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moral stories for kids in hindi . बच्चो की कहानी

moral stories for kids in hindi
Written by Abhishek Pandey

 moral stories for kids in hindi    बड़े दिन की पूर्व संध्या थी .  गलियाँ और बाजार परियों की नगरी जैसे सजे हुए थे.  बाजार में सब दुकानों पर लाल, नीली, हरी, पीली बत्तियाँ तारों की तरह टिमटिमा रही थीं .  सभी दुकानें जगमगा रही थीं। उनमें सजाया हुआ बड़े दिन का सामान मन को लुभा रहा था .

 

 

वहाँ तीन दुकानें ऐसी थीं जो क्रिस्मस पेड़ बेच रहीं थीं .  छोटे, बड़े सभी तरह के पेड़ थे.  उनमें कुछ असली थे, कुछ बनावटी भी थे .  ये पेड़ बड़े आकर्षक ढँग से सजे हुए थे. सब चाँदी और सोने के रिबनों, रंगीन चमकदार गेंदों से सजे झिलमिला रहे थे.

 

moral stories for kids in hindi

 

बेंजी एक दुकान के बाहर खड़ा होकर एक पेड़ को देखने लगा.  उसने सोचा, ‘काश! किसी तरह मुझे यह पेड़ मिल जाये .  सैमी और रूथ पेड़ पाकर कितनी खुश होंगी.  फिर उनका यह सबसे बेहतर क्रिस्मस होगा.’ उसे ध्यान आया उस पेड़ का जो उसने सबसे बड़ी दुकान में देखा था. ‘मुझे वही खरीदना है’ यह सोचकर वह अन्दर गया.

 

 

 

उसने मालिक से उस पेड़ की ओर इशारा करते हुए दाम पूछे.  दुकान के मालिक मोटे और गंजे मि. अब्राहम ने पहले ऊपर से नीचे तक बेंजी को देखा.  फिर बेंजी की कमीज के दाई ओर पर बने छेद को एकटक देखने लगा.  उस पर पड़ती दुकानदार की नजर बेंजी से छिपी नहीं रही.  उसने अपने दोनों हाथ कुछ इस मुद्रा में उठाए कि दाएँ हाथ के नीचे वह छेद दब गया. ‘वैसे भी .’ उसने सोचा, “मेरे पास पूरे अठ्ठाईस रूपये हैं.  इससे क्या फर्क पड़ता है कि मेरी कमीज में एक छेद है’.

 

 

“यह पैंतीस रूपये का है .  क्या तुम खरीदना चाहते हो?” दुकानदार के मुँह से यह बात सुनकर बेंजी का सारा विश्वास छिन्न-भिन्न हो गया . उसे यह अहसास हो गया था जो पेड़ उसे इतना पसन्द आया है उसे वह खरीद नहीं सकता है.  ये अठ्ठाईस रूपये जो उसने पूरे सप्ताह नुक्कड़ के ढाबे पर कठिन परिश्रम करके कमाए थे वे काफी नहीं थे.

 

 

उसने घंटो तक सैंकड़ो ग्राहकों को भाग-भाग कर भोजन परोसा था .  वह अपनी छोटी बहनों सैमी और रूथ के लिए पेड़ खरीदना चाहता था. वह तो समझ रहा था कि पेड़ पच्चीस रूपये में ही आ जाएगा.  बाकी तीन रूपये उसे और सजाने में काम आएँगे.

 

 

“क्या कह रहे हैं, मि. अब्राहम, पिछली बार तो यह केवल पच्चीस रूपये का ही था,” बेंजी ने झिझकते हुए कहा.

 

 

“जरूर था.  पिछले साल पच्चीस रूपये का ही था.  पर तुम्हें मालूम है न तब से अब तक महँगाई कितनी बढ़ गई है.  मेरी दुकान में कोई भी पेड़ पैंतीस रूपये से कम नहीं हैं .” मि. अब्राहम से कहा और पूछा, “जल्दी बोलो, तुम्हें लेना है या नहीं?”

