Kahani in Hindi Pdf / Kahani in Hindi For Kids / हिंदी की कहानियां
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Kahani in Hindi Pdf / Kahani in Hindi For Kids / हिंदी की कहानियां

Kahani in Hindi Pdf यह एक Stories in Hindi To Read है।  आज पुरे ७ सालों के बाद अचानक से राहुल और प्रीती एक शापिंग माल में टकरा गए. चूँकि राहुल अपनी मां के लिए कुछ साड़ियाँ लेने आया था और प्रीती को भी कुछ खरीदारी करनी थी.

 

 

 

इतने सालों के बाद मिलने के बाद दोनों एक दुसरे को फटी आखों से देख रहे थे.दोनों ही कुछ बोलना चाह रहे थे लेकिन बोलने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे. किसी तरह हिम्मत करके राहुल नी प्रीती से  पूछा ” कैसी हो ”

 

 

 

वही पहले जैसा प्यारा स्वर…कोई बनावट नहीं…कोई शिकायत नहीं …..यह देख कर प्रीती ने ख्यालों के सागर में डूबने के पहले खुद को संभाला और बोली ” मैं ठीक हूँ..तुम कैसे हो ”

 

 

Kahani in Hindi Written

 

 

 

इधर भी वही कश्मकश थी….राहुल ने नी ध्यान से प्रीती की तरफ देखा…..उसे साड़ी पुरानी बाते याद आने लगीं…..लेकिन उसने उन यादों को वही चहरे पर नहीं आने दिया…और हल्की  मुस्कान के साथ बोला “मैं भी ठीक हूँ ”

 

 

 

वे दोनों वहीँ माल के पास चहलकदमी करते हुए बाते करने लगे….धीरे धीरे वे फिर से खुलने लगे थे…..राहुल ने प्रीती से कहा कि तुम तो मुंबई चली गयी थी ना….यहाँ किसी काम से आई हो क्या.

 

 

 

 

हाँ ओ…..मेरे एक दूर के रिश्तेदार हैं…उनकी तबियत ज़रा ठीक नहीं थी तो मैं उनसे मिलने आई थी….प्रीती ने कहां

 

 

अच्छा हाँ..ओ फूफा जी ना…..क्या हो गया था उनको….राहुल ने थोड़ा घबराते हुए कहा.

 

 

 

नहीं…नहीं कुछ खास नहीं….थोड़ी तबियत खराब थी…..अच्छा ओ सब छोड़ो..ये बताओ की और क्या चल रहा है….बच्चे…..बीबी कैसे हैं….प्रीती ने बात को बदलते हुए कहा.

 

 

 

अरे शादी ही नहीं की तो बच्चे कहां से रहेंगे……राहुल ने सिरिअस होते हुए कहा.

 

 

 

 

उसके बाद मानसी भी चुप हो गयी…काफी समय तक ख़ामोशी छाई रही….ऐसा लग रहा था जैसे दोनों अपने अपने जिन्दगी की गहराई में गोते लगा रहे हों.

 

 

 

 

कुछ समय की शान्ति के बाद राहुल ने कहा….अभी हमें चलना चाहिए….फिर कल यही मिलते हैं.

 

 

 

हाँ ठीक है….प्रीती ने कहा..शायद वह भी समझ चुकी थी कि इस हालात में बात करना अब ज्यादा ही मुश्किल हो जाएगा.

 

 

 

राहुल वहाँ से निकलते ही फिर से उसी ख्यालों में डूब गया. जब राहुल की प्रीती से शादी होने वाली थी तो राहुल थोड़ा नर्वश था. वह चाहता था कि वह अपनी होने वाली जीवनसंगिनी के साथ थोड़ा समय बिठाये, उसके बारे मीन जाने समझे, उसकी पसंद नापसंद के बारे में जाने.

 

 

 

आखिर वह नए ख्यालात वालों में से था. लेकिन उसके घर वालों को यह बात ठीक नहीं लगी. उसके घर में उसकी मां , पिता और बहन थे. यही उसका परिवार था. उन्होने कहा कि ऐसा करना गलत है. लड़की के परिवार वाले इस बारे में क्या सोचेंगे.

