Jivdani Temple Virar Story. जीवदानी माता की कथा हिंदी में. Jivdani Mandir

Jivdani Temple Virar Story जीवदानी मंदिर की कथा

 

 

Jivdani Temple Virar Story:- मां  जीवदानी देवी का मंदिर मुंबई से लगभग ६० किलोमीटर दूर विरार में स्थित है।  इस मंदिर का बहुत ही अधिक प्रभाव है।

 

 

कहा जाता है की यह एक जागृत मंदिर है।  यहां आने वाले प्रत्येक भक्त की मनोकामना माता जीवदानी जरूर पूरा करती हैं. यह मंदिर विरार पूर्व में स्थित है।

 

 

आप पश्चिम रेलवे के अंतिम स्टॉप विरार पहुंचकर वहाँ से ऑटोरिक्शा के माध्यम से माता जीवदानी मंदिर पहुँच जाएंगे।  जीवदानी मंदिर एक पहाड़ की चोटी पर स्थित है।

 

 

 

मंदिर तक जाने के लिए आपको लगभग १३०० सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है. वैसे वहाँ लिफ्ट की भी व्यवस्था है।  नवरात्रि के समय मंदिर में बहुत अधिक भीड़ होती है।

 

 

 

हर समय मंदिर प्रशासन के तरफ से बहुत अच्छे इंतजाम किये जाते हैं।  यहां बहुत ही दूर दूर से भक्त दर्शन को आते हैं और मनवांछित फल पाते हैं।

 

 

मां जीवदानी की कथा

 

 

माँ जीवदानी के मंदिर के बारे में कई सारी कहानियां, कथाएं प्रचलित हैं।  उन्ही में से एक कहानी के बारे में आपको बताने जा रहा  हूँ।  कहा जाता है की जिस पर्वत पर माता जीवदानी विराजित हैं उसी पर्वत पर एक चरवाहा रोज अपनी गायों को चराने आता था।

 

 

 

वह अपने  मेहनताने के रूप में गाय के मालिकों से अनाज या फिर पैसा लेता था।  उसकी तमाम गायों में से एक गाय अन्य गायों से बिल्कुल ही अलग थी।

 

 

 

वह गाय दिन भर तो सभी गायों के साथ रहती लेकिन शाम के समय वह अचानक से गायब हो जाती।  इससे चरवाहा बहुत परेशान और आश्चर्यचकित रहने लगा।

 

 

 

उस गायब के अचानक गायब हो जाने से उसे मेहनताना भी नहीं मिल पाता था।  उसने इस गाय पर नज़र रखने लगा।  एक दिन उसने उस गाय का पीछा करने की सोची।

उसने देखा की वह गाय खेत, खलिहानों और मैदानों से होते हुए पर्वत पर चढने लगी।  वह चरवाहा भी चुप चाप उसके पीछे चलने लगा।  पहाड़ पर पहुँच कर उसने देखा कि वहाँ एक स्त्री प्रकट हुईऔर गयी वहीँ रुक गयी।

 

 

 

चरवाहा बड़ा ही प्रसन्न हुआ।  उसने उस स्त्री से पूछा कि यह गाय आपकी है तो उस स्त्री ने जवाब दिया ” हाँ, यह गाय मेरी है। ” तब उस चरवाहे ने कहा, ” मैं इस गाय को बहुत दिनों से चारा रहा हूँ।  अगर यह गाय आपकी है तो इसे चराने का मेरा मेहनताना दो।  मैं एक गरीब चरवाहा हूँ , बहुत मेहनत के बाद कुछ पैसे और अनाज जुटा पाटा हूँ। इससे मेरा और मेरे परिवार का भरण – पोषण होता है।  अगर आप इस गाय के चराने का मेहनताना मुझे देंगी तो बड़ी कृपा होगी।  ”

 

 

Jivdani Temple Virar

 

 

 

” ठीक है।  अपने हाथ खोलो ” उस स्त्री ने कहा।  जब चरवाहे ने अपने हाथ खोले तो उस स्त्री ने चरवाहे के हाथ में कोयला दे दिया।  इससे चरवाहा क्रोधित हो गया और क्रोध में उसने कोयला फेकते हुए बोला, ” यह क्या हरकत है।  अगर आपको कुछ नहीं देना है तो मत दो लेकिन बेइज़्ज़ती तो मत करो।  ”

 

 

 

तब तक वह स्त्री वहाँ से गायब हो गयी थी और तभी अचानक से वह गाय पहाड़ी से कूद गयी।  इससे चरवाहा घबरा गया और तेजी से गाँव की तरफ भागा और सारी बात  गाँव वालों  को बताई।

 

 

तभी एक बुजुर्ग बोला, ” पागल, वह देवी माँ थीं।  कोयले का दान बहुत ही शुभ  होता है।  ”

 

तब से वह चरवाहा वहाँ रोज पूजा – अर्चना करने लगा।  उसके बाद बहुत से लोग यहां पूजा – पाठ करने लगे।  आज के समय में जहां माता जीवदानी का विशालकाय मंदिर है वहाँ पहले मात्र एक गुफा थी।
१९६६ में माता जीवदानी की मूर्ति की स्थापना की गयी और तब से लगातार माता जीवदानी टेम्पल की ख्याति बढती गयी।  आज माता जीवदानी टेम्पल में हजारों की संख्या में रोज भक्त आते हैं और नवरात्रि के दिनों में यह संख्या काफी अधिक हो जाती है।
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