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holi festival

holi festival holi hindu dharm का बहुत ही महत्वपूर्ण और बडा़ ही खूबसूरत त्योहार है. यह रंगों का त्यौहार holi फाल्गुन महीने में पूर्णिमा काे मनाया जाता है.  holi festival  बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है….

holi festival

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holi festival का उल्लेख करने से पहले बसंत का बसंत का उल्लेख आवश्यक है…..शीत रितु के पश्चात बसंत रितु का आगमन हाेता है. बसंत काे रितुओं का राजा रितुराज कहा जाता है. बसंत में ना ताे ज्यादा ठंड रहती है और ना ही ज्यादा गर्मी… अर्थात मौसम एकदम सुहावना रहता है.
प्रकृति में भी कई सुखद बदलाव दिखलायी पड़ते हैं. जिससे मन आल्हादित हाे जाता है… चाराे तरफ गेंदा… सूरजमुखी.. गुलाब के फूलो की खुशबू बिखरी रहती है. खेतों में लहलहाते सरसाे के पीले फूल ऐसे लगते हैं मानाे प्रकृति ने पीले रंग की चादर फैला रखी हाे.मदमस्त हवा का झाेंका किसी की याद दिला जाता है.
आम के पेड़ाे में मंजिरियाां लग हाेती है ताे उधर टेसू के फूल हवाओ काे और सुगन्धित करते हैं. पेडाे़ के बूढ़े हाे चले पत्ते गिर जाते हैं, उनकी जगह नयी काेमल पत्तियाँ निकलती हैं. तितलियां फूलों पर इठला रही हैं ताे आम की मंजिरियाें की खुशबू से मदमस्त काेयल “कुहू कुहू “की मीठी मधुर तान छेड़ रही है.
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बसंत उमंग उत्साह का प्रतीक है और इसी उमंग उत्साह नवचेतन से जीवन के क्रियाकलाप संचालित हाेते हैं. इसी उत्साह उमंग के मौसम में holi festival आता है…..holi मुख्यतः दाे दिन का त्यौहार है… holi  के एक दिन पहले हाेलिका दहन किया जाता है फिर अगले दिन फाग खेला जाता है. यह त्यौहार भारत नेपाल के साथ साथ हर उस देश में मनाया जाता है जहां हिन्दू समाज रहता है.
holi पर  मन उल्लास से भरा रहता है… क्या बच्चे,क्या जवान, क्या बूढ़े… सब हाेली के रंग में डूबे रहते हैं. दोपहर तक हाेली खेलने के पश्चात लाेग शाम काे अबीर गुलाल लेकर एक दूसरे के घरों पर जाते हैं.. उन्हें holi wishes देते हैं.
लाेग सारे मतभेद और मतभेद भुलाकर एक दूसरे काे अबीर गुलाल लगाकर holi wishes देते हैं.रंगाे का यह त्यौहार राधा कृष्ण के पवित्र प्रेम से जुड़ा है. बरसाने और नंदगांव की holi भारत वर्ष के साथ साथ पूरे विश्व में प्रसिद्ध है… जिसका आनन्द लेने के लिए विश्व के कई देशों से लाेग बृन्दावन आते हैं.
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holi काे लेकर कई pauranik katha  हैं जिसमें प्रह्लाद और हाेलिका की कथा है. इस कथा का vishnu puran में उल्लेख किया गया है. vishnu puran के अनुसार जब हिरण्यकश्यप ने ऐसा वरदान प्राप्त कर लेता है कि उसे ना काेई मानव मार सकता है ना ही काेई जानवर.. ना वह दिन में मरेगा ना ही रात में.. ना धरती पर मरेगा ना ही आकाश में… ना घर में ना बाहर.. ना अस्त्र से मरेगा ना ही शस्त्र से….वरदान प्राप्त करने के बाद करने के बाद वह खुद काे भगवान कहलवाने लगता है….. चाराे तरफ हाहाकार मचा देता है.
जबकि प्रह्लाद vishnu bhagwan की भक्ति मे लीन रहते हैं. यह देखकर हिरण्यकश्यप आग बबूला हाे जाता है… वह प्रह्लाद काे बहाेत यातनाये देता है… उन्हें मारने का प्रयत्न करता है… लेकिन vishnu bhagwan की कृपा से प्रह्लाद हर बार बच जाते हैं.

फिर वह अपनी बहन होलिका काे बुलाता है… हाेलिका पर ब्रह्मा जी के वरदान के कारण अग्नि का काेई प्रभाव नही पड़ता था… लेकिन वरदान के गलत उपयोग के कारण वरदान का प्रभाव खत्म हाे जाता है…. हाेलिका की मृत्यु हो जाती है… प्रह्लाद बच जाते हैं… तभी से हाेलिका दहन और बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रतीक holi festival का आरम्भ हाेता है…….दोस्तों यह लेख holi festival कैसा लगा कमेन्ट करके अवश्य बताएं. अन्य hindi story के लिए इस लिंक Buddhiman Mantri hindi kahani पर क्लिक करें.

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Abhishek Pandey

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