 

 

 

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क्या सोचेंगे….हां..आप लोग आज भी पुराने ख्यालात में जी रहे हैं. जब तक हम एक दुसरे को थोड़ा समझ नहीं लेते तो हम अपनी पूरी जिंदगी साथ कैसे बिता सकेंगे. बस दो चार मुलाक़ात और क्या……राहुल ने गुस्से और चिढते हुए कहा.

 

 

 

 

घर वालों के मना करने पर भी उसने यह बात प्रीती के घर वालों तक पहुंचा. प्रीती भी मोर्डन ख्यालात की लड़की थी. वह इस प्रस्ताव को ख़ुशी से मान गयी.

 

 

 

हिंदी की कहानी 

 

 

 

पहली ही मुलाक़ात में दोनों एक दुसरे को पसंद करने लगे. धीरे धीरे मुलाकातों का दौर बढ़ता गया और उनका प्यार भी बढ़ता गया. सब कुछ एकदम बढ़िया हो रहा था.

 

 

 

तय समय पर दोनों की शादी हुई. शादी के बाद भी सब कुछ एकदम सही चल रहा था कि एक दिन ऐसी घटना हो गयी कि मानो इस हसते खेलते परिवार को किसी की नजर लग गयी हो.

 

 

 

प्रीती ने अचानक से एक दिन कहा कि तुम इतना पैसा कमाते हो एक बड़ा घर क्यों ना ले लेते, जिसमे हम दोनों रह सकें.

 

 

 

“हम दोनों ” इससे क्या मतलब है तुम्हारा..राहुल ने हैरानी जताते हुए कहा.

 

 

 

मतलब साफ है….मैंने तुमसे शादी की है…घर की नौकरानी नहीं हम मैं….यहाँ तुम्हारे मां…बाप और उस पनौती बहन की सेवा करूं मैं….प्रीती ने गुस्से से कहा.

 

 

 

 

चुप….एकदम चुप…..अब एक आवाज नहीं……राहुल ने लगभग चिल्लाते हुए कहा और उसकी तेज आवाज को सुनकर घर के बाकी सदस्य तेजी से उसकी तरफ आये और राहुल की मां ने पूछा क्या हुआ बेटा.

 

 

 

कुछ नहीं मां…..आप लोगों के प्यार ने इसे पागल कर दिया है…राहुल ने तंज कसते हुए कहा.

 

 

 

तुम और तुम्हारा सारा खानदान पागल है…..क्रोध की आखिरी सीमा पर खडी प्रीती ने कहा.

 

 

 

 

चटाक……राहुल ने प्रीती को एक थप्पड़ लगा दिया.वह अब प्रीती की इस गुस्ताखी को नजरअंदाज नहीं कर सकता था. उसके परिवार वालों को कुछ समझ नहीं आ रहा था. वे हक्के बक्के वहीँ खड़े रहे और प्रीती अपने आंसू पोंछते हुए तेजी से अपने कमरे की ओर चली गयी.

 

 

 

अरे कोई मुझे बतायेगा की यहाँ क्या हो रहा है….राहुल के पिता ने चीखते हुए कहा.

 

 

 

अब राहुल सबको सारी बाते बताने लगा कि इतने में प्रीती बड़ा सा बैग लेकर निकली…..कहां जा रही हो बेटी राहुल की मां ने पूछा.

 

 

 

अपने घर जा रही हूँ..अब इस घर में दुबारा कभी नहीं आउंगी…..प्रीती के गुस्से से कहा.

 

 

 

रुक जा बेटी…..राहुल की मां ने कहा लेकिन अपनी मां की बात को काटते हुए राहुल ने कहा जाने दो मां…अभी उसे रोकना ठीक नहीं होगा.

 

 

 

घर में एक अजीब तरह का माहौल बन गया था. हर कोई खुद को ही दोष देता था. कई बार राहुल ने प्रीती से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो सका.

 

 

Kahani in Hindi 2020

 

 

 

वह शायद राहुल की कमजोरी समझ बैठी थी कि राहुल उसके बगैर नहीं रह सकता, अब प्रीती की इस बेरुखी ने राहुल को पहले से अधिक कठोर बना दिया.

 

 

 

उसने घर वालों से कह दिया कि अब प्रीती को कोई मनाने नहीं जायेगा और ना ही घर में कोई उसकी बात करेगा. सबको लग रहा था कि कुछ ही दिनों में सबकुछ सही हो जाएगा.

