एक अड्डा था, जिनके दुष्कर्मों की कहानियाँ सुन हाथी का हृदय भी उन जैसा भ्रष्ट होने लगा था.

 

 

बुद्धिमान वैद्य ने तत्काल ही राजा से उस अस्तबल को कड़ी निगरानी में रखने की और चोरों के अड्डे पर संतों की सत्संग बुलाने का अनुरोध किया. राजा ने बुद्धिमान् वैद्य के सुझाव को मानते हुए वैसा ही करवाया.

 

 

 

संतों की वाणी सुन-सुन कर हाथी  भी संतों जैसा व्यवहार करने लगा. हाथी की दिमागी हालत सुधर जाने से राजा बहुत प्रसन्न हुआ और वैद्य को प्रचुर पुरस्कार देकर ससम्मान विदा किया. इसीलिए कहा गया है की अगर सांगत अच्छी हो तो मन भी अच्चा होता है.

 

 

 

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