Hindi Love Story

Love Story in Hindi . तेरी मेरी प्रेम कहानी . प्यार की सच्ची कहानियाँ . प्रेम का बंधन

Heart Touching Love Story in Hindi
Written by Abhishek Pandey

True Love Story in Hindi सच्ची प्रेम कहानियां 

 

 

 

Love Story in Hindi:- प्यार को  दूसरों  के समक्ष परिभाषित  कितना कठिन होता है. वैसे भी परिभाषा का अर्थ ही होता है कि बात को इस ढंग इस शैली से रखना की सामने वाले की समझ में आ जाए .      

 

 

 

रह गयी बात खुद की तो वह खुद को समझ में आ ही चुकी होती है तभी तो परिभाषित करने के लायक बनते  हैं. खैर छोडिये,  प्यार व्यार के बारे में   क्या खयालात हैं.      

 

 

 

इस असीम सुखद अनुभूति को परिभाषित नहीं किया जा सकता….यह तो तब समझ में आता है जब आप  प्यार की दरिया में कूदते हैं…उसमें तैरते है…उसके हर भाव को अच्छी तरह समझते हैं.      

 

 

 

यह बात राधिका को तब समझ आई जब उसकी बेटी जो उम्र के १८ बसंत देख चुकी थी और उम्र के उस पड़ाव पर थी जब बहकने की उम्मीद सबसे ज्यादा होती है एक रोमांटिक सिरिअल को देखते हुए बोली “क्या है यह सब बकवास ….प्यार व्यार सब ढोंग होता है….यह महज एक दिखावा है….यह महज एक शारीरिक रिश्ता ही तो है.”.      

 

 

 

 

अपनी बेटी के मुंह प्यार के समर्पण, प्यार के मनोभाव, प्यार की पवित्रता के प्रति इतना द्वेष देख राधिका एकदम से शांत हो गयी. उसने टेलीविजन बंद कर दिया.    

 

 

 

 

टीवी बंद होते ही राधिका की बेटी मधुरा भी बडबडाते हुए बाहर चली गयी. राधिका सोच में पद गयी . आखिर ऐसा क्यों हो रहा है ? माना की सबके सोचने का तरिका अलग अलग हो सकता है, लेकिन मधुरा के मन में प्यार को लेकर इतना क्रोध. आखिर इसका राज क्या ?अभी उसकी उम्र ही क्या है?      

 

 

 

प्रेम कहानिया हिंदी में 

 

 

 

वह अलग बात है की हमारा परिवार खुले विचारों वाला है. जहां हर किसी को अपने विचारों को रखने की आज़ादी है. लेकिन मधुरा के मन में प्रेम को लेकर इनती नफ़रत और वह भी तब जब राधिका और उसके पति विकास की लव मैरिज हुई थी और यह बात हर किसी को पता थी और इसमें हर किसी की स्वीकृति भी थी. इन सब बातों ने राधिका के मन में तूफ़ान खडा कर दिया.      

 

 

 

 

“राधिका” बाहर से विकास की आवाज आई और अचानक से राधिका के मन पर कब्जा जमाकर बैठा  तूफ़ान शांत हुआ…लेकिन तूफ़ान से हुई तबाही राधिका के चेहरे  पर साफ दिखाई दे रही थी. राधिका ने दरवाजा खोला …दरवाजा खुलते ही विकास ने पूछा क्या हुआ…तुम इतनी टेंशन में क्यों हो? अरे कुछ नहीं…आप तो हर बात जान लेते हैं….राधिका ने कहा .      

 

 

जानू भी कैसे नहीं ….तुम मेरी अर्धांगिनी हो…तुम तक आने वाली हर समस्या का पहला आभास मुझे होता है.यही तो प्यार है…विकास ने राधिका को गले लगाते हुए कहा.    

 

 

 

यही बात तो मधुरा नहीं समझ पा रही है….राधिका ने धीरे से कहा.    

 

 

 

क्या हुआ मधुरा को..क्या नहीं समझ पा रही है वह….विकास थोड़ा चिंतित होते हुए बोला.      

 

 

 

चलिए आप पहले फ्रेश हो जाईये फिर मैं आपको सब बताती हु….और विकास के फ्रेश हो जाने के बाद राधिका ने उसे सब बता दिया.  

 

 

 

 अभी बच्ची है वह…यह प्रेम का बंधन  अभी उसे समझ में नहीं आयेगा….विकास ने शान्ति से   कहा.

 

 

 

नहीं…..अभी वह बच्ची नहीं है…प्रेम के प्रति उसमें जो आवेश था ….वह इस बात का संकेत कर रहा था की जरुर कुछ गलत हुआ है….राधिका ने कहा.    

 

 

 

Love Story in Hindi Heart Touching  ह्रदय स्पर्शी प्रेम कहानियां 

 

 

 

 

ठीक शाम को हम मधुरा से इस बारे में बात करेंगे….विकास ने कहा.  

 

 

 

शाम समय था….मधुरा अभी बाहर से आई थी…अरे पापा आप आज जल्दी.      

