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Koi Hoor Pari ki Kahani in Hindi / परी की कहानी इन हिंदी / Hindi Story

 

Koi Hoor Pari ki Kahani in Hindi एक सागर में एक जलपरी राजकुमारी रहती थी।  वह बहुत ही मधुर गीत गाती  थी।  उसके पिताजी जो वहाँ के राजा थे वे हमेशा राजकुमारी को दो पैरों वाले  मानवों के बारे में बताते थे।

 

 

 

जलपरी राजकुमारी की मानवों के प्रति जिज्ञासा दिन – प्रतिदिन बढती ही जा रही थी। उसने एक दिन मानवों को देखने का निश्चय किया और उसके लिए उसने सागर की सतह पर जाने का निश्चय किया।

 

 

 

वह सागर के सतह पर आई।  तभी उसे एक बड़ी सी जहाज दिखी।  वह राजघराने की जहाज थी। उसने देखा कि एक बहुत ही खूबसूरत नौजवान उस पर खड़ा हुआ सागर को निहार रहा था।

 

 

 

वह जलपरी राजकुमार को देखते ही ख्वाब में खो गयी और जहाज के साथ चलने लगी।  तभी जहाज एक भयानक भंवर में फंस गयी और डूबने लगी और उसके साथ राजकुमार भी डूबने लगा।

 

 

 

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राजकुमार को डूबते देख जलपरी तुरंत ही उसे पकड़ लिया और राजकुमार को सागर के तट पर लायी। राजकुमार बेहोश हो गया था।  राजकुमारी ने उसका उपचार किया और उसके होश में आने के पहले ही सागर में चली गयी और वहाँ से वह राजकुमार पर नज़र रखने लगी।

 

 

 

होश में आने के बाद राजकुमार ने इधर – उधर देखा। उसको कोई नज़र नहीं आया।  वह आश्चर्यचकित था और सोच रहा रहा कि उसकी जान किसने बचाई?

 

 

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तभी कुछ राहगीर जो उस तट से गुजर रहे थे उन्होंने राजकुमार को पहचान लिया और उन्हें आदरपूर्वक साथ ले गए।  यह देख राजकुमारी बहुत प्रसन्न हुई लेकिन उसे राजकुमार से बिछडने का दर्द हो रहा था।

 

 

 

 

 

उस दिन से वह गुमसुम सी रहने लगी।  ना ठीक से खाती ना ठीक से सोती।  उसकी इस मनोस्थित से राजा बड़े ही चिंतित हुए।  उन्होंने राजकुमारी से इसका कारण पूछा तो उसने पूरी कहानी बता दी और कहा, ” यदि मेरे भी पैर होते तो मैं भी राजकुमार के साथ रह सकती थी। ”

 

 

 

इसपर राजा ने कहा, ” तुम्हे इसके लिए बूढ़ी तांत्रिक परी से मिलना होगा, लेक्किन एक बात को याद रखना वह कुछ भी देने बदले कुछ ना कुछ मांगती है और वह ऐसी चीज मांगती है जो व्यक्ति को सबसे प्रिय होता है।  ऐसे में इस बात को ध्यान रखते हुए तुम उसके पास जा सकती हो।  ”

 

 

 

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अब वह राजकुमारी उस बूढी तांत्रिक के पास गयी।  उसने उसे अपनी शक्तियों से पैर देना तो स्वीकार कर लिया लेकिन उसकी मधुर आवाज मांगी।  राजकुमारी को कभी भी नहीं लगा था कि वह बूढी तांत्रिक पारी इस तरह की शर्त रखेगी।

 

 

 

लेकिन फिर भी राजकुमारी से शर्त मंजूर कर ली।  उसके बाद उस बूढ़ी तांत्रिक ने अपने मन्त्र शक्तियों का आह्वान किया और उन मन्त्र शक्तियों के प्रभाव से उसे नीद आ गयी।

 

 

 

जब वह नीद से जाएगी तो उसने देखा कि उसके पैर आ चुके हैं और वह सागर किनारे रेत  पर है।  वह इससे खुश थी, लेकिन उसे अपनी आवाज़ खोने का बहुत दुःख था।

 

 

 

वह साझ नहीं पा रही थी कि वह राजकुमार तक कैसे पहुंचेगी और लोगों से राजकुमार का पता कैसे पूछेगी।  वह बेचैनी से इधर – उधर  घूमने लगी।

 

 

 

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उसने बहुत बड़ा निर्णय ले लिया था।  अब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।  उसके अपनी आँख बंद की और मन ही मन रानी परीको याद किया।

