Bhakti Story image

kanhaiya wallpaper

kanhaiya wallpaper
kanhaiya

kanhaiya wallpaper महाभारत के महायुद्ध के समाप्ति पर माता गांधारी दुर्योधन के शव के पास खड़ी फफक कर रो रही थीं. तभी वहाँ श्रीकृष्ण पहुंचते हैं और यह देखकर माता गांधारी का क्रोध और भी अधिक बढ़ जाता है. श्रीकृष्ण तथा कुछ अन्य लोग माता गांधारी को शांत कराने की कोशिश अवश्य करते हैं लेकिन पुत्र वियोग में माता गांधारी श्रीकृष्ण को श्राप दे देती हैं कि यदि मेरे सेवा में बल है , संचित ताप में धर्म है आप भगवान् हो या कोई अवतार हो यया कोई साधारण मनुष्य हो आपका पूरा वंश इसी तरह एक दुसरे को पागल कुत्तों की तरह फाड़ कर खा जायेगा और आपकी द्वारिका जल में विलीन हो जायेगी और आप स्वयं इसके कई वर्षों बाद किसी एक घने जंगल में एक साधारण व्याध के हाथों मृत्यु को प्राप्त होगे.

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

भगवान् हूँ या फिर कोई अवतार या कोई साधारण मानव पर पुत्र हूँ तुम्हारा माता. मैंने अर्जुन से कहा कि सारे तुम्हारे कर्मों का पाप पुन्य योगक्षेम मैं वहां करूंगा. अट्ठारह दिनों के इस भीषण महासंग्राम में कोई नहीं मरा है केवल मैं मरा हूँ करोड़ों बार. जीतनी बार कोई सैनिक भूमिशायी हुआ है वह कोई और नहीं मैं था. अश्वस्थामा को श्राप मैंने दिया तो उसमें भी मैं ही हूँ. मैं ही युग युगांतर तक जीवन हूँ और मृत्यु भी मैं ही हूँ. मैं यह श्राप स्वीकार करता हूँ माते.

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

kanhaiya wallpaper

kanhaiya

गांधारी का पुत्रशोक जाता रहा. अरे यह क्या कर दिया मैंने. यह तो बहुत बड़ा अनर्थ हो गया. तुमने श्राप क्यों स्वीकार किया कृष्ण. मैं निराश थी, पुत्र वियोग में व्यथित थी.

नहीं माते, जब तक मैं जीवित हूँ आप पुत्रहीन नहीं हैं और इसमें आपका कोई दोष नहीं है. आपका श्राप देना विधि का विधान था था.

मित्रों मेरी यह bhakti story kanhaiya wallpaper आपको कैसी लगी जरुर बताएं और इस तरह के इमेज के लियए ब्लॉग को सबस्क्राइब जरुर कर लें और दुसरे इमेज के लिए इस लिंक खाटू श्याम फोटो गैलेरी खाटू श्याम फोटो गैलेरीपर क्लिक करें.

About the author

Hindibeststory

Leave a Comment