 

 

 

हाँ बेटा …आज थोड़ा काम कम था…ठीक है आप जाओ फ्रेश हो जाओ.    

 

 

 

 

ओके पापा …..मधुरा फ्रेश होकर आ गयी तभी उसकी मां ने एक सिरिअल लगा दिया था और यह कुछ दिन पहले परिवार में सबका फेवरेट सिरिअल था.      

 

 

 

 

लेकिन कुछ दिनों से इसे मधुरा की बगावत झेलनी पड रही थी…जिसका कारण अन्य लोगों की तरह वह भी नहीं समझ पा रहा था..लेकिन उसे इस बात की उम्मीद अवश्य ही थी कि प्यार को कभी भी ठुकराया नहीं जा सकता…प्यार सर्वत्र है.      

 

 

 

 

क्या मम्मा फिर से यही सिरिअल  प्रेम का बंधनकोई दूसरा सिरिअल लगाओ.       क्या हुआ बेटा …अभी कुछ दिन पहले तक तो यह आपका फेवरेट था….अचानक से क्या हो गया …..   राधिका  चिढ कर बोली.      

 

 

 

 

ऐसा क्या हो गया बेटा…आपको तो पता है की हमने और राधिका ने प्रेम विवाह किया है.. ….क्या यह गलत है…विकास ने कहा.      

 

 

 

नहीं…मैंने ऐसा कब कहा ……आप का प्यार तो पावन है….पवित्र है….आप एक दुसरे के पूरक है और प्यार में क्या चाहिए…जब हम एक दुसरे की भावनाओं.

 

 

 

 

उसकी सोच….उसके सुख दुःख   को स्वीकार कर लेते हैं ….उसमें कोई घमंड नहीं रह जाता है …यही तो प्यार है.लेकिन….       लेकिन क्या बेटा? राधिका ने कहा.        

 

 

 

हमारी सच्ची प्रेम कहानी 

 

 

 

लेकिन जब यह ना होकर प्यार केवल शारिरिक संबंधों तक रह जाए तो वह अपवित्र हो जाता है…..और यही मेरी सहेली तृप्ति के साथ हुआ….आज वह बर्बाद हो चुकी है….तभी से मुझे प्यार सी नफ़रत हो गयी है……मधुरा की आँखे भर आई थी.       

 

 

 

राधिका ने उसे गले लगा लिया…..कहा की सच है….इन जैसे राक्षसों की वजह से ही प्यार से विश्वास उठता  जा रहा है……लेकिन   प्रेम वह हीरा है जो अपनी चमक दिखा देता है.      

 

 

 

लेकिन जौहरी की परख होनी चाहिए….प्रेम पर अंधविश्वास घातक होता है….इसीलिए प्रेम का बंधन बांधने से पहले यह अवश्य ही जान लेना चाहिए की वह शख्श कितना काबिल है…वह  प्रेम का बंधनकहाँ तक निभा सकता है. …..अब मधुरा की सारी गलतफहमी दूर हो गयी थी.  

 

 

 

Most Romantic love Story in Hindi

 

 

 

 2- प्यार का तोहफा :- वह भी क्या दिन थे जब  मैं सुबह जल्द उठ कर तैयार होकर कालेज की ओर    हो जाता था. लेकिन जाने से पहली मुझे कालेज जाने की फ़िक्र कम खुद के हैंडसम दिखने की फ़िक्र ज्यादा ही रहती थी.    

 

 

 

 

मैं अपने कपड़ों, अपने हेयर  स्टाइल , शूज पर   कुछ ज्यादा ही ध्यान   देता था. इसके अलावा कालेज जाने से पहले मैं कम से कम १० बार अपने चहरे को देखता था.    

 

 

 

 

लेकिन यह सभी आदते पहले से नहीं थी. यह बदलाव बहुत जल्द हुए थी और इन बदलाव को देखकर मेरे घर के अन्य सदस्य भी हैरान थे. क्योकि इसके पहले जो भी कुछ था वह इसके ठीक विपरीत था…अर्थात मैं उन कपड़ों में भी कालेज चला जाता था जिसमें कोई नुक्कड़  पर जाना पसंद ना करे.      

 

 

 

इन बदलाव से घर के सदस्य भी काफी खुश थे , लेकिन वे इस बात से कुछ ज्यादा ही खुश थे कि अब मैं पढाई में भी कुछ ज्यादा ही ध्यान देने लगा  था. लेकिन इन सभी बदलाव का राज क्या था यह किसी  पता नहीं था. चलिए अब देर क्यों आपको तो बता ही देते हैं.      

 

 

 

 

इन सभी बदलाव का कारण थी एक लड़की. दोस्तों क्या बताऊ, शायद मैंने पिछले जन्म में कुछ ज्यादा ही पुण्य किये थे जो मुझे ऋतू मिली. जी हाँ उस लड़की का नाम ऋतू मेहरा था.     

