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kali ke photo/kali maa ka photo

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kali ke photo/kali maa ka photo यह कहानी उत्तर प्रदेश के बिजनौर की है..  यह एक डरावनी कहानी है। इसमें कितना सच है और कितना झूठ यह तो मई नहीं कह सकता लेकिन बिजनौर के लोग इस kali maa ka photo को पूर्णता सत्य मानते हैं.बिजनौर जहाँ आपको बडी संख्या में अघोरी साधु अपनी कठिन  तपस्या में लीन दिख जायेंगे… कोई वहा नदी किनारे आसन  डाले बैठा रहेगा तो कोई सरपत की झाड़ियों में धुनी जमाये अपनी तपस्या में तल्लीन रहेगा.

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लोगों के अनुसार बिजनौर के किसी गाँव में एक बेहद गरीब ब्राह्मण परिवार रहता था … बडी मुश्क्किल  से दो वक्त  की रोटी का जुगाड़  हो पाटा था …. पंडित जी कुछ काम धंधा भी नहीं करते थे ….कहीं कुछ करने की कोशिश करते भी तो वह जल्द ही छुट जाता था….. जब होनी को कुछ और ही मंजूर था तो पंडित जी क्यों कुछ काम करें .

पंडित जी बडे परेशान रहने लगे … गाँव के इक मंदिर में पंडित जी ने पूजा कराने कि सोची तो पहले के पुजारियों ने उन्हें भगा दिया.

निराश  होकर एक दिन पंडित जी गाँव से काफी दूर निकल गए  ….. चलते चलते वह एक दूर दुसरे गाँव में पहुँच गए … पहले लोग पैदल ही चलते थे..आज के तरह साधन नहीं थे….एक दो अमीरों के पास साइकल होती थी.

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चलते-चलते जब पंडित जी गाँव कि आबादी से थोड़ी दूर आगे आये तो उन्हें एक मंदिर दिखाई दिया…. तब तक शाम हो गयी थी …. लेकिन  आश्चर्य यह कि मंदिर में कोई मौजुद नहीं था …दीपक जलने के समय मंदिर में किसी पुजारी के न होनी से पंडित जी का मुरझाया चेहरा खिल गया…साडी थकन अब गायब हो गयी थी.

पंडित जी ने बाहर लगी नल पर हाथ पैर धोया और फिर मंदिर कि सीढियों को प्रणाम का मंदिर में प्रवेश किया…..तब उन्हें पता चला कि यह माँ काली का मंदिर है. उसके बाद उन्होंने मंदिर कि साफ-सफाई कि और दीपक जलाकर घंटनाद किया….कुछ ही देर में भागते हुए गाँव के कुछ लोग मंदिर पर पहुंचे…..उन्हें देखकर पंडित जी खबरा गए लेकिन उन गाँव वालों ने पंडित जी को प्रणाम किया .

उसके बाद गाँव के मुखिया ने पंडित जी से कहा कि पंडित जी आपसे विनम्र आग्रह है कि आप इस मंदिर कि देखभाल करें….पंडित जी तो यही चाहते थे, उन्होंने इसे तुरंत मान लिया.

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कुछ देर बाद गाँव वाले चले गए…पंडित जी कि समस्या ख़त्म हो गयी थी..उन्होंने माँ काली को प्रणाम किया और प्रसन्न वह बैठे कि अचानक एक साधु वहाँ पहुंचा और उन्हें देखकर जोर-जोर से हँसने लगा और बोला “भाग जा..भाग जा मुर्ख…..नहीं तो मरेगा..भाग जा ” इसके बाद वह हसता हुआ वहा से भाग गया…अब पंडित जी के मन में डर  हो गया….उनके मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगे.

तभी कुछ ही देर गाँव के मुखिया जी रत का खाना लेकर मंदिर आये तो पंडित जी ने उन्हें सारी बाते बता दीं…..तब उन मुखिया जी ने कहा कि ऐसी कोई भी बात नहीं है वह साधु आपको भागना चाहता है…फिर भी अगर आपको कोई भी समस्या हो तो आप इस घंटे को बजा देना…गाँव के लोग तुरंत ही यहा आ जायेगें.

पंडित जी मुखिया कि बातों से सहमत हो गए, वैसे भी उनके पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था….रात को माँ का नाम लेकर वे सो गए …कोई परेशानी नहीं हुई…अब उनका हौशला बढ़ गया…वे पूरी लगन से पूजा करने लगे…यह सब ऐसे ही चलता रहा…पंडित जी कभी लड्डू तो कभी बरफी का भोग माँ को लगाते…..धीरे-धीरे एक सप्ताह बीत गया…खूब सारा दान मिलता..पंडित जी बहुत ही खुश थे…सब अच्छे से चल रहा था…उन्होंने कुछ सामान अपने घे भी भिजवाया.

Kali Mandir ka rahasya

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अब मेला का समय आ चुका था …माँ काली के मंदिर के पास एक बहुत ही बड़ा मेला लगता था….पंडित जी बहुत ही खुश थे कि मेले में चढ़ावा भी ज्यादा मिलेगा….हुआ भी यही…पुरे दिन गहमा-गहमी रही….शाम के समय जब पंडित जी भोग लगाने मंदिर गए तो एक अजीब सी घटना हुयी..उन्होंने जैसे ही माँ कलि को बरफी का भोग लगाया…मूर्ति कि जीभ से खून कि बुँदे गिरी और मूर्ति पीछे कि तरफ पलट गयी..जैसे उन्होंने भोग को नकार दिया हो…यह देखकर पंडित जी कि चीख निकल गयी वे चीत्कार के साथ वहीँ धडाम से गिर गए. आवाज सुनकर लोग मंदिर कि और दौड़े तो देखा कि पंडित जी गिरे हुए थे और मूर्ति जरुर अपने पहले के रूप में हो गयी थी लेकिन खून कि बूंदे स्पष्ट प्रतीत हो रही थी.

किसी तरह से पंडित जी को होश में लाया गया…उसके बाद साडी बात पंदित जी ने विस्तार से बताई …..तभी वह साधु वहा फिर पहुंच गए और हसते हुए बोले ” मुर्ख मैंने तो पहले ही चेतावनी दी थी….तुम लोग ही इसे नहीं समझ पाए यह Bijnaur ka Kali Mandir एक जागृत मंदिर है. इसमें बरफी या लडडू का भोग नहीं लगाया जाता है. “….इस घटना के बाद पंडित जी कहा लापता हो गए किसी को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है, तमाम लोगो का कहना है कि पंडित जी उसी उत्तर को खोज में तपस्यारत हो गए.

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