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Jadui Pari ki kahani in Hindi read / जादुई परी की कहानी हिंदी में

Jadui Pari ki kahani in Hindi read

Jadui Pari ki kahani in Hindi read / जादुई परी की कहानी

 

 

 

 

Jadui Pari ki kahani in Hindi read  एक नगर में एक अमीर आदमी था. उसके पास बहुत अधिक पैसा था. पुरे नगर में उसका मान सम्मान था. लेकिन फिर भी उसके मन में नाम मात्र का घमंड नहीं था. वह बहुत ही दयालु था.

 

 

 

वह सदैव लोगों की सेवा करता था. दीन – दुखियों की सेवा करता था. लेकिन उसके बाद भी वह सदा उदास रहता था. वह ही नाहिंन उसकी पत्नी भी हमेशा चिंतित रहती थी और इसका सबसे बड़ा कारण था उनके घर में संतान ना होना. दोनो पति – पत्नी इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि आखिर इतने धन – दौलत का क्या होगा.

 

 

 

उनकी खुबसूरत हवेली में एक खुबसूरत बागीचा था. उस बगीचे कई बड़ी – बड़ी परियों की मूर्तियाँ थीं. अमीर की पत्नी को सलीके से जिंदगी बिताने का बेहद शौक था.

 

 

 

उसने उस बगीचे में परियों कके बैठने के लिये खुबसूरत जगह बनवाई थी. जिसमें बहुत ही खुबसूरत रंग बिरंगे फूल लगे हुए थे. अमीर की पत्नी माली से फूलों की मालाएं बनवाती और स्वयं आकर परियों के गले में पहनाया करती थी.

 

 

 

एक दिन अमीर की पत्नी संतान की चिंता में बहुत उदास थी. वह चुपचाप बगीचे में आकर बैठ गयी और सोचने लगी ” बिना संतान के कोई गृहस्थ जीवन है भला.

 

 

 

Jadui Pari ki kahani in Hindi read दयालु परी की कहानी

 

 

 

बिना बच्चों के हवेली कितनी सूनी – सूनी सी दिखती है. अगर मुझे भी संतान तो उसकी किलकारियों , उसकी हंसी से हवेली में रौनक आ जाती. ” वह बहुत देर तक वैसे ही गम सुम से बैठी रही.

 

 

 

 

परियों के आने पर उसका ध्यान टूटा. आज उसके घर पर एक शुभ आयोजन था. वह जल्दी से उठी और जाने लगी. वह जैसे ही चलने को हुई उसे एक मीठी धुन सुनाई दी. वह चौंकी.

 

 

 

अरे यह तो किसी छोटी बच्ची की आवाज है, लेकिन इस बगीचे में बच्ची कैसे आ गयी. वह इधर – उधर देखने लगी तभी उसे एक छोटी लड़की दिखाई दी. जिसने चमकदार श्वेत कपडे पहने हुए थे. उसके चहरे पर एक तेज था. वह मुस्कुरा रही थी.

 

 

 

अमीर आदमी की पत्नी उसे आश्चर्य से देख रही थी. तभी उस लड़की ने कहा …क्या हुआ ? मुझे आपने नहीं पहचाना.

 

 

 

गृहस्वामिनी चुप रही.उसे समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दे. कुछ देर बाद वह बोली…कैसे पहचानूंगी ? मैं तुम्हे पहली बार देख रही हूँ. तुम इस शहर की हो ? तुम्हारा घर कहाँ है ?

 

 

 

इस पर लड़की बोली मैं परी लोक की हूँ. लेकिन पूनम की रात को हम अक्सर यहाँ आते हैं. हमें ये प्रतिमाएं और खुबसूरत फूल बहुत पसंद आते हैं. हम आपको हर बार देखती थे, लेकिन आज आप बहुत उदास थीं और इसीलिए मैं आपसे इसका कारण पूछने आई हूँ.

 

 

 

यह सुनकर गृहस्वामिनी की पत्नी का दुःख उसकी आँखों में भर आया. उसकी आखों से आंसू टपक पड़े. फिर उसने अपने सारे दुःख परी के सामने उड़ेलकर रख दिया.

 

 

चिंता ना करो . मैं आपकी इच्छा पूरी कर दूंगी .

 

 

क्या ? आप मुझे संतान दे सकती हैं….गृहस्वामिनी चहककर बोली

 

 

हाँ, क्यों नहीं ? अब ध्यान से सुनो . तुम कल सुबह नहा धोकर, स्वच्छ वस्त्र धारण करके इसी स्थान पर आ जाना. उस सामने वाले पेड़ पर आपको दो सेब लटके हुए मिलेंगे . बिना किसी को बताये आप उसे छिलकर खा जाना . उसके बाद आपको दो संतान प्राप्त होगी.

 

 

गृहस्वामिनी ने परी लड़की को धन्यवाद दिया और तेजी से ख़ुशी – ख़ुशी हवेली की और चली. अगले दिन उसने वैसा ही किया जैसा उस लड़की ने कहा था. वहाँ दो सेब लटके हुए थे.

 

 

गृहस्वामिनी बहुत प्रसन्न हुई और सेब को तोड़कर उसे छिलने लगी और तभी उसे किसी के आने की आहात हुई. उसने जल्दी से सेब खा लिए . उसमें सेब छिला हुआ था और एक सेब वैसा ही था.

