Horror Story

बेलीगारद जहाँ है भूतों का डेरा Horror Story

बेलीगारद जहाँ है भूतों का डेरा Horror Story

बेलीगारद जहाँ है भूतों का डेरा Horror Story दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो कि bhoot pret पर विश्वास नहीं करते, लेकिन उनकी संख्या बेहद ही कम. भूत प्रेत को मानने वालों की संख्या ही अधिक है. आज के वैज्ञानिक जीवन में अगर आप लोगों के सामने bhoot pret  की बात करेंगे तो हो सकता है कि वे इस बात को हसीं में उड़ा दें, लेकिन इतना सत्य है कि वे इससे इनकार नहीं कर पायेंगे, क्योकि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है. आज भी पुरे विश्व में कई ऐसी जगहें हैं जो कि रहस्य बनी हुई है. आज हम उन्ही जगहों में से एक बेलीगारद जहाँ है भूतों का डेरा Horror Story के बारे me  बताने जा हूँ.

बेलीगारद जहाँ है भूतों का डेरा Horror Story

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बेलीगारद यानि की रेजीडेंसी उस स्थान पर है जो पुराने लखनऊ को नए लखनऊ से जोड़ता है. एक समय था जब कोई भी इस जगह की तरफ रात में आने की हिम्मत नहीं कर पाता था. दिन में भी खासकर दोपहर लोगों को इस तरफ आने में पसीने छुट जाते थे. आज चूँकि वैज्ञानिक युग है फिर उस दर की यादें लोगों के जेहन में ताजा हैं और इस जगह की बात छिड़ने पर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

आखिर क्या हुआ था बेलीगारद में

यह  एक  real horror stories  १९७१ की है. उस समय लखनऊ विश्वविद्यालय के तीन छात्रों (जो कि अच्छे मित्र थे)   ने शर्त रखी की किसकी हिम्मत है जो कि इस  रेजीडेंसी में पूरी रात  अकेले रुक सके. दरअसल यह शर्त इसलिए लगी थी क्योंकि १८५७ में मारे गए अंग्रेज सैनिको के कब्रिस्तान हैं और सभी कब्रों पर लगे पत्थरों पर उनके नाम भी लिखे हुए हैं, यही कारन था कि कोई भी रात को यहाँ नहीं रुकता था.

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अब उनमें से एक दोस्त ने हिम्मत दिखाई और रात में रुकने के लिए हाँ कह दिया. अब तीनों दोस्त अगले दिन सफेद कुर्ते पायजामे में विश्वविद्यालय से निकले और नवादा कालेज और पक्का पुल के रास्ते रेजीडेंसी  अर्थात बेलीगारद पहुंचे. रात के लगभग ११ बज चुके थे, चारो तरफ अँधेरे का स्वामित्व हो चुका था. इक्का दुक्का तांगे काफी देर के बाद आ रहे थे और वे भी सरपट निकल जा रहे थे.

रेजीडेंसी की चाहरदिवार टूटी हुई थी, कोई भी बड़ी ही आसानी से अन्दर बहुंच सकता था. इसका फायदा उन तीनों दोस्तों ने उठाया और तनों रेजीडेंसी में प्रवेश कर गए. रात लगभग १२ बजे या कुछ समय पहले बाकि दो दोस्त निकल गए और शर्त के अनुसार एक दोस्त उस सुनसान, भयावह  horror बेलीगारद में रुक गया. सुबह जब दोनों दोस्त उससे मिलने गए तो उनकी चीख निकल गयी क्योंकि वहाँ उनका दोस्त नहीं बल्कि उसकी लाश थी.

पुलिस के डर से दोनों दोस्त भाग गए. उसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम कराया तो पुलिस के साथ ही हर कोई हैरान रह गया. रिपोर्ट के अनुसार उसकी मौत बेहद बुरी तरह से डरने की वजह से उसकी मौत हो गयी थी. उसे हार्ट अटैक हुआ था. आज भी लोग उस जगह रात को जाने से डरते हैं. कहा जाता है कि पहले जब कोई रात को यहाँ से गुजरता था तो एक आदमी सफेद कपडे पहने उससे माचिस मांगता था और माचिस दे देने पर उसकी मौत सुनिश्चित थी और ना देने पर भी तबियत बेहद खराब हो जाती थी. इस घटना ने लोगों की मन में बेहद खौफ भर दिया था. जब उन भागे हुए छात्रों से पुलिस ने पूछताछ की तो सारी कहानी सामने आ गयी.अब सरकार ने इसे संरक्षित करवा दिया है. चारो तरफ लाइट्स लगवा दी गयी हैं. चाहरदीवारी को बड़ा और मजबूत बनवा दिया गया है. अब वहाँ पुलिस की गश्त भी होती रहती है. क्योंकि इस घटना के सरारती तत्व लोगों को बेवजह डराकर परेशान करने और उन्हें लुटने लगे थे.

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