 

 

 

बला की खुबसूरत थी वह….उसके आगे तो बड़ी बड़ी हिरोइन भी शर्मा जाए…..वह मेरी हिरोइन थी और मैं उसका हीरो. मैं सुबह जल्द तैयार होकर नुक्कड़ पर पहुंचता और वह वही खड़ी रहती या फिर कभी मुझे थोड़ा इन्तजार करना पड़ता….फिर हम साथ में कालेज जाते.  

 

 

 

Emotional Love Story in Hindi 

 

 

 

 

रास्ते में ढेर सारी बाते होती…मैं तो बस उसके ही ख्यालों में खोया रहता था. उसके प्रेम में मैं पागल हो गया था. मैं भगवान से कहता प्रभु आपको लाख लाख प्रणाम जो आपने मुझे यहप्यार का तोहफा दिया.         

 

 

 

जिससे  मेरे अन्दर यह बदलाव आया और  मैं कुछ बनने के लिए मेहनत करने   लगा. सचमुच अगर किसी से प्यार  होता है तो किसी और के ना सही तो कम से कम उसकी नज़रों में जरुर अच्छा बनने की कोशिश करते हैं और एक काबिल इंसान बन जाते हैं , मित्रों जीवन में प्यार का एहसास होना जरुरी  है. जब आप प्यार में पड़ते हैं तब आप इस खुबसूरत एहसास को समझ पाते हैं.        

 

 

 

 

3-  Short Love Story In Hindi   बाहों का हार:- दोस्तों मैं अनीता आज अपने प्यार की सच्ची कहानी को आप लोगों के बीच रख रही हूँ. मैं हमेशा चाहती थी कि मेरा पति एक आदर्श पति हो, जिम्मेदार हो, मेरी हर ख्वाहिस को पूरी करे.      

 

 

 

प्यार के मामले में बिलकुल सच्चा हो और यह सिर्फ मेरी ही नहीं बल्कि हर लड़की की सोच होती है. कोई भी लड़की यह कभी भी नहीं चाहेगी कि उसका पति निकम्मा हो.    

 

 

 

Really Heart Touching Love Story in Hindi 

 

 

 

 

मैं भी उन्हीं में से एक  थी और मैं भगवान  की  शुक्रगुजार हूँ कि उन्होने मेरी बात सुन ली और मुझे एक अच्छा और सच्चा पति मिला. जो मुझे बेहद प्यार करते हैं. मेरी हर सुबह उनकी मुस्कान के साथ होती है.      

 

 

 

 

मैं आज भी उस पल को याद करते हुए प्यार के गहरे सागर में डूब जाती हूँ , जब मैं उनसे पहली बार मिली. मैं और मेरी सहेली एक बस में यात्रा कर रहे थे. ट्रेन में बहुत भीड़ थी.      

 

 

 

 

मैं बीच में फंसी हुई थी.जैसे ही मेरी सहेली ने  धूप से बचने के लिए खिड़की बंद की. वैसे ही वो मेरे तरफ देखकर मुस्कुराया…..वैसे तो मैं अनजान लोगों की तरफ देखना भी पसंद नहीं करती  हूँ, लेकिन उसकी  उस मुस्कान में ना जाने क्या आकर्षण था कि मैंने भी मुस्कुरा दिया.  

 

 

 

 

इसके बाद बातों का सिलसिला शुरू हो गया और कुछ ही समय में हम घुल मिल गए.  कुछ देर में हमारा स्टॉप आ गया. मैंने उसे बाय कहा….फोन नम्बर्स का आदान-प्रदान पहले ही हो चुका था.        

 

 

 

 

बस से उतरते ही मेरी सहेली ने इठलाते हुए  कहा ” क्या बात है अनीता जी….अरे उस बस में तो हम भी थे…हमसे तो ना बातें हुई…सारी बातें तो उन मिस्टर से ही हो गयीं ”        

 

 

 

 

यह बात मुझे लग गयी. मैंने भी सोच लिया कि मैं उन्हें फोन नहीं करुँगी…..तीन दिन बाद उनका फोन आया…..लेकिन वे तीन दिन ३०० साल के बराबर थे….हर पर मेरी निगाह मोबाइल पर ही रहती थी.        

 

 

 

 Hindi Love Stories

 

 

 

कोई भी फोन आने पर मैं झट से फोन देखती कि कहीं उनका ही तो नहीं है. खैर फोन पर सारे गिले सिकवे दूर हो गए…..अब तो फोन का आना-जाना शुरू हो गया….मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि यूँ ही सफ़र के दौरान इतने अच्छे इंसान से मुलाक़ात हो जायेगी.      

 

 

 

ओ अक्सर मुझसे कहता है कि तुमको तो भरा पूरा परिवार मिला था लेकिन मुझे  ज़िन्दगी ने  कभी अपनी  ख़ुशी की रोशनी से रौशन नहीं किया था.        

 

 

 

 

मेरे  पिता की मृत्यु बहुत  जल्द हो गयी थी. उसके बाद  मां भी अक्सर बीमार ही रहती थी. तुमने जो यह बाहों का हार मेरे गले में डाला है न…..मैं समझता हूं कि भगवान ने सारी खुशियाँ मुझे सूद समेत वापस दे दी हैं.      