 

 

दुकानदार की बात सुनकर बेंजी का चेहरा शर्म से लाल हो गया . ‘ कितना कठोर आदमी है’ सोचते हुए वह खिन्न मन से बाहर निकल आया.  अपनी परेशानी में दरवाजे के पास रखी रेत की बालटी से भी टकराते-टकराते बचा .  जब दुकान में लोग उसके सारे पेड़ खरीद रहे हैं तो ऐसे में दुकानदार भला उसकी क्या परवाह करेगा.  दुकान में भीड़ थी .  माता-पिता और बच्चे आपस में चिल्लाकर बात कर रहे थे कि उन्हें कौन-सा पेड़ पसन्द है.

 

 

“अब मैं कहाँ से बाकी के सात रूपये लाऊँ” बेंजी ने सोचा .  उसे दुख यह था कि इस बार उसके छोटे से घर में कोई पेड़ नहीं होगा .  उसे अपनी बहनों का विचार भी परेशान कर रहा था . उसने उन्हें अब की बार बड़े दिन का पेड़ लाने और उसे खूब सजाने के लिए, पूर्ण विश्वास के साथ, सामान लाने का वायदा किया था.  यदि वह पेड़ नहीं ले गया तो उनके मन पर क्या बीतेगी .  बल्कि उसने तो अपने मित्रों को भी आज रात खाने पर आने का निमंत्रण दिया था .  पेड़ के बिना वह क्या मुँह लेकर घर जाएगा, और क्या अपने मित्रों को दिखाएगा.

 

 

शहर के दूसरे छोर पर बेंजी का छोटा-सा दो कमरों का घर था .  वहाँ ऐसी दुकानों और सजावट कहाँ थी.  बेंजी उदास मन लिए जेब में हाथ डाले जूते से पत्थरों को ठोकर मरता हुआ इधर से उधर घूमने लगा.  बाज़ार के एक सिरे पर एक आधी बनी हुई इमारत खड़ी थी .  शाम होने के कारण वहाँ बहुत वीरानी छाई हुई थी.  बेंजी थोड़ी देर के लिए एक रेत के टीले पर जा बैठा.  ठंड के मारे वह काँप रहा था.  फिर उठकर बाजार में आ गया.  सोचा, दुबारा पूछे.  हो सकता है उन्होंने दाम गलत बता दिये हों.  पर तभी दिमाग ने झटका दिया कि नहीं. वास्तव में सबसे छोटे पेड़ का मूल्य पैंतीस रूपये ही था.

 

 

‘बस सात ही रूपये तो कम थे.  मैंने क्यों नहीं पिछले हफ्ते और सात रूपये कमा लिये ? और दो-चार दिन ढाबे में ज्यादा काम कर लेता तो कमा ही लेता.  इसी तरह अपने ऊपर झल्लाते, पैर पटकते, उसने फिर अपने आपको उसी दुकान के सामने खड़े पाया. उसने खिड़की में से देखा, वह पेड़ अभी तक वहीं खड़ा था.

 

 

अचानक, उसने मिस्टर अब्राहम को दुकान से बाहर आते हुए देखा.  वह अपने दोनों हाथ खुशी से मल रहे थे और काफी सन्तुष्ट लग रहे थे.  वह दुकान के बाहर खड़े होकर लोगों को आते-जाते हुए देखने लगे. जैसे ही बेंजी ने उधर देखा, दुकान के ऊपर लगा बड़ा निऑन साईन बोर्ड जो हरे और लाल रंग में टिमटिमा, टिमटिमा कर कह रहा था ‘पेड़ बिक्री के लिए’ वह धीरे-धीरे नीचे सरक रहा है.  बेंजी ने आव देखा न ताव, उछल कर मिस्टर अब्राहम को धक्का दिया और उन्हें पीछे की ओर धकेल दिया. इस गुत्थम-गुत्था में दोनों जमीन पर लोटपोट हो गए.  तभी वह बोर्ड धड़ाम से गिरा और टुकड़े-टुकड़े हो बिखर गया.

 

 

“क्या हुआ क्या ? दुकानदार एकदम घबरा गया था.

