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Jago Grahak Jago . जागो ग्राहक जागो उपभोक्ता फोरम जानिये इसके बारे सब कुछ

Jago Grahak Jago in hindi

Jago Grahak Jago in Hindi उपभोक्ता फोरम के बारे में जानिये 

 

 

Jago Grahak Jago के बारे में आज हम विस्तार से जानते हैं. आखिर क्या है जागो ग्राहक जागो और क्या है इसमें आपके अधिकार. आइये जानते है जागो ग्राहक जागो के बारे. 

 

 

सुरक्षा का अधिकार 

 

 

ऐसी सेवाओं और सामग्रियों के विपणन के खिलाफ सुरक्षा पाने का अधिकार जो जीवन तथा संपत्ति के लिए जोखिम कारक हैं. खरीदी गयी वस्तुओं और प्राप्त सेवाओं से न केवल तात्कालिक जरूरतें पूरी होनी चाहिए बल्कि इससे दीर्घ अवधि के हित भी पुरे होते हैं. 

 

 

ग्राहकों को भी किसी उत्पाद को खरीदने से पहले उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी सेवाओं की गारंटी पर जोर देना चाहिए. उन्हें आईएसआई, एगमार्क जैसे मार्क वाले ही उत्पाद ही लेने चाहिए. 

 

 

सूचना पाने का अधिकार 

 

वस्तुओं की गुणवत्ता, मात्र, शक्ति, शुद्धता, मानक और मूल्य के बारे जानकारी होना, जिससे अनुचित व्यापार बंद हो. 

 

 

चुनने का अधिकार 

 

हमें यह जानने चुनने का अधिकार होता है कि हम कौन सी वस्तु चुने और जो वस्तु हम चुने वही हमें प्राप्त हो और निश्चित समय तो तय हुआ पर मिल जाए. 

 

 

सुने जाने का अधिकार 

 

ग्राहकों के हितों पर उपयुक्त मंचो पर उचित विचार किया जाएगा. 

 

शिकायत निवारण का अधिकार 

 

अगर उपभोक्ता के साथ कोई शोषण या अनुचित व्यवहार या छल हुआ है तो उसे उपभोक्ता फोरम में  अपनी शिकायत जरुर दर्ज करनी चाहिए. 

 

उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार 

 

ग्राहकों को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए. 

 

 

Jago Grahak Jago की पूरी जानकारी 

 

 

 

कंपनिया बड़े – बड़े विज्ञापन दिखाकर ग्राहकों को बेवकूफ बनानी है. लेकिन हम सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बिरहे रहते हैं. क्या है उसका कारण? 

हमें अपने अधिकारों के बारे में पता नहीं होता है. 

 

क्या आप जानते हैं कि उपभोक्ता शिकायतों सरल, शीघ्र और कम खर्चीला और निवारण प्रदान करने के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरों पर एक तीन स्तरीय अर्धन्यायिक मशीनरी की संकल्पना की गयी है. 

 

 

यह मंच उपभोक्ता की शिकायतों  को सरल, शीघ्र और कम खर्चीला और निवारण प्रदान करने के लिए अधिदेशित है.  राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग और जिला फोरम यह तीन शिकायत निवारण एजेंसी हैं. 

 

 

कौन शिकायत  कर सकता है? 

 

 

१- किसी भी वस्तु या सेवा के सन्दर्भ में शिकायत की जा सकती है. 

 

२- किसी उपभोक्ता की मृत्यु हो जाने पर उसके कानूनी वारिस या प्रतिनिधि.  अधिनियम के तहत पावर ऑफ़ अटार्नी धारक शिकायत नहीं कर सकता है. शिकायत सिर्फ वही कर सकता है जो मुख्य मालिक हो.

 

३-  एक या अधिक उपभोक्ता, जहां अनेक उपभोक्ताओं की एक सामान शिकायत है . 

 

४- केंद्र सरकार और राज्य सरकार.

 

 

कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत कैसे करें? How do I complain about customer service?

 

 

 

इसके लिए किसी फॉर्म की आवश्यकता नहीं होती है. एक सादे कागज़ पर भी शिकायत लिखी जा सकती है. इसे निम्नलिखित तरीके से लिखे…

 

१- शिकायत करता तथा विरोधी पार्टी का नाम, विवरण, पता.

 

२- शिकायत से सम्बन्धित तथ्य और समय और जगह.

 

३- शिकायत के आरोपों के समर्थन में दस्तावेज.

 

४- शिकायतकर्ता द्वारा मांगी जा रही राहत.

 

५- शिकायतकर्ता या उसके द्वारा अधिकृत एजेंट को  फॉर्म पर हस्ताक्षर करना होता है.

 

६- शिकायत दायर करने के लिए किसी वकील की आवश्यकता नहीं होती है. 

 

७- सांकेतिक न्यायालय शुल्क लगता है.

 

 

शिकायत कहाँ करें? 

 

१- यदि शिकायत २० लाख रुपये से कम हो तो जिला फोरम में शिकायत करें.

 

२- यदि शिकायत २० लाख से अधिक और १ करोड़ से कम हो तो राज्य आयोग में शिकायत करें.

 

३- यदि शिकायत १ करोड़ से अधिक है तो राष्ट्रीय आयोग में शिकायत करें.

