Moral Story

kahani in hindi with moral

kahani in hindi with moral
Written by Abhishek Pandey

kahani in hindi with moral एक साधू और एक डाकू यमलोक पहुंचे . यमराज ने कहा बताईये आपको नरक और स्वर्ग में से क्या दिया जाए और क्यों. दोनों आश्चर्य में पड़ गए कि क्या माजरा है. इन सब का निर्णय तो स्वयं यमराज करते हैं. कुछ सोचकर डाकू ने यमराज से कहा प्रभु मैंने जिंदगी भर पाप कर्म किये, लोगों को तड़पाया तो यहाँ किस अधिकार से स्वर्ग की मांग कर सकता हूँ अतः दंड की कामना करता हूँ और साधू ने कहा प्रभु मैंने जप – तप किये , पूण्य का कार्य किया अतः मुझे स्वर्ग की सुख सुविधाएं चाहिए .

 

यमराज ने डाकू को साधू की सेवा करने का आदेश दे दिया. डाकू ने सिर झुकाकर यम की आज्ञा स्वीकार कर ली. लेकिन साधू ने इसपर आपत्ति की. उसने कहा प्रभु! इस पापी के स्पर्श मात्र से ही मैं अपवित्र हो जाऊँगा. मेरी सारी तपस्या तथा भक्ति का पुण्य निरर्थक हो जाएगा.

 

यह सुनते ही यमराज जी क्रोधित होते हुए बोले – इतने पाप करनेवाला और भोले व्यक्तियों को लुटने वाला इतना विनम्र हो गया और तुम्हारी सेवा करने को तैयार हो गया और एक तुम हो जो इतने वर्षों तक तपस्या करने के बाद भी अहंकार से मुक्त नहीं हो सके और यह न जान सके कि सबमें एक ही आत्मतत्व समाया हुआ है. तुम्हारी तपस्या अधूरी है. अतः अब तुम इस डाकू की रोज सेवा करोगे. यही तुम्हारा प्रायश्चित होगा .

 

इस कहानी का सन्देश यह है कि तपस्या वही प्रतिफलित होती है , अहंकार मुक्त हो . वस्तुतः अहंकार का त्याग ही तपस्या का मूल मंत्र है और यही भविष्य में प्रभु कृपा प्राप्ति का आधार बनाता है. मित्रों आपको यह moral story kahani in hindi with moral कैसी लगी जरुर बताएं और इस तरह की moral story के लिए इस ब्लॉग को लाइक , शेयर और सबस्क्राइब करें और दूसरी moral story के लिए इस लिंक purani kahani पर क्लिक करें.

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