 

 

“ओह,” बेंजी चिल्लाया, “तारों में से चिन्गारी निकल रही है . ” जैसे ही वह कूदा तार एक गत्ते के डिब्बे से छू गये जो वहीं पड़े थे और तुरंत ही आग भड़क उठी.  “ओह, ओह, आग! आग,” सहमे से मि. अब्राहम चिल्लाये. वह अभी तक जमीन पर बैठे थे.

 

 

‘आग’ शब्द सुनते ही कुछ ही क्षणों में भीड़ एकत्रित हो गई.  बेंजी एक झटके से उठा .  उसे दुकान के पास रखी रेत की बालटी का ध्यान आया. वही बालटी जिससे वह पहले भी टकराया था.  उसने बालटी की रेत आग पर फेंकनी शुरू कर दी और लोगों ने भी ऐसी ही बालटियाँ उठा लीं. कई लोग चिल्ला भी रहे थे कि “आग बुझाने वालों को बुलाओ .” इतनी भागदौड़ और गड़बड़ी के बाद खतरा टल गया .  लोग उत्तेजित होकर बात कर रहे थे.  किसी की आवाज सुनाई पड़ी, “यह वही लड़का है जिसने मिस्टर अब्राहम की जान बचाई.  कितना चतुर है यह .” इशारा बेंजी की ओर था .

 

 

“और आग बुझाने में भी इसने कितनी फुर्ती से काम लिया, ” किसी दूसरे ने कहा.

 

 

सारी बात सुन समझ कर मिस्टर अब्राहम भी मन ही मन बेंजी का गुणगान कर रहे थे.

 

 

भारी मन से उन्होंने बेंजी का कंधा दबा दिया. बोले, “मैं तुम्हारा किस तरह से धन्यवाद करूँ. तुमने आज मेरी जान बचाई है .”

 

 

“नहीं, नहीं, ऐसा न कहिए मिस्टर अब्राहम, आप सुरक्षित है यही मेरे लिए बहुत खुशी की बात है .” वह कुछ-कुछ शर्मिन्दा महसूस कर रहा था।. “अब मुझे घर जाने की अनुमति दे,” वह मुड़ने ही लगा था कि मि. अब्राहम ने शांत स्वर में कहा, “मुझे याद है, तुम कुछ घंटे पहले यहाँ आये थे .” जो पेड़ बेंजी लेना चाहता था उसी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने पूछा, “तुम यही पेड़ लेना चाहते थे न?” बेंजी चुप था . “मैं तुम्हें यह पेड़ उपहार स्वरूप देना चाहता हूँ.  देखो इसे स्वीकार कर लो.  इससे मुझे बहुत खुशी होगी.”

 

 

 

बेंजी को अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था.  अपने शरीर पर उसने दो-तीन जगह चिकोटी काट कर देखा कि वह सपना तो नहीं देख रहा था .  उसकी आँखों में चमक आ गई.  “धन्यवाद सर, पर आप को यह पैसे अवश्य लेने पड़ेंगे और बाकी पैसे मैं कुछ ही दिनों मे लौटा दूँगा .”

 

 

 

“नहीं, नहीं पैसे की बात करके तुम मुझे शर्मिन्दा मत करो, “मि. अब्राहम ने कहा। “मैं तुम्हें इसे उपहार के रूप में देना चाहता हूँ.  मैं जानता हूँ मेरी जान बचाने के बदले यह कुछ भी नहीं है, पर क्योंकि तुम्हें यह पसन्द आया था इसीलिए, ” कहते-कहते वह रूक गए.

 

 

 

“ओह धन्यवाद सर, मेरी छोटी बहनें बहुत खुश होंगी.  मैंने उनको आज रात पेड़ लाकर देने का वायदा किया था.”

 

 

 

“तब तो तुम्हें अवश्य ही उन्हें निराश नहीं करना चाहिए, “मि. अब्राहम ने मुस्कराते हुए कहा.  “एक मिनट रूको,” कहते हुए वह अपनी दुकान के पीछे बने एक छोटे से कमरे में गायब हो गये . अगले ही क्षण वह अपने हाथ में एक गत्ते का डिब्बा लेकर वापस आये.  “इसे भी पेड़ के साथ ले जाओ, इसमें कुछ सजावट का सामान है.  और मेरी गाड़ी तुम्हें तुम्हारे घर तक छोड़ आयेगी.  नहीं तो फिर कोई समस्या आ खड़ी होगी .”

