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manavata se bada koi dharm nahi

एकता की ताकत . short moral stories for kids
एकता की ताकत . short moral stories for kids
Written by Hindibeststory

manavata se bada koi dharm nahi बहुत समय पहले की बात है. एक राज्य में एक ब्राह्मण रहते थे. उनका नाम सोमनाथ था. वे राज्य में काफी सम्मानित थे. लोग उनका काफी आदर सत्कार करते थे. एक तो ब्राह्मण और ऊपर से रईस तो उनका राज्य में काफी रुतबा था. बस एक चीज की कमी थी. उन्हें कोई संतान नहीं थी.

शादी को बड़े दिन हो गए . उन्होंने बहुत कोशिशे कीं. वैद्य को दिखाया. पूजा पाठ की. मन्नतें मांगीं. जिसने जो भी सलाह दी, हर सलाह को उन्होंने माना, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उम्र बढती गयी और वे प्रौढ़ावस्था में पहुँच गए.

अब वे पूरी तरह से निराश हो चुके थे. उन्होंने सोच लिया कि शायद उनके भाग्य में संतान का सुख नहीं है,लेकिन भाग्य तो कुछ और ही खेल खेलने वाला था. भला नसीब को कौन जान सका है. उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई.

सोमनाथ ने खूब पार्टियां दी.. खूब जश्न मनाया. अब इस उम्र में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी तो उनकी आखों की चमक बढ़ गयी थी. समय बीता, सोमनाथ और उनकी पत्नी ने अपने बेटे का बखूबी लालन – पालन किया . उसका नाम सोमदत्त रखा. उसके लिए अच्छी शिक्षा का प्रबंध किया. उन्होंने सोचा एक ही लड़का है और उसे इस लायक बनाना है कि खानदान का नाम रौशन करे. लेकिन हुआ इसका उल्टा. उनके लाड -प्यार में सोमदत्त बिगड़ गया. वह जुआरी हो गया.

एक दिन वह जुआ खेल रहा था और वह जुए में सब कुछ हर गया और यहाँ तक कि शरीर पर पहने हुए वस्त्र भी हार गया. उसे बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुयी. वह घर की और ना जाकर राज्य से बाहर की और चल पडा . उसने निश्चय किया कि वह मां – बाप को मुंह नहीं दिखाएगा और किसी नदी में कूदकर जान दे देगा, लेकिन समय बहुत बलवान है, उसे कुछ और ही मंजूर था.

सोमदत्त जब राज्य के बाहर पहुंचा तो उसे इक टूटा – फूटा मंदिर दिखाई दिया. उसमें कुछ महीनों से एक पुजारी आकर रहने लगा था. वह कहाँ से आया था यह कोई नहीं जानता था. जबी सोमदत्त मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचा तो देखा कि वह पुजारी पूजा कर रहा था. सोमदत्त वही बैठ गया और प्रतीक्षा करनी लगा. इधर उसकी मां – बाप सोमदत्त को ढूँढते हुयी परेशान हो रहे थे.

जब पुजारी पूजा से निवृत हुआ तो उसकी नजर सोमदत्त पर पड़ी जो उदास भाव से वहाँ बैठा हुआ था. पुजारी नजदीक आया और उसे प्रसाद दिया और उसका परिचय पूछा. इसपर सोमदत्त ने सारी बात सही सही बता दी. पुजारी ने उसे समझाया कि जुआरी के लिए तो संसार का सम्पूर्ण धन भी अपर्याप्त है. अतः तुम यहाँ रहकर अपना आचरण सुधारों और जब तुम्हे लगी कि अब तुम सही हो चुके हो तो घर चले जाना.

सोमदत्त वहीँ रहने लगा, लेकिन उसे खुद से नफरत हो गयी थी. उसे अपने किये पर बहुत शर्मिंदगी होती थी. वह बार बार सोचता था कि उसका इस धरती पर रहना ठीक नहीं है… यह बात वह पुजारी भी समझ गए थे. उन्होंने एक दिन सोमदत्त को अपने पास बुलाया और उसे एक कहानी सुनाई.

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एक भिखारी था. वह ना तो ठीक से कुछ खाता, ना पीता था, जिसके कारण वह एक सुखकर काँटा हो गया था. उसकी आँख की रोशनी चली गयी और उसे कोढ़ भी हो गया था. बेचारा रास्ते के एक बैठा गिडगिडाते हुयी भीख मांगता था . उसे कोई भीख भी नहीं देना चाहता था. एक युवक उसी रास्ते से रोज जाता था. उसे भिखारी की यह हालत देख कर बहुत बुरा लगता था. वह सोचता था कि आखिर यह भीख क्यों मांगता है ? जीने से उसे मोह क्यों है ?

उससे रहा नहीं गया और एक दिन वह भिखारी के पास पहुंचा और बोला ” बाबा , आपकी ऐसी हालत हो गयी है , फिर भी आप जीना चाहते हो ? आप भीख मानागते हो. आप ईश्वर से प्रार्थना क्यों नहीं करते कि वे आपको अपने पास बुला लें.

इसपर भिखारी बोला … आप जो कह रहे हो वह बात मेरे भी मन में उठती है. मैं भगवान् से रोज प्रार्थना करता हूँ लेकिन वह मेरी सुनता ही नहीं है. शायद इसमें भी मेरी ही गलती है. यह मेरे बुरे कर्मों का ही दंड है. जब भगवान् तमाम कारणों से मुझे बचाता रहा तब मैंने इस पर गौर नहीं किया तो आज भगवान् भी मेरी क्यों सुने. वह युवक निशब्द रह गया.

फिर पुजारी ने कहा बेटा भगवान् ने शायद तुम्हे एक रास्ता दिया है सुधरने का, जिससे तुम जिस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए इस धरा पर आये हो उसे पूरा कर सको. आत्महत्या कोई उपाय नहीं वरन कर्तव्यों , चुनौतियों से भागना है और यह मनुष्य की लिए पाप है.

सोमदत्त को बात समझ आ गयी . वह अपने घर गया. वहाँ उसके मां – बाप उसे देखकर बहुत प्रसन्न हुए. अब सोमदत्त बिलकुल बदल गया था. उसने खूब पढाई की और बड़ा आदमी बन्ना और फिर उसने अपने राज्य में जुआ को प्रतिबंधित करवा दिया. इस तरह से साधू ने सोमदत्त को सही राह पर लाकर सच्चे अर्थों में मानवता की सेवा की.

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