 

 

 

 

आज हमारी शादी हो चुकी है, लेकिन मेंजब भी उस सफ़र को याद कराती हूँ…..प्रेम के गहरे सागर में डूब जाती हूँ.        

 

 

 

 

 

Really Love Story in Hindi

Love Story in Hindi

 

 

4- मैं करूँ इन्तजार तेरा :- मेरा नाम यशवंत है और मैं भरतपुर का रहने वाला हूँ. आज मैं बहुत परेशान हूं क्याेंकि आज मेरा 12वीं का परिणाम आने वाला है.

 

 

 

मुझे यह पता कि मैं बढ़िया नंबर से पास हाेने वाला हूँ लेकिन मुझ पर बहुत ही ज्यादा दबाव है अच्छे नंबर लाने का क्याेकि मैने दसवी में अपने कालेज में सबसे ज्यादा नंबर लाये थे और कालेज टाप किया था…. इसलिए मन में थाेड़ी घबराहट थी.

 

 

 

 यह सच्ची प्रेम कहानी कुछ समय पहले की है, तब गांव उतने विकसित नहीं हुये थे. मैं अपना रिज़ल्ट देखने पास के गांव में जाने वाला था… जहां कुछ पैसे लेकर रिजल्ट दिखाया जाता था.

 

 

 

 

क्याेकि उस समय आज की तरह स्मार्टफ़ोन और लैपटॉप बहुतायत नही हाेते थे और ना ही नेट सस्ता था. मोबाइल रहती थी लेकिन वही नाेकिया की सादा पीस.

 

 

 

मैं परिणाम देखने जाने की तैयारी कर ही रहा था कि राहुल जाे कि नवीं में पढ़ता था ने आकर बताया कि ट्राँसफार्मर जल गया है. अब मैं और भी परेशान हाे गया… परेशानी जायज थी क्याेंकि गांव में ट्राँसफार्मर जलना मतलब कि कम से कम एक हफ्ते के लिए बिजली गुल.
 
 
 
 
 
 
जब तक गांव के प्रभावशाली लाेग या फिर ट्यूबवैल वाले बिजली विभाग वालाें कीे फाेन नहीं करेंगे, तब तक बिजली नही आने वाली. आम लाेगाें काे क्या फर्क पड़ता है और वैसे भी ज्यादातर बिजली का बिल ताे भरते नही और जब चेकिंग आती है ताे पूरे गांव में ऐसी अफरातफरी मचती है तुफान आ गया हाे.
 
 
 
 
 
मैं यह साेच ही रहा था कि मेरे नाेकिया मोबाइल के सादे पीस की रिंगटोन बजी. मैने देखा तो एक अननाेन नंबर से काल था. मैंने काल रिसीव किया ताे एक लड़की की मीठी आवाज आयी हैलाे…. बधाई हाे मिस्टर यशवंत….आपने कालेज टाप किया है.
 
 
 
 
 
मैं खुशी के मारे चिल्लाते हुये बाेला “क्या”
 
 
 
 
 
मेरी आवाज़ सुनकर सुनकर मेरी जाे कि पास में ही कुछ काम कर रही थी, वह दाैड़कर मेरे पास आयी और घबरा कर पूछा क्या हुआ बेटा  “क्याे इतना तेज चिल्लाये”.
 
 
 
 
 
मैं थाेड़ा सिरिअस  हाेकर बाेला… कुछ नहीं मां,  मैं बाद में बताता हूं. इतना कह कर मैं अपने घर के बाहर लगे गुड़हल के पेड़ के पास आ गया.
 
 
 
 
 
मैं उस लड़की से सीरियल आवाज में पूछा.. काैन हैं आप,  कहीं आप मजाक ताे नहीं कर रही हैं, मेरा नम्बर कैसे मिला आपकाे.
 
 
 
 

Love Stories in Hindi

 
 
 
 
 
वाे हंसने लगी और बाेली बुद्धू ही रहाेगे आप, मैं आपके हर सवाल का उत्तर दूंगी…परन्तु एक सवाल काे छाेड़कर… ताे मेरा जवाब है कि मैं मजाक नही कर रही हूं.
 
 
 
 
 
आपने सच में कालेज टाप किया है.. आपकाे विश्वास नहीं है ताे मै आपका राेल नंबर बता देती हूँ और आपका नम्बर आपके परम मित्र शरद मिश्र ने दिया है.
 
 
 
 
 
रह गयी यह बात कि मैं काैन हूं ताे इसकी ज़िम्मेदारी आपकी, आप स्वत: पता लगा कि मैं काैन हूं…. फिर उसने बाय कहा और फाेन कट कर दिया.
 