 

 

 

 

लेकिन शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था.कुछ ही दिनों में तलाक का नोटिस राहुल के घर आ गया. अब आशा की अंतिम डोर भी टूट गयी थी.

 

 

 

 

दरअसल प्रीती को रिश्तों की परख, रिश्तों की समझ  बिलकुल नहीं थी. वह बस पैसे को सबकुछ समझती थी, उसे इस बात का भान नहीं था कि अगर रिश्ते ही ना रहे तो पैसों की क्या बिसात रह जायेगी.

 

 

 

समय बिता और राहुल की बहन की भी शादी हो गयी. तलाक के केस की तारीख थी और उसी सिलसिले में प्रीती शहर आई हुई थी. लेकिन अब शायद इस रिश्ते की एक अलग शुरुआत होने वाली थी.

 

 

 

 

अगली सुबह का इंतज़ार हर किसी को थक, लेकिन प्रीती और राहुल को अगली सुबह का बहुत ही बेसब्री से इन्तजार था.अगली सुबह दोनों को बहुत सुहानी लग रही थी.

 

 

 

अब निश्तित समय से काफी पहले दोनों उस माल के पास पहुँच गए.

 

 

 

क्या हुआ राहुल इतनी जल्दी….क्या मेरे बिना रात नहीं कट रही थी….प्रीती ने मुस्करा कर पूछा.

 

 

 

न..ना अरे ऐसी कोई बात नहीं है…राहुल ने ऐसी कहा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो, लेकिन तभी उसने तपाक से कहा प्रीती तुम भी तो पहले ही आ गयी हो…शायद तुम भी ……वह बात पूरी कर पाता की प्रीती ने उसे गले से लगा लिया.

 

 

उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे….यह देख राहुल की आखों से भी आंसू के मोती छलक उठे…..सारे घमंड…नफ़रत…इन आंसुओं में धुल रहे थे. मुझे माफ़ कर दो राहुल…मैं रिश्तों को समझ नहीं पायी थी…प्रीती ने रोते हुए कहा.

 

 

 

मुझे भी माफ़ कर दो…राहुल ने कहा.

 

 

 

वहा काफी भीड़ जुट गयी…लोगों ने ताली बजाकर दोनों का स्वागत किया…..प्रीती ने केस वापस ले लिया और फिर से सभी साथ रहने लगे.

 

 

2- आखिर वह मुझे नहीं मिली Kahani in Hindi Love :-हेलो दोस्तों मेरा नाम राहुल सक्सेना है. आज मैं आपको अपनी सच्ची लव स्टोरी बताने जा रहा हूँ, लेकिन दर्द इस बात का है की यह लव स्टोरी अपनी पूर्णता को प्राप्त नहीं हो सकी.

 

 

 

मित्रों आज मैं करीब एक साल से इस दर्द को खुद में ही छुपा कर रखा था, लेकिन अब इसे सहा नहीं जाता . अन्दर ही अन्दर बहुत घुटन सी होने लगी है, तो मैंने सोचा की क्यों ना इस दर्द को बाहर निकाल दिया जाए.

 

 

 

मुझे पता है कि इस दर्द के बाहर आने पर मेरी जिंदगी में एक बार फिर से भूचाल आने वाला है, लेकिन अगर यह दर्द बाहर नहीं आया तो मेरे अन्दर का भूचाल मुझे खत्म ही कर देगा.

 

 

 

 

दोस्तों बात तब की है जब मैं कालेज में पढाई करता था. वहाँ एक लड़की थी रेशमा…..रेशमा चौधरी. बला की खुबसूरत….कजरारे नैन….लाल सुर्ख होंठ….गोरा रंग….अरे लड़की क्यों अप्सरा कहना चाहिए था.

 

 

 

दोस्तों मुझे उस लड़की से पहली ही नजर में प्यार हो गया था. लेकिन मुझे हमेशा इस बात का दर था की कहीं यह प्यार एकतरफा तो नहीं है ना. मैं हमेशा से ही भगवान से इस बात की प्रार्थना करता था की यह प्यार एकतरफा ना हो.

