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मनोहर पार्रिकर

मनोहर पार्रिकर
मनोहर पार्रिकर
Written by Hindibeststory

मनोहर पार्रिकर भारतीय जनता पार्टी के एक बहुत बड़े नेता थे. वे हमेशा ही अपनी सादगी को लेकर चर्चा में रहे. विरोधी पक्ष के नेता भी उनकी सादगी और इमानदारी पर कायल रहते थे. वे अंतिम क्षणों तक अपनी डयूटी की. पार्रिकर ने सन १९७८ में आई.आई.टी. मुंबई से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की. भारत के किसी राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले वह पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने आई.आई.टी. से स्नातक किया. सन २००१ में आई.आई.टी.मुंबई के द्वारा उन्हें विशिष्ट अभूतपूर्व छात्र की उपाधि प्रदान की गयी.

भारतीय जनता पार्टी से गोवा के मुख्यमंत्री बनने वाले वह पहले नेता हैं. १९९४ में उन्हें गोवा की द्वितीय व्यवस्थापिका के लिये चयनित किया गया था। जून १९९९ से नवम्बर १९९९ तक वह विरोधी पार्टी के नेता रहे. २४ अक्टूबर् २००० को वह गोवा के मुख्यमंत्री बने किंतु उनकी सरकार २७ फ़रवरी २००२ तक ही चल पाई. जून २००२ में वह पुनः सभा के सदस्य बने तथा जून ५, २००२ को पुनः गोवा के मुख्यमन्त्री पद के लिये चयनित हुए.

२०१४ में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया और उन्होंने डिफेन्स मिनिस्टर रहते हुए उरी सर्जिकल स्ट्राइक को बखूबी अंजाम दिया और उसके साथ ओ.आर.ओ.पी. के मसले को भी हल किया. डिफेन्स मिनिस्टर रहते हुये उन्होंने डिफेन्स के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया. २०१७ के गोवा विधानसभा के चुनाव में कम सीटें आने पर श्री मनोहर पार्रिकर को वापस गोवा की राजनीति में भेजा गया जहाँ उनकी लोकप्रियता, कर्तव्यनिष्ठ और सहयोगी पार्टियों के बीच उनकी स्वीकार्यता से वे १३ मार्च २०१७ को फिर से चौथी बार गोवा के चीफ मिनिस्टर बने.

भाजपा को गोवा की राजनीति में शिखर पर लाने का श्रेय पार्रिकर को ही जाता है. वे बीजेपी की तरफ से पहले गोवा के मुख्यमंत्री थे.उन्होंने गोवा को विकसित करने और आज का न्यू गोवा , विकसित गोवा बनाने के लियए बहुत से कार्य किये. मनोहर पार्रिकर को भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को अकेले गोवा लाने तथा किसी भी अन्य सरकार से कम समय मे एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की मूलभूत संरचना खड़ी करने का श्रेय जाता है. कई समाज सुधार योजनाओं जैसे दयानन्द सामाजिक सुरक्षा योजना जो कि वृद्ध नागरिकों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, साइबरएज योजना, सी.एम. रोजगार योजना इत्यादि में भी उनका प्रमुख योगदान रहा है.प्लानिंग कमीशन ऑफ इन्डिया तथा इंडिया टुडे के द्वारा किय गए सर्वे़क्षण के अनुसार उनके कार्यकाल में गोवा लगातार तीन साल तक भारत का सर्वश्रेष्ठ शासित प्रदेश रहा. कार्यशील तथा सिद्धांतवादी श्री मनोहर पार्रिकर को गोवा में मि. क्लीन के नाम से जाना जाता है.

मनोहर पार्रिकर सादगी के मिसाल थे और उनकी इसी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा से गोवा की जनता सदैव उन्हें प्यार कराती थी. वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पसंदीदा नेतावों में से एक थे और इसीलिए उन्हें डिफेन्स मिनिस्टर बनाया गया था. लम्बे समय से बीमार होने के बावजूद वे अपने करवया से नहीं हटे बल्कि अंतिम क्षणों तक नली लगाकर कार्य करते रहे. आईये उनकी कुछ सादगी की मिसाल आप लोगों को दे रहा हूँ.

मनोहर पार्रिकर के बेटे की शादी में जहां तमाम मेहमान शानदार सूट-बूट से लैस थे, पर्रिकर हाफ शर्ट (जो कि उनकी पहचान बन चुकी है), क्रीज वाली साधारण पैंट और सैंडिल पहने सबकी आवभगत करने में जुटे थे. आप उन्हें गोवा की सड़कों पर स्कूटर चलाते और बिना सिक्यॉरिटी के साधारण से रेस्ट्रॉन्ट में चाय पीते भी देख सकते हैं. उन्हें कोट पेंट पहनना पसंद नहीं था. वे कहते थे इसे पहनने पर गले में फंदा लगाने जैसा महसूस होता है. उम्होने अपने बेटे की शादी कम्युनिटी हाल में की थी जो कि सादगी की एक और मिसाल है.

मनोहर पार्रिकर के लिए काम सर्वप्रथम था.वे १६ से १८ घंटे काम करते थे. एक बार आधी रात तक अपने ओएसडी गिरिराज वरनेकर के साथ एक प्रॉजेक्ट डिस्कस करते रहे. विदा लेते समय वरनेकर ने पूछा, कल किस समय आ जाऊं. जवाब था, हां कल तुम थोड़ा देर से भी आ सकते हो, सुबह ६.३० तक आ जाना. हैरान वरनेकर ६.१५ पर सीएम रेजिडेंस पहुंचे तो पता चला पार्रिकर साहब सुबह ५.१५ बजे से ऑफिस में जमे हैं और फाइलें निपटा रहे हैं.

फिल्म फेस्टिवल २००४ के उद्घाटन समारोह में आए मेहमान ये देखकर हैरान रह गए कि पसीने से लथपथ मनोहर पार्रिकर पुलिस वालों के साथ आयोजन स्थल के बाहर ट्रैफिक कंट्रोल में जुटे थे. २०१२ में खुले मैदान में तीसरी बार शपथ लेने के बाद पार्रिकर ने हर उस आदमी से हाथ मिलाया, जो उन्हें बधाई देने के लिए स्टेज के पास आया.

बेहद अनुशासित और सख्त प्रशासक कहे जाने वाले पर्रिकर को मार्च २०१२ में पर्यटन मंत्री मातनही सलदन्हा के निधन पर फूट-फूट कर रोते देखा गया. २००५ में जब कुछ विधायकों की खरीद-फरोख्त से पर्रिकर की सरकार डिगा दी गई, मातनही उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे थे. जब मातनही बीमार पड़े, तो पर्रिकर लगातार उनके बेड के सिहराने बैठे रहे. जब डॅाक्टरों ने उन्हें घर जाकर आराम करने के लिए कहा तो जवाब था, मैं उस व्यक्ति को कैसे छोड़कर चला जाऊं, जो इतने सालों तक साए की तरह मेरे साथ बना रहा.

मनोहर पार्रिकर कैंसर की बिमारी से पीड़ित थे. उनकी पत्नी का निधन भी कैंसर से ही हुआ था. वे लम्बे समय से इस बिमारी से पीड़ित थे. अमेरिका, एम्स और गोवा में भी उनका इलाज चला, लेकिन १७ मार्च २०१९ की शाम ६३ वर्ष की उम्र में मनोहर पार्रिकर जी का निधन हो गया.लेकिन उनकी कर्मयोगी की छवि सदा लोगों को प्रेरणा देती रहेगी. मित्रों दूसरीं पोस्ट के लिए इस लिंकnarendra modi quotes पर क्लिक करें.

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