 

 

 

बेंजी जब घर पहुँचा तो उसे लगा जो गली अभी कुछ घंटों पहले तक ठंडी व वीरान लग रही थी अब खुशियों से भर गई है.  उसे लगा कि हरी और लाल बत्तियाँ उसके हृदय को छू रही हैं.  पेड़ उतारने के बाद, बेंजी ने ड्राइवर को एक पल के लिए रूकने को कहा, “मैं मि. अब्राहम के लिए कुछ भेजना चाहता हूँ .” घर के अन्दर तेजी से जा कर बेंजी ने एक कागज पर कुछ लिखा और एक लिफाफे में डालकर उसे बंद कर दिया और मि. अब्राहम को देने के लिए ड्राइवर को दे दिया। फिर सुख की सांस ली.

 

 

 

उस रात जब अमर और राहुल चले गये, और उसकी दोनों बहनें शाम के उत्साह से भरी सो गई, तब बेंजी उस पेड़ को देखने लगा जिसका प्रकाश पूरे कमरे में फैल रहा था.  इतनी सारी सजावट थी, सुनहरी और चांदी के रंग के काँच के गोले, लाल, नीली, हरी और पीली बत्तियाँ, रंग-बिरंगे रिबन.  पर सबसे अच्छा तो उसे चमकीला सितारा लगा था जो उन्हें उस गत्ते के डिब्बे में मिला था.  जब भी वह झिलमिलाता था तो लगता कह रहा हो, “मैं यहाँ खुश हूँ .”

 

 

जब मि. अब्राहम ने वह लिफाफा खोला तो उन्हें उसमें कुछ रूपये और एक पुर्जा मिला.  “कृपया यह अठ्ठाईस रूपये स्वीकार कीजियेगा. पिछले साल पेड़ की यही कीमत थी.  मैंने ज्यादा काम नहीं किया था, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.  क्रिस्मस की बधाई .

 

 

 

 

  बच्चो की कहानी     moral stories for kids in hindi      moral stories for kids in hindi

 

एक रात की बात है शालू अपने बिस्तर पर लेटी थी . अचानक उसके कमरे की खिडकी पर बिजली चमकी .  शालू घबराकर उठ गई.  उसने देखा कि खिडकी के पास एक बुढिया हवा मे उड़ रही थी . बुढ़िया खिडकी के पास आइ और बोली “शालू तुम मुझे अच्छी लड़की हो .  इसलिए मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूँ . ” शालू यह सुनकर बहुत खुश हुई.

 

 

बुढिया ने शालू को एक छड़ी देते हुए कहा “शालू ये जादू की छड़ी है.  तुम इसे जिस भी चीज की तरफ मोड़ कर दो बार घुमाओगी वह चीज गायब हो जाएगी . ” अगले दिन सुबह शालू वह छड़ी अपने स्कूल ले गई.  वहा उसने शैतानी करना शुरू किया.  उसने पहले अपने समने बैठी लड़की की किताब गायब कर दी फिर कइ बच्चों की रबर और पेंसिलें भी गायब कर दीं.  किसी को भी पता न चला कि यह शालू की छड़ी की करामात है.

 

जब वह घर पहुँची तब भी उसकी शरारतें बंद नही हुई.  शालू को इस खेल में बडा मजा आ रहा था.  रसोई के दरवाजे के सामने एक कुरसी रखी ती .  उसने सोचा, “क्यों न मै इस कुरसी को गायब कर दूँ .  जैसे ही उसने छडी घुमाई वैसे ही शालू की माँ रसोइ से बाहर निकल कर कुरसी के सामने से गुजरीं और कुरसी की जगह शालू की माँ गायब हो गईं.

