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कठिन परिश्रम का परिणाम
कठिन परिश्रम का परिणाम
Written by Hindibeststory

kahani बहुत समय पहले की बात है. एक महात्मा जी एक नगर से होकर कहीं जा रहे थे. मार्ग में उन्हें एक सिक्का मिला. महात्मा जी तो वैरागी थे. उन्हें इस पैसे से क्या मतलब था. अतः उन्होंने सोचा कि इसे किसी गरीब को दे दिया जाए. कई दिन बीत गए लेकिन उन्हें कोई ऐसा गरीब नहीं मिला , जिसे उस रुपये की आवश्यकता हो.

एक दिन महात्मा जी अपने नित्यकर्म के लिए सुबह सुबह उठे तो देखे कि एक राजा अपनी सेना को लेकर दुसरे राज्य पर आक्रमण के लिए जा रहा था. जैसे ही राजा का काफिला महात्मा जी के आश्रम से गुजरा तो महात्मा जी को देख कर राजा ने काफिले को रुकने का आदेश दिया.

राजा ने महात्मा को प्रणाम किया और कहा कि दुसरे राज्य को जीतने के लिये जा रहा हूँ . कृपया आशीर्वाद आशीष दें की मेरी विजय हो.

इस पर महात्मा जी ने कहा कि क्या आपकी उस राज्य से कोई शत्रुता है ? या फिर उस राज्य की वजह से आपके राज्य , सत्ता को कोई नुकसान हो रहा है.

इस पर राजा ने कहा नहीं …ऐसा कुछ नहीं है.

इस पर महात्मा जी नी कहा तो फिर आप क्यों उस राज्य पर आक्रमण करने जा रहे हैं ?

राज्य विस्तार के लिए …राजा ने उत्तर दिया

महात्मा जी ने कुछ देर सोचा और वह सिक्का जेब से निकालकर राजा के हथेली पर रख दिया. यह देख राजा बड़ा नाराज हुआ और हैरान भी हुआ. उसने महात्मा जी से इसका कारण पूछा .

महात्मा जी ने सहज भाव से उत्तर दिया ” राजन ! यह सिक्का मुझे बहुत दिनों पहले मिला था. अब भला मुझे इस पैसे से क्या मतलब , तो मैंने सोचा इसे किसी गरीब को दे दूंगा, लेकिन आज तक कोई गरीब नहीं मिला था . लेकिन आज आपको देख कर मुझे लगा कि आपको इसकी बड़ी आवश्यकता है. आपसे बड़ा गरीब तो कोई नहीं है , जो खुद का राज्य और संपत्ति होने पर भी दुसरे राज्य की लालसा रखता हो.

राजा को अपनी गलती का एहसास हो गया. उन्होंने महात्मा जी क्षमा मांगी और सेना लेकर वापस चले गये. मित्रों आपको यह kahani कैसी लगी जरुर बताएं और इस तरह की और भी kahani कके लिए इस ब्लॉग को लाइक , शेयर और सबस्क्राइब कर लें . इस ब्लॉग पर रोज नयी कहानिया पोस्ट होती हैं और दूसरी kahani के लिए इस लिंक sabak in hindi पर क्लिक करें.

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