 

 

 

मुझे भगवान ने वह समय दे ही दिया जब मैं इस बात को जांच लूँ की यह प्रेम एकतरफा है की नहीं. एक दिन कॉलेज की छुट्टी के बाद जब मैं घर जा रहा था तो देखा की रेशमा की साइकिल खराब हो गयी थी.

 

 

 

वह साइकिल को एक आम के पेड़ के निचे खड़ी करके उसे बनाने की कोशिश कर रही थी और वह साईकिल बन नहीं रही थी. दरअसल में उसका दुपट्टा साइकिल के चैन में फंस गया था.

 

 

 

 

मैंने जब यह देखा तो मैं वहीँ रुक गया और उसकी हेल्प की…उसके बाद हम साथ में ही अपने – अपने घर गए. रास्ते में हमने एक दुसरे के बारी काफी कुछ जाना…..धीरे धीरे हमारी दोस्ती परवान चढने लगी.

 

 

 

एक दिन मौक़ा देखकर मैंने उसे प्रपोज कर दिया. उसने उसी पल हाँ कह दिया. यह मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था. मैं उस दिन बहुत खुश था.

 

 

 

लेकिन शायद यह ख़ुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाली थी. एक्जाम का समय आने वाला था. हम लोग बहुत मेहनत से पढ़ाई में लग गए. अब मेरा लक्ष्य अच्छे नम्बर्स लाकर रेशमा को और अधिक खुश करना था.

 

 

 

 

एक्जाम्स खत्म हो गए. रिजल्ट के दिन आ गए, लेकिन मुझे क्या पता था की आज के दिन दो दो परिणाम आने वाले हैं एक मेरे पढाई के और एक मेरे प्रेम के…..

 

 

 

मेरी नजर रेशमा को ही धुंढ रही थी.लेकिन रेशमा कहीं दिखाई नहीं दे रही थी. तभी राजू ने बताया की जाकर नम्बर्स ले ले……जब मैंने रिजल्ट लियए तो देखा की ९८% मार्क्स आये हैं.

 

 

 

मैं बहुत ही खुश हो गया कि पहली परीक्षा में तो मैं पास हो गया अब दूसरी परीक्षा में भी अवश्य ही पास हो जाऊँगा. अब मेरी नजर और भी बेसब्री से रेशमा की राह ताकने लगीं.

 

 

 

 

तभी मैंने देखा की रेशमा एक हैंडसम शहरी लडके के साथ कार से उतरी…मैं यह देख कर हैरान हो गया की किस तरह वह लड़का उसकी बाहों में हाथ डालकर उससे बातें कर रहा था.

 

 

 

उसके बिखरे हुए बालों को संवार रहा था…मैं दौड़कर रेशमा के पास गया, लेकिन रेशमा ने मुझे इग्नोर कर दिया…अब मुझे गहरा धक्का लगा….मैं तेजी सी उसके पास पहुंचा और उसका हाथ पकड़ कर बोला कौन है यह लड़का…..मेरा गुस्सा उस समय सातवें आसमान पर था.

 

 

 

क्या बेहूदगी है…हाथ छोड़…उस लडके ने कहा.

 

 

 

तू बीच में मत आ….यह हमारे बीच का मामला है….और तू है भी कौन.

 

 

 

इसके पहले की वह लड़का कुछ जवाब दे….रेशमा नी कहा की यह हेमंत है…..मेरा मंगेतर.

 

 

 

और मैं…मैने पूछा.

 

 

 

तू…तू मेरा…….टाईमपास और दोनों हंसने लगे.

 

 

 

 

 

मैं वहीँ बैठ गया……ऐसा लग रहा था की पूरा आसमान मेरे ऊपर गिर पडा हो..धरती में मेरे पैर जकड गए हों..किसी तरह से मेरे दोस्तों ने मुझे मेरे घर पहुंचाया और वहाँ कहा की इसकी तबिय्यत अचानक से खराब हो गयी थी.

 

 

Kahani in Hindi to Read

 

 

 

उस दिन के बाद सी मैं कुछ भी ठीक ढंग से नहीं कर पा रहा हूँ…ना ही खाने में मन लगता है….न ही कुछ करने में…..दोस्तों से पता चला की वह फेल हो गयी थी….तो भी इस दिल को उसके फेल होने का दर्द हुआ…उस दिल को जिसे उसने ठुकरा दिया है.

 

 

 

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