 

 

शालू बहुत घबरा गई और रोने लगी .  इतने ही में उसके सामने वह बुढिया प्रकट  हुई .  शालू ने बुढिया को सारी बात बताई . बुढिया ने शालू से कहा “ मै तुम्हारी माँ को वापस ला सकती हूँ  लेकिन उसके बाद मै तुमसे ये जादू की छडी वापस ले लूगी .”

 

 

शालू बोली “तुम्हे जो भी चाहिए ले लो लेकिन मुझे मेरी माँ वापस ला दो .” तब बुढिया ने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते शालू की माँ वापस आ गई .  शालू ने मुड़ कर बुढ़िया का शुक्रिया अदा करना चाहा लेकिन तब तक बुढ़िया बहुत दूर बादलों में जा चुकी थी.  शालू अपनी माँ को वापस पाकर बहुत खुश हुई और दौडकर गले से लग गई .

 

 

        moral stories for kids in hindi   STORY – 3 

 

बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था. उस किसान की एक बहुत ही सुन्दर बेटी थी. दुर्भाग्यवश, गाँव के जमींदार से उसने बहुत सारा धन उधार लिया हुआ था. जमीनदार बूढा और कुरूप था. किसान की सुंदर बेटी को देखकर उसने सोचा क्यूँ न कर्जे के बदले  किसान के सामने उसकी बेटी से विवाह का प्रस्ताव रखा जाये.

जमींदार किसान के पास गया और उसने कहा – तुम अपनी बेटी का विवाह मेरे साथ कर दो, बदले में मैं तुम्हारा सारा कर्ज माफ़ कर दूंगा . जमींदार की बात सुन कर किसान और किसान की बेटी के होश उड़ गए.तब जमींदार ने कहा –चलो गाँव की पंचायत के पास चलते हैं और जो निर्णय वे लेंगे उसे हम दोनों को ही मानना होगा.वो सब मिल कर पंचायत के पास गए और उन्हें सब कह सुनाया. उनकी बात सुन कर पंचायत ने थोडा सोच विचार किया और कहा-

ये मामला बड़ा उलझा हुआ है अतः हम इसका फैसला किस्मत पर छोड़ते हैं . जमींदार सामने पड़े सफ़ेद और काले रोड़ों के ढेर से एक काला और एक सफ़ेद रोड़ा उठाकर एक थैले में रख देगा फिर लड़की बिना देखे उस थैले से एक रोड़ा उठाएगी, और उस आधार पर उसके पास तीन विकल्प होंगे :

१. अगर वो काला रोड़ा उठाती है तो उसे जमींदार से शादी करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज माफ़ कर दिया जायेगा.

२. अगर वो सफ़ेद पत्थर उठती है तो उसे जमींदार से शादी नहीं करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्फ़ भी माफ़ कर दिया जायेगा.

३. अगर लड़की पत्थर उठाने से मना करती है तो उसके पिता को जेल भेज दिया जायेगा.

पंचायत के आदेशानुसार जमींदार झुका और उसने दो रोड़े उठा लिए . जब वो रोड़ा उठा रहा था तो तब तेज आँखों वाली किसान की बेटी ने देखा कि उस जमींदार ने दोनों काले रोड़े ही उठाये हैं और उन्हें थैले में डाल दिया है.

लड़की इस स्थिति से घबराये बिना सोचने लगी कि वो क्या कर सकती है , उसे तीन रास्ते नज़र आये:

१. वह रोड़ा उठाने से मना कर दे और अपने पिता को जेल जाने दे.

२. सबको बता दे कि जमींदार दोनों काले पत्थर उठा कर सबको धोखा दे रहा हैं.

३. वह चुप रह कर काला पत्थर उठा ले और अपने पिता को कर्ज से बचाने के लिए जमींदार से शादी करके अपना जीवन बलिदान कर दे.

उसे लगा कि दूसरा तरीका सही है, पर तभी उसे एक और भी अच्छा उपाय सूझा , उसने थैले में अपना हाथ डाला और एक रोड़ा अपने हाथ में ले लिया . और बिना रोड़े की तरफ देखे उसके हाथ से फिसलने का नाटक किया, उसका रोड़ा अब हज़ारों रोड़ों के ढेर में गिर चुका था और उनमे ही कहीं खो चुका था .

