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Kiradu Temple in Hindi . किराडू मंदिर की सच्ची कहानी हिंदी में।

Kiradu Temple Story in Hindi
Written by Abhishek Pandey

Kiradu Temple History in Hindi  किराडू मंदिर की कहानी

 

 

 

Kiradu Temple in Hindi भारत चमत्कारों और आस्था का देश है।  यहां आपको तमाम ऐसे मंदिर, स्थान, साधु – संत मिल जाएंगे जो कि अपने आप में अन्य से अलग होंगे।

 

 

चाहे वह बिजनौर का काली मंदिर हो या वाराणसी के ऐसे तमाम चमत्कारी जगह है या फिर हिमाचल के बिजली महादेव का मंदिर सभी अपने – आप में रहस्यों से भरे हैं।

 

 

आज हम ऐसे एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि आश्चर्य से भरा हुआ है।  बात हो रही है राजस्थान के बाड़मेर जिले के किराडू मंदिर की।  राजस्थान ना जाने ऐसे कितने रहस्यों को खुद में समेटे है।  इसके पहले हम आपको Bhangarh Fort के बारे में हम बता चुके है।

 

 

 

किराडू मंदिर राजस्थानके बाड़मेर से 39 किलोमीटर दूर हाथमा गांव मे है। यह मंदिर मध्य प्रदेश के खजुराहाे की शैली में बना है. यह 5 मंदिराे की श्रृंखला है। जिसमें एक भगवान् विष्णु के और बाकी भगवान् शिव का है। इसे राजस्थान का खजुराहो कहा जाता है।

 

 

 

किराडू मंदिर स्टोरी 

 

 

 

इतिहास में हाथमा काे किरततूप के नाम से जाना जाता है जाे कि परमार वंश की राजधानी थी। यह शहर एक समय में खूब फला फूला था।  यहा लाेग खुशी खुशी रहते थे। धन-धान्य से भरा पूरा शहर था और किराडू मंदिर भी अन्य मंदिराे की भाति ही था।

 

 

 

एक किवदंती के अनुसार  एक साधु के श्राप के कारण किराडू का यह मंदिर शापित हाे गया। किवदंती के अनुसार इस मंदिर में एक साधू अपने शिष्य के साथ रहते थे जाे की महा तपस्वी थे।

 

 

 

एक बार उन्हाेने भिक्षाटन के लिए मंदिर से बाहर जाते समय अपने शिष्य काे मंदिर के देखभाल के लिए वही छोड़ दिया और गांव वालों से आग्रह किया कि जिस तरह से वे मेरी सेवा करते थे, वैसे ही मेरे शिष्य की भी करें। फिर वे भिक्षाटन के लिए प्रस्थान कर गये।

 

 

 

लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत। इसी बीच शिष्य की तबीयत बहाेत ज्यादा खराब हो गयी। गांव वालों ने शिष्य की तरफ काेई ध्यान नहीं दिया। केवल एक कुम्हारन शिष्य की सेवा में लगी रही।

 

 

 

Kiradu Temple Story  in Hindi

 

 

 

जब साधु मंदिर वापस मंदिर आये ताे देखा कि उनके शिष्य की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गयी है और वह बहुत ही कमजोर हाे गया है। उन्हाेने देखा कि उस कुम्हारन के अलावा गांव के किसी भी व्यक्ति ने शिष्य की सुध नहीं ली थी।

 

 

 

साधु बहाेत क्रोधित हाे गये। उन्हाेने क्रोध में कुम्हारन से कहा “तूने मेरे शिष्य की सेवा की, तेरे हृदय में करुना का भाव है… जा भाग जा… अब मेरे क्रोध से इस गांव का काेई व्यक्ति नही नहीं बचेगा।

 

 

 

सबका हृदय पत्थर का हाे गया है ताे यही सही…. अब सब लाेग पत्थर के हाे जायेंगे..जा भाग जा.. पीछे मुड़कर मत देखना नही ताे तू भी पत्थर की हाे जायेगी।

 

 

किराडू मंदिर पर साधू का श्राप 

 

 

 

साधु के इन कथनाे काे सुन कुम्हारन डर के मारे भाग खड़ी हुयी लेकिन कुछ दूर जाने पर उसके मन में काैतुहल हुआ। उसे यह जानने की जिज्ञासा  हुई कि लाेग पत्थर के हुये कि नहीं  कहीं साधु का श्राप झूठा ताे नही हाे गया।

 

 

 

वह इस दृश्य काे देखने के लिए जैसे ही पीछे की ओर मुड़ी… वह भी पत्थर की हाे गयी। आज भी उसकी वह पत्थर की मूर्ति शापित किराडू मंदिर के भयावह अतीत काे बयां करती है।

 

 

 

कहा जाता है कि आज भी अगर काेई उस किराडू मंदिर में शाम ढलने के बाद रुक जाता है ताे वह पत्थर बन जाता है…… 900 वर्षाें के बाद भी यह मंदिर आज भी शापित है।

 

 

 

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