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हिंदी कहानियां

हिंदी कहानियां
Written by Abhishek Pandey

हिंदी कहानियां कभी किसी ने एक घमण्डी साधु को चमड़े की धोती दान में दे दी जिसे पहन कर वह साधु अपने को अन्य साधुओं से श्रेष्ठ समझने लगा.

 

एक दिन वह उसी वस्त्र  को पहन कर भिक्षाटन के लिए घूम रहा था.  रास्ते में उसे एक बड़ा सा जंगली भेड़ मिला.  वह भेड़ पीछे को जाकर अपना सिर झटक-झटक कर नीचे करने लगा.  साधु ने समझा कि निश्चय ही वह भेड़ झुक कर उसका अभिवादन करना चाहता था, क्योंकि वह एक श्रेष्ठ साधु था; जिसके पास चमड़े के वस्त्र थे.

 

तभी दूर से एक व्यापारी ने साधु को आगाह करते हुए कहा: “हे ब्राह्मण! मत कर तू विश्वास किसी जानवर का…. बनते है; वे तुम्हारे पतन का कारण  जाकर भी पीछे वे मुड़ कर करते हैं आक्रमण.”

 

राहगीर के इतना कहते-कहते ही उस जंगली भेड़ ने साधु पर अपने नुकीले सींग से आक्रमण कर नीचे गिरा दिया. साधु का पेट फट गया और क्षण भर में ही उसने अपना दम तोड़ दिया.

 

 

   हिंदी कहानियां 

 

एक महावत था जिसका एक हाथी काफी बुढा हो गया था .  महावत ने सोचा अब ये किसी काम का नहीं है , अगर इसे अभी नहीं बेचा तो इसका कोई दाम नहीं मिलेगा . ऐसा सोचकर वो उसे गाँव के पशु मेले में ले आया .

उसने हाथी को खूब साफ़ करके उसपर खूब सारा काला रंग और तेल लगा दिया . ये सब करने से हाथी जवान लगने लगा .  मेले में दूर दूर से लोग उस हाथी को देखने आते . कुछ रईश लोग उसको लेने के लिए भी उत्सुक दिखे .  महावत को अपनी तरकीब काम करती नज़र आ रही थी .

एक दिन हकीरा भी मेले में पहुचा . वो हाथी देखेते ही अपनी भौ सिकोड़ के खड़ा हो गया . वो हाथी को कभी आगे से कभी पीछे से देखता . महावत का तो जी आधा हो गया . उसको लगा – लगता हैं इस आदमी को पता चल गया है कि  हाथी बुढा है .

महावत दौड़ के हकीरा के पास आया , और झट से उसे ले के दूर चला गया . महावत ने एक सौ रूपये हकीरा को दिए और बोला – “चलो चलो ! रख लो .. और जाओ यहाँ से .. “

हकीरा ने कहा – “परन्तु मैं ये कह रहा था कि …”

महावत ने जल्दी से उसे वहा से और दूर ले जाके कहा – “हो गया ! जाओ भी ..”

हकीरा वहा से चला गया .

महावत ने पता लगाया तो पता चला की हकीरा उस गाँव का सबसे बुद्धिमान आदमी हैं .

दुसरे दिन हकीरा फिर से आया और लगा हाथी का मुआयना करने . कभी आगे से कभी पीछे से   .

महावत दौड़ के हकीरा के पास आया , और झट से उसे ले के दूर चला गया . महावत ने इस बार पांच सौ रूपये हकीरा को दिए और बोला – “अरे भाई ! कोई बात नहीं … जाओ यहाँ से .. “

हकीरा कुछ कह पाता इसके पहले महावत ने उसे वहाँ से दूर कर दिया .

अगले दिन हकीरा फिर से आया और लगा हाथी का मुआयना करने . कभी आगे से कभी पीछे से .
महावत को बड़ा गुस्सा आया .

महावत (सबके सामने चिल्लाते हुए ) – क्या है ? क्या पता कर लिए तुम इस हाथी के बारे में ?

हल्ला गुल्ला  सुन के लोगो की भीड़ लग गयी .

हकीरा – अरे जनाब मैं ये कह रहा था की इसका  …

महावत (और जोर से चिल्लाते हुए ) – इसका क्या ? क्या इसका ? तुम यह कैसे कह सकते हो की ये हाथी बुढा है?