लड़की ने कहा – हे भगवान ! मैं कितनी फूहड़ हूँ . लेकिन कोई बात नहीं .आप लोग थैले के अन्दर देख लीजिये कि कौन से रंग का रोड़ा बचा है , तब आपको पता चल जायेगा कि मैंने कौन सा उठाया था जो मेरे हाथ से गिर गया.

थैले में बचा हुआ रोड़ा काला था , सब लोगों ने मान लिया कि लड़की ने सफ़ेद पत्थर ही उठाया  था.जमींदार के अन्दर इतना साहस नहीं था कि वो अपनी चोरी मान ले .लड़की ने अपनी सोच से असम्भव को संभव कर दिया.

मित्रों, हमारे जीवन में भी कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जहाँ सबकुछ धुंधला दीखता है, हर रास्ता नाकामयाबी की और जाता महसूस होता है पर ऐसे समय में यदि हम परमपरा से हट कर सोचने का प्रयास करें तो उस लड़की की तरह अपनी मुशिकलें दूर कर सकते हैं.

                                                                  moral stories for kids in hindi  STORY – 4 
एक  वृद्ध  व्यक्ति अपने  बहु – बेटे  के  यहाँ  शहर  रहने  गया . उम्र  के  इस  पड़ाव  पर   वह  अत्यंत  कमजोर  हो  चुका  था , उसके  हाथ  कांपते  थे  और  दिखाई  भी  कम   देता  था .  वो एक छोटे से घर में रहते थे , पूरा  परिवार  और  उसका  चार  वर्षीया  पोता  एक  साथ  डिनर  टेबल  पर  खाना  खाते  थे . लेकिन  वृद्ध  होने  के  कारण  उस  व्यक्ति  को खाने  में  बड़ी  दिक्कत  होती  थी . कभी  मटर  के  दाने  उसकी  चम्मच  से  निकल  कर  फर्श  पे  बिखर  जाते  तो  कभी  हाँथ  से  दूध  छलक   कर  मेजपोश   पर  गिर  जाता  .

बहु -बेटे   एक -दो   दिन   ये   सब   सहन   करते   रहे   पर   अब   उन्हें  अपने  पिता  की  इस   काम  से  चिढ  होने  लगी . “ हमें  इनका  कुछ  करना  पड़ेगा ”, लड़के  ने  कहा . बहु  ने  भी  हाँ  में  हाँ  मिलाई  और  बोली ,” आखिर  कब तक  हम  इनकी  वजह  से  अपने  खाने  का  मजा किरकिरा रहेंगे , और  हम  इस  तरह  चीजों  का  नुक्सान  होते  हुए  भी  नहीं  देख  सकते .”

अगले दिन जब  खाने  का  वक़्त  हुआ  तो  बेटे  ने  एक  पुरानी  मेज  को  कमरे  के  कोने  में  लगा  दिया  , अब बूढ़े पिता  को  वहीँ  अकेले  बैठ  कर  अपना  भोजन  करना  था .  यहाँ  तक की  उनके  खाने  के  बर्तनों   की  जगह  एक  लकड़ी  का  कटोरा  दे  दिया  गया  था  , ताकि  अब  और  बर्तन  ना  टूट -फूट  सकें . बाकी  लोग  पहले की तरह ही आराम   से   बैठ  कर  खाते  और  जब  कभी -कभार  उस  बुजुर्ग  की  तरफ   देखते  तो  उनकी  आँखों  में  आंसू  दिखाई  देते  . यह देखकर भी बहु-बेटे का मन नहीं पिघलता ,वो  उनकी  छोटी  से  छोटी  गलती  पर  ढेरों  बातें  सुना  देते .  वहां  बैठा  बालक  भी  यह  सब  बड़े  ध्यान  से  देखता  रहता , और  अपने  में  मस्त   रहता .