 

 

ऑनलाइन शिकायत कैसे करें? Can I file Consumer Complaint Online?

 

 

 

ऑनलाइन शिकायत के लिए आप इस लिंक यहाँ शिकायत करें पर क्लिक करें और फॉर्म को फिलप करें. इसके अतिरिक्त आप राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर 1800-11-4000 ( Only For BSNL And MTNL ) पर भी शिकायत कर सकते हैं. 

 

 

इसके अलावां आप 011-27006500 ( सामान्य काल प्रभार लागू ) पर फोन कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अतिरिक्त अपने शहर का उल्लेख करते हुए आप इस नंबर 8800939717 पर शिकायत SMS भी कर सकते हैं. 

 

 

National Consumer Helpline

 

National Consumer Helpline नंबर 1800-11-4000 है. आप इस पर अपनी शिकायत  को ट्रैक कर सकते हैं.

 

 

क्रसं. राज्य
उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर Consumer Helpline Numbers
1 आंध्रप्रदेश 1800-425-0082 , 1800-425-2977
2 अरुणाचलप्रदेश 1800-345-3601
3 बिहार 1800-345-6188
4 छत्तीसगढ़ 1800-233-3663
5 गुजरात 1800-233-0222
6 कर्नाटक 1800-425-9339
7 केरल 1800-425-1550
8 मध्यप्रदेश 155343 , 0755-2559778
9 महारास्ट्र 1800-2222-62
10 मिजोरम 1800-231-1792
11 नागालैंड 1800-345-3701
12 उड़ीसा 1800-34567-24
13 राजस्थान 1800-180-6030
14 सिक्किम 1800-345-3209
15 तमिलनाडु 044-2859-2828
16 पश्चिमबंगाल 1800-345-2808

 

 

क्या है उपभोक्ता फॉर्म? ( What Is Upbhokta Forum ) 

 

 

उपभोक्ता फोरम जानिये इसके बारे सब कुछ भारत में २४ दिसंबर राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया है. सन १९८६ में २४ दिसंबर के दिन उपभोक्ता सरक्षण अधिनियम पारित हुआ था.

 

 

 

इस अधिनियम में १९९१ और १९९३ में संशोधन किया गया. इसके अतिरिक्त इस कानून को और अधिक सशक्त बनाने के लिए दिसंबर २००२ में एक व्यापक संशोधन लाया गया और फिर इसे १५ मार्च २००३ को लागू किया गया.

 

 

इसके अतिरिक्त उपभोक्ता संरक्षण नियम १९८७ में भी संशोधन किया गया और ५ मार्च २००४ को को अनुसुचित किया गया. भारत सरकार ने २४ दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस घोषित किया है. इसके अतिरिक्त १५ मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है.

 

 

 

यह दिन भारतीय ग्राहक आन्दोलन के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अ गया है. भारत में यह इसे पहली सन २००० में मनाया गया था और तब से इसे प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है.

 

 


उपभोक्ता फोरम जानिये इसके बारे सब कुछ ग्राहक सरक्षण कानून से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि किसी शासकीय पक्ष नी इसे तैयार नहीं किया बल्कि इसे अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने इसका मसौदा तैयार किया.

 

 

१९७९ में ग्राहक पंचायत के अंतर्गत एक कानून समिति का गठन हुआ. इस समिति के अध्यक्ष गोविन्ददास और सचिव सुरेश बहिरात थे. इसके अलावा शंकरराव पाध्ये, वकील गोविंदराव आठवले , स्वाति शहाणे इस समिति के सदस्य थे. ग्राहक पंचायत को यह बात ध्यान में आने लगी कि ग्राहकों को हर क्षेत्र में ठगा जा रहा है.

 

 

 

उसका नुकसान हो रहा है लेकिन उसके पास न्याय माँगने का कोई कानून नहीं है. अगर ग्राहक ने इस अन्याय का प्रतिकार भी किया तो व्यापारी उस पर लूट आदि का आरोप लगा देते थे. इसी को देखते हुए ग्राहक पंचायत ने इसके लिए कानून बनने का निश्चय किया.

 

 

 


१९७७ में लोनावाला में इसकी सदस्यों ने बैठक की और इसमें एक प्रस्ताव पारित करके कानून की मांग की गयी और १९७८ में एक मांग पत्र प्रकाशित किया गया.

 

 

 

९ अप्रैल १९८० को कानून समिति की पहली बैठक में कानून का प्रारूप समिति के सामने रखा गया . इस पर चर्चा के बाद इसी अनीक कानून विशेषज्ञों के पास भेजा गया . राज्य सरकार के पदस्थ सचिव और उच्च न्यायलय के पदस्थ न्यायाधीश से भी चर्चा की. उसके बाद यह कानून अस्तित्व में आया.

 

 

 

 

मित्रों यह पोस्ट  Jago Grahak Jago  जानिये इसके बारे सब कुछ आपको कैसी लगी अवश्य ही बताये और अन्य जानकारी के लिए इस लिंक What is Sixth Sense . सिक्स्थ सेन्स क्या होती है? जाने उसके बारे में पर क्लिक करें.

 

1- Moral Story

 

 

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Abhishek Pandey

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