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Holika Story in Hindi : जानिये होलिका दहन की कथा और इतिहास हिंदी में जरुर पढ़ें

holika
Written by Abhishek Pandey

Why is Holika celebrated? होलिका क्यों मनाई जाती है?

 

 

holika और होली त्योहार का मुख्य संबंध प्रहलाद से है. प्रहलाद विष्णु भक्त थे , लेकिन प्रहलाद का पिता हिरण्यकश्यप अपने आपको भगवान समझता था और प्रजा से भी यही उम्मीद करता था कि वह भी उसे ही पूजे और भगवान माने. ऐसा नहीं करने वाले को या तो मार दिया जाता था या कैद-खाने में डाल दिया जाता था.

 

 

 

कब मनाई जाती है होलिका? 

 

 

 

हिन्दू धर्म के पर्वों, त्योहारों का अपना इतिहास है और उसमें कई वैज्ञानिक बातें भी छुपी हुई हैं. होलिका दहन, होली त्यौहार का प्रथम दिन है. इसे  फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है.

 

 

इसके अगले दिन रंग खेला जाता है. होली खुशियों का त्यौहार है. अधर्म पर धर्म की विजय का त्यौहार है. होली को धुलेंडी, धुलंडी, धूलि, होरी  आदि नामों से भी जाना जाता है.

 

 

 

होलिका दहन को छोटी होली भी कहा जाता है. हिन्दू धर्म में इसका पौराणिक महत्व है. इस त्यौहार में सबसे प्रचिलित कथा प्रहलाद, होलिका और हिरण्यकश्यप की कथा है.

प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की कथा 

जब हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद विष्णु भक्त निकला तो पहले तो उस निर्दयी ने उसे डराया-धमकाया और अनेक प्रकार से उस पर दबाव बनाया कि वह विष्णु को छोड़ उसका पूजन करे.

 

 

 

 

मगर प्रहलाद की भगवान विष्णु में अटूट श्रद्धा थी और वह विचलित हुए बिना उन्हीं को पूजता रहा. सारे यत्न करने के बाद भी जब प्रहलाद नहीं माना तो हिरण्यकश्यप ने उसे मार डालने की सोची.

 

 

 

 

इसके लिए उसने अनेक उपाय भी किए मगर वह मरा नहीं. अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान था, को बुलाया और प्रहलाद को मारने की योजना बनाई… एक दिन निर्दयी राजा ने बहुत सी लकड़ियों का ढेर लगवाया और उसमें आग लगवा दी.

 

 

 

जब सारी लकड़ियाँ तीव्र वेग से जलने लगीं, तब राजा ने अपनी बहन को आदेश दिया कि वह प्रहलाद को लेकर जलती लकड़ियों के बीच जा बैठे.

 

 

 

 

होलिका ने वैसा ही किया. दैवयोग से प्रहलाद तो बच गया, परन्तु होलिका वरदान प्राप्त होने के बावजूद जलकर भस्म हो गई… तभी से प्रहलाद की भक्ति और आसुरी राक्षसी होलिका की स्मृति में इस त्योहार को मनाते आ रहे हैं.

 

 

 

 

Holika Story In Hindi कामदेव की कहानी 

 

 

होली की एक कहानी कामदेव की भी है. माता पार्वती महादेव शिव से विवाह करना चाहतीं थीं. लेकिन तपस्या में रत भगवान् शिव का ध्यान उनकी तरफ नहीं जा रहा था.

 

 

ऐसे में प्रेम के देवता कामदेव आगे आये और महादेव पर पुष्प बाण चला दिया. इससे शिव की तपस्या भंग हो गयी. लेकिन इससे महादेव इतने अधिक क्रोधित हुए कि अपने तीसरे नेत्र की अग्नि से कामदेव को भस्म कर दिया.

 

 

 

कामदेव के भस्म होने पर उनकी पत्नी रति विलाप करने लगीं और महादेव से कामदेव को जीवित करने ही प्रार्थना करने लगीं. अगले दिन जब महादेव का क्रोध शांत हुआ तो उन्होंने कामदेव को जीवनदान दिया.

 

 

 

इस तरह से कामदेव के भस्म होने के दिन होलिका जलाई जाती है और उंनके जीवित होने की ख़ुशी में रंगों का त्यौहार होली मनाया जाता है.

 

 

 

Holika Dahan महाभारत की कथा 

 

 

Mahabharat katha के अनुसार युधिष्ठिर को भगवान् कृष्ण ने बताया कि एक बार श्रीराम के पूर्वज रघु के शासन काल में एक असुर महिला थी.
एक वरदान के कारण कोई उसका वध नहीं कर सकता था. इससे महाराजा रघु बहुत ही चिंतित थे. उन्होंने इस चिंता को गुरु वशिष्ठ के समक्ष प्रकट किया.
तब गुरु वशिष्ठ ने रघु को बताया कि यदि बच्चे अपने हाथों में लकड़ी के छोटे तुकडे लेकर, नगर के बाहरी में जायें और सुखी घास के ढेर में आग लगाकर राक्षसी को जला दें, तो उसका वध सुनिश्चित है.
उसके बाद उसके चारो और परिक्रमा दें, नृत्य करें, ताली बजाएं, गाना गायें और नागादें बजाएं , क्योंकि यह पाप का अंत होगा. तभी से होलिका और होली का त्यौहार मनाया जाता है.

 

 

 

कान्हा और पूतना की कहानी  

 

 

होली का श्रीकृष्ण से गहरा रिश्ता है. इसे राधा-कृष्ण के प्रेम के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है.  पौराणिक कथा  के अनुसार जब कंस को श्रीकृष्ण के होने का पता चला तो उसने कान्हा को मारने के के लिए पूतना नामक राक्षसी को भेजा.

 

 

 

पूतना भेष बदलकर कृष्ण को दुसरे स्थान ले गयी और कान्हा को विषपान कराने लगी. भगवान् श्रीकृष्ण सबकुछ जानते ही थे. दुग्धपान करते समय कृष्ण ने पूतना का वध कर दिया.

 

 

इधर यशोदा और गोपिया कान्हा को ना देख परेशान हो गयीं. फिर कान्हा के मिलने की ख़ुशी में रंगोत्सव मनाया गया और तभी से होलिका और  होली की शुरुआत हुई.

 

 

 

होलिका दहन का नियम 

 

 

फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक होलाष्टक माना जाता है. इसमें शुभ कार्य वर्जित होते है. पूर्णिमा के दिन होलिका दहन होता है. इसके लिए कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है.
१- उस दिन ” भद्रा ” ना हो. 
२- पूर्णिमा प्रदोषकाल- व्यापिनी होनी चाहिए. 

 

 

 

holi ke totke होलिका दहन के टोटके 

 

 

१- होलिका दहन के पश्चात् थोड़ी सी राख घर ले जाएँ और उसे आग्नेय कोण, अर्थात घर  के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखे. इससे व्य्यापर में लाभ होगा. घर में मां लक्ष्मी का वास होगा.

 

 

२- यदि कोई आपका धनब वापस नहीं कर रहा है तो होलिका जलने के स्थान पर उसका नाम अनार की लकड़ी से लिख कर होलिका माता से प्रार्थना करते हुए उसके नाम का हरा गुलाल छिड़क दें. आपका पैसा मिल जाएगा.

 

 

 

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