hindi moral story

Moral Story in Hindi . शिक्षाप्रद हिंदी कहानी बदलाव। सादा जीवन की कहानी ।

Moral Story in Hindi New
Written by Abhishek Pandey

Moral Story in Hindi New  नयी हिंदी कहानिया 

 

 

 

Moral Story in Hindi एक शहर में रामगोविंद नामक एक व्यक्ति थे।  वे अध्यापन का कार्य करते थे और इसी से उनका जीवन – यापन होता था।

 

 

 

एक दिन जब वे विद्यालय जा रहे थे तो उनकी पत्नी ने कहा ” आज घर में खाना कैसे बनेगा . घर में केवल एक मुठ्ठी चावल है “. रामगोविंद जी ने एक नजर पत्नी की और देखा और बिना कुछ बोले चल दिए।

 

 

 

 

शाम को जब वे वापस लौट कर आये तो भोजन के समय थाली में थोड़े उबले हुए चावल और शाक देखा।  यह देखकर अपनी पत्नी से बोले ” यह स्वादिष्ट शाक किस चीज का बना है “.

 

मैंने सुबह जब आपसे भोजन के विषय में पूछा था तो आपकी दृष्टि इमली के पेड़ की तरफ गयी थी।  मैंने उसी के पत्ते से शाक बनाया है….पत्नी ने जवाब दिया।

 

रामगोविंद जी ने बड़ी ही निश्चिन्त भाव से कहा अगर इमली के पत्तों का शाक इतना स्वादिष्ट होता है तो फिर हमें भोजन की कोई चिंता ही नहीं रही।
इसी बीच शहर के एक रईस को रामगोविंद की गरीबी का पता चला तो वह स्वयं उनके घर आया और उन्हें मध्य शहर में रहने के लिए कहा। लेकिन रामगोविंद जी मना कर दिया।

 

इस पर रईस बहुत हैरान हुआ और उसने हाथ जोड़कर कहा कि आप विद्यार्थियों को शिक्षा देते हैं।  उन्हें उचित मार्ग दिखाते हैं और आप इस तरह रहे तो यह उचित नहीं है. आप बताएं , आपको किस चीज की आवश्यकता है।

 

इस पर रामगोविंद जी बोले अब इसका हाल तो मेरी धर्मपत्नी ही बता सकती है।  अब रईस ने रामगोविंद जी की पत्नी से वही सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिया ” अभी हमें किसी तरह का अभाव नहीं है।  अभी हमारे वस्त्र इतने नहीं फटे हैं कि पहने नहीं जा सकते।
घर भी इतना नहीं टूटा है कि इसे छोड़ा जा सके और जब तक मेरे हाथों की चूड़िया सलामत हैं मुझे किसी चीज का अभाव नहीं हो सकता है और अगर सीमित संसाधनों में भी संतोष की अनुभूति हो तो जीवन आनंदमय हो जाता है।  रईस को बात समझ में आ गयी और उसके बाद वह भी सादा जीवन व्यतीत करने लगा.

२- दूसरी कहानी मोरल कहानी

 

 

गाैरी का आज कालेज में दाखिला हुआ था।  वह बहुत ही खुश थी।  उसके साथ उसकी सहेलियां भी खुश थीं, क्याेंकि वह पढ़ने में बहुत ही अच्छी थी और वह बहुत ही निडर थी।  लड़कों के किसी भी फब्तियाें पर वह चुप-चाप नही चली जाती थी,बल्कि उन्हें बाकायदा चुप कराकर जाती थी।

 

 

 

ऐसी ही एक घटना का जिक्र मैं कर रहा हूँ, जिसकी वजह से वह पूरे गांव में प्रसिद्ध हाे गयी थी। उस दिन गौरी दाेपहर में स्कूल से छुट्टी लेकर घर आ रही थी, क्याेंकि उसकी मां की तबीयत खराब थी और उसके पिताजी बाजार गये थे।   उन्हाेने उसे जल्द घर आने के लिये कहा था।

 

 

 

उसके घर और स्कूल के बीच में एक आम का बगीचा था।  जहां दाेपहर में गांव के कुछ लफंगे बैठते थे.  गाैरी काे आता देख गांव का एक बिगड़ैल लड़का रिंकू खुश हाेते हुये अपने दाेस्त प्यारे से बाेला …प्यारे देख गाैरी आ रही है…इसे परेशान करेंगे।

 

 

 