 

 

 

कुछ समय में वहाँ लाल परी उपस्थित हो गयी और उसने बताया कि उसे रानी परी ने भेजा है।  इसपर राजकुमारी बहुत प्रसन्न हुई और अपनी समस्या बता दी।

 

 

 

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तब लाल परी ने कहा, ” यहाँ से कुछ दूर एक बाग़ है।  वहाँ राजकुमार हर शाम को घूमने आते हैं।  तुम वहाँ जाओ वे तुम्हे वहाँ जरूर मिलेंगे।  लाल परी मन की भाषा को समझती थी।

 

 

 

राजकुमार शाम को घूमने आया।  उसने राजकुमारी को देखा तो उस पर मोहित हो गया।  उसने राजकुमारी से उसका नाम पूछा, लेकिन आवाज नहीं होने के कारण उसने इशारों से बात करनी शुरू की।

 

 

 

राजकुमार ने उसे राजभवन में चलने का प्रस्ताव दिया।  जिसे राजकुमारी जलपरी सहर्ष मान गयी। यह तो उसके लिए उसके स्वप्न के साकार होने जैसा था।

 

 

 

वह जिससे प्यार करती थी आज उसके महल में जा रही थी।  महल में राजकुमार ने राजकुमारी जलपरी का भव्य स्वागत किया।  उसने अपने माता – पिता और परिवार के लोगों से राजकुमारी को मिलवाया।

 

 

 

राजकुमारी और राजकुमार बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे।  इधर बूढी तांत्रिक जलपरी से कोई डरता ही नहीं था।  उसकी आवाज़ मधुर हो गयी थी।  इससे वह बहुत ही क्रोधित रहने लगी।

 

 

एक दिन उसने यह आवाज वापस राजकुमारी को देने का निश्चय किया। उसने अपनी जादुई शक्तियों से राजकुमारी के बारे में पता किया और उसके बाद उसने राजकुमारी से कहा, ” तुम यह अपनी आवाज ले लो और इसके साथ ही तुम जब भी चाहो जलपरी बन जाओगी और जब चाहो मानव बन सकती हो और तुम्हारी देने से मुझे मेरी आवाज मिल जायेगी।  ”

 

 

 

राजकुमारी के लिए यह बात ” सोने पर सुहागा ” वाली थी।  उसने तुरंत ही इसके लिए हाँ कह दी।  आवाज मिल जाने के बाद उसने राजकुमार को पूरी सच्चाई, पूरी कहानी बता दी।

 

 

 

राजकुमार इससे बहुत प्रभावित और खुश हुआ।  उसकी शादी राजकुमारी जलपरी से हो गयी।  अब राजकुमारी राजकुमार के साथ ख़ुशी और सुखी पूर्वक रहने लगी।  जब उसका मन होता वह जलपरी बनकर अपने मायके अपने माता – पिता के पास भी जाती थी।

 

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2- एक बार एक  किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया .  कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये.  हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये.

 

 

 

 

एक  दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा ,देखिये प्रभु,आप परमात्मा हैं , लेकिन लगता है आपको खेती बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है ,एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये , जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो,फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा.परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम  दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा.

 

 

 

किसान ने गेहूं की फ़सल बोई ,जब धूप  चाही ,तब धूप  मिली, जब पानी तब पानी .  तेज धूप, ओले,बाढ़ ,आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी,क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई  थी .  किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं ,बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे.

 

 

परी की कहानी वीडियो में 

 

 

 

 

फ़सल काटने का समय भी आया ,किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा ,एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया.  गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था ,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी,  बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा ,प्रभु  ये  क्या हुआ ?

 

 

 

तब परमात्मा बोले,” ये तो होना ही था  ,तुमने पौधों  को संघर्ष का ज़रा  सा  भी मौका नहीं दिया . ना तेज  धूप में उनको तपने दिया , ना आंधी ओलों से जूझने दिया ,उनको  किसी प्रकार की चुनौती  का अहसास जरा भी नहीं होने दिया , इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए, जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है.

 

 

वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है ,उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है.सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने , हथौड़ी  से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है,उसे अनमोल बनाती है .”

 

 

 

उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो ,चुनौती  ना हो तो आदमी खोखला  ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता ! ये चुनोतियाँ  ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं ,उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं, अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ  तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.  अगर जिंदगी में प्रखर बनना है,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियो का सामना तो करना ही पड़ेगा .

 

 

 

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Abhishek Pandey:

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