 

 

 

घबराहट में वह परी की बात भूल गयी थी. समय बीता और निश्चित समय पर गृहस्वामिनी ने दो पुत्र को जन्म दिया, लेकिन उसमें एक पुत्र तो बहुत ही खुबसूरत था पर दूसरा पुत्र बहुत ही कुरूप था.

 

 

 

जादुई परी की कहानी हिंदी में 

 

 

 

समय बितता गया बच्चे बड़े होने लगे, लेकिन हर कोई केवल खुबसूरत बच्चे से प्यार करता कुरूप बच्चे की पास कोई नहीं जाता. इससे कुरूप बच्चे को बहुत ही दुःख होता और गृहस्वामिनी भी बहुत दुखी होती.

 

 

 

एक दिन उस कुरूप बच्चे ने पूछा ” मां, आखिर भाई इतने खुबसूरत और मैं इतना कुरूप क्यों हूँ ? लोग मेरा मजाक उड़ाते हैं. उसक अधिक हाथ पर उसने सारी बात बता दी.

 

 

 

इसके बाद पूर्णिमा की रात को कुरूप लड़का बाग़ में बड़ी बड़ी मूर्तियों के पास आकर खडा हो गया. उसने सोचा कि आज परियां आएँगी तो मैं उनसे विनती करूंगा और वे जरुर मेरी सहायता करेंगी. तभी वह परी लड़की वहाँ आई . वह उसे पहचान नहीं सका , लेकिन मां के बताये अनुसार उसने सोचा यही तो वह परी है.

 

 

 

वह कुछ कहता कि उसके पहले ही उस परी ने कहा कि तुम मुझे नहीं पहचानते , लेकिन मैं तुम्हे जानती हूँ और तुम्हारा दुःख भी जानती हूँ. समझ लो तुम्हारा दुःख ख़त्म हो गया. तुम्हारी मां ने हमे घुमने के लिए यह खुबसूरत स्थान दिया है. इससे हम बहुत खुश हैं.

 

 

 

कल सुबह नहा धोकर यहाँ आना और अपनी मां को भी साथ लाना. यहाँ इस आम की पेड़ के नीचे एक गिलास दूध होगा , जिसे पी लेना और उसे पीते तुम्हारा दुःख ख़त्म हो जाएगा. व

 

 

 

ह लड़का धन्यवाद करके घर गया और अपनी मां को सारी बात बताई और अगले दिन उसने वैसा ही किया. दूध पीते ही वह एक खुबसूरत राजकुमार की तरह हो गया.

 

 

 

 

जब वे दोनों हवेली में गए तो हर कोई हैरान था. उसके बाद गृहस्वामिनी ने गृहस्वामी अर्थात अमीर को सारी बात बता दी. वह बहुत खुश हुआ और उसने उस बगीचे में और भी सुन्दर – सुन्दर फूल लगा दिए.

 

 

 

Jadui Pari ki Kahani in Hindi read जादुई परियों की कहानी

 

 

 

छोटी रानी ने पहले ही परी की सारी कहानी सुन ली थी.  वो भी राज्य से बाहर जा कर अनार के पेड़ के नीचे, नदी किनारे जा कर रोने लगी. पिछली बार जैसे ही इस बार भी परी प्रकट हुई.

 

 

 

 

परी ने छोटी रानी से भी उसके रोने का कारण पूछा.  छोटी रानी ने झूठ मूठ बड़ी रानी के ऊपर दोष लगाया और कहा कि उसे बड़ी रानी महल से बाहर निकाल दिया है.

 

 

तब परी बोली, ” ठीक है, मैं जैसा कहती हूँ, वैसा ही करो, न ज़्यादा न कम. पहले इस नदी में तीन डुबकी लगाओ और फिर इस अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ो.” और ऐसा कह कर परी गायब हो गयी.

 

 

 

छोटी रानी ने ख़ुश हो कर नदी में डुबकी लगाई.  जब रानी ने पहली डुबकी लगाई तो उसके शरीर का रंग और साफ़ हो गया, सौंदर्य और निखर आया.

 

 

 

दूसरी डुबकी लगाने पर उसके शरीर पर सुंदर कपड़े और ज़ेवर आ गये. तीसरी डुबकी लगाने पर रानी के सुंदर लंबे काले घने बाल आ गये. इस तरह रानी बहुत सुंदर लगने लगी.

 

 

 

जब छोटी रानी ने ये देखा तो उसे लगा कि अगर वो तीन डुबकी लगाने पर इतनी सुंदर बन सकती है, तो और डुबकिय़ाँ लगाने पर जाने कितनी सुंदर लगेगी.

 

 

 

इसलिये, उसने एक के बाद एक कई डुबकियाँ लगा लीं. मगर उसका ऐसा करना था कि रानी के शरीर के सारे कपड़े फटे पुराने हो गये, ज़ेवर गायब हो गये, सर से बाल चले गये और सारे शरीर पर दाग़ और मस्से दिखने लगी.

 

 

 

छोटी रानी ऐसा देख कर दहाड़े मार मार कर रोने लगी. फिर वो नदी से बाहर आई और अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ा. उस अनार में से एक बड़ा सा साँप निकला और रानी को खा गया. इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि दूसरों का कभी बुरा नहीं चाहना चाहिये, और लोभ नहीं करना चाहिये.

 

 

 

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