गाैरी तेजी से आगे बढ़ते हुये जैसे ही बागीचे में आयी, इन दाेनाें ने उसे राेक लिया और उलटे – सीधे बाते बोलने लगे। लेकिन गौरी उनसे  डरी नहीं।  उसने एक जोरदार किक मारी और दोनों जमीन पर आ गिरे।

 

 

 

दरअसल गाैरी कराटे की चैम्पियन थी।  उसे स्कूल से कई सारे अवार्ड मिले थे।  वह वहाँ से सीधा रिंकू और प्यारे के घर गयी और वहां उनके मां-बाप काे सम्बाेधित करते हुये  गुस्से से बाेली ” ले आवाे अपने निकम्माें काे, पहले ही उनसे कहा था कि चले जावाे, नहीं ताे अपने पैर पर नहीं जा पावाेगे, पड़े हैं आम के बागीचे में”.

 

 

 

रिंकू कि मां गुस्से में खीझते हुये बाेली ” हे भगवान किस गलती की सजा दे रहे हो, ऐसी औलाद से अच्छा ताे बेऔलाद ही ठीक थी मैं”

इस घटना के बाद से गाैरी पूरे गांव में प्रसिद्ध हाे गयी।  हर काेई उसके शान में कसीदा पढ़ता, लाेग अपने बच्चों से कहते कि देखाे बेटा तुम्हें भी गाैरी की तरह बनना है…. गुणवान, धैर्यवान और बलवान।

 

 

Moral Story in Hindi For Class 9

 

 

 

कालेज में दाखिले से गौरी और उसकी सहेलियां ताे खुश  थीं, लेकिन गाैरी के पिता रामेश्वर खुश नहीं थे।  वे कालेज में दाखिले एकदम खिलाफ थे।  उन्हें गौरी की हमेशा चिन्ता रहती थी।

 

 

 

उनका चिन्तित हाेना भी सही था,एक पिता अपनी बेटी काे लेकर चिंतित नहीं रहेगा ताे कौन रहेगा, लेकिन गौरी की जिद के आगे उनकी एक ना चली और उन्हें दाखिला  कराना ही पड़ा।

 

 

 

कालेज गांव से थाेड़ी दूर पर था।  बीच में 4-5 गांव पड़ते थे।  हर गांव के नुक्कड़ पर लफंगे इकठ्ठा हाेते थे।  उन्हीं में एक था पंकज उर्फ पंकू।  उसे पंकज कहलाना पसंद नहीं था।

 

 

 

उसके पिताजी  ग्राम प्रधान थे।  उसका परिवार खानदानी रईस था।  इस रईसी की वजह से पंकज बहुत बिगड़ गया था।   उसका सिर्फ एक ही काम था, लोगों को परेशान  करना  और खासकर  कालेज के लडके लड़कियों को।

 

 

 

उसके डर से कितने लडके लड़कीयो  ने रास्ता बदल कर जाना शुरू कर दिया।  लेकिन वह रास्ता काफी लंबा पड़ता था और कभी – कभी पंकज वहाँ भी पहुँच जाता था।

 

 

Moral Story in Hindi Writing

 

 

 

उसके पिता के रसूख  के कारण काेई उस पर बंदिश नहीं लगा पा रहा था।  लाेग उससे बहुत डरते थे. इसलिये उसका हौसला बहुत बढ़ गया था।

 

 

 

क दिन की बात है गाैरी कालेज से वापस लाैट रही थी,रास्ते में पंकू ने उसे राेक लिया।  गाैरी उसके डर से बेखबर होकर उससे कहा कि ” शायद तुम्हें पता नहीं है, इसके पहले ऐसे ही रास्ता राेकने के कारण दाे लाेगाें काे अपनी एक-एक टांगे गवानी पड़ी। आज भी जब वो चलते हैं ना ताे मेरा नाम लेते हैं “.