 
 
 
 
 
अब मैं और भी साेच में पड़ गया… मैंने फाैरन शरद काे फाेन लगाया….लेकिन उसका नम्बर बंद था. अब मैने उसके पिता जी काे फाेन किया और शरद के बारे में पूछा ताे उन्हाेने बताया कि शरद भगवानपुर मार्केट गया है. उसकी मोबाइल चार्ज ना हाेने के कारण बंद हाे गयी… और तुमकाे ताे पता ही ट्राँसफार्मर जल गया है.
 
 
 
 
 
 
मैंने उनसे कहा सही बात है चाचा जी… अच्छा यह बताइये शरद कब से गया है मार्केट….अभी दस मिनट पहले… किसी काे फाेन कर रहा था और काेई नम्बर लिखवा रहा था… बाेल रहा था कि जल्दी लिखाे मोबाइल बंद हाेने वाली है… उन्हाने कहा.
 
 
 
 
 
 
ठीक है चाचा जी… मैंने कहा और फाेन कट कर दिया.
 
 
 
 
 
अब मेरा मन और परेशान हाेने लगा था. मैं घर में गया, फटाफट तैयार हाेकर भगवानपुर की ओर निकला और निकलते हुये मैने मां से कह दिया कि मैं भगवानपुर जा रहा हूँ.
 
 
 
 
 
 
मैं जब भगवानपुर पहुंचा ताे शरद काे ढुढने में ज्यादा परेशानी नही हुई, क्याेकि भगवानपुर में मोबाइल की 5 दुकाने है और वह  श्याम मोबाइल सेंटर पर था. वह वहां मेरा रिजल्ट देखने गया था.
 
 
 
 
 
मैने उसकाे आवाज दी. शरद और मेरे कालेज के कुछ और दाेस्ताे ने मुड़कर मुझे देखा और दौड़कर मेरे पास आ गये और मुझे खुशी से उठा लिया.
 
 
 
 
Love Story Hindi
 
 
 
 
 
रमेश ने कहा कि तुमने कालेज टाप किया है.. लेकिन यह मैं कंफर्म हाेना चाहता था.. साे मैं श्याम भैया की दुकान पर गया और उनसे अपना रिज़ल्ट दिखाने काे कहा… उन्हाने मेरा रिजल्ट दिखाया.. मेरा 95% अंक आये था.
 
 
 
 
 
 
तब तक पंडित जी का भी आ गया जाे कि मेरे क्लासटीचर थे, उन्हाेने भी वही खुशख़बरी दी. अब मुझे यकीन हाे गया था, वैसे मुझे 90% से अधिक की उम्मीद थी, लेकिन मैं कालेज टाप करूंगा, इसकी उम्मीद नहीं थी.
 
 
 
 
 
सारे दाेस्त मुझसे पार्टी देने के लिए कहने लगे, फिर हम पास के एक मिठाई की दुकान पर गये, जहां हम सबने रसगुल्ले खाये.
 
 
 
 
 
सारे दाेस्ताे से विदा लेने के बाद मैने शरद से पूछा कि तुमने मेरा मोबाइल नम्बर किसी काे दिया था क्या?
 
 
 
 
शरद  तपाक से बाेला.. मतलब?
 
 
 
 
 
मैने कहा यार मुझे एक लड़की का काल आया था और फिर मैंने सारी बातें बता दीं.
 
 
 
 
 
शरद मुस्कराते हुये बाेला.. पागल वाे राधिका थी.
 
 
 
 
 
राधिका.. अनायास ही मैं बाेल पड़ा और मेरे आंखाें में आसू आ गये.
 
 
 
 
 
 
शरद मुझे संभालते हुये बाेला… इतना प्रेम करते हाे ताे अलग क्याें हाे गये?
 
 
 
 
 
मैं राेते हुये बाेला कि मैं अलग नही हुआ वरन हालात ने हमें अलग करा दिया. तब शरद ने कहा कि मुझे बताओ आखिर क्या हुआ था.
 
 
 
 
 
बाते करते करते हम एक पार्क में आ गये थे… हम दाेनाे एक पेड़ के नीचे बैठ गये… फिर मैंने बताना आरम्भ किया.
 
 
 
 
 
जब मैं 9वीं में था,उसी साल उसका ऐडमिशन उस कालेज में हुआ था. मैने ताे शुरूआत से ही इसी कालेज में पढ़ाई की है. उस दिन शर्मा सर की क्लास थी….उसने क्लासरूम के दरवाजे पर दस्तक दी और बाेला  May I Coming Sir.
 
 
 
 
 
 
Yes Coming Beta… फिर  शर्मा सर थाेड़ा गुस्से में अन्य स्टूडेन्ट्स से मुखातिब हाेते हुये उन्हाेने कहा.. कुछ सीखाे, क्लास में कैसे प्रवेश किया जाता है, तुम लाेग  गधाें की तरह जब मन करे आ जाते हाे, जब मन करे चले जाते हाे…शर्म आनी चाहिये तुम लाेगाें काे…समझ गये ना सब लाेग.
 
 
 
 
 
तभी मेरे मुंह से अचानक से यस सर निकल गया.. बाकी किसी स्टूडेन्ट्स ने कुछ नहीं बाेला.
 