एक  रात  खाने  से  पहले  , उस  छोटे  बालक  को  उसके  माता -पिता  ने  ज़मीन  पर  बैठ  कर  कुछ  करते  हुए  देखा ,  “तुम  क्या  बना  रहे  हो ?”   पिता ने  पूछा ,

बच्चे  ने  मासूमियत  के  साथ  उत्तर  दिया , “ अरे  मैं  तो  आप  लोगों  के  लिए  एक  लकड़ी  का  कटोरा  बना  रहा  हूँ , ताकि  जब  मैं बड़ा हो  जाऊं  तो  आप  लोग  इसमें  खा  सकें .” ,और  वह  पुनः  अपने  काम  में  लग  गया . पर  इस  बात  का  उसके  माता -पिता  पर  बहुत  गहरा  असर  हुआ  ,उनके  मुंह  से  एक  भी  शब्द  नहीं  निकला  और आँखों  से  आंसू  बहने  लगे . वो  दोनों  बिना  बोले  ही  समझ  चुके  थे  कि  अब  उन्हें  क्या  करना  है . उस  रात  वो  अपने  बूढ़े पिता  को   वापस  डिनर  टेबल  पर  ले  आये , और  फिर  कभी  उनके  साथ  अभद्र  व्यवहार  नहीं  किया .

                                                              moral stories for kids in hindi   STORY – 5
बहुत समय पहले की बात है , किसी गावं में 6 अंधे आदमी रहते थे. एक दिन गाँव वालों ने उन्हें बताया , ” अरे , आज गावँ में हाथी आया है.”  उन्होंने आज तक बस हाथियों के बारे में सुना था पर कभी छू कर महसूस नहीं किया था. उन्होंने ने निश्चय किया, ” भले ही हम हाथी को देख नहीं सकते , पर आज हम सब चल कर उसे महसूस तो कर सकते हैं ना?” और फिर वो सब उस जगह की तरफ बढ़ चले जहाँ हाथी आया हुआ था.

सभी ने हाथी को छूना शुरू किया.

” मैं समझ गया, हाथी एक खम्भे की तरह होता है”,  पहले व्यक्ति ने हाथी का पैर छूते हुए कहा.

“अरे नहीं, हाथी तो रस्सी की तरह होता है.” दूसरे व्यक्ति ने पूँछ पकड़ते हुए कहा.

“मैं बताता हूँ,  ये तो पेड़ के तने की तरह है.”,  तीसरे व्यक्ति ने सूंढ़ पकड़ते हुए कहा.

” तुम लोग क्या बात कर रहे हो, हाथी  एक बड़े हाथ के पंखे की तरह होता है.” , चौथे व्यक्ति ने कान छूते हुए सभी को समझाया.

“नहीं-नहीं , ये तो एक दीवार की तरह है.”, पांचवे व्यक्ति ने पेट पर हाथ रखते हुए कहा.

” ऐसा नहीं है , हाथी तो एक कठोर नली की तरह होता है.”, छठे व्यक्ति ने अपनी बात रखी.

और फिर सभी आपस में बहस करने लगे और खुद को सही साबित करने में लग गए.. ..उनकी  बहस तेज होती गयी और ऐसा लगने लगा मानो वो आपस में लड़ ही पड़ेंगे.

तभी वहां से एक बुद्धिमान व्यक्ति गुजर रहा था. वह रुका और उनसे पूछा,” क्या बात है तुम सब आपस में झगड़ क्यों रहे हो?”

” हम यह नहीं तय कर पा रहे हैं कि आखिर हाथी दीखता कैसा है.” , उन्होंने ने उत्तर दिया.

और फिर बारी बारी से उन्होंने अपनी बात उस व्यक्ति को समझाई.

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी की बात शांति से सुनी और बोला ,” तुम सब अपनी-अपनी जगह सही हो. तुम्हारे वर्णन में अंतर इसलिए है क्योंकि तुम सबने हाथी के अलग-अलग भाग छुए हैं, पर देखा जाए तो तुम लोगो ने जो कुछ भी बताया वो सभी बाते हाथी के वर्णन के लिए सही बैठती हैं.”

” अच्छा !! ऐसा है.” सभी ने एक साथ उत्तर दिया . उसके बाद कोई विवाद नहीं हुआ ,और सभी खुश हो गए कि वो सभी सच कह रहे थे.

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