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मित्रता एक सपर्पण

मित्रता एक सपर्पण

मित्रता एक सपर्पण वैसे तो मित्रता पर आज तक बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन आज के कलयुग के समय में इसे बार बार रिफ्रेश करने , पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है. जीवन के सबसे सुन्दर, सबसे सुखद और सबसे प्यारे रिश्ते मित्रता के बारे में इंसान या तो निशब्द रहकर इसके सुखद एह्सास की गहराईयों ण खोया रहता है और यदि बोलता है तो ऐसे बोलता है कि थामे का नाम ही नहीं लेता है. क्योकि यह रिश्ता है ही ऐसा सुखद और सलोना कि इस पर अपने भाव और व्विचार अभिव्व्यक्त करने वाला कभी थकता ही नहीं है.

मित्रता एक सपर्पण
मित्रता एक सपर्पण

मित्रता किसी प्रयोजन से या आयोजन से नहीं होती है, यह तो बस हो जाती है. इस दुनिया में जितने भी रिश्ते उदात्त भावों से जुड़े हैं , वे स्वयं घटित हुए हैं , कभी प्रायोजित नहीं किये गए. दुनिया के अन्य रिश्ते भी जैसे माँ-बेटी, मां बेटा, पिता – पुत्री, पिता – पुत्र, भाई -बहन, पति – पत्नी जब मित्रता के भाव में उतर जाते हैं तो बड़े गरिमामय और महिमामय हो जाते हैं.

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दो व्यक्तियों का एक -दुसरे के प्रति संवेदना , सम्मान, प्यार, समान प्रवृति, समान सोच, समान नजरिया, सामान प्रतिक्रया यह सब मिलकर मित्रता को जन्म देती है. ये सारे विन्दु मित्रता को फुल की तरह पंखुड़ी दर पंखुड़ी विकसित करते और महकाते चले जाते हैं. जब दो लोगों के बीच मित्रता अ बिज पड़ता है तो पता ही नहीं चलता है कि इसका बीजारोपण कब हुआ, कब इसकी कोपलें फूटी, कब वह फुल बना कब वह महका, कब वह मीठे भावों से तरंगायित हुआ , कब मधुर संगीत सी उसमें समाहित हुई. बस एक पावन और मनभावन प्रक्रिया के तहत यह सब घटित होता जाता है और एक दिन दो लोग अपने को , एक दुसरे के सबसे अच्छे मित्र की रूप में पाते हैं. मित्रों मेरी यह पोस्ट मित्रता एक सपर्पण आपको कैसी लगी. अन्य कहानी के लिए इस लिंक https://www.hindibeststory.com/zindagi-ka-sabak-hindi-moral-kahani/ पर क्लिक करें.

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