 
 
 
वाह, क्या बात है, चलाे बढ़िया है किसी गधे काे ताे बात समझ में आयी… शर्मा सर ने कहा.
 
 
 
 
 
इस पर सारे स्टूडेन्ट्स बसने लगे… राधिका भी मुस्कुरा दी… वैसे मुझे अभी तक उसका नाम नही पता था.
 
 
 
 
 
 
शर्मा सर पढ़ाने लगे.. लेकिन मेरा मन ताे कहीं और खाेया हुआ था. जब राधिका क्लास में आयी ताे ऐसा लगा जैसे अमावस  की काली घनेरी रात काे चांद ने अपनी  आभा से अलंकृत कर दिया है.
 
 
 
 
 
 
उसकी खूबसूरती का वर्णन करने के लिये शब्दों की श्रिंखला भी कम पड़ जायेगी….यूं कहाे कि आज तक ऐसा काेई शब्द नही बना जिससे उस परी की तुलना की जा सके.
 
 
 
 
 
मैं ताे उसकी आंखाें की गहराईयाें में खाे गया था कि घंटे की आवाज सुनाई दी… शर्मा सर की क्लास खत्म हाे चुकी थी और लंच का समय हाे गया था.
 
 
 
 
 
क्लास खत्म हाते ही सारे स्टूडेन्ट्स बाहर आ गये और मैं भी अपने दोस्तों के साथ बाहर आ गया… कुछ स्टूडेन्ट्स इधर उधर घूम रहे थे ताे कुछ लंच कर रहे थे लेकिन मेरा दिल नहीं लग रहा था.
 
 
 
 
 
 
 
रघु ने मुझसे कहा कि खाना खा लाे… लेकिन मैंने मना कर दिया… इस पर रीतिक ने कहा कि कालेज में माडल आयी है इसलिए यशवंत काे भूख नहीं है… इसपर मैं रीतिक पर गुस्सा हाे गया.
 
 
 
 
मेरे नयन हर पल राधिका काे ढूढ रहे थे…तभी मैंने देखा कि एक 50 वर्षीय आदमी जाे कि उसके पापा लग रहे थे के साथ वह प्रिन्सिपल सर के कक्ष में जा रही थी.
 
 
 
 
 
 
कुछ देर के बाद तीनाे लाेग बाहर आये. राधिका के पिताजी ने प्रिन्सिपल सर ले हाथ मिलाकर विदा ली और अपनी कार में आकर बैठ गये,  राधिका फिर क्लासरूम में आ गयी.
 
 
 
 
 
 
सबकुछ ऐसे ही चलता रहा लेकिन मेरे अंदर एक बड़ा बदलाव आया, मेरी पढ़ाई बहुत अच्छी हाे गयी.  मुझे किसी भी कीमत पर राधिका के नजराें में आना था और यह सबसे बढ़िया तरीका था.
 
 
 
 
 
 
यह बदलाव सबने महसूस किया. मैं 9वीं में पूरे क्लास में सबसे ज्यादा नंबर पाया. उस दिन पहली बार राधिका ने मुझसे बात की और सबसे ज्यादा नंबर लाने की बधाई दी.
 
 
 
 
 
गर्मियाें की छुट्टियाँ प्रारम्भ हाेने वाली थीं. यह छुट्टी के पहले का हमारा आखिरी दिन था. हम दाेनाे बढ़िया दाेस्त बन चुके थे. राधिका ने बिना मेरे कहे अपना माेबाइल नम्बर मुझे दिया और फिर मैंने भी उसे अपना मोबाइल नम्बर दे दिया.
 
 
 
 
 
 
 
 
फिर हम दाेनाे ने विदा ली, लेकिन हमारी आंखों में बिछड़न का दर्द साफ नजर आ रहा था, जाे कुछ ही समय में माेतियाें की लड़ी की टूटन के समान बिखरना लगा.
 
 
 
 
 
अचानक से राधिका रुकी और उसी पल मेरे भी पांव ठहर गये, हम एक साथ मुड़े और राधिका दाैड़कर मेरे पास आयी और मुझसे लिपटकर राेने लगी, मेरे भी आंखों से अश्रुपात हाने लगा.
 
 
 
 
यह अश्रुमाेती इस बात को प्रमाण थे कि यह एक पवित्र प्रेम था… निस्वार्थ… निश्छल…पावन.
 
 
 
 
 
अब मुझे समझ आ गया था कि यह प्रेमअगन दाेनाे तरफ लगी थी… किसी तरह हमने अपनेआप काे संभाला और विदा ली. मैं कुछ ही दूर गया था कि राधिका का काल आ गया और पूरे रास्ते वह बातें करती रही.
 
 
 
 
 
यह गर्मी की छुट्टियाँ तिहाड़ से कम ना थी…. बातें ताे हाती लेकिन मुलाकाताें के लिये हम तरस जाते… सबसे बड़ी बात यह थी कि हम दानाे के घर वालाें कीे हम पर शक हाेने लगा…. फिर क्या तमाम तरह की बंदिशें…. और वैसे भी प्यार में बंदिशें ना हो ताे प्यार का मजा अधूरा रह जाता है.
 