हकीरा – ऐसा है की .. मैं समझ नहीं पा रहा ….

महावत – अरे क्या समझ गए … क्या नहीं समझ पा रहे .. चलो मैंने माना की ये हाथी बुढा और बेकार है .. तो क्या … जाओ यार तुम्हारे गाँव में मुझे सौदा ही नहीं करना ..

लोगो के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रही . लोगो में कानाफूसी शुरू हो गयी .

हकीरा – मेरी बात तो सुनिए …

महावत (सर पर हाथ रख के बैठ गया ) – जाओ यहाँ से यार . मैं मान गया तुम बहुत बुद्धिमान हो ..

हकीरा – मेरी बात तो सुनिए …

महावत – बोलो भाई ! बोलो !

हकीरा – मैं समझ नहीं पा रहा हूँ की इस जानवर की पूँछ आगे है या पीछे ..

महावत दीवाल पर सर पटकने लगा .

हकीरा ने पीछे से बोला  – और हाँ . इसका मुंह तो है ही नहीं ??

महावत ने पलट के देखा और जोर से रोने लगा !!

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                                                                                                हिंदी कहानियां       

पुराने समय की बात है.  एक राजा था .  वह बड़ा समझदार था और हर नई बात को जानने को इच्छुक रहता था.  उसके महल के आंगन में एक बकौली का पेड़ था.  रात को रोज नियम से एक पक्षी उस पेड़ पर आकर बैठता और रात के चारों पहरों के लिए अलग-अलग चार तरह की बातें कहा करता. पहले पहर में कहता :

“किस मुख दूध पिलाऊं,

किस मुख दूध पिलाऊं”

दूसरा पहर लगते बोलता :

“ऐसा कहूं न दीख,

ऐसा कहूं न दीख !”

जब तीसरा पहर आता तो कहने लगता :

“अब हम करबू का,

अब हम करबू का ?”

जब चौथा पहर शुरू होता तो वह कहता :

“सब बम्मन मर जायें,

सब बम्मन मर जायें !”

राजा रोज रात को जागकर पक्षी के मुख से चारों पहरों की चार अलग-अलग बातें सुनता.  सोचता, पक्षी क्या कहता ? पर उसकी समझ में कुछ न आता.  राजा की चिन्ता बढ़ती गई.  जब वह उसका अर्थ निकालने में असफल रहा तो हारकर उसने अपने पुरोहित को बुलाया.  उसे सब हाल सुनाया और उससे पक्षी के प्रशनों का उत्तर पूछा.  पुरोहित भी एक साथ उत्तर नहीं दे सका.  उसने कुछ समय की मुलत मांगी और चिंतित होकर घर चला आया.  उसके सिर में राजा की पूछी गई चारों बातें बराबर चक्कर काटती रहीं.  वह बहुतेरा सोचता, पर उसे कोई जवाब न सूझता.  अपने पति को हैरान देखकर ब्राह्मणीने पूछा, “तुम इतने परेशान क्यों दीखते हो ? मुझे बताओ, बात क्या है ?”

इस पर ब्राह्मण   ने कहा, “क्या बताऊं ! एक बड़ी ही कठिन समस्या मेरे सामने आ खड़ी हुई है.  राजा के महल का जो आंगन है, वहां रोज रात को एक पक्षी आता है और चारों पहरों मे नितय नियम से चार आलग-अलग बातें कहता है . राजा पक्षी की उन बातों का मतलब नहीं समझा तो उसने मुझसे उनका मतलब पूछा.  पर पक्षी की पहेलियां मेरी समझ में भी नहीं आतीं.  राजा को जाकर क्या जवाब दूं, बस इसी उधेड़-बुन में हूं.”

ब्राह्मणी  बोली, “पक्षी कहता क्या है? जरा मुझे भी सुनाओ.”

ब्राह्मण  ने चारों पहरों की चारों बातें कह सुनायीं.  सुनकर ब्राह्मणी बोली.  “वाह, यह कौन कठिन बात है! इसका उत्तर तो मैं दे सकती हूं.  चिंता मत करो.  जाओ, राजा से जाकर कह दो कि पक्षी की बातों का मतलब मैं बताऊंगी.”

ब्राह्मण  राजा के महल में गया और बोला, “महाराज, आप जो पक्षी के प्रश्नों के उत्तर जानना चाहते हैं, उनको मेरी पत्नी  बता सकती है.”

