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Hindi Kahani Suspense Story

Imandari hindi kahani

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Imandari hindi kahani

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Imandari hindi kahani सुरेंद्रकी अभी नई-नई दारोगा के पोस्ट पर पोस्टिंग हुई तीन….वह बहुत खुश था और उलझन में भी…उलझन इसलिए थी कि जिस चौकों पर उसकी उसकी पोस्टिंग थी उस चेकपोस्टों से बहुत सी ग़ैरक़ानूनी गतिविधियां होती थीं….इससे सरकार के राजस्व का बहुत नुकसान होता था और जो भी दारोगा उस चेकपोस्ट पर ईमानदारी दिखाने की कोशिश करता…उसके दूसरे ही दिन कहीं और पोस्टिंग कर दी जाती थी…यह बात सुरेंद्र को पहले से ही बता दी गयी थी….और उसे बताने वाला उसी चेकपोस्ट का चपरासी “जुगल किशोर” था, लेकिन उसे “चुगल किशोर” कहना ज़्यादा ठीक होगा क्योकि वह इसी “चुगली” की वजह से बीस साल से उसी पोस्ट पर था….जबकि कितने दारोगा, सिपाही आए गये..लेकिन जुगल किशोर “अंगद के पांव” की तरह उसी चेक पोस्ट पर तैनात था…उसे हटाने वाला कोई पैदा ही नहीं हुआ था…..उसे ना जाने कितनी बार पदोन्नति का लालच दिया गया , लेकिन वह कहता कि “नहीं..नहीं मै यहीं खुश हूँ.

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दरअसल वह दारोगा और सर्किल आफिसर से भी ज़्यादा कमाता था. आज सुबह ही जुगल किशोर ने सुरेंद्र से कहा कि “दारोगा साहेब आज दयाल सिंह की १५ ट्रक इस चेकपोस्ट से जाने वाली है और उसके माध्यम से कुछ प्रतिबंधित चीजोंको नेपाल भेजा जाने वाला है….लेकिन आप उसे रोकने की कोशिश मत करना…आप नये हैं इसीलिए आपको समझा रहे हैं…बहुतो ने कोशिश की…उसका अंजाम भी उन्होने भुगता…आपको भी समझा रहा हूँ” …..यह कहकर वह हँसता हुआ चला गया.

शाम को ६ बजने वाले थे. सुरेंद्र इसी उधेड़बुन में था कि क्या करें और क्या ना करें. सुरेंद्र का मन कर रहा था कि ऐसा मौका बार-बार नही आता…ले-दे कर मामले को ख़त्म कर लिया जाए…..लेकिन उसका दिल नही मान रहा था..उसने फिर सोचा कि दयाल जैसे लोग ही इस देश को बर्बाद कर रहे हैं. भले ही मेरी नौकरी चली जाए लेकिन इस बार इस दयाल को ऐसा सबक दूंगा कि उसने सपने में भी नही सोचा होगा. ६ बजकर ३० मिनट पर पहला ट्रक आया और चेकपोस्ट पर रुक गया कारण आगे का रास्ता अवरुद्ध था, इतने में सुरेंद्र ट्रक के पास आए और कड़क आवाज़ में ड्राइवर से बोले “क्या है इस ट्रक में”.

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“ड्राई फ़ूड है “…ड्राइवर ने कहा
ठीक है..मैं खुद चेक करूंगा…इसके बाद सुरेंद्र ने ट्रक को चेक किया तो उसमें प्रतिबंधित समान था. जिसकी कीमत १ करोड़ से ज़्यादा थी.
चलो गाड़ी को साइड में लगाओ….झूठ बोलता है….इसमें ड्रायफूड है…..सुरेंद्र ने कड़क आवाज़ में कहा
 “शायद आप नहीं जानते हैं कि यह किसकी गाड़ी है”…ड्राइवर ने व्यंग में मुस्कुराते हुए कहा
 चल गाड़ी साइड लगा.. सुरेंद्र ने उसे डाँटने हुए कहा
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सुरेंद्र के कड़े तेवर देखकर ड्राइवर ने गाड़ी को साइड में लगा दिया..पीछे से आने वाले १४ ट्रक भी साइड में लगा दिये गये. रात के १० बज गये थे. पूरी स्थिति को भांपकर जुगल किशोर ने पूरी बात दयाल सिंह को बता दिया….क्योंकि वह ख़ाता तो सरकार का था लेकिन गाता दयाल सिंह का था. थोड़ी ही देर में दयाल सिंह की गाड़ी चेक पोस्ट पर आकर रुकी. दयाल सिंह के साथ २ आदमी ४ सूटकेश लेकर उतरे, दयाल सीधे दारोगा सुरेंद्र के पास गया और चारो सूटकेश उनके पास रखते हुये बोला कि दारोगा जी ये लीजिए और गाड़ी को जाने दीजिए और यह छोटा सा तोहफा स्वीकार करें और आगे ऐसे हीऐसे तोहफे मिलते रहेंगे.
गाड़ी नहीं जाएगी..दयाल सिंह…चाहे आप कुछ भी कर लें और यह तोहफा भी आप साथ ही ले जाएं…सुरेंद्र ने कड़क आवाज़ में बोला
ठीक है…दारोगा साहब..हम तो जा रहे हैं..लेकिन २५ साल में पहली बार हमें कोई ऐसा आदमी मिला है , जिसने ऐसी हिमाकत की है.इसक इनाम आपको ज़रूर मिलेगा….कहकर दयाल सिंह वहां से चला गया.
कोई परवाह नहीं….मैं इसके लिए पहले से ही तैयार हूँ…सुरेंद्र ने कहा
वही हुआ जो होना था…सुबह-सुबह बड़े आफिसर का लेटर लेकर जुगल किशोर सुरेंद्र के आफ़िस में पहुंचा और उन्हें लेटर देकर तीखी मुस्कान के साथ बाहर निकल गया. सुरेंद्र तो पहले से ही इसके लिए तैयार था. वह कुछ देर में अपने घर की लिए निकाला और घर पहुँच कर अपने पिता से इसी बात पर विचार कर रहा था कि उतने में आईजी डी पी तिवारी की गाड़ी दरवाजे के सामने आकर रुकी..वह आते ही उन्होने कहा गर्व है मुझे आप पर और आपके माता-पिता…जिन्होने आपको ऐसी शिक्षा दी…जो कि आपकी ईमानदारी को डिगा नहीं पाई.
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आपकी इस ईमानदारी के वजह से कल १४ गाड़ियां पकड़ी गयी और दयाल की अमीरी भी आपको डिगा नहीं पायी/ मुझे आप पर गर्व है. मुख्यमंत्री ने खुद इस मामले को संज्ञान में लिया है. आपका प्रमोशन करने का आदेश दिया गया है. जुगल किशोर को निलंबित कर दिया गया है…और जल्द ही दयाल सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा…..हमें इसी तरह के आफिसर की आवश्यकता है. मुझे आप पर गर्व है. उसके दयाल सिंह को गिफ्टार कर लिया गया. पूरा इलाक़ा खुशहाल हो गया.
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