 
 
 
 
किसी तरह गर्मी की छुट्टियाँ खत्म हुई और कालेज के पहले दिन ही मै कॉलेज पहुंच गया, जैसा हमारा वादा था, लेकिन राधिका नही आयी, मेरी निगाहें उसे चाराे ओर ढुढने लगीं, मेरा मन अधीर हाेने लगा कि तभी उसका मैसेज आया कि उसकी तबीयत खराब है और वह कल आयेगी, लेकिन यह मैसेज हमारे प्यार का ग्रहण साबित हुआ.
 
 
 
 
 
अगले दिन भी राधिका नहीं आयी,मैने उसे काल किया, पर उसका नम्बर बंद था. मैं परेशान हाे गया. किसी अनहाेनी की आशंका से मेरा मन घबराना लगा.
 
 
 
 
 
दोपहर एक बजे राधिका के साथ उसके पिता जी और 10 अन्य लाेग धड़धड़ाते हुये क्लासरूम में घुस आये और मुझे घसीटकर बाहर ले गये, शर्मा सर ने राेने का प्रयास किया तो उनके साथ भी बेहूदगी की.
 
 
 
 
 
तब तक अन्य टीचर और स्टूडेन्ट्स आ गये,. उन्हाेने मुझे छुड़ा लिया. प्रिन्सिपल सर ने गुस्से से राधिका के पिता जी से का कि सर आप इस कॉलेज काे डाेनेशन देते हैं ताे इसका मतलब यह नहीं कि आप ऐसी बेहूदगी करेंगे. इतने बड़े बिजनेसमैन हाेने पर भी ऐसी घिनाैनी हरकत करते हुये आपकाे शर्म नही आयी.
 
 
 
 
 
 
 
इस पर राधिका के पिता जी ने झल्लाते हुये गुस्से से कहा आप लाेग इस यहां शिक्षा देते हैं या फिर यह कालेज आवारा लाेगाें का अड्डा है. शर्म मुझे नही शर्म आपकाे आनी चाहिये, देखिये आपका छात्र क्या गुल खिलाता है.
 
 
 
 
 
फिर उन्हाेने सारे मैसेज प्रिन्सिपल सर काे दिखा दिया…. हांलाकि ज्यादातर मैसेज काे राधिका ने डिलिट अवश्य कर दिया था, लेकिन उसमें माैजूद मैसेज हमारी प्रेम कहानी की दास्तान कहने काे पर्याप्त थे.
 
 
 
 
 
 
यह देखने के बाद प्रिन्सिपल सर ने मुझे सबके सामने जाेरदार थप्पड़ लगाया और मुझे कैरेक्टर लेस करके कालेज से निकालने की धमकी दी, हांलाकि उनरी बाताे में राधिका के पिता जी का दबाव साफ झलक रहा था.
 
 
 
 
 
 
उसी क्षण राधिका ने कहा कि यशवंत काे कालेज से निकालने की काेई आवश्यकता नही है.  मैं खुद अब इस कालेज में नही पढुंगी. मैं नही चाहती  कि मेरे वजह से मेरे प्यार काे काेई तकलीफ हाे.
 
 
 
 
 
 
मैं भगवान काे साक्षी मानकर कहती हूं कि हमारा प्यार राधा-कृष्ण की तरह पवित्र है और हे प्रभु अगर हमारा प्यार पावन है.. सच्चा है… निश्छल है मुझे  पति को रूप में यशवंत ही मिले.

 

 

 

इतना कहकर वह चली गयी. उसकी सिसकियां आज भी मेरे कानाे में सुनाई देती हैं और मेरे दिल काे तड़पाती हैं. मैने उसकी सिसकियाें काे अपनी ताकत बना लिया और पढ़ाई में दिन रात एक कर दिया.
 
 
 
 
 
मेरी यह प्रेमकहानी कई लाेगाें के द्वारा अलग अलग तरीकाें से कही गयी… मुझ पर तमाम फब्तियां कसी गयी…. लेकिन यह मेरे साहस काे नही डिगा सकी ना ताे डिगा पायेंगी.
 
 
 
 
 
 
सही कहा तुमने… ऐसी ही कुछ गलत कहानियां मैने भी सुनी थी… लेकिन मुझे कभी यकीन नही हुआ…. शरद ने कहा.
 
 
 
 
 
 
लेकिन तुम्हें राधिका का नम्बर कहां से मिला, कैसी है वाे, शायद मुझे भूल गयी हाेगी….मैने शरद से पूछा.
 
 
 
 
 
ना.. ना.. यशवंत तुमने ताे उनकी सिसकियाें काे अपनी ताकत बनाया लेकिन उन्हाेने ने ताे तुम्हें अपना भगवान बना लिया हर पल सिर्फ तुम्हारे नाम की माला जपती है.
 