पुरोहित की बात सुनकर राजा ने उसकी स्त्री को बुलाने के लिए पालकी भेजी.  ब्राह्मणी  आ गई.  राजा-रानी ने उसे आदर से बिठाया.  रात हुई तो पहले पहर पक्षी बोला:

“किस मुख दूध पिलाऊं,

किस मुख दूध पिलाऊं ?”

राजा ने कहा, “पंडितानी, सुन रही हो, पक्षी क्या बोलता है?”

वह बोली, “हां, महाराज ! सुन रहीं हूं. वह अधकट बात कहता है.”

राजा ने पूछा, “अधकट बात कैसी ?”

पंडितानी ने उत्तर दिया, “राजन्, सुनो, पूरी बात इस प्रकार है-

लंका में रावण भयो बीस भुजा दश शीश,

माता ओ की जा कहे, किस मुख दूध पिलाऊं.

किस मुख दूध पिलाऊं ?”

लंका में रावण ने जन्म लिया है, उसकी बीस भुजाएं हैं और दश शीश हैं. उसकी माता कहती है कि उसे उसके कौन-से मुख से दूध पिलाऊं?”

राज बोला, “बहुत ठीक ! बहुत ठीक ! तुमने सही अर्थ लगा लिया.”

दूसरा पहर हुआ तो पक्षी कहने लगा :

ऐसो कहूं न दीख,

ऐसो कहूं न दीख.

राजा बोला, ‘पंडितानी, इसका क्या अर्थ है ?”

पडितानी ने समझाया, “महाराज ! सुनो , पक्षी बोलता है :

“घर जम्ब नव दीप

बिना चिंता को आदमी,

ऐसो कहूं न दीख,

ऐसो कहूं न दीख .”

चारों दिशा, सारी पृथ्वी, नवखण्ड, सभी छान डालो, पर बिना चिंता का आदमी नहीं मिलेगा.  मनुष्य को कोई-न-कोई चिंता हर समय लगी ही रहती है. कहिये, महाराज! सच है या नहीं ?”

राजा बोला, “तुम ठीक कहती हो.”

तीसरा पहर लगा तो पक्षी ने रोज की तरह अपी बात को दोहराया :

“अब हम करबू का,

अब हम करबू का ?”

ब्राह्मणी  राजा से बोली, “महाराज, इसका मर्म भी मैं आपको बतला देती हूं. सुनिये:

पांच वर्ष की कन्या साठे दई ब्याह,

बैठी करम बिसूरती, अब हम करबू का,

अब हम करबू का.

पांच वर्ष की कन्या को साठ वर्ष के बूढ़े के गले बांध दो तो बेचारी अपना करम पीट कर यही कहेगी-‘अब हम करबू का, अब हम करबू का ?” सही है न, महाराज !”

राजा बोला, “पंडितानी, तुम्हारी यह बात भी सही लगी.”

चौथा पहर हुआ तो पक्षी ने चोंच खोली :

“सब बम्मन मर जायें,

सब बम्मन मर जायें .”

तभी राज ने ब्रह्राणी से कहा, “सुनो, पंडितानी, पक्षी जो कुछ कह रहा है, क्या वह उचित है ?”

ब्रहाणी मुस्कायी और कहने लगी, “महाराज ! मैंने पहले ही कहा है कि पक्षी अधकट बात कहता है. वह तो ऐसे सब ब्रह्राणों के मरने की बात कहता है :

विश्वा संगत जो करें सुरा मांस जो खायें,

बिना सपरे भोजन करें, वै सब बम्मन मर जायें

वै सब बम्मन मर जायें.

जो ब्राह्राणी वेश्या की संगति करते हैं, सुरा ओर मांस का सेवन करते हैं और बिना स्नान किये भोजन करते हैं, ऐसे सब ब्रह्राणों का मर जाना ही उचित है. जब बोलिये, पक्षी का कहना ठीक है या नहीं ?”

राजा ने कहा, “तुम्हारी चारों बातें बावन तोला, पाव रत्ती ठीक लगीं.  तुम्हारी बुद्वि धन्य है .”

राजा-रानी ने उसको बढ़िया कपड़े और गहने देकर मान-सम्मान से विदा किया. अब पुरोहित का आदर भी राजदरबार में पहले से अधिक बढ़ गया.