 

 

पंकज इस बात पर जाेर  से हंसा और बोला शायद तुम्हे मेरे बारे में पता नहीं है। यहां से जाने वाला हर व्यक्ति मुझे सलाम करके जाता है।  तुमने ऐसा नहीं किया।  तुम्हे इसकी सजा मिलेगी।  कल से तुम भी यह रास्ता छोड़ दोगी। दोनों में तेज बहस होने लगी।

 

 

 

इधर रास्ते के दाेनाे तरफ लाेग खड़े थे।  सबकी नजरे झुकी हुयी थीं। रास्ते के बीचाेबीच पंकज और गौरी खड़े थे।  काेई भी किसी तरफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

 

 

 

सभी पर पंकज का खौफ साफ नजर आ रहा था।  लेकिन गौरी निर्भीक,निडर उसके सामने खड़ी थी और उसके हर वार पर पलटवार कर रही थी।

 

 

 

आज तक पंकज से बहस करने की किसी ने हिम्मत नहीं की थी।  पंकज गौरी पर बहुत गुस्सा हो रहा था और गौरी उससे भी अधिक क्रोध से उसे जवाब दे रही थी।

 

 

 

तभी पंकज आपा खो बैठा और गौरी को एक जोरदार थप्पड़ लगा दिया। लेकिन अगले ही पल गौरी ने पंकज को एक पंकज काे एक जाेरदार तमाचा रसीद करते हुये चिल्लाते हुये बाेली “मर्द है तू, शर्म आनी चाहिये तुझे , एक लड़की पर अपनी ताकत दिखाता है।  अरे तेरी इस हरकत से तेरी मां पर क्या गुजरती हाेगी, साेचा है तूने कभी।  अरे क्या साेचेगा तू, तेरे दिमाग में ताे कचरा भरा है कचरा।  अरे जा चुल्लू भर पानी में डूब मर। “

 

 

 

आज तक पंकज से किसी ने ऐसी बात नहीं की थी।  उसे अब बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी। अब पंकज अपनी नजराें से गिर चुका था।  वह पीछे हट  गया।

 

 

 

शिक्षाप्रद कहानियां 

 

 

 

गौरी ने लाेगाें की देखा,उनकी नजरें अभी भी झुकी हुयी थीं। यह देख दर्द और गुस्से के मिश्रित स्वर में गौरी ने कहा “अगर आज बेटियां, बहुयें बेइज्जत हाे रही हैं ना ताे उसके जिम्मेदार उसके कसूरवार आप और आप जैसी साेच के लाेग हैं।   आप लाेग  इस बात का इंतजार करते हैं कि अरे यह मेरे घर की थाेड़ी ना  है मेरे घर की हाेगी ताे देखा जायेगा. लेकिन आपके घर की हाे या किसी और को घर की, मरती है ताे सिर्फ बेटी, लुटती है ताे सिर्फ बेटी….”

 

 

 

 

यह कहकर गाैरी  वहां से चली गयी, लेकिन पंकज वहीं घुटने के बल पर बैठ गया।  उसके आंखों से आंसू निकलने लगे। उसे अपनी गलतियों का एहसास हाे गया था।
उसने ऐसी गलती कभी भी ना करने की शपथ ली।  उसने अपना नाम पंकज कर लिया।  उसे पंकू नाम में काई दिलचस्पी नहीं थी। अब वह पंकू से पंकज बन गया था।

 

३- तीसरी कहानी Moral Story in Hindi

एक गाँव के दो साधु अपनी – अपनी झोपड़ियां बनाकर रहते थे।  दिन के समय वे दोनों गाँव में जाकर भिक्षा माँगते और बचे समय में ईश्वर का भजन करते।
एक दिन भारी तूफ़ान आया और उनकी झोपड़ियां टूट गयी और काफी हद तक बर्बाद हो गयीं। पहला साधू यह सब देखकर दुःख के मारे विलाप करने लगा और बोला, ” हे प्रभु ! तुमने ऐसा क्यों किया? क्या मेरी पूजा, भक्ति का यही फल है? “
इस तरह वह पूरा दिन भगवान् कोसते  हुए एक पेड़ के नीचे बैठा रहा।  शाम को जब दूसरा साधु घर लौटा और अपनी झोपड़ी का यह हाल देख मुस्कुराते हुए भगवान् का धन्यवाद करते हुए कहने लगा, ” हे प्रभु ! ऐसे भीषण तूफ़ान में जब पक्के और मजबूत मकान ध्वस्त हो जाते हैं ऐसे में आपने मेरी झोपड़ी बचा ली।  इसे अधिक क्षति नहीं होने दी।  सचमुच आप महान हैं प्रभु। “
इससे यह सीख मिलती है कि प्रत्येक घटना के दो पहलू होते हैं।  आप उसका बुरा निष्कर्ष निकालते हैं कि अच्छा निष्कर्ष निकालते हैं, यह आप पर निर्भर करता है।

 

 

 

 

 

 

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