 
 
 
 
 
यह उनके प्यार की ताकत थी जाे तुमने यह मुकाम हासिल किया… उनके पिता जी काे भी इस पवित्र प्रेम का एहसास हाे गया.
 
 
 
 
 
 
तुम्हें शायद पता नहीं परसों वे प्रिन्सिपल सर ले मिले थे, तुम्हारे घर का पता मांग रहे थे,  लेकिन सर ने उन्हे वापस लाैटा दिया…. फिर राधिका के कहने पर उन्हाेने पता दिया. आज वे लाेग तुम्हारे घर जाने वाले हैं… चलाे अब तक पहुंच भी गये होंगे.
 
 
 
 


हम दाेनाे वहां से तुरंत ही घर की तरफ निकले, सचमुच वहां पर प्रिन्सिपल सर, शर्मा सर, राधिका, उसके पिता जी और गांव के कई गणमान्य लाेग माैजूद थे.
 
 
 
 
 
मैने नमस्कार किया… तभी सबके सामने राधिका के पिता जी मुझसे हाथ जाेड़कर माफी मांगने लगे.
 
 
 
मैंने तुरंत उनका हाथ पकड़ और कहा कि यह क्या कर रहे हैं… आप हमसे बड़े हैं… हमें शर्मिंदा ना करें.
 
 
 
 
फिर उन्हाेने कहा कि मैने तुम्हारे माता पिता से बात कर ली है जल्द ही तुम दाेनाे की सगाई हाे जायेगी, लेकिन एक शर्त है तुम लाेगाें काे आगे पढ़कर डाक्टर बनना है और गांव का नाम राेशन करना है.
 
 
 
 
 
इस तरह से इस प्रेम कहानी का सुखद अंत हो गया. 

 

 

 

 

True Love Story in Hindi

Love Story in Hindi

 

 

5- Really Heart Touching Love Story in  Hindi     मेरा हमसफ़र:-  यह मेरी एक सच्ची लव स्टोरी है. मेरा नाम गौरव है, और मै आपसे कह दूं कि यह एक सच्ची प्रेम कहानी   है.मैं 2010 में 12वीं क्लास में था.

 

 

 

मेरे क्लास में 40 boy and 59 Girls  थीं. उन सभी  Girls  मे से एक लडकी रितु थी, जिससे मुझे प्यार हाे गया.जब मैने उसे पहली बार देखा… ताे देखता ही रह गया.

 

 

 

उसका वाे मासूम चेहरा, वाे खूबसूरत आंखें, उसकी वो मुस्कान मैं ताउम्र नहीं भूल सकता.मै उस पर फिदा हाे गया था.हर पल बस उसी के बारे मेसाेचता था.

 

 

 

हर जगह मुझे वही दिखाई देती थी. सच ताे यह था कि मैं उसके प्यार में पागल हो गया था.आज मुझे एहसास हो गया था कि प्यार किसे कहते हैं.

 

 

 

मैं उससे बात करने, दोस्ती करने की कोशिश करता, पर हिम्मत नहीं जुटा पाता, राज नये -नये प्लान्स बनाता पर हिम्मत नही हाेती. फिर एक दिन हिन्दी की क्लास थी, सर थाेडा लेट आने वाले थे.
 
 
 
 
सब स्टूडेन्ट्स आपस में बाते कर रहे थे…. मैने रितु की तरफ देखा और हिम्मत करके एक स्माइली दी आऔरर उसने भी स्माइली दी.क्या बताएं दाेस्ताे उस समय मै कितना खुश था.
 
 
 
 
 

उसके बाद हम कॉलेज के बाहर मिले.. बाते की… एक दुसरे के बारेमेंमीन जान-पहचान बढ़ी. उसके बाद हम राज मिलते, बाते करते, हम अच्छे दोस्त बन गये.

 

 

 

 

19 Jan 2011 काे मैने उसे प्रपाेज किया,उसने कुछ जवाब नहीं दिया, बेाली साेचकर बताती हूं. मेरी बेचैनी बढ गयी थी… मैं पूरी रात साे नही पाया. मैने उसे मैसेज भी किया बट उसने काेई जवाब नहीं दिया.

 

 

 

मै यही साेचता रहा कि कही काेई गलती ताे नही हुई ना. अगले दिन मै कॉलेज गया, रितु कही दिखी नही.मै कॉलेज के गार्डन मे उदास बैठा था कि पीछे से आवाज आयी…. ओये पागल…

 

 

 

मैने देखा ताे ओ रितु था और उसने मुस्कुराते हुये हां कह दी. वाे मेरे लाइफ की सबसे बड़ी खुशी थी. सबसे बड़ा दिन था.मैने रितु काे गले लगा लिया… मेरे आखों से आंसू निकलने लगे, वा खुशी के आंसू थे.

 

 

 

 

सारे स्टूडेन्ट्स हमे घेरकर तालियां बजा रहे थे. वह लम्हा बहुत ही खूबसूरत था.मुझे मेरा प्यार मिल गया..मेरा हमसफ़र मिल गया.

 

 

 

 

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Abhishek Pandey

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