                                                                                              हिंदी कहानियां 

एक बार बंता ने संता से कहा, तुम्हारे खुशहाल वैवाहिक जीवन के पीछे क्या राज है?

संता ने कहा, हमें अपने जीवन साथी के साथ प्यार से जिम्मेवारियां बाँटनी चाहिए, एक दूसरे का आदर करना चाहिए, तब कोई समस्या नहीं रहती.

बंता ने कहा क्या तुम थोड़ा खुल कर बता सकते हो?

संता ने कहा, जैसे मेरे घर में सारे बड़े मुद्दों पर में ही निर्णय लेता हूँ, जबकि सारी छोटी छोटी बातों के निर्णय मेरी बीवी लेती है हम एक दूसरे के निर्णयों पर कभी हस्तक्षेप नहीं करते.

मैं कुछ समझा नहीं ?  बंता ने कहा, थोड़ा उदाहरण दे कर बताओ, संता ने कहा छोटी छोटी बातें जैसे हमें कौन सी कार खरीदनी है, कितना पैसा बचाना है, कब घर जाना है, कब बाजार जाना है, कौन सा सोफा, एयर कंडिशनर कौन सा रफ्रिज्रेटर खरीदना है, महीने का खर्चा, नौकरानी रखनी है या नहीं वगैरा वगैरा.  मेरी पत्नी ही इन सबका निर्णय लेती है मैं उसके निर्णयों से सहमत हो जाता हूँ.

बंता ने पूछा तब तुम्हारी क्या भूमिका है?

संता ने कहा मेरे निर्णय हमेशा बड़े मुद्दों पर होते हैं जैसे,अमेरिका को इराक पर हमला करना चाहिए,क्या अफ्रीका को अपनी अर्थव्यवस्था बढ़ानी चाहिए,क्या सचिन को सन्यास वापस लेना चाहिए वगैरा वगैरा, तुम्हें ये सुनकर हैरानी होगी, कि मेरी बीवी कभी भी मेरे फैसलों का विरोध नहीं करती.

                                                                                        हिंदी कहानियां 

एक लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड से कहा, “तुम मेरे लिए क्या कर सकते हो?”

लड़का: जो तुम कहो डार्लिंग.

लड़की: क्या तुम मेरे लिए चाँद ला सकते हो?

लड़का गया और थोड़ी देर बाद हाथ में कुछ चीज़ छिपा कर लाया और लड़की से कहा, “आँखे बंद करो.”

लड़की ने आँखें बंद की तो लड़के ने वो चीज़ लड़की के हाथो में दी और लड़की से आँखे खोलने को कहा.

लड़की ने आखें खोली तो उस चीज़ को देख उसकी आँखों में आंसू थे.  क्योकि उसके हाथों में एक आइना था जिसमे उस लड़की का चेहरा नज़र आ रहा था.

लड़की: तुम मुझे चाँद सा समझते हो?

लड़का: नहीं, मैं तो तुम्हें सिर्फ ये समझा रहा था कि जिस मुँह से चाँद मांग रही हैं कभी वो थोबड़ा आईने में भी देखा है या नहीं ?

                                                                                      हिंदी कहानियां 
एक चाइनिज जिसे हिंदी या इंग्लिश ठीक से नहीं आती थी इंडिया आया और एक रेस्टोरेंट में गया .
वेटर मेनू ले के आया और उसे दिया .

उसने मेनू देखा और एक नाम के उंगली रख के बोला – “दिस … दिस … डीप फ्राइड … डीप फ्राइड … फ़ास्ट “

वेटर ने सर खुजाया और बोला – “सर कुछ और आर्डर करे … ये हम नहीं दे सकते “

चाइनिज – “नो … दिस .. दिस .. डीप फ्राइड … डीप फ्राइड …”

वेटर – “सॉरी … कुछ और आर्डर करे “

चाइनिज – “यु इंडियन ……ओनली दिस … फ़ास्ट फ़ास्ट …”

कुछ देर से चल रहे इस सिलसिले को देख कर रेस्टोरेंट का मेनेजर आ गया और वेटर से बोला – “अरे क्या बहस करते हो .. दे दो ना जो मांग रहा हैं “

वेटर बोला – “मेनेजर सर ! वो मेनू के नीचे लिखे आपके नाम पर ऊँगली रख के मांग रहा है – डीप फ्राइड – बोले तो दे दू ? “
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